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मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -What are the aliens come from, said aliens

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एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -aliens kya hote hai-aliean kha se aate hai-What are the aliens come from, said aliensक्या होते है एलियंस? इस ब्रह्माण्ड  में जो दुसरे गृह है उन गृह के प्राणियों को एलियंस कहा ज़ाता है. हालांकि ये अपने आप में खुद एक सवाल है कि क्या दुसरे गृह पर भी प्राणी होते है. लेकिन इसको लेकर भिन्न भिन्न लोगों के  भिन्न भिन्न  मत है. कुछ कहते है कि एलियंस होते है जबकि कुछ कहते है कि एलियंस नहीं होते है. कितना रोचक है ये विषय. एलियंस क़ा अध्ययन तो क्या इस अध्ययन से जुड़ना नहीं चाहेंगे? तो चलिए आइये  देखते हैं एलिएंस कि रिसर्च से जुडी कुछ खबरों को- 

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अभी हाल ही में अमेरिकी अनुसंधान संस्थान के एक  वैज्ञानिक ने ये दावा किया है कि एलियंस होते हैं. असल में उन्हें एलियंस से सम्बंधित रिसर्च में कहा है कि एलियंस एक तरह क़ा बक्टीरिया क़ा जीवाश्म है जो कई वर्षो पूर्व अन्तरिक्ष से प्रथ्वी पर गिरे उल्कापिंडो  में पाया गया था. 

नासा के मार्शल स्पेस फ्लाईट  सेंटर के वैज्ञानिक डॉक्टर "रिचर्ड हूवर" ने इस दुनिया में पाए गये उल्कापिंडो पर एक शोध कार्य किया, जिसमें उन्होंने पाया कि एलियंस होते हैं. उन्होंने ये दावा "साइबेरिया और आलास्का" में पाए गये उल्कापिंडो के असाधारण नमूनों पर शोध कार्य करने के बाद किये जिससे कहीं ना कहीं ये सिद्ध होता है कि प्रथ्वी से परे भी जीवन है. 

एलियंस के अस्तित्व की धारणा को और मजबूत बनाने के लिए अब वैज्ञानिको ने इस खोज को और सरल बनाने के लिए आम आदमी को इससे जोड़ने की पहल की है. जिसमें आम आदमी एलियंस के बारे में अपने विचार, अपनी जिन्दगी में घटी कुछ अजीब और असामान्य घटनाओं के बारे इस शोध से जुड़े वैज्ञानिको को बाते सकते है.  इसलिए एलियंस कि खोज के लिए वैज्ञानिको ने एक वेबसाइट को लॉंच किया है जिसका एड्रेस है www.setilive.org अमेरिका के शहर लॉस एंजेल्स में TED (टेक्नोलोजी, इंटरटेनमेंट और डिज़ाइन) कॉंफ़्रेंस के दौरान इस वेबसाइट लॉंच किया गया है. वैज्ञानिको SETI वर्ड क़ा प्रयोग किया है जिसकी मतलब है "सर्च फॉर एक्सट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस". ये वेबसाइट सेटी एलेन टेलिस्कोप के द्वारा संचारित रेडियो तरंगों को सीधे प्रसारित करेगी और जो भी लोग .इसमें भाग लेंगे उनको कहा जाएगा कि कहा जाएगा कि अगर उन्हें कोई भी असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो वे फ़ौरन इसकी जानकारी वैज्ञानिको को दे. इस बारे में वैज्ञानिको क़ा ये मानना है कि कभी कभी इंसानों का दिमाग़ उन चीज़ो को भी देख सकता है जो कि शायद कोई स्वचालित मशीन भी नहीं देख पाए. 

जिलियन टार्टर इस योजना की प्रमुख कार्यकर्ता हैं डॉक्टर जिलियन टार्टर को 2009 में TED एवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. डॉक्टर टार्टर के बारे में बताया ज़ाता है कि उन्होने अपना पूरा करियर एलियन की खोज में लगा दिया है और उनका कहना है कि इस वेबसाइट के लॉच होने से एलियन की खोज में जुटे वैज्ञानिकों और दूसरे विशेषज्ञों को एक साथ आने का मौक़ा मिलेगा और साथ ही साथ आम आदमी के विचारों को जाने क़ा भी मौका मिलेगा जिसे एलियंस रिसर्च को और भी सरल बनाया जा सकेगा. क्योंकि उनका ये मानना है कि जायदा से जायदा वैग्यांकियो और व्यक्तियों के इस रीसर्च से जुड़ने पर उन तरंगों का अध्ययन  करना आसान हो जाएगा जिन पर अब तक ध्यान नहीं गया. इस अध्ययन से कुछ ना कुछ तो एलियंस के बारे में जरूर नया मिलेगा. अब आगे देखते है कि कहा तक जाती है एलियनस के बारे में ये खोज. 
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बुधवार, 14 मार्च 2018

इच्छाधारी नागिन या नागकन्या है ये औरत -Wishful serpent or snake today is this lady

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इच्छाधारी नागिन या नागकन्या है ये औरत -.ichadhari nagin ya nagknya hai ye-Wishful serpent or snake today is this lady

आज तक आपने इच्छाधारी नागिन या नागकन्या का रूप फिल्मों में ही देखा होगा, परंतु आज हम आपको ऐसी इच्छाधारी नागिन से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो अपने नाग पति को पाने के लिए इस मृत्युलोक में साधना कर रही है।

इच्छाधारी नागिन या नागकन्या है ये औरत -Wishful serpent or snake today is this lady


स्वयं नागकन्या होने का दावा करने वाली माया का कहना है कि वह हर 24 घंटे में हवन के दौरान नागिन का रूप धारण कर अपनी तीन बहनों से मिलने जाती है जो उसे अपने नाग पति को पाने के लिए किस तरह साधना की जाए, यह निर्देश देती हैं। माया के मुताबिक ये तीनों बहनें भी इच्छाधारी नागिनें हैं।



खुद को बचपन से शादीशुदा समझने वाली माया नाग के नाम का सिंदूर भरती है और उसे पूरा विश्वास है कि जल्द ही उसके पति के साथ उसका मिलन होगा। माया कहती है कि फिलहाल उसका पति इस मृत्युलोक में उसके परिवार के मोह में फँसा हुआ है और उससे सारी शक्तियाँ छीनी जा चुकी हैं।

अपने पूर्व जन्म की कहानी सुनाते हुए वह कहती है कि द्वापर युग के दौरान वह एक खाई में गिर गई थी तब किसी बाबा ने गोपाल नामक नाग को उसकी मदद के ‍लिए भेजा था, तभी से उन दोनों में प्रेम हो गया था। परंतु शादी न हो पाने की वजह से उसने आत्महत्या कर ली थी। ...और तब से आज तक अपने साथी को पाने के लिए भटक रही है।

नागलोक और मृत्युलोक की अजीबो-गरीब कहानियाँ सुनाने वाली यह इच्छाधारी नागिन माया मध्यप्रदेश के बड़नगर स्थित एक आश्रम में निवास करती है। इन कहानियों से प्रभावित वहाँ के निवासी इनकी महामाया माँ भगवती के रूप में आराधना करते हैं।
इच्छाधारी नागिन या नागकन्या है ये औरत -Wishful serpent or snake today is this lady

लोगों द्वारा माया की पूजा करना आस्था का प्रतीक है या उसका इच्छाधारी नागिन होने के अंधविश्वास का प्रभाव है? आज के इस वैज्ञानिक युग में यह घटना कितनी प्रासंगिक है,

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बुधवार, 31 जनवरी 2018

ताजमहल के गहरे राज ,जिन्हें कोई नही जनता -Deep secrets of the Taj Mahal, which no public

