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मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -What are the aliens come from, said aliens

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एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -aliens kya hote hai-aliean kha se aate hai-What are the aliens come from, said aliensक्या होते है एलियंस? इस ब्रह्माण्ड  में जो दुसरे गृह है उन गृह के प्राणियों को एलियंस कहा ज़ाता है. हालांकि ये अपने आप में खुद एक सवाल है कि क्या दुसरे गृह पर भी प्राणी होते है. लेकिन इसको लेकर भिन्न भिन्न लोगों के  भिन्न भिन्न  मत है. कुछ कहते है कि एलियंस होते है जबकि कुछ कहते है कि एलियंस नहीं होते है. कितना रोचक है ये विषय. एलियंस क़ा अध्ययन तो क्या इस अध्ययन से जुड़ना नहीं चाहेंगे? तो चलिए आइये  देखते हैं एलिएंस कि रिसर्च से जुडी कुछ खबरों को- 

एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -What are the aliens come from, said aliens,एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -aliens kya hote hai-aliean kha se aate hai- क्या होते है एलियंस? इस ब्रह्माण्ड  में जो दुसरे गृह है उन गृह के प्राणियों को एलियंस कहा ज़ाता है. हालांकि ये अपने आप में खुद एक सवाल है कि क्या दुसरे गृह पर भी प्राणी होते है. लेकिन इसको लेकर भिन्न भिन्न लोगों के  भिन्न भिन्न  मत है. कुछ कहते है कि एलियंस होते है जबकि कुछ कहते है कि एलियंस नहीं होते है. कितना रोचक है ये विषय. एलियंस क़ा अध्ययन तो क्या इस अध्ययन से जुड़ना नहीं चाहेंगे? तो चलिए आइये  देखते हैं एलिएंस कि रिसर्च से जुडी कुछ खबरों को-What are the aliens come from, said aliens,एलियंस क्या है  एलियंस का रहस्य  एलियंस का अस्तित्व  एलियंस इन इंडिया  एलियंस movie  एलियंस का सच  एलियंस के बारे में जानकारी  एलियंस इन हिंदी

अभी हाल ही में अमेरिकी अनुसंधान संस्थान के एक  वैज्ञानिक ने ये दावा किया है कि एलियंस होते हैं. असल में उन्हें एलियंस से सम्बंधित रिसर्च में कहा है कि एलियंस एक तरह क़ा बक्टीरिया क़ा जीवाश्म है जो कई वर्षो पूर्व अन्तरिक्ष से प्रथ्वी पर गिरे उल्कापिंडो  में पाया गया था. 

नासा के मार्शल स्पेस फ्लाईट  सेंटर के वैज्ञानिक डॉक्टर "रिचर्ड हूवर" ने इस दुनिया में पाए गये उल्कापिंडो पर एक शोध कार्य किया, जिसमें उन्होंने पाया कि एलियंस होते हैं. उन्होंने ये दावा "साइबेरिया और आलास्का" में पाए गये उल्कापिंडो के असाधारण नमूनों पर शोध कार्य करने के बाद किये जिससे कहीं ना कहीं ये सिद्ध होता है कि प्रथ्वी से परे भी जीवन है. 

एलियंस के अस्तित्व की धारणा को और मजबूत बनाने के लिए अब वैज्ञानिको ने इस खोज को और सरल बनाने के लिए आम आदमी को इससे जोड़ने की पहल की है. जिसमें आम आदमी एलियंस के बारे में अपने विचार, अपनी जिन्दगी में घटी कुछ अजीब और असामान्य घटनाओं के बारे इस शोध से जुड़े वैज्ञानिको को बाते सकते है.  इसलिए एलियंस कि खोज के लिए वैज्ञानिको ने एक वेबसाइट को लॉंच किया है जिसका एड्रेस है www.setilive.org अमेरिका के शहर लॉस एंजेल्स में TED (टेक्नोलोजी, इंटरटेनमेंट और डिज़ाइन) कॉंफ़्रेंस के दौरान इस वेबसाइट लॉंच किया गया है. वैज्ञानिको SETI वर्ड क़ा प्रयोग किया है जिसकी मतलब है "सर्च फॉर एक्सट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस". ये वेबसाइट सेटी एलेन टेलिस्कोप के द्वारा संचारित रेडियो तरंगों को सीधे प्रसारित करेगी और जो भी लोग .इसमें भाग लेंगे उनको कहा जाएगा कि कहा जाएगा कि अगर उन्हें कोई भी असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो वे फ़ौरन इसकी जानकारी वैज्ञानिको को दे. इस बारे में वैज्ञानिको क़ा ये मानना है कि कभी कभी इंसानों का दिमाग़ उन चीज़ो को भी देख सकता है जो कि शायद कोई स्वचालित मशीन भी नहीं देख पाए. 

जिलियन टार्टर इस योजना की प्रमुख कार्यकर्ता हैं डॉक्टर जिलियन टार्टर को 2009 में TED एवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. डॉक्टर टार्टर के बारे में बताया ज़ाता है कि उन्होने अपना पूरा करियर एलियन की खोज में लगा दिया है और उनका कहना है कि इस वेबसाइट के लॉच होने से एलियन की खोज में जुटे वैज्ञानिकों और दूसरे विशेषज्ञों को एक साथ आने का मौक़ा मिलेगा और साथ ही साथ आम आदमी के विचारों को जाने क़ा भी मौका मिलेगा जिसे एलियंस रिसर्च को और भी सरल बनाया जा सकेगा. क्योंकि उनका ये मानना है कि जायदा से जायदा वैग्यांकियो और व्यक्तियों के इस रीसर्च से जुड़ने पर उन तरंगों का अध्ययन  करना आसान हो जाएगा जिन पर अब तक ध्यान नहीं गया. इस अध्ययन से कुछ ना कुछ तो एलियंस के बारे में जरूर नया मिलेगा. अब आगे देखते है कि कहा तक जाती है एलियनस के बारे में ये खोज. 
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बुधवार, 24 जनवरी 2018

हमारे ब्रह्मांण्ड कि एसी रोचक जानकारी जो आप नही जानते You do not know what the interesting details of our universe

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ब्रह्मांण्ड एक ऐसी जगह है जहां सब कुछ है. ब्रह्माण्ड इतना विशाल है कि आप इसके आकार का अनुमान नही लगा सकते. मान लीजिए कि आप ने अनुमान लगा भी लिया कि ब्रह्माण्ड इतना बड़ा है. पर आप के अनुसार जहां ब्रह्माण्ड का अंत होता है उसके आगे भी कोई पदार्थ तो जरूर होगा ही. इसी तरह अगर हम सोचते जाए कि ब्रह्माण्ड इतना बड़ा है तो यह उससे ज्यादा फैलता जाएगा. 1929 ईसवी में हब्बल नामक वैज्ञानिक ने देखा कि आकाशगंगाएँ एक दूसरे से दूर जा रही हैं. तो कई वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि शायद ब्रह्माण्ड शुरू में एक बिंदु के जितना होगा और अचानक हुए एक विस्फोट के द्वारा बने कण, प्रतिकण बने जिन से कई आकाशी पिंडो का निर्माण हुआ. और यह तब से निरंतर फैलते ही जा रहै हैं. इस विस्फोट के समय का अनुमान आज से 15 अरब (15×109) साल पहले का लगाया गया है और इसे महाविस्फोट का सिद्धांत कहा जाता है. आइए इस रहस्मई ब्रह्माण्ड के बारे में रोचत तथ्य जानते हैं-

 हमारे ब्रह्मांण्ड कि एसी रोचक जानकारी जो आप नही जानते  You do not know what the interesting details of our universe हमारे ब्रह्मांण्ड कि एसी रोचक जानकारी जो आप नही जानते  You do not know what the interesting details of our universe,अन्तरिक्ष की जानकारी , ब्रह्मांण्ड का अध्ययन करने वाले विज्ञान को खगोलविज्ञान या अंग्रेजी में astronomy कहा जाता है. खगोल विज्ञान, विज्ञान की एक बहुत ही रोचक और रहस्मई शाखा है. खगोल विज्ञान में बहुत ही दूर स्थित आकाशी पिंडो का अध्ययन किया जाता है जिसे एक शाधारण मनुष्य सरलता से समझ नही सकता. खगोल विज्ञान से जुड़े कई सिद्धात बहुत प्रतलित है. जैसे के विशेष तथा साधारण सापेतक्षतावाद. 2. आप का T.V. या कोई और आवाज़ पैदा करने वाला रिकार्डर जा music set जब ठीक से नही चल रहा होता तब यह जो बेकार सी आवाज पैदा करता है यह Big Bang(महाविस्फोट) के तुरंत बाद बनने वाली रेडिऐशन का नतीजा है जो आज 15 अरब साल बाद भी है. अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्य  अंतरिक्ष यान का रहस्य  भारत के अनसुलझे रहस्य  अंतरिक्ष के बारे में जानकारी  विज्ञान के रहस्य  अंतरिक्ष क्या है  अंतरिक्ष की खोज  अंतरिक्ष में मानव

