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रविवार, 16 जुलाई 2017

भारत में इंडियन मुजाहिद्दीन की सच्चाई और मुसलमान The truth of the Indian Mujahideen and the Muslims

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छद्मयुद्ध और मुसलमान :-
भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दो दिन पहले आधा सच बोला कि
"विश्व की दूसरी सबसे अधिक मुस्लिम आबादी होने के बावजूद "आईएसआईएस" भारत में पैर जमाने में नाकाम रहा"
भारत में इंडियन मुजाहिद्दीन की सच्चाई और मुसलमान The truth of the Indian Mujahideen and the Muslims

दरअसल राजनाथ सिंह को पूरी बात कहनी चाहिए थी और वह यह थी कि इस देश के मुसलमानों की इतनी बड़ी आबादी के बावजूद "अलकायदा" भी इस देश में कभी पैर ना जमा सका।
संपुर्ण बात तो यह होती कि "इस देश का मुसलमान "आतंकवाद" से सदैव ही दूर रहा।"
मेरी इस बात का आधार यह है कि कांग्रेस के समय में या अटल बिहारी बाजपेयी सरकार के समय एक एक करके "इंडियन मुजाहिद्दीन" के नाम पर पकड़ॆ गये मुसलमान भारत की अदालतों से एक एक करके 12 से 20 साल बाद अपना बहुत बड़ा जीवन जेल की अँधेरी काल कोठरी में गुजार कर बाइज्ज़त बरी होते जा रहे हैं।
यदि आप यह सोचेंगे कि अदालतों से एक एक करके बाइज्ज़त बरी होते यह मुसलमान यदि निर्दोष हैं तो इनको जिन आतंकवादी घटनाओं में फँसाया गया उन्हें दरअसल किसने अंजाम दिया ? तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा कि यह खेल कितना साजिश भरा है और गहरा है।

महाराष्ट्र के पूर्व आईजी एस एम मुशरिफ ने अपनी किताब "करकरे के हत्यारे कौन" में इस बात का खुलासा साल 2009 में ही कर दिया था कि यह साजिश किसकी है।
दरअसल , आतंकवाद का हौव्वा जब इस देश और दुनिया में खड़ा हुआ तो आतंकवादी घटनाओं में पुलिस और जाँच एजेंसियां अपना नाकारापन छुपाने के लिए छद्म रूप से गढ़ी गये एक आतंकवादी संगठन "इंडियन मुजाहिद्दीन" से उन आतंकवादी घटनाओं को छोड़कर यहाँ से वहाँ तक जहाँ दिल किया मुस्लिम लड़कों को उस संगठन का सदस्य बता कर और उस आतंकवादी घटनाओं में शामिल बता कर जेलों में ठूस दिया जो अब एक एक करके सब बाइज्ज़त बरी हो रहे हैं।
ताज़ी रिहाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शोध के छात्र गुलज़ार वाणी की हुई है जिन्हें ट्रेन धमाकों में फँसाया गया था।

सवाल फिर वही है कि फिर इन सभी घटनाओं को किया किसने ?
महाराष्ट्र पुलिस के पूर्व आईजी एस एम मुशरिफ अपने कार्यकाल के अनुभव पर कहते हैं कि यह सभी कारनामे भारत की खूफिया जाँच एजेंसी "इंटेलिजेंस ब्यूरो" कराती है इसीलिए इन घटनाओं के असली अपराधी पकड़े नहीं जाते और मुसलमानों को इन घटनाओं के नाम पर यहाँ वहाँ से उठा कर जेल में ठूस दिया जाता है और फिर भाँड मीडिया के ज़रिए यह माहौल बनवाया जाता है कि "मुसलमान आतंकवादी होता है" और इसका कारण उसका कट्टर होना और कुरान के प्रति उसकी अपार श्रृद्धा होता है। ऐसे ही छद्म खेल खेलकर मुसलमान और इस्लाम को डरावना बनाने की कोशिशें की गयीं।

दरअसल ऊपर से नीचे तक "इंटेलिजेंस ब्यूरो" में बैठे संघी यह साजिश करते हैं जिसको एस एम मुशरिफ ने सबके सामने नंगा करके रख दिया है , वह भी तमाम प्रमाणों के साथ।
आज "इंडियन मुजाहिद्दीन" का कुछ अता पता नहीं , कौन थे लोग ? कहाँ था हेडक्वार्टर ? सब बातें हवा हो गयीं , और वह यूँ कि इस संगठन का कोई वजूद कभी रहा ही नहीं , इसके वजूद को पुलिस और जाँच एजेंसी अदालतों में सिद्ध ही नहीं कर सकी। इसके नाम से फँसाए गये मुसलमान एक एक करके बाइज्ज़त बरी होते गये तो आईबी का गढ़ा "इंडियन मुजाहिद्दीन" भी हवा हो गया।