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ताजमहल के गहरे राज ,जिन्हें कोई नही जनता -Deep secrets of the Taj Mahal, which no public
ताजमहल सिर्फ़ प्यार की निशानी ही नहीं हैं, बल्कि इसका नाम दुनिया के सात अजूबों में भी शुमार किया जाता है. इस खूबसूरत और प्यार की कहानी बयां करने वाली इमारत को किसने किस लिए बनवाया हम सब जानते हैं पर इसके बावजूद बहुत सी ऐसी बातें भी है जिन्हें हम नहीं जानते.
हम आज आपको ताजमहल के उन्हीं रहस्यों के बारे में बता रहे हैं, जो इस खूबसूरत इमारत की चकाचौंध में नहीं दिखाई पड़ते.
ताजमहल के गहरे राज ,जिन्हें कोई नही जनता /Deep secrets of the Taj Mahal, which no public ताजमहल के गहरे राज ,जिन्हें कोई नही जनता /Deep secrets of the Taj Mahal, which no public,ताजमहल के राज ,ताजमहल का रहस्य ,ताजमहल की हकीकत ,मुमताज़ के मकबरे की छत पर एक छेद,ताजमहल के चारों ओर बांस का घेरा,शाहजहां ने जब पहली बार ताजमहल को देखा,ताजमहल जब बेच दिया गया, पिशाचों की कलाकृति,ताजमहल पर खर्च,ताजमहल का गायब होना,काले ताजमहल का सपना,ताजमहल के साथ पहली सेल्फी,ताजमहल का रंग बदलता है taj mahal story  taj mahal information  taj mahal facts  taj mahal india  why was the taj mahal built  taj mahal wikipedia  taj mahal inside 10 points on taj mahal in hindi  history of black taj mahal in hindi  essay on taj mahal in hindi language  taj mahal kab bana  taj mahal history in hindi video  essay on taj mahal in marathi language  taj mahal kisne banaya hai  taj mahal kab banaya gaya taj mahal the true story

1. मुमताज़ के मकबरे की छत पर एक छेद

मकबरे की छत की छेद से टपकते पानी की बूंद के पीछे कई कहानियां प्रचलित है, जिसमें से एक यह है कि जब शाहजहां ने सभी मज़दूरों के हाथ काट दिए जाने की घोषणा की ताकि वे कोई और ऐसी खूबसूरत इमारत न बना सके तो मजदूरों ने ताजमहल को पूरा के बावजूद इसमें एक ऐसी कमी छोड़ दी जिससे शाहजहां का खूबसूरत सपना पूरा न हो सके.
2. ताजमहल के चारों ओर बांस का घेरा
द्वितीय विश्व युद्ध, 1971 भारत-पाक युद्ध और 9/11 के बाद इस भव्य इमारत की सुरक्षा के लिए ASI ने ताजमहल के चारों और बांस का सुरक्षा घेरा बना कर उसे हरे रंग की चादर से ढक दिया था, जिससे ताजमहल दुश्मनों को नज़र न आये और इसे किसी प्रकार की क्षति से बचाया जा सके.
3. शाहजहां ने जब पहली बार ताजमहल को देखा
जब शाहजहां ने पहली बार ताजमहल का दीदार किया तो उसने कहा “ये सिर्फ़ प्यार की कहानी बयां नहीं करेगा बल्कि उन सबको दोष मुक्त भी करेगा जो इस पाक जमीं पर अपने क़दम रखेंगे और चांद-सितारे इसके गवाही देंगे”
4. मजदूरों के हाथ काट दिए गये
ताजमहल बनने के बाद की एक अफ़वाह यह थी कि शाहजहां ने मजदूरों के हाथ कटवा लिए थे, पर अगर इतिहास पर नज़र डाली जाये तो ताजमहल के बाद भी कई इमारतों को बनवाने में उन लोगों का योगदान रहा था. उस्ताद अहमद लाहौरी उस दल का हिस्सा रहे थे जिसने ताजमहल को बनाया था और लाल किले का निर्माण का कार्य भी उन्हीं की देख-रेख में शुरू हुआ था.

5. ताजमहल के मीनार

अगर ताजमहल के मीनारों पर ध्यान दिया जाये तो हम पाएंगे कि चारो मीनार एक दूसरे की ओर झुके हुए नज़र आते है, जिन्हें बिजली और भूकम्प के दौरान मुख्य गुम्बद पर न गिरने के लिए इस एंगल से बनाया गया है.
6. ताजमहल जब बेच दिया गया
बिहार के सुप्रसिद्ध ठग नटवरलाल के बारे में यह कहानी प्रचलित है कि एक बार उसने ताजमहल को मंदिर बताकर लोगों को बेच दिया था. नटवर लाल के पैतृक गांव के लोग उसके इसी कारनामे के लिए गांव में उसका मंदिर बनवाने की मांग उठाने लगे हैं.
7. यमुना न होती तो ताजमहल न होता
ताजमहल का आधार एक ऐसी लकड़ी पर बना हुआ है जिसे मजबूत बनाये रखने के लिए नमीं की जरूरत होती है, जिसे नज़दीक ही बहने वाली यमुना बनाए रखती है.
8. पिशाचों की कलाकृति
ताजमहल की कलाकृति में 28 तरह के कीमती पत्थरों को लगाया गया था जो चीन, तिब्बत से लेकर श्रीलंका से लाये गये थे. ब्रिटिश काल के समय इन बेश-कीमती पत्थरों को अंग्रेजों ने निकाल लिया था. जिसके बारे में यह कहा जाता था कि ये बेश-कीमती पत्थर किसी की भी आंखे चौंधियाने की काबिलियत रखते थे.
9. क़ुतुब मीनार से भी लम्बा
कुतुब मीनार को देश की सबसे ऊंची इमारत के तौर पर जाना जाता है पर इसकी ऊंचाई भी ताजमहल के सामने छोटी पड़ जाती है. सरकारी आंकड़ो के अनुसार ताजमहल, क़ुतुब मीनार से 5 फुट ज़्यादा लम्बा है.
10. ताजमहल पर खर्च
शाहजहां ने जब ताजमहल बनवाया था तब उस पर लगभग 32 मिलियन खर्च हुए थे. जिसकी कीमत आज 1,062,834,098 USD हैं.
11. सारे फव्वारे एक ही समय पर काम करते है
ताजमहल में लगा कोई भी फव्वारा किसी पाइप से नहीं जुड़ा हुआ है. बल्कि हर फव्वारे के नीचे एक तांबे का टैंक बना हुआ है, जो एक ही समय पर भरता है और दबाब बनने पर एक साथ ही काम करता हैं.
12. ताजमहल का गायब होना
8 नवम्बर 2000 का दिन ताजमहल को देखने वालो के लिए बड़ा ही अचंभित करने वाला था PC Sorkar Jr.ने ऑप्टिकल साइंस के जरिये ताजमहल को गायब करने का भ्रम पैदा कर दिया था.
13. 12000 सैलानी
ताजमहल एक दिन में वर्ल्ड में सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली भव्य इमारतों में सबसे ऊपर हैं. इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से 12000 सैलानी हर रोज आगरा आते हैं.
14. काले ताजमहल का सपना
शाहजहां की एक ख्वाहिश यह भी थी कि जैसे उसने अपनी बीबी के लिए सफ़ेद ताजमहल बनाया था. वैसा ही एक काला ताजमहल खुद के लिए बनवा सके. पर शाहजहां को जब उसके बेटे औरंगजेब ने कैद कर लिया तो उसका ये सपना बस सपना ही रह गया.