1. ब्रह्मांण्ड का अध्ययन करने वाले विज्ञान को खगोलविज्ञान या अंग्रेजी में astronomy कहा जाता है. खगोल विज्ञान, विज्ञान की एक बहुत ही रोचक और रहस्मई शाखा है. खगोल विज्ञान में बहुत ही दूर स्थित आकाशी पिंडो का अध्ययन किया जाता है जिसे एक शाधारण मनुष्य सरलता से समझ नही सकता. खगोल विज्ञान से जुड़े कई सिद्धात बहुत प्रतलित है. जैसे के विशेष तथा साधारण सापेतक्षतावाद.
2. आप का T.V. या कोई और आवाज़ पैदा करने वाला रिकार्डर जा music set जब ठीक से नही चल रहा होता तब यह जो बेकार सी आवाज पैदा करता है यह Big Bang(महाविस्फोट) के तुरंत बाद बनने वाली रेडिऐशन का नतीजा है जो आज 15 अरब साल बाद भी है.
3. खगोलविज्ञान के अनुसार हम कहते है कि हर भौतिक वस्तु इस ब्रह्मांण्ड में मौजुद है. इसमें ही खरबों तारे, सौर मंण्डल और आकाशगंगाएं है. पर यह सिर्फ सारी वस्तुओं का 25 प्रतीशत ही है. अभी भी कई ऐसी और चीजों के बारें में पता लगाया जाना बाकी है.
4. अगर नासा एक पंक्षी को अंतरिक्ष में भेजे तो वह उड़ नही पाएगा और जल्दी ही मर जाएगा. क्योंकि वहां पर उड़ने के लिए बल ही नही है.
5. क्या आप को पता है श्याम पदार्थ(dark matter) ब्रह्माण्ड में पाया जाने वाला ऐसा पदार्थ है जो दिखता नही पर इसके गुरूत्व का प्रभाव जरूर पाया गया है. तभी इसे श्याम पदार्थ का नाम दिया गया है क्योंकि यह है तो दिखता नही.
6. अगर आप 1 मिनट में 100 तारे गिने तो आप 2000 साल में एक पुरी आकाशगंगा गिन देगें.
7. महाविस्फोट के बाद ब्रह्माण्ड विस्तारित होकर अपने वर्तमान स्वरूप में आया . पर आधुनिक विज्ञान के अनुसार भौतिक पदार्थ प्रकाश की गति से फैल नही सकता. पर महाविस्फोट सिद्धांत में तो यह पक्का है कि ब्रह्माण्ड 15 खरब साल में 93 खरब प्रकाश वर्ष तक फैल चुका है.(1प्रकाश वर्ष( light year)=प्रकाश के द्वारा एक साल में तय की गई दूरी). पर इस उलझण को आइंस्टाइन का साधारण सापेक्षतावाद का सिद्धात समझाता है. इसके अनुसार दो आकाशगंगाएँ एक-दुसरे से जितनी दूर है उतने ही अनुपात से यह और दूर होती जाती है. यह तथ्य थोड़ा समझने में कठिन लगेगा मगर जब इसे ध्यान से पढ़ेगें तो कुछ-कुछ समझ आ जाएगा.
8. हमारी आकाशगंगा का नाम मंदाकिनी(Milky way) है, हमारा सौर मंण्डल इसी आकाशगंगा में है. आकाशगंगा का ग्रीक भाषा में अर्थ है- 'दूध'. अगर आप एक खगोलीए दूरबीन लेकर आकाशगंगओं को देखे तो ऐसा लगेगा जैसे दूध की धारा बह रही हो.
9. द लार्ज मेगालीनिक कलाउड आकाशगंगा सभी आकाशगंगाओं से सबसे ज्यादा चमकदार है. यह केवल दक्षिणी गोलाअर्थ में ही दिखेगी. यह धरती से 1.7 लाख प्रकाश वर्ष दूर है और इसका व्यास 39,000 प्रकाश वर्ष है.
10. Abell 2029 ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी आकाशगंगा है. इसका व्यास 56,00,000 प्रकाश वर्ष है और यह हमारी आकीशगंगा से 80 गुना ज्यादा बड़ी है यह धरती से 107 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है.
11. धनु बौनी आकाशगंगा की खोज 1994 मे हुई थी और यह सभी आकाशगंगायों से धरती के सबसे करीब है यह धरती से 70,000 प्रकाश वर्ष दूर है.
12. ऐड्रोमेडा आकाशगंगा नंगी आखों से देखी जाने वाली सबसे दूर स्थित आकाशगंगा है यह पृथ्वी से 2309000 प्रकाश वर्ष दूर है. इसमें लगभग 300 खरब (30×1011) तारे है और इसका व्यास 1,80,000 प्रकाश वर्ष है.
13. ज्यादातर आकाशगंगाओं की शकल अंडाकार है पर कुछ अपनी शकल बदलती रहती है. हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी अंडाकार है.
14. Abell 135 IR 1916 आकाशगंगा हमारे ब्रह्माण्ड की सबसे दूर स्थित आकाशगंगा है यह धरती से आश्चार्यजनक 13.2 खरब प्रकाश वर्ष दूर है. 2004 में युरोपीय दक्षिणी वेधशाला के खगोलविदों ने इस आकाशगंगा की खोज की घोषणा की .
15. ब्रह्माण्ड कैंलेडर
महाविस्फोट के बाद कई खगोलीय और धरती की घटनाएँ घटित हुई जिसमें डायनासोरों का जन्म और खातमा शामिल है. यह सारी चीजे बहुत ही ज्यादा समय में घटित हुई जिसे कि एक साधारण मनुष्य नही समझ सकता. इस समस्या से पार पाने के लिए अमरीकी गणितज्ञ और खगोलबिद कार्ल सागन ने 'ब्रह्माण्ड कैंलेडर' का सुझाव दिया. इस कैंलेडर में महाविस्फोट से लेकर अब तक के मानव इतिहास को एक साल में दर्शाया गया है. आइए इस कैंलैडर की घटनाएँ जानते है.
1 जनवरी 12:00 am------महाविस्फोट- ब्रह्माण्ड की उत्पती.
15 मार्च-----------------पहले सितारो और आकाशगंगाऔ की उत्पती.
1 मई-------------------हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी की उत्पती.
8 सितंबर---------------हमारे सुर्य की उत्पती.
9 सितंबर--------------हमारे सुर्य मंण्डल की उत्पती.
12 सितंबर-------------पृथ्वी की उत्पती.
13 सितंबर-------------चाँद की उत्पती
20 सितंबर-------------धरती के वायुमंडल की उत्पती.
1 अक्तुबर-------------धरती पे सबसे पहले एक कोशिका जीवो की उत्पती.
7 अक्तुबर-------------सबसे पहले के जाने जाने वाले फासिल(पथराट).
18 दिसंबर------------अनेक cells वाले जीवों की उत्पती.
19 दिसंबर------------पहली मछली.
21 दिसंबर------------पहले स्थली पौदे और कीड़े
23 दिसंबर-----------पहले सरीसृप (रेंगने वाले)
24 दिसंबर-----------पहले डायनासोर
26 दिसंबर------------पहले स्तनपाई
27 दिसंबर-----------पहले पक्षी
28 दिसंबर----------पहले फूल वाले पौधे.
29 दिसंबर----------डायनासोरो का खातमा.
31 दिसंबर के रात के 11:55 बजे-----मनुष्यों के कुल इतिहास से अब तक.
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गुरुवार, 11 जनवरी 2018

ये गुप्त बाते जानकर लड़की को आसानी से पटाए These secret things, knowing the girl easily in love