कभी कभी मुझे लगता है कि "आइएस" भी झूठ का पुलिंदा है , ठीक "इंडियन मुजाहिद्दीन" की तरह जिससे इसके नाम के सहारे पूरी दुनिया में मुसलमानों का कत्ले-आम किया जा सके।
केवल दुनिया को डराने के लिए इसके मुखिया को रोज मारा जाता है रोज जिन्दा किया जाता है और यह सारी दुनिया की भाँड मीडिया के माध्यम से किया जाता है , प्रतिदिन उसके खौफनाक किस्सों से देश और दुनिया को डराया जाता है और उसके लिए इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया जाता है। ओसामा बिन लादेन तो सदैव दुनिया के सामने रहा परन्तु "बगदादी" अदृश्य ही रहा जैसे भारत में "इंडियन मुजाहिद्दीन" अदृश्य रहा।
दरअसल यह छद्म युद्ध कहा जाता है और यहूदी अपने जन्म से यह युद्ध लड़ते रहे हैं , सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम हज़रत मुहम्मद के समय से ही , और तब इनकी रणनीति दूसरी थी , ये युद्ध विराम के समझौते करके मुसलमानों को युद्ध करने से रोकते थे और अपनी औरतों और बच्चों को आगे करके समझौता तोड़ कर लोगों को मारते थे।

यही छद्मयुद्ध आज पूरी दुनिया में खेला जा रहा है जो यहूदी सदैव से खेलते आएँ हैं , अब यह सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं कि "संघी" और "यहूदियों" का डीएनए एक है।
सच तो यह है कि देश का जो मुसलमान अपने विरुद्ध हो रहे इतने उत्पीड़न पर सड़क पर एक विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकता वह अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डाल कर आतंकवादी क्या बनेगा।
दरअसल आज के मुसलमानों को हक और संघर्ष से अधिक जरूरत "दो वक्त की रोटी" की है , वह झंडा लेकर हक के लिए खड़ा हो जाएगा तो उसके घर में रात की रोटी नहीं बन पाएगी , दो वक्त की रोटी उसके सभी संघर्ष और हक की माँग पर भारी पड़ जाती है , उसे रोज़ कूँआ खोदना होता है रोज़ पानी पीना होता है , वह कूँआ खोदना छोड़कर आंदोलन करेगा तो पानी कहाँ से मिलेगा ? वह पंचर नहीं बनाएगा , कपड़े नहीं सिलेगा , मोटर मशीन नहीं बनाएगा तो रात में घर की रोटी कैसे बनेगी ?  वह इस कारण आंदोलन नहीं करता तो आतंकवादी घटनाओं में शामिल होने की बात तो बहुत दूर की बात है।

दरअसल , आंदोलन भरे पेट के लोग करते हैं जिनको घर की रोटी की चिंता नहीं होती , 50 साल पहले दलित भी आंदोलन नहीं करते थे , क्युँकि वह भी तब आज के मुसलमान जैसे ही थे , आरक्षण और तमाम योजनाओं ने उनको समृद्ध किया उनको नौकरी मिली और उन्हीं नौकरी वालों से हर दफ्तर में जा जा कर कांशीराम ने दलित आंदोलन को जन्म दिया। दलित आंदोलन कोई भूखे पेट से नहीं जन्मा।
मुसलमानों के संदर्भ में ऐसे आरक्षण और लाभ संविधान में या तो प्रतिबंधित किया या तुस्टीकरण की गाली बना कर सभी को डराया गया कि वह मुसलमान के साथ खड़े होने की हिम्मत ना कर सकें। राहुल हों अखिलेश हों या मायावती , सब इसी कारण डरते हैं।
राजनाथ सिंह जी पूरा सच बोलिए , आप गृहमंत्री हैं आपको तो सब सच पता ही है ?
इस छद्म युद्ध में मारे जाना ही फिलहाल देश के मुसलमानों की किस्मत है। आज कहीं कल कहीं परसों कहीं।
बेसहारा
एक लेखक के दुवरा लिखा गया पोस्ट 
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रविवार, 19 मार्च 2017

यूपी CM योगी आदित्यनाथ के गहरे राज जानिए Know the deeper state of UP Yogi Adityanath

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up के नये cm योगी जी बन गये है जाहिर है इनके बारे में सब जानना चाहते है | योगी आदित्य नाथ जी का जीवन परिचय और उनके गहरे राज जो अब तक कोई नही जनता था वो आज हम आपको बताने जा रहे है | कट्टर हिंदूवादी और नाथ सम्प्रदाय के प्रमुख भाजपा से पांच बार सांसद रहे योगी से महंथ बने आदित्यनाथ को अंततः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए विधायक दल का नेता चुन लिया गया।
यूपी CM योगी आदित्यनाथ के गहरे राज जानिए Know the deeper state of UP Yogi Adityanath