15. ताजमहल के साथ पहली सेल्फी

आज हम सब सेल्फी के दीवाने है पर George Harrison नाम के इस व्यक्ति ने Fish Eye Lense की मदद से उस समय ही ले ली थी जब सेल्फी का दौर ही नहीं था. मतलब ताजमहल के साथ पहली सेल्फी George Harrison ने ली थी.
16. ताजमहल का रंग बदलता है
यह बात जरुर हैरान करने वाली है पर ताजमहल का रंग भी बदलता है, दिन के अलग अलग पहर के हिसाब से ताज भी अपना रंग बदलता रहता है. सुबह देखने पर ताज गुलाबी दिखता है, शाम को दुधिया सफ़ेद और चांदनी रात में सुनहरा दिखता है.
17. अमेरिका में ताजमहल
ताजमहल के दीवानों का जब भी जिक्र होगा सबसे पहला नाम ग्रैमी अवार्ड विनर, सिंगर Henry Saint Clair Fredericks का होगा. उन्हें ताज से इतनी मोहब्बत है की उन्होंने अपना स्टेज नेम ही ताजमहल रख लिया है.
18. आपके दिल में ताज
ताजमहल बनाने वालो ने इसके हर पहलू पर बड़ा ध्यान दिया है, यहा के लोग कहते हैं कि जब आप यहां से जाते हैं तो ताजमहल को अपने दिल में लेकर जाते हैं. एक सीमा तक जैसे-जैसे आप ताज से दूर जाते हैं ताजमहल आपको और बड़ा भव्य लगने लगता है और आपकी यादों से कभी जुदा नहीं होता.
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मंगलवार, 16 जनवरी 2018

ताजमहल का रहस्यमय दरवाजा गुप्त राज --Mysterious door of the Taj Mahal

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आगरा. ताजनगरी में यमुना किनारे से ताजमहल में प्रवेश करने के लिए खास दरवाजा था, जो आज भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है। बताया जाता है कि इसी रास्‍ते से शाहजहां के शव को ताजमहल में दफनाने के लिए लाया गया था। ब्रिटिश शासनकाल में इस दरवाजे को ईंटों से बंद करवा दिया गया। इसके बाद से यह दरवाजा आज तक रहस्‍य बना हुआ है। केवल मुगल शासक के लिए बने इस गुप्‍त दरवाजे को इसके बाद कभी खोला नहीं गया। वहीं, इसकी वजह से ही आगरा के स्‍थानीय अदालत में इसे 'तेजोमहल' मंदिर करार देने की याचिका पहुंची है-
ताजमहल का रहस्यमय दरवाजा गुप्त राज --Mysterious door of the Taj Mahal ताजमहल का रहस्यमय दरवाजा गुप्त राज --Mysterious door of the Taj Mahal-ताजमहल का इतिहास-ताजमहल का सच-ताजमहल एक शिव मंदिर-चुटकुले-tajmahal-रेड फोर्ट-ताजा खबर आज की-lotus temple-शिव मंदिर -ताजमहल का फोटो ताज महल क्या है ताजमहल एक शिव मंदिर ताजमहल का सच ताजमहल किसने बनवाया ताजमहल पर निबंध ताजमहल दफ़नाए गए ताज महल का रहस्य 1  2 3 4 5 6 7 8 9 10 अगला ताजमहल का रहस्यमय दरवाजा the secret door of tajmahal,इसी खास दरवाजे से अंदर लाया गया था शाहजहां का शव,ताजमहल के निर्माण से 89 साल पहले की है लकड़ी,आगरा. ताजनगरी में यमुना किनारे से ताजमहल में प्रवेश करने के लिए खास दरवाजा था, जो आज भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है। बताया जाता है कि इसी रास्‍ते से शाहजहां के शव को ताजमहल में दफनाने के लिए लाया गया था। ब्रिटिश शासनकाल में इस दरवाजे को ईंटों से बंद करवा दिया गया।

इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं कि ताजमहल के निर्माण के दौरान ही यमुना किनारे स्थित दरवाजे बनवाए गए थे, ये ताजमहल के अंदर भूमिगत कमरों में खुलते थे। यहां से शाहजहां ताजमहल में प्रवेश करते थें। राजकिशोर ने अपनी पुस्‍तक 'तवारीख-ए-आगरा' में लिखा है कि सितंबर 1657 में दिल्‍ली में शाहजहां को मूत्र रोग हो गया था। जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से उनका बेटा दारा शिकोह उन्हें आगरा लेकर आ गया। यहां उनकी मौत की अफवाह फैल गई। तब उनके जीवित रहते ही बेटों में सिंहासन के लिए युद्ध छिड़ गया था-

इसी खास दरवाजे से अंदर लाया गया था शाहजहां का शव-

राजकिशोर राजे ने बताया कि युद्ध में औरंगजेब जीत गया और शाहजहां को बंदी बनाकर आगरा किले में रखा। करीब आठ साल की कैद के बाद जनवरी 1666 में शाहजहां फिर बीमार पड़ गए और 74 साल की आयु में लाल किले के मुसम्‍मन बुर्ज में उनका निधन हो गया। तब उनके शव को यमुना के रास्‍ते नाव से लाकर ताजमहल के खास दरवाजे से इतिहासकारों के लिए रहस्य है यह दरवाजा-

अब यह दरवाजा इतिहासकारों के लिए रहस्य बन गया है, जिसे जानने के लिए सभी इच्छुक हैं। इतिहासकार राजकिशोर राजे ने दिसंबर 2008 में सूचना के अधिकार के तहत इन दरवाजों के बारे में जानकारी मांगी थी। इस पर एएसआई ने जवाब में कहा था कि चमेली फर्श के नीचे बने हुए भूमिगत कमरों में जाने के लिए बने दरवाजे यमुना की ओर खुलते थे। इन दरवाजों को ब्रिटिश शासनकाल में बंद करवा दिया गया था। इनको ईंटों की चुनाई करके बंद किया गया था। इनके निशान आज भी हैं, लेकिन यहां लगे दरवाजे का रिकॉर्ड नहीं है-

ताजमहल के निर्माण से 89 साल पहले की है लकड़ी-

लखनऊ के वकील हरीशंकर जैन सहित छह वकीलों ने आगरा के सिविल अदालत में ताज को राजा परमार्दिदेव द्वारा बनाया गया शिवालय बताते हुए याचिका दायर की है। उनका कहना है कि सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्‍यूयॉर्क ब्रुकलिन कॉलेज के प्रोफेसर ईवान टी. विलियम्‍स ने भी ताजमहल के मुगल काल के होने से पहले की बात कही थी। ब्रिटिश शासनकाल में जब वह ताजमहल आए थे, उस समय वे यमुना किनारे के दरवाजे की लकड़ियों के कुछ अंश ले गए थे। उन्‍होंने कार्बन डेटिंग करवाई थी और लकड़ी की उम्र साल 1359 बताई। उन्होंने आशंका व्यक्त की थी कि यह लकड़ी ताजमहल के निर्माण से 89 साल पहले की है। गया था। इसके बाद उन्‍हें मुमताज के बगल में दफनाया दिया गया-
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शनिवार, 13 जनवरी 2018

इन तरीको से करे आकर्षित लडकियों को ,These ways to attract girls

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हर लड़की आपके पीछे आएगी5 बातें और हर लड़की आपके पीछे आएगी, ५ क्वालिटीज है जिससे कोई भी लड़की को पटा सकते है, कोई भी लड़की आप का पीछा करेगी, आप किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर सकते है | मज़े की बात ये है की उसको पता भी नहीं चलेगा | ये क्वालिटीज आदि काल से मानव के साथ है और ये किसी को भी प्रभावित करती है | बस इन को अपने जीवन मैं उतार ले और इनका असर देखे-लड़की को पटाये -बात करे -सेट करे -फिर सेक्स के लिए तैयार करे -लड़की काम -वासना जगाये -


इन तरीको से करे आकर्षित लडकियों को ,These ways to attract girls इन तरीको से करे आकर्षित लडकियों को ,These ways to attract girls,लड़की केसे पटाए ,दूसरी लड़कियों को आपका पसंद करना,अगर आपके पीछे लड़कियाँ नहीं है तो आप जाये और लड़कियों से बात्तचित करें जब भी मौका मिले कैसे किसी लड़की को इम्प्रेस करें लड़की-को-कैसे-बनाये-अपनी-गर्लफ्रेंड लड़की गर्लफ्रेंड को इमोशनल कैसे करे करने के तरीके लड़कियों को आकर्षित करने के तरीके बात करने का ढंग आकर्षण मंत्र आकर्षित करने के टोटके लड़कियों को कैसे पटाये बात करने की कला प्यार पाने के तरीके ladki ko garam karne ka tarika ladki ko patane ke tarike ladki ko patane ka mantra ladki ko garam karne ka tarika ladki se dosti kaise kare ladki ko propose kaise kare kala jadu kaise kare ladki patane ke 151 tarike बातचीत करने के तरीके