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 आप पार्टी में है..और आपको वह कोई लड़की पसंद आ गयी ..तो आपको करना ये है की आप उस लड़की के पास जाये और उस से बातें करें..अपना परिचय दें . धीरे धीरे बातचीत का सिलसिला शुरू होगा. और अगर किस्मत अच्छी  हुई तो लड़की पट ही जाएग
ये  गुप्त बाते जानकर लड़की को आसानी से पटाए These secret things, knowing the girl easily in love ये  गुप्त बाते जानकर लड़की को आसानी से पटाए These secret things, knowing the girl easily in love,लड़की पटाने के तरीके ,लड़की केसे पठाए ladki patane ka tarika hindi me  ladki patane ke 151 tarike  ladki patane ka mantra  photos ladki patane ka tarika  ladki patane ke nuskhe  ladki patane ka formula  facebook par ladki patane ka tarika  boy patane ke tarike 3 दिन मे लड़की पटाने का आसान तरीका बस ये करके आप किसी भी लड़की को 2 मिंट मे पटा सकते है लड़की पटाने के आसान और कारगर तरीके ladki patane ka tarika hindi me  ladki patane ke 151 tarike  ladki patane ka mantra  ladki patane ke nuskhe  लड़का पटाने के तरीके  photos ladki patane ka tarika  facebook par ladki patane ka tarika  boy patane ke tarike टिप्स तो इम्प्रेस या बॉय विथौत टॉकिंग  बॉयफ्रेंड चुनें अपनी  लड़कों को कैसे इम्प्रेस करे  लव लेटर लिखना  बॉयफ्रेंड को भुलाने का तरीका  लड़को को कैसे इम्प्रेस करे  हाउ तो इम्प्रेस या बॉय इन हिंदी  100 love tips
  • ये  गुप्त बाते जानकर लड़की को आसानी से पटाए These secret things, knowing the girl easily in love
  • अगर आपको अपनी पड़ोसन ही पसंद है तो ..वो जब भी स्कूल/कॉलेज जाने के लिए निकले तो आप भी उनके साथ हो लें. उनसे बातें करते हुए चलें. लगातार 4 दिन तक अगर आप ऐसा करेंगे और अगर पांचवे दिन आप उनके साथ ना जाये तो वो जरुर आपके बारे में पूछेगी.  अगर उसने पूछा तो समझिये वो आपे से इम्प्रेस हो चुकी है 
  • लड़कियों को रोमांस बहुत पसंद होता है. आप अपने मोबाइल में कोई रोमांटिक रिंगटोन ही रखें जिस से वे आपसे और ज्यादा इम्प्रेस हो जाएँगी.
  • आप उन्हें स्पेशल महसूस करवाएं. जैसे की आप उस से उनका ऑटोग्राफ ही मांग लें ” क्या मुझे आपका ऑटोग्राफ मिल सकता है ??”. ऐसा कहने पर वो बहुत खुश होंगी… और आपकी  लड़की पटाने की सम्भावना काफी बद जाती है -
  • लड़कियों के सामने तो कभी भी भूल के भी स्मोकिंग या ड्रिंकिंग न करें . याद रखें..लड़की केवल अच्छे स्वाभाव वाले लड़कों को ही पसंद करती है .
  • लड़की के साथ बहस तो बिलकुल भी न करें ..उनका साथ दें.
  • अगर लड़की अपने माँ या पिताजी के साथ कही दिख जाये तो उनके पेरेंट्स को पाँव छू कर प्रणाम जरुर करें. यह हमारी संस्कृति भी है. इस से लड़की बिना इम्प्रेस हुए नहीं रह सकती. 

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रविवार, 7 जनवरी 2018

पत्नी को वश में करने के लिए वशीकरण मन्त्र-Wife love spells to tame

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किसी भी स्त्री या अपनी पत्नी को काबू करने के लिए मन्त्र -पत्नी को वश में करने के लिए वशीकरण मन्त्र-Wife love spells to tame
कहा जाता है दया की मूर्त है स्त्री पापनाशिनी है साक्षात् जगदम्बा है पर आज के इस आधुनिक युग में भी लोग अपनी बहु बेटियों को दहेज़ के लिए परेशान करते है ! ऐसे लोगो के लिए गुरु गोविन्द सिंह जी ने लिखा है !
पत्नी का वशीकरण मन्त्र  .....Captivate mantra wife .पत्नी को वश में करना ,पत्नी को समझना -काबू करना -काबू में रखना -वश में करना -नीबू से वशीकरण आसान वशीकरण मंत्र नाम से वशीकरण के उपाय फोटो से वशीकरण कैसे करे पानी से वशीकरण लौंग से वशीकरण कैसे करे स्त्री वशीकरण उपाय निम्बू से वशीकरण पत्नी को वश में करने का उपाय पत्नी को वश में करना स्त्री वशीकरण उपाय स्त्री वशीकरण तंत्र स्त्री वशीकरण करने के उपाय पति वशीकरण टोटके वशीकरण के आसान उपाय स्त्री वशीकरण मंत्र हिंदी में किसी को वश में करने के तरीके मोहनी टोटके ladki patane ka mantra hindi mein ladki ko vash me karne ka jadu ladki patane ke 101 tarike hindi स्त्री वशीकरण करने के उपाय काला जादू वशीकरण मंत्र वशीकरण के अचूक टोटके

धी भैन का पैसा खाए कहे गोविन्द सिंह यम धक्के खाए “
जो इन्सान दाज दहेज़ के लिए अपनी बहु बेटियों को परेशान करता है उसे यमराज के यमदूतो की मार खानी पड़ेगी ! दहेज़ के डर से कुछ लोग बेटियों को गर्भ में ही मार देते है ! पंजाब के इतिहासिक शहर फतेहगढ़ साहिब में सबसे अधिक भ्रूण हत्या होती है ! मेरे गुरुदेव ने मुझे एक ऐसी औषधि बनाना सिखाया है जिसे खाने के बाद स्त्री को केवल लड़का ही होता है और यदि एक बार वो दवाई किसी स्त्री को खिला दी जाये तो अगले तीन गर्भ तक पुत्र संतान ही होती है पर मै यह दवाई किसी को नहीं देता क्योंकि पंजाब में हर 1000 लडको के पीछे केवल 726 लडकिया है ! मै नहीं चाहता कि यह औसत और कम हो जाये !
आज के समय में यदि पुरुष बुरे है तो स्त्रिया भी कम नहीं कोई जमाना था जब लड़की अपने पति को ईश्वर मानती थी पर आज के समय में तो लोग ईश्वर को ईश्वर नहीं मानते तो बेचारे पति कि क्या औकात है ! हररोज किसी न किसी भाई की मेल आती है कि मेरी पत्नी मुझे छोड़कर चली गयी ! मेरी पत्नी ने मुझ पर 498 A का दहेज़ उत्पीडन का केस दर्ज करवा दिया है ! ऐसे भाईओं से मै सिर्फ इतना ही कहूँगा “” गाय माता होती है पर जब वो सिंग मारती है तो उसके सिंग तोड़ दिए जाते है “” आप भी ऐसा ही करे ! हमारे देश में एक और बहुत बड़ी समस्या है प्रेम केवल कविताओ और किताबो में ही अच्छा लगता है ! हमारे देश में यदि कोई सच्च में प्रेम करना चाहे तो समाज उसके खिलाफ खड़ा हो जाता है ! हमारा समाज चाहता है कि आज के समय में भी हीर और सोहनी जैसी सुंदर लडकिया पैदा हो पर हमारे घर में नहीं हमारे पडोसी के घर में पैदा हो ! ऐसे गंदे समाज की मै बिलकुल फ़िक्र नहीं करता जो कृष्ण की उपासना तो करता है पर प्रेम को बहुत बुरा मानता है !
ऐसे सभी आशिक भाई जो प्रेम में असफल हो चुके है और ऐसे भाई जो अपनी पत्नी से परेशान है उनके लिए मै एक साधना दे रहा हूँ पर इस साधना का प्रेम और वशीकरण के लिए दुरूपयोग न करे और मुझसे इस साधना का अपना अनुभव न पूछे !
|| मन्त्र  ||
जंगल की योगिनी पाताल के नाग
उठो मेरे वीरो …………….. को ल्याओ हमारे पास
यहाँ यहाँ हमारे सहाई
अब नाज़ भरी ताज भरी अग्नि तक फूक फिरो
मन विसरे मेरे गुरु गोरखनाथ की दुहाई !
||  विधि  ||
इस मन्त्र का ग्रहण काल में जप करे ! ग्रहण काल में जप करने से यह मन्त्र सिद्ध हो जायेगा !
||  प्रयोग विधि ||
जब किसी स्त्री पर प्रयोग करना हो तो उस स्त्री का नाम खाली स्थान पर कह दे और 21 दिन तक हररोज 1 माला जप करे ! वो स्त्री जरूर वशीभूत होकर दौड़ी चली आएगी !
इस मन्त्र का दुरूपयोग न करे ! मेरा विश्वास है यह प्रयोग करने के बाद आपके जीवन में बदलाव जरूर आएगा !