जन्म -
योगीजी का जन्म देवाधिदेव भगवान् महादेव की उपत्यका में स्थित देव-भूमि उत्तराखण्ड में 5 जून सन् 1972 को हुआ। शिव अंश की उपस्थिति ने छात्ररूपी योगी जी को शिक्षा के साथ-साथ सनातन हिन्दू धर्म की विकृतियों एवं उस पर हो रहे प्रहार से व्यथित कर दिया। प्रारब्ध की प्राप्ति से प्रेरित होकर आपने 22 वर्ष की अवस्था में सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण कर लिया। आपने विज्ञान वर्ग से स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की तथा छात्र जीवन में विभिन्न राष्ट्रवादी आन्दोलनों से जुड़े रहे।
 राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे नाथ सम्प्रदाय के महंथ अबैद्य नाथ ने योगी को न सिर्फ दीक्षा देकर गोरखनाथ मंदिर का उत्तराधिकारी बनाया बल्कि अपने ही नेतृत्व में देश की सबसे बड़ी पंचायत में वर्ष 1998 में सांसद बनवाने का काम किया। वर्ष 2007 के गोरखपुर में हुए दंगों में योगी का नाम भी आया और उन्हें मुलायम सरकार में गिरफ्तार भी किया गया।

कौन हैं योगी आदित्यनाथ जी -

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की गोरखपुर से सांसद है.. लोकसभा चुनाव में उन्होंने लगातार सातवें बार जीत दर्ज की... योगी आदित्यनाथ बीएससी पास हैं | 26साल की उम्र से ही सांसद हैं सातवें बार संसद पहुंचे हैं,लेकिन उनकी इस चमत्कारी जीत के पीछे उनका कट्टर हिंदुत्व का एजेंडा हैं ऐसा एजेंडा जिससे उनकी ताकत लगातार बढ़ती गई. इतनी कि आखिरकार गोरखपुर में जो योगी कहे वही नियम है, वही कानून है.तभी तो उनके समर्थक नारा भी लगाते हैं,'गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगीकहना होगा. |

राजनीतिक पारी-

1998 में शुरू हुई राजनीतिक पारी योगी आदित्यनाथ का असली नाम है अजय सिंह. वह मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं. गढ़वाल यूनिवर्सिटी से उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की. गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें दीक्षा देकर योगी बनाया था अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. यहीं से योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी  शुरू हुई है.1998 में गोरखपुर से12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ संसद पहुंचे तो वह सबसे कमउम्र के सांसद थे हिंदू युवा वाहिनी का गठन राजनीति के मैदान में आते ही योगी आदित्यनाथ ने सियासत की दूसरी डगर भी पकड़ ली उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया और धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ दी कट्टर हिंदुत्व की राह पर चलते हुए उन्होंने कई बार विवादित बयान दिए.

विवाद -

योगी विवादों में बने रहे, लेकिन उनकी ताकत लगातार बढ़ती गई. 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाया गया.गिरफ्तारी हुई और इस पर कोहराम भी मचा.योगी के खिलाफ कई अपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए. अब तक योगी आदित्यनाथ की हैसियत ऐसी बन गई कि जहां वो खड़े होते, वहाँ सभा शुरू हो जाती.वो जो बोल देते, उनके समर्थकों के लिए वो कानून हो जाता. यही नहीं,होली और दीपावली जैसे त्योहार कब नाया जाए, इसके लिए भी योगी आदित्यनाथ  गोरखनाथ मंदिर से फरमान जारी करते हैं इसलिए गोरखपुर में हिन्दूओं के त्योहार एक दिन बाद मनाए जाते हैं.

दबंग छवि -

उर्दू बन गई हिंदी, मियां बदलकर मायायोगी आदित्यनाथ के तौर-तरीकों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने गोरखपुर के कई ऐतिहासिक मुहल्लों के नाम बदलवा दिए. इसके तहत उर्दू बाजार हिंदी बाजार बन गया.अलीनगर आर्यनगर हो गया. मियां बाजार माया बाजार हो गया. इतना ही नहीं, योगी आदित्यनाथ तो आजमगढ़ का नाम भी बदलवाना चाहते हैं.इसके पीछे आदित्यनाथ का तर्क है कि देश की पहचान हिंदी से है उर्दू से नहीं, आर्य से है अली से नहीं. गोरखपुर और आसपास के इलाके में योगी आदित्यनाथ और उनकी हिंदू युवा वाहिनी की तूती बोलती है. बीजेपी में भी उनकी जबरदस्त धाक है.इसका प्रमाण यह है कि पिछले लोकसभा चुनावों में प्रचार के लिए योगी आदित्यनाथ को बीजेपी ने हेलीकॉप्टर मुहैया करवाया था

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