५ क्वालिटीज है जिससे कोई भी लड़की को पटा सकते है, कोई भी लड़की आप का पीछा करेगी, आप किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर सकते है | मज़े की बात ये है की उसको पता भी नहीं चलेगा | ये क्वालिटीज आदि काल से मानव के साथ है और ये किसी को भी प्रभावित करती है | बस इन को अपने जीवन मैं उतार ले और इनका असर देखे |
किसी के पीछे आपको भागने की ज़रुरत नहीं है, इनसे लड़कियाँ आपके पीछे आएगी | ये क्वालिटीज विशेष है और भी लड़की पर इस्तेमाल किया जा सकता है |
आइये क्रम-विकास देखते है, हर जानवर अपने वंश या जीन्स को बचाना और बढ़ाना चाहता है | अपनी रक्षा करना है और सम्भोग करता है और अपने जाति /प्रजाति को आगे बढ़ता है | जो जानवर ऐसा नहीं कर पाते वो खत्म हो जाते है | उनकी प्रजाति विलुप्त हो जाती है | हम इंसान भी कुछ इसी तरह से रहते है, हम भी अपनी रक्षा और सम्भोग से अपनी जाति को आगे बढ़ाते है |
क्रम-विकास में पुरुष आकर्षित होते है नारी की प्रजनन शक्ति पर जैसे की उसका स्वस्थ होना, सुन्दर होना क्योकि ये लड़की की प्रजनन शक्ति को दर्शाती है | नारी आकर्षित होती है, आपकी शक्ति, स्टेटस, लीडर या कबीले का सरदार होने पर, ताकी वो सबसे अच्छे पुरुष से सम्बन्ध बना कर अपनी संतान को उसका अंश दे सके और उसकी संतान में भी वो गुण आये | तो आज कल के संसार में ये गुण एक नारी कैसे देखती है |
दूसरी लड़कियों को आपका पसंद करना
आपको कई लड़कियाँ पसंद करती है , बस इतना ही | अगर कोई लड़की देख ले की आप के पीछे दूसरी लड़कियाँ है तो वो अपने आप ही आप पर आकर्षित हो जाती है | अगर आप किसी को भी पटाना/ इम्प्रेस करना चाहते हो सबसे पहले ये क्वालिटी दिखाए | अगर आपके पीछे लड़कियाँ नहीं है तो आप जाये और लड़कियों से बात्तचित करें जब भी मौका मिले | अगर से उसके सामने हो तो अति उत्तम |  आप जिसे चाहते है उसे अपनी पुनरी गिर्ल्फ्रिएंड्स के बारे में बता सकते है, या बोल सकते है की आप किसी से साथ बहार जा रहे है | फेसबुक पर दूसरी लड़कियों के साथ अपनी फोटो दिखाए |
जब उसे लगता है की दूसरे लोग उसे पसंद कर रहे है तो उसमे कुछ तो बात होगी, क्रम-विकास को देखे तो स्त्रियां के लिए ये एक प्रमाण है की वो पुरुष सबसे अच्छा है |
आप लीडर है
आप कबीले के सरदार है, नेता है और आपका एक प्रभावी व्यक्तिव है | आप फुटबॉल टीम के कप्तान है, आप ग्रुप के लीडर है, आपको अपने विषय में सबको पढ़ा सकते है |जब आप किसी हुनर के मालिक होते है तो ये दर्शना बहुत ही सरल हो जाता है , इसी लिए किसी विशेषता या हुनर का होना महत्त्वपूर्ण हो जाता है | जब आप किसी का भी नेतृत्व करते है लड़कियाँ आपको नोटिस करती है | ये उनको आकर्षित करता है | आपको ये हुनर हर बार दिखाना पड़ता है |
जब आप लोगो को संचालित करते हो, उन्हें राह दिखते हो, तो स्त्रियों को लगता है की ये पुरुष कबीले का सरदार है, ये बुद्धिमान है, ये ख़तरा उठा सकता है और उनकी रक्षा भी कर सकता है | इन गुणों को दिखाने की जरूरत नहीं होती है, पर जब आप एक लीडर बन जाते है तो आप स्वत: ही इन गुणों के मालिक बन जाते है और लड़की आपकी तरफ आकर्षित हो जाती है|
भावनाओ का प्रदर्शन
ख़ुशी सबको आपके पास आकर्षित करती है, हँसना शीघ्र प्रभावी  होता है | लड़कियाँ इमोशनल होती है और किसी भी पॉजिटिव या सकरात्मक भावना जैसे की ख़ुशी की तरफ जल्दी आकर्षित होती है, इसीलिए कहते है हँसी तो फंसी | तो जब आप लड़कियों के साथ हो प्रसन्न रहे |
आप जब अपने परिवार को महत्व देते है, जब आप देस्तो की मदद करते है तो उसे लगता है की आप एक पारिवारिक आदमी है जो उनको समझ सकता है, लड़कियों को सिर्फ हँसना या रोना अच्छा नहीं लगता है पर ये छोटी बातें भी इसी तरफ इशारा करती है की आप भावनात्मक लड़के है |
रक्षक और धयान रखना
जब कोई मुसीबत में है तो आप उसकी कितनी मदद करते है, आप किसी की रक्षा कर पाते है या नहीं | उसको लगना चाहिए की आप उसकी रक्षा करने में सक्षम है, आप उसे छोड़ कर नहीं जायेगे | छोटी बाते जैसे की उसके लिए कुर्सी खीचना, उसको पहले आमंत्रित करना, उसको सड़क पार करना दिखाता है की आप केयर करते है, आप दयालु है और आप अच्छे व्यक्तित्व के स्वामी है |  अपने माता पिता को पहले रखना, उनका आदर करना, अपनी फैमिली के साथ वक्त बिताना ये सब इशारा करते है की वो आपके साथ सुरक्षित है और आप उसका धयान रखेंगे |
अपने दोस्तों के लिए लड़ाई करना, भाई या परिवार के कियो कुछ करना, लड़की को बुरे लड़को से बचाना और उनसे लिए ढाल बन जाना इन गुणों को उजागर करता है |
रिस्क लेना
आप चाहे अमीर न हो, आप के पास पैसा न हो, पर वो ये देखना चाहती है की आप कितने महत्वकांशी है. उसको अपना प्लान बताये और बताये की आप किस उंचाई पर जाना चाहते है | आप रिस्क लेने, कुछ नया करने से नहीं डरते और आप जो चाहते है उसको हासिल करने का प्रयत्न करते है |  अपने लक्ष्य को पाने के बातें करना, उसके लिए प्रयास करना लड़कियों को बहुत ही जयादा प्रभावित करता है और उन्हें आपकी तरफ आकर्षित करता है |
इसमें सबसे जयादा महत्वपूर्ण है आपका किसी और से चयनित होना, लड़कियों का आपसे बात करना वो भी पब्लिक के सामने | अगर आप ये सारी बातें थोड़ी थोड़ी देर के लिए भी दिखा देते है तो वो उनके दिमाग में घर कर जाती है | इन क्वालिटीज को अपने अन्दर लए और उसके सामने दिखाए, उस ग्रुप में इनकी बातें करें जहाँ पर वो हो |
जब आप इन क्वालिटीज, विशिष्टयों को दिखाते है, तो सबसे अच्छी लड़की भी आप की तरफ आकर्षित हो जाती है |
कैसे शुरआत करें
कुछ ऐसा जो आप दिन रात कर सकते है, आपका बेस्ट टैलेंट क्या है, जो आपको बोर नहीं 
करता, जो आपका पैशन है, जो आपको सोने नहीं देता ऐसा कोई हुनर, कोई विषय चुने और अपनी प्रवीणता हासिल करें | इस गुण को सबको दिखाए, और ये ही सबको आगे ले जायेगा |
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सोमवार, 8 जनवरी 2018

किन्नरो का रहस्य जानना चाहते हो ? Want to know the secret of eunuchs?

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इंसान की पहचान ही उसके वजूद को जीने की वजह देती है. लेकिन जब पहचान, परेशानी और परेशानी दाग बन जाए तो जीना मुहाल हो जाता है. फिर उनकी तो सबसे बड़ी परेशानी यही थी कि उन्हें पूरा समाज ना तो मर्द मानता था और ना ही औरत.किन्नर की शादी ,किन्नर की मौत .या फिर किन्नर की शव यात्रा कैसे निकली जाती है ये सवाल आपकें -और क्या औरत या लड़की भी किन्नर या हिजड़ा होती है -किन्नरो का रहस्य जानना चाहते हो ? Want to know the secret of eunuchs?