रविवार, 31 दिसंबर 2017

सम्मोहन क्या है केसे करे किसी को सम्मोहित-What is hypnosis how to hypnotize someone

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सम्मोहन क्या है केसे करे किसी को सम्मोहित-What is hypnosis how to hypnotize someone
सम्मोहन (Hypnosis) -Hypnosis Secrets of Powe

सम्मोहन क्या है केसे करे किसी को सम्मोहित-What is hypnosis how to hypnotize someone http://www.hindirhsygyan.com/2016/01/hypnosis-secrets-of-power.htmlसम्मोहन शक्ति का रहस्य |Hypnosis Secrets of Power |सम्मोहन (Hypnosis) दैनिक जीवन में सम्मोहन,सम्मोहन क्रिया  सम्मोहन विधि  सम्मोहन कला  सम्मोहन मंत्र  आत्म सम्मोहन  सम्मोहन साधना  सम्मोहन शक्ति कैसे प्राप्त करें  गुप्त सम्मोहन कैसे किया जाता हैवह कला है जिसके द्वारा मनुष्य उस अर्धचेतनावस्था में लाया जा सकता है जो समाधि, या स्वप्नावस्था, से मिलती-जुलती होती है, किंतु सम्मोहित अवस्था में मनुष्य की कुछ या सब इंद्रियाँ उसके वश में रहती हैं। वह बोल, चल और लिख सकता है; हिसाब लगा सकता है तथा जाग्रतावस्था में उसके लिए जो कुछ संभव है, वह सब कुछ कर सकता है, किंतु यह सब कार्य वह सम्मोहनकर्ता के सुझाव पर करता है।


इतिहास

भारत में अति प्राचीन काल से सम्मोहन तथा इसी प्रकार की अन्य रहस्यमय, अद्भुत प्रभावोत्पादक, गुप्त क्रियाएँ प्रचलित हैं। अन्य पूर्वी देशों में भी ये अज्ञात नहीं रही हैं। यह निश्चय है कि यदि सबने नहीं तो इनमें से अधिकांश ने इन क्रियाओं का ज्ञान भारत से प्राप्त किया, जैसेतिब्बत ने। नटों, साधुओं तथा योगियों में इन क्रियाओं के जाननेवाले पाए जाते हैं। इन विशिष्ट मंडलों के लोगों को छोड़कर अन्य मनुष्यों में इनका ज्ञान बहुत थोड़ा, या कुछ भी नहीं, रहता। अनधिकारी के ज्ञाता होने से अनिष्ट की आशंका समझ, पूर्वी देशों में इस विषय के समर्थ लोगों ने इसे सर्वथा गोपनीय रखा। इस कारण आज भी इस संबंध में जो कुछ निश्चित रूप से लिखा जा सकता है वह यूरोप की देन है, जहाँ इसका वैज्ञानिक अध्ययन करने की चेष्टा की गई है।
अठारहवीं सदी के मध्य में फ्रांज़ ए. मेस्मर नामक वियना के एक चिकित्सक ने सर्वप्रथम सम्मोहन का अध्ययन प्रारम्भ किया। इन्होंने कुछ सफलता तथा बड़ी प्रसिद्धि प्राप्त की, किंतु इस संबंध में जिन सिद्धांतों की इन्होंने कल्पना की वे गलत सिद्ध हुए। जो सिद्धांत आजकल स्वीकृत हैं, उनका विवेचन लीबाल्ट (Liebault) तथा वेर्नहाइम (Bernheim) नामक दो फ्रांसीसी डाक्टरों ने किया था। इनके अनुसार सम्मोहन का अनिवार्य प्रवर्तक सुझाव या प्रेरणा का संकेत होता है।

स्वरूप

यह निश्चित रूप से समझ लेना चाहिए कि सम्मोहनकर्ता जादूगर, अथवा दैवी शक्तियों का स्वामी, नहीं होता। मनुष्यों में से अधिकांश प्रेरणा या सुझाव के प्रभाव में आ जाते हैं। यदि कोई आज्ञा, जैसे "आप खड़े हो जाँए" या "कुर्सी छोड़ दें", हाकिमाना ढंग से दी जाए, तो बहुत से लोग इसका तुरंत पालन करते हैं। यह तो सभी ने अनुभव किया है कि यदि हम किसी को उबासी लेते देखते हैं, तो इच्छा न रहने पर भी स्वयं उबासी लेने लग जाते हैं। दूसरों के हँसने पर स्वयं भी हँसते या मुस्कराते हैं तथा दूसरों को रोते देखकर उदास हो जाते हैं।
जो लोग दूसरों के सुझावों को इच्छा न रहते हुए भी मान लेते हैं, वे सरलता से सम्मोहित हो जाते हैं। सम्मोहित व्यक्ति के व्यवहार में निम्नलिखित समरूपता पाई जाती है :

आज्ञाकारिता

कुछ लोगों का मत है कि जो मनुष्य पूर्ण रूप से सम्मोहित हो जाता है वह सम्मोहनकर्ता की दी हुई सब आज्ञाओं का पालन करता है, किंतु कुछ अन्य का कहना है कि सम्मोहित व्यक्ति के विश्वासों के अनुसार यदि आज्ञा अनैतिक या अनुचित हुई, तो वह उसका पालन नहीं करता और जाग जाता है।

मिथ्या प्रतीति तथा भ्रम

सम्मोहनकर्ता यदि कहता है कि दो और दो सात होते है, तो सम्मोहित व्यक्ति इसे मान लेता है। यदि उसे कहता है कि तुम घोड़ा हो, तो वह व्यक्ति हाथों और घुटनों के बल चलने लगता है।

मतिविभ्रम

सम्मोहित व्यक्ति को ऐसी वस्तुएँ जो उपस्थित नहीं है दिखाई तथा सुनाई जा सकती है और उनका स्पर्श व अनुभव कराया जा सकता है। इस अवस्था में यह भी मनवाया जा सकता है कि वह वस्तु उपस्थित नहीं है जो वास्तव में उपस्थित है। यदि प्रेरणा दी जाए कि जिस कुर्सी पर सम्मोहित व्यक्ति बैठा है वह वहाँ नहीं है, तो वह व्यक्ति मुँह के बल जमीन पर लुढ़क जाएगा।

ज्ञानेंद्रियों पर प्रभाव

सम्मोहनकर्ता के सुझाव पर सम्मोहित व्यक्ति के शरीर का कोई भाग सुन्न हो जा सकता है, यहाँ तक कि उस भाग को जलाने पर भी उसे वेदना न हो। इंद्रियों को तीव्र बनानेवाली प्रेरणा भी कार्यकारी हो सकती है, जिससे सम्मोहित व्यक्ति असाधारण बल का प्रयोग कर सकता है, या कही हुई बात को भी दूर से सुन सकता है।

रासंमोहन विस्मृति

साधारणतया सम्मोहनावस्था में हुई सब बातों को सम्मोहित व्यक्ति भूल जाता है।

सम्मोहनोत्तर प्रेरणा

व्यक्ति की सम्मोहनावस्था में दिए हुए सुझावों या आज्ञाओं का, पूर्ण चेतनता प्राप्त करने पर भी, वह पालन करता है। यदि उससे कहा गया है कि चैतन्य होने के दस मिनट बाद नहाना, तो उतना समय बीतने पर वह अपने आप ऐसा ही करता है।

दैनिक जीवन में सम्मोहन

प्रतिदिन के जीवन में सम्मोहन के अनेक दृष्टांत मिलते हैं। राजनीतिक या धार्मिक नेता अपने भाषणों से लोगों को सम्मोहित कर लेते हैं। आत्मसम्मोहन भी संभव है। किसी चमकीली वस्तु पर दृष्टि स्थिर रखकर यह अवस्था उत्पन्न की जा सकती है। अत्यधिक उत्तेजना, भय आदि से मनुष्य सम्मोहित अवस्था जैसा व्यवहार करने लगता है, या उत्तेजना के क्षण के पहले या बाद की घटनाओं को भूल जाता है। वह कौन है, उसका पिछला जीवन क्या था, यह भी भूल जा सकता है।
आकस्मिक शारीरिक चोट, मानसिक क्षोभ, अथवा उत्तेजना के कारण, हाथ पैर रहते कभी कभी मनुष्य लूले या लँगड़े के सदृश व्यवहार करने लगता है, दृष्टि का लोप हो जाता है, अथवा वह नींद में ही चलने फिरने लग जा सकता है। दृष्टि विभ्रम, या जाग्रत अवस्था में स्वप्न देखने के अनेक उदाहरण मिलते हैं। धार्मिक उत्तेजना से सम्मोहित होकर कुछ लोग अनजाने अर्धचेतनावस्था में हो जाते हैं और कल्पित होकर कुछ लोग अनजाने अर्धचेतनावस्था में हो जाते हैं और कल्पित दृश्य या वस्तुएँ देखते या सुनते हैं। बाद में उन्हें विश्वास हो जाता है कि यह सब वास्तविक था।
कुछ लोग सम्मोहन में कुशल होते हैं। अन्य लोग इनके प्रभाव में आकर, अर्धचेतनावस्था में कुर्सी, मेज आदि इधर उधर हटा देते हैं या हिलाते हैं, अनुपस्थित वस्तु देखते या सुनते हैं। श्रद्धा से रोगमुक्ति का आधार भी सम्मोहन ही है। भीड़ मे दूसरों से प्रभावित होकर मनुष्य सम्मोहित व्यक्ति के सदृश आचरण करने लगता है। भावातिरेक में भीड़ों के विवेकहीन आचरण का यही कारण है।