किन्नरो का रहस्य जानना चाहते हो ? Want to know the secret of eunuchs?किन्नर का राज ,किन्नर की शादी ,किन्नर की योनी ,किन्नर के बारे में ,किन्‍नरों की जिंदगी रहस्‍यमय होती है और यही समाज के दूसरे लोगों को उनके प्रति उत्‍सुक रखता है. किन्‍नरों हिजडा कैसे बनते है किन्नर कैसे पैदा हो जाते हैं किन्नर की पहचान कैसे करें किन्नर कैसे बनते है किन्नर ka ling हिजड़ा की पहचान किन्नर प्राइवेट पार्ट वीडियो किन्नर की पहचान कैसे हो अंग भाग किन्नर के जननांग ,महिला किन्नर ,स्त्री किन्नर के अंग ,लड़की किन्नर ,

समाज के बनाए दस्तूर में अब तक बस दो जेंडर या यूं कहें कि दो ही दर्जा है. यानी आप या तो मर्द हो सकते हैं या औरत. लेकिन देश की सबड़े बड़ी अदालत ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश को एक तीसरा जेंडर यानी तीसरा दर्जा दे दिया. जी हां, अब देश में मौजूद पचास लाख से भी ज्यादा किन्नरों को तीसरे दर्जे में शामिल कर लिया गया है.
जब अचानक टिक जाती हैं उनपर नजरें
कभी भीड़ में तो कभी घर के आंगन में. कभी सड़क पर तो कभी किसी महफिल में. कभी ढोलक की थाप पर तो कभी तालियों की आवाज पर थिरकते उन चेहरों को आपने कई बार देखा होगा. ये वो हैं जो जब-जब सामने आते हैं नजरें ना चाहते हुए भी उनपर टिक जाती हैं. इनकी पहचान ही कुछ ऐसी बनी हई थी कि हर खासो-आम इनसे बस किसी तरह पीछा छुड़ाना चाहता था. लेकिन जब खुद ये किसी के पीछे पड़ जाएं तो फिर इनसे पीछा छुड़ाना आसान नहीं होता.
दुनिया में और दुनिया के साथ-साथ हिंदुस्तान में भी अब तक र थीं और इन्हीं दो दर्जों यानी मर्द और औरत को तमाम जरूरी पहचान, हक, सुविधाएं, अधिकार हासिल थीं. मगर 15 अप्रैल को देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि उस फैसले के आते ही अचानक अब एक तीसरा जेंडर यानी तीसरे दर्जे ने जन्म ले लिया है.
पिछड़ी जातियों के समान अधिकार
देश की पचास लाख से भी ज्यादा किन्नरों को इजज्त से सिर उठा कर जीने का हक दे दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें थर्ड जेंडर करार देकर वो सारे अधिकार देने को कहा है जो पिछड़ी जातियों को हासिल हैं. इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी, आरक्षण सभी शामिल हैं. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में किन्नरों को बच्चा गोद लेने का अधिकार देने के साथ-साथ उन्हें सेक्स चेंज करवाकर औरत या मर्द बनने का भी अधिकार दे दिया है.
अपने इस हक के लिए किन्नर बिरादरी वर्षों से लड़ाई लड़ रही थी. 1871 से पहले तक भारत में किन्नरों को ट्रांसजेंडर का अधिकार मिला हुआ था. मगर 1871 में अंग्रेजों ने किन्नरों को क्रिमिनल ट्राइब्स यानी जरायमपेशा जनजाति की श्रेणी में डाल दिया था. बाद में आजाद हिंदुस्तान का जब नया संविधान बना तो 1951 में किन्नरों क्रिमिनल ट्राइब्स से निकाल दिया गया. मगर उन्हें उनका हक तब भी नहीं मिला था.
हालांकि तब से अब तक ये किन्नर उसी दुनिया में रह रहे थे, जिसमें हम और आप रहते हैं. लेकिन इनसे हमारी और आपकी मुलाकात सिर्फ खुशियों के मौके पर होती है. मर्जी से या जबरदस्ती. जिन्हें बदनसीब समझा जाता है उनका काम है सिर्फ दुआएं देना. लेकिन इन दुआ देने वालों का भी एक सच है.
हर साल 40-50 हजार किन्‍नर, लेकिन कैसे?
हमारे और आपके लिए किन्नर सिर्फ किन्नर होते हैं. ज्यादातर लोग या तो किन्नरों का सामना करने से बचते हैं या फिर उनसे नफरत करते हैं. शायद ही कोई हो जो किन्नरों को करीब से जानने की कोशिश करता हो. शायद ही कोई हो जिसने किन्नरों की दुनिया में झांकने की कोशिश की हो.
किन्‍नरों की दुनिया की सच्‍चाई बेहद खौफनाक और खुलासों भरा है. देश में हर साल किन्‍नरों की संख्‍या में 40-50 हजार की वृद्धि होती है. देशभर के तमाम किन्‍नरों में से 90 फीसद ऐसे होते हैं जिन्‍हें बनाया जाता है. फिलहाल देश में किन्‍नरों की चार देवियां हैं. समय के साथ किन्‍नर बिरादरी में वो लोग भी शामिल होते चले गए जो जनाना भाव रखते हैं.
किन्‍नरों की दुनिया के अपने कानून हैं और अपने रिवाज. किन्‍नरों की जब मौत होती है तो उसे किसी गैर किन्‍नर को नहीं दिखाया जाता. ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से मरने वाला अगले जन्‍म भी किन्‍नर ही पैदा लेगा. किन्‍नर मुर्दे को जलाते नहीं बल्कि दफनाते हैं.
ख्‍वाब और हकीकत के बीच
किन्‍नरों की जिंदगी रहस्‍यमय होती है और यही समाज के दूसरे लोगों को उनके प्रति उत्‍सुक रखता है. किन्‍नरों की दुनिया का एक खौफनाक सच यह भी है कि यह समाज ऐसे लड़कों की तलाश में रहता है जो खूबसूरत हो. जिसकी चाल-ढाल थोड़ी कोमल हो और जो ऊंचा उठने के ख्‍वाब देखता हो. यह समुदाय उससे नजदीकी बढ़ाता है और फिर समय आते ही उसे बधिया कर दिया जाता है. बधिया, यानी उसके शरीर के हिस्‍से के उस अंग को काट देना, जिसके बाद वह कभी लड़का नहीं रहता.
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गुरुवार, 4 जनवरी 2018

महिला नागा साधू की रहस्यमय दुनिया ।Naga sadhus mysterious woman in the world.

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महिला या औरत जो नागा साधू बनती है ये कोन होती है ये क्या होती है कैसे बनती है -ये जानकारी हम आपको देने जा रहे है -नागा साधू कैसे होते है आप जानते है लेकिन औरत या स्त्री भी नागा साधू बनती है ये आप नही जानते होंगे -महिला नागा साधू की रहस्यमय दुनिया ।Naga sadhus mysterious woman in the world.in hindi -कुम्भ कुंभ के मेले में बहुत राज रहस्य होते है -इसका कारण भी जाने 
महिला नागा साधू रहस्यमय दुनिया ।Naga sadhus mysterious woman in the world.महिला नागा साधू रहस्यमय दुनिया ।Naga sadhus mysterious woman in the world. महिला नागा सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के साधु-संत महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की जांच-पड़ताल करते है।  4. महिला को भी नागा सन्यासिन बनने से पहले खुद का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है।  5. नागा साधुओं के अखाड़ों में महिला संन्यासियों को एक अलग पहचान और खास महत्व दिया जाता है। ये महिला साधु पुरुष नागाओं की तरह नग्न रहने के बजाए अपने तन पर एक गेरूआ वस्त्र लपेटे रहती हैं। बिना वस्त्रों के शाही स्नान में नहाना प्रतिबंधित होता है, इसलिए यह गेरूआ वस्त्र धारण कर ही स्नान करती हैं। जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है नागा साधु फोटो गैलरी नागा साध्वी महिला साधु नागा साधुओं का रहस्य नागा साधु बनने की प्रक्रिया महिला नागा साधु फोटो नागा बाबा का इतिहास नागा बाबा का वीडियो

         
      1. सन्यासिन बनने से पहले महिला को 6 से 12 साल तक कठिन बृह्मचर्य का पालन करना होता है। इसके बाद गुरु यदि इस बात से संतुष्ट हो जाते है कि महिला बृह्मचर्य का पालन कर सकती है तो उसे दीक्षा देते है।


2 – प्रयाग महाकुंभ में शुरू हुई परंपरा इलाहाबाद(प्रयाग) में संपन्न हुए 2013 महाकुंभ के दौरान महिला नागा सन्यासियों के स्नान और अखाड़े बनाने के लिए अलग से जगह दी गई थी। उस दौरान इसका विरोध भी हुआ था। महाकुंभ में ही पहली बार पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े ने साध्वी वेदगिरी को महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी।

3. महिला नागा सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के साधु-संत महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की जांच-पड़ताल करते है।

4. महिला को भी नागा सन्यासिन बनने से पहले खुद का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है।

5. नागा साधुओं के अखाड़ों में महिला संन्यासियों को एक अलग पहचान और खास महत्व दिया जाता है। ये महिला साधु पुरुष नागाओं की तरह नग्न रहने के बजाए अपने तन पर एक गेरूआ वस्त्र लपेटे रहती हैं। बिना वस्त्रों के शाही स्नान में नहाना प्रतिबंधित होता है, इसलिए यह गेरूआ वस्त्र धारण कर ही स्नान करती हैं।

6. जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है, उसके आचार्य महामंडलेष्वर ही उसे दीक्षा देते है।
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सोमवार, 1 जनवरी 2018

जाने इस्लाम (मुस्लिम) धर्म के बारे में -।know about islam(muslim)

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क्या है इस्लाम का इतिहास-
आमतौर पर यह समझा जाता है कि इस्लाम 1400 वर्ष पुराना धर्म है, और इसके ‘प्रवर्तक’ पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) हैं। लेकिन वास्तव में इस्लाम 1400 वर्षों से काफ़ी पुराना धर्म है; उतना ही पुराना जितना धर्ती पर स्वयं मानवजाति का इतिहास और हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) इसके प्रवर्तक (Founder) नहीं, बल्कि इसके आह्वाहक हैं। आपका काम उसी चिरकालीन (सनातन) धर्म की ओर, जो सत्यधर्म के रूप में आदिकाल से ‘एक’ ही रहा है, लोगों को बुलाने, आमंत्रित करने और स्वीकार करने के आह्वान का था। आपका मिशन, इसी मौलिक मानव धर्म को इसकी पूर्णता के साथ स्थापित कर देना था ताकि मानवता के समक्ष इसका व्यावहारिक रूप साक्षात् रूप में आ जाए।

जाने इस्लाम (मुस्लिम) धर्म के बारे में -।know about islam(muslim) जाने इस्लाम (मुस्लिम) धर्म के बारे में -।know about islam(muslim)-हिन्दू धर्म की स्थापना इस्लाम की सच्चाई इस्लाम का उदय इस्लाम में नारी इस्लाम का अंत कब होगा इस्लाम की असलियत इस्लाम का सच इस्लाम का पूरा सच  इस्लाम का अंत-इस्लाम का सच-इस्लाम का इतिहास-इस्लामिक स्टेट-ईसाई धर्म-हिन्दू-कुरान-isis-मुस्लिम-औरतो का खतना-मुस्लिम लडकियाँ-मुस्लिम धर्म-मुस्लिम इतिहास-मुस्लिम नाम-मुस्लिम लीग-हिन्दू-पाकिस्तान-जाने इस्लाम (मुस्लिम) धर्म के बारे में ।know about islam(muslim) इस्लाम का उदय इस्लाम की सच्चाई इस्लाम में नारी हिन्दू धर्म की स्थापना इस्लाम का सच इस्लाम का अंत कब होगा इस्लाम का पूरा सच इस्लाम धर्म का सच इस्लाम धर्म के संस्थापक  इस्लाम का अंत  इस्लाम धर्म का सच  इस्लाम की सच्चाई  इस्लाम की असलियत  इस्लाम क्या है  इस्लाम में नारी  मुहम्मद साहब का इतिहास
इस्लाम का इतिहास जानने का अस्ल माध्यम स्वयं इस्लाम का मूल ग्रंथ ‘क़ुरआन’ है। और क़ुरआन, इस्लाम का आरंभ प्रथम  मनुष्य ‘आदम’ से होने का ज़िक्र करता है। इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए क़ुरआन ने ‘मुस्लिम’ शब्द का प्रयोग हज़रत इबराहीम (अलैहि॰) के लिए किया है जो लगभग 4000 वर्ष पूर्व एक महान पैग़म्बर (सन्देष्टा) हुए थे। हज़रत आदम (अलैहि॰) से शुरू होकर हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) तक हज़ारों वर्षों पर फैले हुए इस्लामी इतिहास में असंख्य ईशसंदेष्टा ईश्वर के संदेश के साथ, ईश्वर द्वारा विभिन्न युगों और विभिन्न क़ौमों में नियुक्त किए जाते रहे। उनमें से 26 के नाम कु़रआन में आए हैं और बाक़ी के नामों का वर्णन नहीं किया गया है। इस अतिदीर्घ श्रृंखला में हर ईशसंदेष्टा ने जिस सत्यधर्म का आह्वान दिया वह ‘इस्लाम’ ही था; भले ही उसके नाम विभिन्न भाषाओं में विभिन्न रहे हों। बोलियों और भाषाओं के विकास का इतिहास चूंकि क़ुरआन ने बयान नहीं किया है इसलिए ‘इस्लाम’ के नाम विभिन्न युगों में क्या-क्या थे, यह ज्ञात नहीं है।

इस्लामी इतिहास के आदिकालीन होने की वास्तविकता समझने के लिए स्वयं ‘इस्लाम’ को समझ लेना आवश्यक है। 

इस्लाम क्या है, यह कुछ शैलियों में क़ुरआन के माध्यम से हमारे सामने आता है, जैसे:-

1. इस्लाम, अवधारणा के स्तर पर ‘विशुद्ध एकेश्वरवाद’ का नाम है। यहां ‘विशुद्ध’ से अभिप्राय है: ईश्वर के व्यक्तित्व, उसकी सत्ता व प्रभुत्व, उसके अधिकारों (जैसे उपास्य व पूज्य होने के अधिकार आदि) में किसी अन्य का साझी न होना। विश्व का...बल्कि पूरे ब्रह्माण्ड और अपार सृष्टि का यह महत्वपूर्ण व महानतम सत्य मानवजाति की उत्पत्ति से लेकर उसके हज़ारों वर्षों के इतिहास के दौरान अपरिवर्तनीय, स्थायी और शाश्वत रहा है।

2. इस्लाम शब्द का अर्थ ‘शान्ति व सुरक्षा’ और ‘समर्पण’ है। इस प्रकार इस्लामी परिभाषा में इस्लाम नाम है, ईश्वर के समक्ष, मनुष्यों का पूर्ण आत्मसमर्पण; और इस आत्मसमर्पण के द्वारा व्यक्ति, समाज तथा मानवजाति के द्वारा ‘शान्ति व सुरक्षा’ की उपलब्धि का। यह अवस्था आरंभ काल से तथा मानवता के इतिहास हज़ारों वर्ष लंबे सफ़र तक, हमेशा मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता रही है।

3- इस्लाम की वास्तविकता, एकेश्वरवाद की हक़ीक़त, इन्सानों से एकेश्वरवाद के तक़ाज़े, मनुष्य और ईश्वर  के बीच अपेक्षित संबंध, इस जीवन के पश्चात (मरणोपरांत) जीवन की वास्तविकता आदि जानना एक शान्तिमय, सफल तथा समस्याओं, विडम्बनाओं व त्रासदियों से रहित जीवन बिताने के लिए हर युग में अनिवार्य रहा है; अतः ईश्वर ने हर युग में अपने सन्देष्टा (ईशदूत, नबी, रसूल, पैग़म्बर) नियुक्त करने (और उनमें से कुछ पर अपना ‘ईशग्रंथ’ अवतरित करने) का प्रावधान किया है। इस प्रक्रम का इतिहास, मानवजाति के पूरे इतिहास पर फैला हुआ है।