उपयोग

सम्मोहन का उपयोग कुछ रोगों को दूर करने में तथा प्रसव में किया जाता है। कुछ चिकित्सकों ने शल्यचिकित्सा में भी इसे वेदनाहर पाया है। सम्मोहन की कार्यपद्धति से मानस तथा मानसिक रोगों के अध्ययन में सहायता मिलती है।


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बुधवार, 20 दिसंबर 2017

हिन्दू धर्म के अनुसार हमारा का जन्म कैसे हुआ हम कहा से आये-According to Hinduism, we were born, how we came to the

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सृष्टि के आदिकाल में न सत् था न असत्, न वायु थी न आकाश, न मृत्यु थी न अमरता, न रात थी न दिन, उस समय केवल वही था, जो वायुरहित स्थिति में भी अपनी शक्ति से सांस ले रहा था। उसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं था।’ ‘ब्रह्म वह है, जिसमें से संपूर्ण सृष्टि और आत्माओं की उत्पत्ति हुई है या जिसमें से ये फूट पड़े हैं। विश्व की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश का कारण ब्रह्म है।’ -(ऋग्वेद, उपनिषद)
हिन्दू ग्रंथो के अनुसार मानव का जनम,केसे जाने ज्ञान /According to Hindu scriptures of human birth, how the knowledge,इन्सान का जन्म ,पहला इन्सान ,पहला मानव ,कहा से आया ,हम कोण है ,हम कहा से आये है --kaise hui aadmi ki utpatti-मानव की उत्पत्ति-पृथ्वी का अंत-मानव की उत्पत्ति का इतिहास-मानव का इतिहास-पृथ्वी का निर्माण-पृथ्वी अ का इतिहास-पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति-मानव का विकास-हिन्दू धर्म के अनुसार हमारा का जन्म कैसे हुआ हम कहा से आये-According to Hinduism, we were born, how we came to the इंसान की उत्पत्ति मनुष्य कैसे बना manav ki पृथ्वी पर मनुष्य की उत्पत्ति कैसे हुई धरती का पहला मानव कौन था?  मानव की उत्पत्ति और विकास धरती का पहला मानव कौन था मनुष्य कैसे बना पृथ्वी की उत्पत्ति video पृथ्वी की उत्पत्ति video download मानव का इतिहास पृथ्वी का निर्माण मनुष्य का जन्म कैसे हुआ


ब्रह्म से आत्मा। आत्मा से जगत की उत्पत्ति हुई। महर्षि अरविंद ने अपनी किताब ‘दिव्य जीवन’ में इस संबंध में बहुत अच्छे से लिखा है। उन्होंने जहां पुराणों के अनुसार धरती पर जीवन की उत्पत्ति, विकास और उत्थान के बारे में बताया है वहीं उन्होंने वेदों की पंचकोशों की धारणा को विज्ञान की कसौटी पर कसा है।
जब धरती ठंडी होने लगी तो उस पर बर्फ और जल का साम्राज्य हो गया। तब धरती पर जल ही जल हो गया। इस जल में ही जीवन की उत्पत्ति हुई। आत्मा ने ही खुद को जलरूप में व्यक्त किया। इस जलरूप ने ही करोड़ों रूप धरे। जल का यह रूप हिरण्यगर्भ में जन्मा अर्थात जल के गर्भ में जन्मा।
सर्वप्रथम : सर्वप्रथम हिरण्यगर्भ से अंडे के रूप का एक मुख प्रकट हुआ। मुख से वाक् इन्द्री, वाक् इन्द्री से ‘अग्नि’ उत्पन्न हुई। तदुपरांत नाक के छिद्र प्रकट हुए। नाक के छिद्रों से ‘प्राण’ और प्राण से ‘वायु’ उत्पन्न हुई। फिर नेत्र उत्पन्न हुए। नेत्रों से चक्षु (देखने की शक्ति) प्रकट हुए और चक्षु से ‘आदित्य’ प्रकट हुआ। फिर ‘त्वचा’, त्वचा से ‘रोम’ और रोमों से वनस्पति-रूप ‘औषधियां’ प्रकट हुईं। उसके बाद ‘हृदय’, ‘हृदय’ से ‘मन, ‘मन से ‘चन्द्र’ उदित हुआ। तदुपरांत नाभि, नाभि से ‘अपान’ और अपान से ‘मृत्यु’ का प्रादुर्भाव हुआ। फिर ‘जननेन्द्रिय, ‘जननेन्द्रिय से ‘वीर्य’ और ‘वीर्य’ से ‘आप:’ (जल या सृजनशीलता) की उत्पत्ति हुई।
यहां वीर्य से पुन: ‘आप:’ की उत्पत्ति कही गई है। यह आप: ही सृष्टिकर्ता का आधारभूत प्रवाह है। वीर्य से सृष्टि का ‘बीज’ तैयार होता है। उसी के प्रवाह में चेतना-शक्ति पुन: आकार ग्रहण करने लगती है। सर्वप्रथम यह चेतना-शक्ति हिरण्य पुरुष के रूप में सामने आई।
अति सूक्ष्म रूप में जीवन की उत्पत्ति के बाद मोटेतौर पर वनस्पत्तियों, लताओं और फिर वृक्षों की उत्पत्ति हुई। इस क्रम में आगे चलकर एककोशीय और फिर बहुकोशीय जीवों की उत्पत्ति हुई।
कुछ ऐसे जीव उत्पन्न हुए जिसमें हड्डी न होती थी तथा ये किसी पतले इमली, नीम के पत्ते की तरह होते थे। प्रारंभ में ये सभी जल के भीतर की भूमि से जुड़े रहते थे। ऐसे जीव जो एकेंद्रीय थे अर्थात वे न देख सकते थे, न सुन सकते थे, न स्वाद ले सकते थे। बस स्पर्श ही उनकी अनुभूति थी।
इसी क्रम में आगे चलकर एक पत्तेनुमा मछली की उत्पत्ति हुई। फिर मछली ने कई रूप धरे। हिन्दू धर्म में मछली को पवित्र जलचर जंतु माना जाता है। जल के अंदर मछली की उत्पत्ति सबसे बड़ी घटना थी। संभवत: यह घटना 3 अरब वर्ष पहले की है।
वराह काल और कच्छप काल : जब वराह काल में धरती के कुछ भाग को जल से ऊपर प्रकट किया गया तो प्रारंभ में कुछ आदिकालीन शैवाल और वनस्पतियों ने धरती पर अपना साम्राज्य स्थापित किया। यही धीरे-धीरे वृक्ष का आकार लेने लगी।
इन छोटी-छोटी घासों के पीछे आए उभयचर प्राणी, कीट, कीड़े और सरीसृप आदि। यही धरती पर और जल में अपनी सत्ता जमाने लगे। इनमें से कई हिंसक प्राणियों से बचने के लिए कीटों ने वृक्षों पर चढ़ना सीखा और उनमें से ही कुछ कीटों में पंख निकलने लगे और इस तरह आकाश में कीट-पतंगों की भरमार होने लगी।
इधर कई उभयचर प्राणियों में कछुआ सबसे विकसित प्राणी था और उन्हीं आदिकालीन प्रजातियों में से कुछ उड़ना सीखकर पक्षी होने लगे। कुछ धरती पर नए-नए रूप धरने लगे। सर्वप्रथम जमीन पर बसने वाले प्राणियों ने अपनी जड़ें पानी में ही जमाए रखीं, उसी तरह जिस तरह कि वनस्पत्तियों और पौधों ने। ऐसा इसलिए कि वे धरती पर ज्यादा देर तक रह नहीं सकते थे। उन्हें सांस लेने के लिए जल में लौटना ही पड़ता था।
हिन्दू धर्म में सर्प को इसलिए महत्व दिया जाता है कि जहां जल में इसकी करोड़ों प्रजातियां थीं वहीं धरती पर सबसे पहले इसका ही साम्राज्य स्थापित हुआ। यह जल के बगैर भी धरती पर कई दिनों तक रहने में कामयाब रहा और इसने अन्य प्राणियों की अपेक्षा सबसे पहले जल पर अपनी निर्भरता छोड़ दी। इसकी ऐसी भी प्रजातियां थीं, जो उड़ने में सफल हो गई थीं।
वराह, कच्छप और सर्प ने धरती पर जीवन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिस तरह सर्प की कुछ अन्य प्रजातियां उड़ने में सफल हो गई थीं उसी तरह कछुए की प्रजातियां भी कुछ इसमें सफल रहीं और इस तरह आकाश में कीट-पतंगों, मछलियों, कछुओं और सर्पों की भिन्न-भिन्न प्रजातियों ने आकाश को हरा-भरा कर दिया।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, धरा के पर्यावरण में भारी बदलाव आते गए। जो जीव इन परिवर्तनों के अनुसार अपने आपको ढाल नहीं सके, वे हमेशा के लिए विलुप्त हो गए और जिन्होंने खुद को बचाए रखा वे विजेता कहलाए। उनमें मछली, सर्प, कछु्आ, मगरमच्छ, कीट-पतंगें, चींटी, मकोड़े आदि जलचर और उभयचर प्राणी तो आज भी हैं, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि मनुष्य कैसे और किससे बना?
इसके लिए हिन्दू धर्म में दो सिद्धांत हैं- 1. मनुष्य को ईश्वर ने बनाया, 2. क्रम विकास के तहत मनुष्य बना मछली जैसे प्राणी से।
1. मनुष्य को ईश्वर ने बनाया : ब्रह्म से ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई और ब्रह्मा ने खुद को दो भागों में विभक्त कर लिया। उसका पुरुष रूप एक भाग का नाम था स्वायंभुव मनु और स्त्री रूप दूसरे का नाम शतरूपा था। सप्तचरुतीर्थ के पास वितस्ता नदी की शाखा देविका नदी के तट पर मनुष्य जाति की उत्पत्ति हुई। प्रमाण यही बताते हैं कि आदि सृष्टि की उत्पत्ति भारत के उत्तराखंड अर्थात इस ब्रह्मावर्त क्षेत्र में ही हुई। 
2. मनुष्य बना मछली जैसे प्राणी से : आज का मनुष्य मछली की लाखों प्रजातियों में से एक विशेष मछली का विकसित रूप है। विकास के क्रम में उसने कई महत्वपूर्ण रूप बदले। लेकिन पूर्व काल में मनुष्य सिर्फ मछली का ही विकसित रूप नहीं रहा और ‍भी कई ऐसे जीव-जंतु थे, जो न मालूम कब वानर की भिन्न-भिन्न प्रजातियां बनते गए और अंतत: उन्हीं में से एक आज का आधुनिक मनुष्य बना। जिस तरह मछलियां हजारों प्रजातियों में पाई जाती हैं उसी तरह मानव भी आदिकाल में हजारों प्रजातियों में थे। हालांकि आज हमें अफ्रीकी, यूरोपीय, चीनी, भारतीय आदि क्षे‍त्र की मानव प्रजातियां ही नजर आती हैं।
वेद में सृष्टि की उत्पत्ति, विकास, विध्वंस और आत्मा की गति को पंचकोश के क्रम में समझाया गया है। पंचकोश ये हैं- 1. अन्नमय, 2. प्राणमय, 3. मनोमय, 4. विज्ञानमय और 5. आनंदमय। 
उक्त पंचकोश को ही 5 तरह का शरीर भी कहा गया है। वेदों की उक्त धारणा विज्ञानसम्मत है।
दो गोलार्ध हैं- एक उर्ध्व और दूसरा अधो। जब आत्मा नीचे गिरती है तो जड़ हो जाती है और इस तरह वह विकास क्रम का हिस्सा बनकर अपने पुरुषार्थ से ऊपर उठना शुरू करती है और अंतत: स्वयं के आनंदस्वरूप को पुन: प्राप्त कर लेती है। लेकिन कुछ ऐसी भी आत्माएं हैं, जो कभी नीचे नहीं गिरीं और जाग्रत हो गईं, वे ही आत्माएं देवात्माएं कहलाईं। उनके कारण भी सृष्टि उत्पत्ति, विकास और विध्वंस हुआ।
महर्षि अरविंद ने अपनी किताब ‘दिव्य जीवन’ में इस संबंध में बहुत अच्छे से लिखा है।