4. शब्द ‘धर्म’ (Religion) को, इस्लाम के लिए क़ुरआन ने शब्द ‘दीन’ से अभिव्यक्त किया है। क़ुरआन में कुछ ईशसन्देष्टाओं के हवाले से कहा गया है (42:13) कि ईश्वर ने उन्हें आदेश दिया कि वे ‘दीन’ को स्थापित (क़ायम) करें और इसमें भेद पैदा न करें, इसे (अनेकानेक धर्मों के रूप में) टुकड़े-टुकड़े न करें।

इससे सिद्ध हुआ कि इस्लाम ‘दीन’ हमेशा से ही रहा है। उपरोक्त संदेष्टाओं में हज़रत नूह (Noah) का उल्लेख भी हुआ है और हज़रत नूह (अलैहि॰) मानवजाति के इतिहास के आरंभिक काल के ईशसन्देष्टा हैं। क़ुरआन की उपरोक्त आयत (42:13) से यह तथ्य सामने आता है कि अस्ल ‘दीन’ (इस्लाम) में भेद, अन्तर, विभाजन, फ़र्क़ आदि करना सत्य-विरोधी है-जैसा कि बाद के ज़मानों में ईशसन्देष्टाओं का आह्वान व शिक्षाएं भुलाकर, या उनमें फेरबदल, कमी-बेशी, परिवर्तन-संशोधन करके इन्सानों ने अनेक विचारधाराओं व मान्यताओं के अन्तर्गत ‘बहुत से धर्म’ बना लिए।

मानव प्रकृति प्रथम दिवस से आज तक एक ही रही है। उसकी मूल प्रवृत्तियों में तथा उसकी मौलिक आध्यात्मिक, नैतिक, भौतिक आवश्यकताओं में कोई भी परिवर्तन नहीं आया है। अतः मानव का मूल धर्म भी मानवजाति के पूरे इतिहास में उसकी प्रकृति व प्रवृत्ति के ठीक अनुकूल ही होना चाहिए। इस्लाम इस कसौटी पर पूरा और खरा उतरता है। इसकी मूल धारणाएं, शिक्षाएं, आदेश, नियम...सबके सब मनुष्य की प्रवृत्ति व प्रकृति के अनुकूल हैं।

अतः यही मानवजाति का आदिकालीन तथा शाश्वत धर्म है।

क़ुरआन ने कहीं भी हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को ‘इस्लाम धर्म का प्रवर्तक’ नहीं कहा है। क़ुरआन में हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) का परिचय नबी (ईश्वरीय ज्ञान की ख़बर देने वाला), रसूल (मानवजाति की ओर भेजा गया), रहमतुल्-लिल-आलमीन (सारे संसारों के लिए रहमत व साक्षात् अनुकंपा, दया), हादी (सत्यपथ-प्रदर्शक) आदि शब्दों से कराया है।

स्वयं पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) ने इस्लाम धर्म के ‘प्रवर्तक’ होने का न दावा किया, न इस रूप में अपना परिचय कराया। आप (सल्ल॰) के एक कथन के अनुसार ‘इस्लाम के भव्य भवन में एक ईंट की कमी रह गई थी, मेरे (ईशदूतत्व) द्वारा वह कमी पूरी हो गई और इस्लाम अपने अन्तिम रूप में सम्पूर्ण हो गया’ (आपके कथन का भावार्थ।) इससे सिद्ध हुआ कि आप (सल्ल॰) इस्लाम धर्म के प्रवर्तक नहीं हैं। (इसका प्रवर्तक स्वयं अल्लाह है, न कि कोई भी पैग़म्बर, रसूल, नबी आदि)। और आप (सल्ल॰) ने उसी इस्लाम का आह्वान किया जिसका, इतिहास के हर चरण में दूसरे रसूलों ने किया था। इस प्रकार इस्लाम का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना मानवजाति और उसके बीच नियुक्त होने वाले असंख्य रसूलों के सिलसिले (श्रृंखला) का इतिहास।

यह ग़लतफ़हमी फैलने और फैलाने में, कि इस्लाम धर्म की उम्र कुल 1400 वर्ष है दो-ढाई सौ वर्ष पहले लगभग पूरी दुनिया पर छा जाने वाले यूरोपीय (विशेषतः ब्रिटिश) साम्राज्य की बड़ी भूमिका है। ये साम्राज्यी, जिस ईश-सन्देष्टा (पैग़म्बर) को मानते थे ख़ुद उसे ही अपने धर्म का प्रवर्तक बना दिया और उस पैग़म्बर के अस्ल ईश्वरीय धर्म को बिगाड़ कर, एक नया धर्म उसी पैग़म्बर के नाम पर बना दिया। (ऐसा इसलिए किया कि पैग़म्बर के आह्वाहित अस्ल ईश्वरीय धर्म के नियमों, आदेशों, नैतिक शिक्षाओं और हलाल-हराम के क़ानूनों की पकड़ (Grip) से स्वतंत्र हो जाना चाहते थे, अतः वे ऐसे ही हो भी गए।) यही दशा इस्लाम की भी हो जाए, इसके लिए उन्होंने इस्लाम को ‘मुहम्मडन-इज़्म (Muhammadanism)’ का और मुस्लिमों को ‘मुहम्मडन्स (Muhammadans)’ का नाम दिया जिससे यह मान्यता बन जाए कि मुहम्मद ‘इस्लाम के प्रवर्तक (Founder)’ थे और इस प्रकार इस्लाम का इतिहास केवल 1400 वर्ष पुराना है। न क़ुरआन में, न हदीसों (पैग़म्बर मुहम्मद सल्ल॰ के कथनों) में, न इस्लामी इतिहास-साहित्य में, न अन्य इस्लामी साहित्य में...कहीं भी इस्लाम के लिए ‘मुहम्मडन-इज़्म’ शब्द और इस्लाम के अनुयायियों के लिए ‘मुहम्मडन’ शब्द प्रयुक्त हुआ है, लेकिन साम्राज्यिों की सत्ता-शक्ति, शैक्षणिक तंत्र और मिशनरी-तंत्र के विशाल व व्यापक उपकरण द्वारा, उपरोक्त मिथ्या धारणा प्रचलित कर दी गई।

भारत के बाशिन्दों में इस दुष्प्रचार का कुछ प्रभाव भी पड़ा, और वे भी इस्लाम को ‘मुहम्मडन-इज़्म’ मान बैठे। ऐसा मानने में इस तथ्य का भी अपना योगदान रहा है कि यहां पहले से ही सिद्धार्थ गौतम बुद्ध जी, ‘‘बौद्ध धर्म’’ के; और महावीर जैन जी ‘‘जैन धर्म’’ के ‘प्रवर्तक’ के रूप में सर्वपरिचित थे। इन ‘धर्मों’ (वास्तव में ‘मतों’) का इतिहास लगभग पौने तीन हज़ार वर्ष पुराना है। इसी परिदृश्य में भारतवासियों में से कुछ ने पाश्चात्य साम्राज्यिों की बातों (मुहम्मडन-इज़्म, और इस्लाम का इतिहास मात्र 1400 वर्ष की ग़लत अवधारणा) पर विश्वास कर लिया।
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महाभारत के रहस्यमय और अमर किरदार जो अब तक जिन्दा है - Mahabharata still alive immortal character

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जिस व्यक्ति ने जन्म लिया है उसकी मृत्यु अवश्य होगी गीता में भी श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यही ज्ञान दिया था कि सिर्फ आत्मा अमर है और यह निश्चित समय के लिए अलग-अलग शरीर धारण करती है ये शरीर नश्वर है मगर  शास्त्रों में आठ ऐसे लोग भी बताए गए हैं जिन्होंने जन्म लिया है और वे हजारों सालों से देह धारण किए हुए हैं यानी वे अभी भी सशरीर जीवित हैं- 