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

जाने बीवी और गर्लफ्रेंड के क्या अंतर होते है -What benefits do the wives and girlfriends -

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teg - पुरुष की नजऱ से जानिये गर्लफ्रेंड और बीवी में क्या है अंतर -Know what's in the girlfriends and wives of men Njrh difference-जाने बीवी और गर्लफ्रेंड के क्या फायदे होते है -What benefits do the wives and girlfriends -

आप को जानकर शॉक होगा कि पुरूष अपनी बीवी और गर्लफ्रेंड को दो अलग-अलग नजऱों से देखते हैं।



जाने बीवी और गर्लफ्रेंड के क्या फायदे होते है -What benefits do the wives and girlfriends -पुरुष की नजऱ से जानिये गर्लफ्रेंड और बीवी में क्या है अंतर -Know what's in the girlfriends and wives of men Njrh difference-जाने बीवी और गर्लफ्रेंड के क्या फायदे होते है -What benefits do the wives and girlfriends -आइए जानते हैं कि पुरूष को गर्लफ्रेंड से क्या खास चाहिए होता है:-   वो गर्लफ्रेंडके साथ सिगरेट पीना पसंद करता है। जबकि उसे अपनी बीबी का धूम्रपान करना कतई पसंद नहीं होता है। शायद वो उसकी हेल्थ की केयर करने लगता है। गर्लफ्रेंड की डांट में भी प्यार-लड़के, अपनी गर्लफ्रैंड की डांट में भी प्यार देख लेते हैं और उसे पसंद करते हैं लेकिन अगर बीवी कुछ कह दें तो उसे पसंद नहीं आता है। बिस्तर पर  अगर पुरूष की जगह उसकी गर्लफ्रेंड पहल करे तो उसे अच्छा लगता है। लेकिन अगर बीबी ऐसा करें, तो उसे शक की निगाह से देखा जाने लगता है। सेक्सपुरूष, गर्लफ्रेंड के साथ बिस्तर पर कई पोजिशन में सेक्स करने की इच्छा रखता है लेकिन बीबी के साथ सिर्फ फार्मेलिटी की तरह सो जाता है

 वो अपनी गर्लफ्रेंड को फन के लिए समझते हैं.और बीवी को काबू कर के रखना चाहते हैं। एक ही आदमी के दो स्वरूप तब सामने आते हैं, जब वो अपनी बीवी के साथ कुछ और होता है और गर्लफ्रेंड के साथ कुछ और। यही कारण होता है कि जब कोई लड़का अपनी गर्लफ्रेंड से शादी कर लेता है, तो शादी के बाद दोनों के बीच वो अपनापन और प्यार कहीं खो सा जाता है। 

आइए जानते हैं कि पुरूष को गर्लफ्रेंड से क्या खास चाहिए होता है:-


  1. वो गर्लफ्रेंडके साथ सिगरेट पीना पसंद करता है। जबकि उसे अपनी बीबी का धूम्रपान करना कतई पसंद नहीं होता है। शायद वो उसकी हेल्थ की केयर करने लगता है।
  2. गर्लफ्रेंड की डांट में भी प्यार-लड़के, अपनी गर्लफ्रैंड की डांट में भी प्यार देख लेते हैं और उसे पसंद करते हैं लेकिन अगर बीवी कुछ कह दें तो उसे पसंद नहीं आता है।
  3. बिस्तर पर  अगर पुरूष की जगह उसकी गर्लफ्रेंड पहल करे तो उसे अच्छा लगता है। लेकिन अगर बीबी ऐसा करें, तो उसे शक की निगाह से देखा जाने लगता है।
  4. सेक्सपुरूष, गर्लफ्रेंड के साथ बिस्तर पर कई पोजिशन में सेक्स करने की इच्छा रखता है लेकिन बीबी के साथ सिर्फ फार्मेलिटी की तरह सो जाता है
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सोमवार, 4 दिसंबर 2017

स्त्री चरित्र पर वैज्ञानिक शोध ये कहता है --Scientific research on the feminine character, it says -

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स्त्री चरित्र पर वैज्ञानिक शोध ये कहता है --Scientific research on the feminine character, it says स्त्री चरित्र ।। आधुनिक  शोध् ।Female character .. Adhunik research,ओरत का चरित्र ,स्त्री के बारे में ,ओरत के बारे में ,त्रिया चरित्र ,स्त्री चरित्र पर वैज्ञानिक शोध ये कहता है --Scientific research on the feminine character, it says-स्त्री को क्या चाहिए-चरित्रहीन स्त्री-स्त्री की नाभि-चरित्रहीन की पहचान-चरित्रहीन पत्नी-स्त्री की छाती-स्त्री वशीकरण-चरित्रहीन महिलाओं के लक्षण-चरित्रहीन स्त्री की पहचान चरित्रहीन पत्नी के लक्षण त्रिया चरित्र गरम स्त्री चरित्रहीन महिलाओं की पहचान स्त्री के प्रकार चरित्रहीन लड़कियों की पहचान चरित्रहीन पुरुष की पहचान-


बुरे लोग अंग्रेज़ों में भी हैं लेकिन उनके बहुसंख्यक लोगों का स्वभाव शोध करने का बन चुका है। बात चाहे कितनी ही मामूली क्यों न हो लेकिन बात मानने से पहले वे यह ज़रूर देखेंगे कि बात में सच्चाई कितनी है ?
और यह हमारे लिए कितनी हितकारी है ?
मस्लन औरत की वफ़ा के साथ उसकी बेवफ़ाई के क़िस्से भी सदा से ही आम हैं और बेवफ़ा औरत के लिए ही भारत में त्रिया चरित्र बोला जाता है लेकिन अंग्रेज़ों ने इस पर भी शोध कर डाला।
देखिए आप भी यह दिलचस्प शोध :--
 धोखा देने में महिलाएं भी नहीं हैं कुछ कम---
    आमतौर पर केवल पुरुषों के विषय में ही यह माना जाता है कि वह अपने प्रेम-संबंधों को लेकर संजीदा नहीं रहते. वह जरूरत पड़ने पर अपने साथी को धोखा देने से भी नहीं चूकते. लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारी मानसिकता बिल्कुल बेबुनियाद है क्योंकि विश्वासघात और संबंधों से खेलना केवल पुरुषों का ही शौक नहीं है बल्कि महिलाएं भी इन तौर-तरीकों को अपनाने से नहीं हिचकतीं. प्रेमी को धोखा देने और उसके पीठ पीछे दूसरा प्रेम-संबंध बनाने में महिलाएं पुरुष के समान नहीं बल्कि उनसे कहीं ज्यादा आगे हैं.
    डेली एक्सप्रेस में छपे एक शोध के नतीजों ने यह खुलासा किया है कि केवल पुरुष नहीं बल्कि महिलाएं भी अपने रिश्ते की गंभीरता को समझने में चूक कर बैठती हैं. लव-ट्राएंगल जैसे संबंधों में महिलाओं की भागीदारी अधिक देखी जा सकती है. इस सर्वेक्षण में 2,000 लोगों को शामिल किया गया था जिनमें से लगभग एक चौथाई महिलाओं ने यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने एक ही समय में एक से ज्यादा पुरुषों के साथ प्रेम-संबंध स्थापित किए हैं. जबकि केवल 15% पुरुषों ने ही यह माना है कि उन्होंने एक बार में दो से ज्यादा महिलाओं से प्रेम किया है.
    शोधकर्ताओं ने पाया कि लव-ट्राएंगल में महिलाओं की अधिक संलिप्तता का कारण यह है कि वह पुरुषों की अपेक्षा जल्द ही भावनात्मक तौर पर जुड़ जाती हैं जिसके कारण वह प्रेम और आकर्षण में भिन्नता नहीं कर पातीं. फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों के आगमन से भी लोगों की जीवनशैली बहुत हद तक प्रभावित हुई है. ऐसी साइटों पर पर अधिक समय बिताने के कारण महिलाएं विभिन्न स्वभाव और व्यक्तित्व वाले पुरुषों के संपर्क में आ जाती हैं. लगातार बात करने और एक-दूसरे के संपर्क में रहने के कारण वह उनके साथ जुड़ाव महसूस करने लगती हैं और अपनी भावनाओं पर काबू ना रख पाने के कारण वह जल्द ही लव ट्राएंगल के फेर में पड़ जाती हैं.
    इस शोध की सबसे हैरान करने वाली स्थापना यह है कि अधिकांश लोग यह मानते हैं कि एक समय में दो या दो से अधिक लोगों से प्यार करना और उनके साथ संबंध बनाना कोई गलत बात नहीं हैं. व्यक्ति चाहे तो वह दो लोगों से प्यार कर सकता है.
    महिलाओं के विषय में एक और बात सामने आई है कि वे अधिक आमदनी वाले पुरुषों की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं. धन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए महिलाएं आर्थिक रूप से सुदृढ़ पुरुष को मना नहीं कर पातीं.
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शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

जाने लडकियों के सबसे कामुक अंगो के बारे में -The girls about the sensual organs

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कामुक और सेक्सी हिस्सा कौनसा है योनि से पानी आता है स्त्री औरत लड़की वेसे तो लडकियों का पूरा शारीर ही इस तरह बना होता है कि मर्द उनकी हर अदा पर फ़िदा हो जाता है / 
पर बात जब लडकियों कि आती है तो बहुत से मर्दों को निजी पलो में उनको कुश करना नही आता /इसलिए हम आप को बताने जा रहे ही वो खास अंग जिस पर अगर आप ध्यान दे तो लडकिय आपकी दीवानी हो जाएगी
जाने लडकियों के सबसे कामुक अंगो के बारे में -The girls about the sensual organs जाने लडकियों के सबसे कामुक अंगो के बारे में The girls about the sensual organs,लडकियों के अंग ,लडकियों के बारे में ,लड़की ,लडकियों का शरीर ,लडकियों की बात ,स्तन महिला,नितंब या कूल्हे,योनि,योनि की गहराई,भगशिश्न  महिलाओं का सबसे कामुक अंग ,स्त्री का सेक्सी कामुक अंग ,महिला के सेक्सी अंग ,संवेदनशील अंग चूत से पानी टपक जाये जाता है सेक्सी अंग हिस्सा लड़की को उत्तेजित करने के तरीके, कौनसे अंगों से महिलाओं के शरीर के ये हिस्‍से करते हैं उत्‍तेजित इन अंगों को छूने से मचल कर बाहों में आ जाती है लड़की महिलाओं के ये अंग होते हैं सेंशुअल, छूने से बढ़ती है महिलाओं के ये अंग छूते ही बढ़ जाती है सेक्स की इच्छा शरीर के ये अंग होते है सबसे ज्यादा कामुक

कान
कानों के चारों ओर चैतन्य नसों का जमावड़ा होता है, जो कान को उत्तेजना के प्रति अतिरिक्त चैतन्य बनाती हैं. अपनी उंगलियों से उन्हें हल्के से सहलाइए या खींचिये, कान के पीछे की ओर 
चूमे और कान के निचले गुद्देदार हिस्से को हल्के से काटे. इससे महिलाओं में उत्तेजना पूर्ण सनसनाहट का संचार होता है. कई महिलाएं अपने कान में जीभ फेरना पसंद नहीं करती लेकिन सौम्य तरीके से कान के चारों ओर जीभ घुमाना भी उनमें उत्तेजना का संचार करता है.
होंठ
चूमना… किसी महिला के लिए एक बड़ा टर्निंग प्वांइट होता है. जब रिलेशन बन रहे होते हैं तो किस(kiss) ऐसी पहली चीज होती है सर्वप्रथम अस्वीकार की जाती है, लेकिन इसमें देर नहीं करना चाहिये. होंठ उत्तेजक नसों से लबालब भरे होते हैं. इन्हें तुरंत सीधे तौर पर इसलिए जीभ में नहीं डुबाना चाहिये. आपकी किस द्वारा सौम्यता से कामुकता में तीव्रता से परिवर्तन होता है. सबसे पहले उसके निचले होंठो पर अपनी जीभ फेरें फिर उसे अपने होंठों के बीच फंसाकर चूसे साथ ही उसे भी ऐसा करने दें. जब आप उसे किस कर रहें हो तो अपने हाथ उसकी गर्दन पर रखे या फिर उसकी कमर या नितंबों पर या फिर इस दौरान उसके इन सभी जगहों पर हाथ फेर सकते हैं यह दिखाने के लिये कि आप उससे कितना कुछ चाहते हैं



गर्दन
इसे चूमना, चाटना, सौम्य तरीके से काटना और हल्के से थपथपाना उसको सिसकने के मजबूर कर देता है. लेकिन यहां जोर से नहीं काटना चाहिये क्योंकि यहां की त्वचा ब्रेक हो सकती है


कंधे
गर्दन की तरह- कई महिलाएं कंधों को चूमने और आलिंगन करने से काफी उत्तेजना का अनुभव करती हैं. पूर्व की तरह जो प्रक्रिया गर्दन में कर रहे हैं वही करते हुए कंधों तक आएं ताकि उस पता चल सके कि आप कितने सेन्सुअल लवर हैं.

कोहनी
कोहनी के अंदर की ओर चूमने से महिलाओं में हल्की उत्तेजना का संचार होता है. कोहने के अंदर की ओर की त्वचा कोमल होती है, इस जगह हल्के से काटते हुए किस करते चले जाएं. देखें इससे उसे कैसे आनंद की अनुभूति होती है.

अंगुलियां
महिलाओं की उंगलियां भी काफी उत्तेजक होती हैं लेकिन ज्यादातर लोग इस ओर ध्यान नहीं देते. उंगलियों के पोरों को हल्के-हल्के सहलाते हुए दबाने से महिलाओं में तीव्र उत्तेजना का संचार होता है. साथ ही जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ती जाती है आपको उसकी उंगलियों को अपने होंठों के बीच ले जाना चाहिए फिर होंठो से सहलाते हुए धीरे धीरे चूसना चाहिए. इस क्रिया से वह नशे की सी स्थिति में आ जाएगी. यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि उंगलियों में सर्वाधिक कामुक बिन्दु उसके पोर होते हैं.

स्तन
स्तन महिला के सेक्सुअल और कामुक अंगों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. यह महिलाओं में सेक्सुअल आकांक्षा के साथ सेक्सुअल उत्तेजना जागृत करने में सहायक होता है साथ ही सेक्सुअल उत्तेजना के लिये अत्यंत संवेदनशील होता है. परन्तु इसके लिए सीधे छलांग नहीं लगा देनी चाहिये. आप अपने रास्ते उसके शरीर में नीचे की ओर जाते जाएं व उन्हें सहलाते रहे लेकिन स्तनों को तब तक न छुएं जब तक कि आपको यह न पता चल जाए कि वह स्वयं चाह रही है कि आप उसके स्तनों को छुएं. शुरुआती दौर में उनके साथ सौम्य तरीके से पेश आएं. इसके लिये शुरुआत किनारे से करें, फिर केन्द्रीभूत तरीके से गोल घेरे में अपनी उंगलियां उसके स्तनों के चारों ओर घूमाएं, ऐसा तब तक करें कि जब तक कि स्तनों के निप्पल के चारों ओर के गुलाबी या भूरे रंग के गोल घेरे तक न पहुंच जाएं, यहां कुछ देर तक उंगलियां फिराने के बाद निप्पल तक पहुंचना चाहिए. अब आप तो निप्पल को सहलाते हुए थपथपाएं, खींचे, दबाएं, चूमे और चूसे. इस दौरान आप चाहें तो सौम्य तरीके से हल्के से दांतो से काट सकते हैं. जब आप का मुंह एक स्तन पर है तो इस दौरान आपका हाथ दूसरे स्तन पर खेलना चाहिए तभी वह सब कुछ सौंपने को आतुर होगी. इसके पश्चात स्तन बदल कर यही क्रिया दोहराएं. फिर दोनों हाथों से स्तनों को जम कर दबाना चाहिये साथ ही बीच में अपने पार्टनर से पूछें कि उसे स्तनों में कौन सी क्रिया आनंददायी लगती है. कभी भी पार्टनर की इच्छाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिये. स्तनों के बीच की हिस्सा कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है जबकि यह भी कामुक क्षेत्र होता है.

पीठ
शुरुआत हल्के तरीके से सहलाने से करें. इसके लिए कंधों के निचले हिस्से से शुरू करें फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर आती जायें(इस दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधे छूने से बचे यह खतरनाक हो सकता है). इस दौरान पीठ पर मिले जुले कभी हल्के कभी तेज थपथपाहट करनी चाहिये. इसे और बेहतर बनाने के लिये टेलकम पावडर या तेल का प्रयोग कर सकते हैं. यहां यह ध्यान दें कि उसकी पीठ के किस हिस्से में टच करने पर ज्यादा उत्तेजना का संचार होता हैं इसके लिये आप चाहें तो अपने पार्टनर से पूछ सकते हैं. फिर उसकी पीठ के मध्य में रीढ़ की हड्डी के उपर बने नालीदार हिस्से पर हल्के हाथ से उंगलियां फिराते हुए नीचे की ओर नितंबों तक आना चाहिये यह क्रिया चाहें तो कई बार दोहरा सकते हैं. ऐसा करने से उसे आराम की अनुभूति तो होगी ही, साथ ही इससे रक्त का संचार उसके पेल्विक क्षेत्र की ओर होने लगता है- इससे उसकी उत्तेजना चरम की ओर पहुंचने लगती है. उसकी पीठ के निचले हिस्से में या ठीक नितंब के उपर बने गङ्ढे (dimple) भी उत्तेजक अंग होते हैं. उसकी रीढ़ के समानान्तर ऊपर से नीचे की ओर(top to the bottom) जीभ फेरने पर उसके उत्तेजना की आग सुलग उठती है.

नितंब या कूल्हे
कई महिलाएं अपने नितंबों को जोर से दबाना या तेज दबाव की मालिश पसंद करती हैं. आप यहां पर शरीर के अन्य अंगों की अपेक्षा ज्यादा दबाव दे सकते हैं. कुछ महिलाएं नितंब पर हल्के थप्पड़ो का प्रहार पसंद करती हैं- किन्तु ऐसा करने से पहले अपने पार्टनर से पूछ लें.इस मामले को जोर का दबाव या थपथपाहट मजाक का विषय नहीं बनाना चाहिये – क्योंकि कई महिलाएं अपने नितंब के आकार को लेकर काफी आशंकित रहती हैं.

मोन्स
जैसे ही आप भग क्षेत्र या बाह्य जननेन्द्रियों (genital area) को पाते हैं, तो उसमें छलांग लगाना काफी सरल होता है लेकिन उसके पहले भगशिश्न के उपर स्थित उस गुद्देदार क्षेत्र को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जो रोमों (pubic hair) से घिरा होता है. इसे थपथपाना और रगड़ना उसे सिसकने को मजबूर कर देगा वहीं रोमों को(यदि हैं तो) उंगलियों में फंसाकर हल्के से खींचने पर उसे मीठे दर्द की अनुभूति होती है जो उसमें उत्तेजना का संचार करती है.
भगशिश्न
यह महिलाओं का सबसे कामुक अंग होता है. भगशिश्न को आसानी से खोजा जा सकता है. यह भगोष्ठ (vaginal lips) के उपर की ओर उभरा हुआ हिस्सा होता है. यह उत्तेजक उत्तकों से बना हुआ होता है और इसका काम पुरुषों को शिश्न मुण्ड की ही तरह होता है. उत्तेजना के दौरान यह रक्त से भरा रहता है. कुछ महिलाओं का भगशिश्न इतना सेन्सटिव होता है कि कई बार परेशानी का सबब भी बन जाता हैं क्योंकि हल्की सी छुअन भी उसमें उत्तेजना भर देती है. इस तरह की स्थितियों में इसे सीधे न छूकर इसके किनारों से स्पर्श करना चाहिए और उस नीचे (base) से उत्तेजित करना चाहिये. कुछ महिलाएं जैसे-जैसे उत्तेजित होती जाती हैं वैसे-वैसे वे अपने भगशिश्न में ज्यादा दबाव चाहती हैं. लेकिन भगशिश्न में दबाव व स्पर्श के लिये पार्टनर से पूछ कर ही हरकत करना चाहिये. यदि आप मुखमैथुन कर रहें हैं तो भगशिश्न तक किनारे से पहुंचे. इस तरीके से उसे ज्यादा आनंद आएगा.
योनि
योनि वह दूसरा क्षेत्र है जहां कई आदमी स्तनों को उत्तेजित करने के बाद सीधे पहुंच जाते हैं. जब आप वहां पहुंच जाएं तो उसके बाहर रुके, तब आपको काफी पसंदीदा तरीके से अंदर के लिये वेलकम किया जाएगा. जैसे ही महिला उत्तेजित होती है उसका गर्भद्वार उपर की ओर खिसक जाता है जिससे योनि की
गहराई बढ़ जाती है और आपको गहरे तक प्रवेश का आनंद मिलता है. इस लिए यह आपकी पसंद का मामला है कि आप उसे कितना गीला कर सकते हैं. जितना समय यहां दिया जाएगा उतना ही आनंद आपको लिंग प्रवेश पर मिलेगा.
जी-स्पॉट
योनि की गहराई के एक तिहाई रास्ते पर यह क्षेत्र योनि की बाहरी दीवार पर (आमाशय या पेट के सामने न कि गुदा की ओर ) एक स्पंजी क्षेत्र पाया जाता है यह लगभग मुंह के उपरी हिस्से की तरह होता है जब जीभ से छुआ जाता है. यदि इस जगह पर लगातार उंगली चलाई जाती है तो कई महिलाएं काफी मात्रा में पानी छोड़ती है. पानी की यह धार काफी तेज भी होती है. वहीं कुछ महिलाओं को ऐसा अनुभव होता है कि मानों उन्हें पेशाब जाना हो, तो कई को कुछ और ही अनुभूति होती है. कुल मिला कर जी-स्पाट उत्तेजना के महिलाओं में अलग-अलग अनुभव होते हैं. इसलिए अपने पार्टनर से पूछिये कि उसे क्या अनुभूति हो रही है और उसे कैसा लग रहा है-


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