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आपने सुना भी होगा कि महाभारत काल का अश्वथामा भी अभी तक जीवित है। श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को चिरकाल तक पृथ्वी पर भटकते रहने का श्राप दिया था-


हनुमान -  

कलियुग में हनुमानजी सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं और हनुमानजी भी इन अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं। सीता ने हनुमान को लंका की अशोक वाटिका में राम का संदेश सुनने के बाद आशीर्वाद दिया था कि वे अजर-अमर रहेंगे। अजर-अमर का अर्थ है कि जिसे ना कभी मौत आएगी और ना ही कभी बुढ़ापा। इस कारण भगवान हनुमान को हमेशा शक्ति का स्रोत माना गया है क्योंकि वे चीरयुवा हैं- 

कृपाचार्य- 

महाभारत के अनुसार कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के कुलगुरु थे। कृपाचार्य गौतम ऋषि पुत्र हैं और इनकी बहन का नाम है कृपी। कृपी का विवाह द्रोणाचार्य से हुआ था। कृपाचार्य, अश्वथामा के मामा हैं। महाभारत युद्ध में कृपाचार्य ने भी पांडवों के विरुद्ध कौरवों का साथ दिया था- 

अश्वथामा- 

ग्रंथों में भगवान शंकर के अनेक अवतारों का वर्णन भी मिलता है। उनमें से एक अवतार ऐसा भी है, जो आज भी पृथ्वी पर अपनी मुक्ति के लिए भटक रहा है। ये अवतार हैं गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा का। द्वापरयुग में जब कौरव व पांडवों में युद्ध हुआ था, तब अश्वत्थामा ने कौरवों का साथ दिया था। महाभारत के अनुसार अश्वत्थामा काल, क्रोध, यम व भगवान शंकर के सम्मिलित अंशावतार थे। अश्वत्थामा अत्यंत शूरवीर, प्रचंड क्रोधी स्वभाव के योद्धा थे। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने ही अश्वत्थामा को चिरकाल तक पृथ्वी पर भटकते रहने का श्राप दिया था।

अश्वत्थामा के संबंध में एक प्रचलित मान्यता भी है भारत में मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर एक किला है। इसे असीरगढ़ का किला कहते हैं। इस किले में भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है। यहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि अश्वत्थामा प्रतिदिन इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने आते हैं- 

ऋषि मार्कण्डेय- 


भगवान शिव के परम भक्त हैं ऋषि मार्कण्डेय। इन्होंने शिवजी को तप कर प्रसन्न किया और महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि के कारण चिरंजीवी बन गए-

विभीषण- 

राक्षस राज रावण के छोटे भाई हैं विभीषण। विभीषण श्रीराम के अनन्य भक्त हैं। जब रावण ने माता सीता हरण किया था, तब विभीषण ने रावण को श्रीराम से शत्रुता न करने के लिए बहुत समझाया था। इस बात पर रावण ने विभीषण को लंका से निकाल दिया था। विभीषण श्रीराम की सेवा में चले गए और रावण के अधर्म को मिटाने में धर्म का साथ दिया-

राजा बलि- 

शास्त्रों के अनुसार राजा बलि भक्त प्रहलाद के वंशज हैं। बलि ने भगवान विष्णु के वामन अवतार को अपना सब कुछ दान कर दिया था। इसी कारण इन्हें महादानी के रूप में जाना जाता है। राजा बलि से श्रीहरि अतिप्रसन्न थे। इसी वजह से श्री विष्णु राजा बलि के द्वारपाल भी बन गए थे-

ऋषि व्यास- 

ऋषि व्यास भी अष्ट चिरंजीवी हैँ और इन्होंने चारों वेद (ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद और यजुर्वेद) का सम्पादन किया था। साथ ही, इन्होंने ही सभी 18 पुराणों की रचना भी की थी। महाभारत और श्रीमद्भागवत् गीता की रचना भी वेद व्यास द्वारा ही की गई है। इन्हें वेद व्यास के नाम से भी जाना जाता है। वेद व्यास, ऋषि पाराशर और सत्यवती के पुत्र थे। इनका जन्म यमुना नदी के एक द्वीप पर हुआ था और इनका रंग सांवला था। इसी कारण ये कृष्ण द्वैपायन कहलाए-

परशुराम- 

भगवान विष्णु के छठें अवतार हैं परशुराम। परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं। इनका जन्म हिन्दी पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ था। इसलिए वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली तृतीया को अक्षय तृतीया कहा जाता है। परशुराम का जन्म समय सतयुग और त्रेता के संधिकाल में माना जाता है। परशुराम ने 21 बार पृथ्वी से समस्त क्षत्रिय राजाओं का अंत किया था-परशुराम का प्रारंभिक नाम राम था। राज ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। शिवजी तपस्या से प्रसन्न हुए और राम को अपना फरसा (एक हथियार) दिया था। इसी वजह से राम परशुराम कहलाने लगे-  


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जाने कुछ रामायण के गुप्त रहस्य - Some of the Ramayana secret in hindi-

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कम लोग जानते है की श्री रामचरित मानस और रामायण में कुछ बातें अलग है जबकि कुछ बातें ऐसी है जिनका वर्णन केवल वाल्मीकि कृत रामायण में है-

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भगवान राम को समर्पित दो ग्रंथ मुख्यतः लिखे गए है एक तुलसीदास द्वारा रचित 'श्री रामचरित मानस' और दूसरा वाल्मीकि कृत 'रामायण'। इनके अलावा भी कुछ अन्य ग्रन्थ लिखे गए है पर इन सब में वाल्मीकि कृत रामायण को सबसे सटीक और प्रामाणिक माना जाता है यह महाकाव्य को भारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निधियों में से एक कहा जा सकता है-

आइये जाने दोनों रामायण के कुछ प्रसंगो में क्या विशेष अंतर है -


विशेष तथ्य :-

1- तुलसीदास द्वारा श्रीरामचरित मानस में वर्णन है कि भगवान श्रीराम ने सीता स्वयंवर में शिव धनुष को उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया, जबकि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में सीता स्वयंवर का वर्णन नहीं है। रामायण के अनुसार भगवान राम व लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे थे। विश्वामित्र ने ही राजा जनक से श्रीराम को वह शिवधनुष दिखाने के लिए कहा। तब भगवान श्रीराम ने खेल ही खेल में उस धनुष को उठा लिया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। राजा जनक ने यह प्रण किया था कि जो भी इस शिव धनुष को उठा लेगा, उसी से वे अपनी पुत्री सीता का विवाह कर देंगे।


2- रामायण के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ को मुख्य रूप से ऋषि ऋष्यश्रृंग ने संपन्न किया था। ऋष्यश्रृंग के पिता का नाम महर्षि विभाण्डक था। एक दिन जब वे नदी में स्नान कर रहे थे तब नदी में उनका वीर्यपात हो गया। उस जल को एक हिरणी ने पी लिया था, जिसके फलस्वरूप ऋषि ऋष्यश्रृंग का जन्म हुआ था।

3- विश्व विजय करने के लिए जब रावण स्वर्ग लोक पहुंचा तो उसे वहां रंभा नाम की अप्सरा दिखाई दी। अपनी वासना पूरी करने के लिए रावण ने उसे पकड़ लिया। तब उस अप्सरा ने कहा कि आप मुझे इस तरह से स्पर्श न करें, मैं आपके बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर के लिए आरक्षित हूं।

इसलिए मैं आपकी पुत्रवधू के समान हूं,  लेकिन रावण नहीं माना और उसने रंभा से दुराचार किया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को श्राप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसे स्पर्श करेगा तो उसका मस्तक सौ टुकड़ों में बंट जाएगा।

4- ये बात सभी जानते हैं कि लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा के नाक-कान काटे जाने से क्रोधित होकर ही रावण ने सीता का हरण किया था, लेकिन स्वयं शूर्पणखा ने भी रावण का सर्वनाश होने का श्राप दिया था। क्योंकि रावण की बहन शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था। वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था। रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ। उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का वध कर दिया। तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।

5- श्रीरामचरित मानस के अनुसार सीता स्वयंवर के समय भगवान परशुराम वहां आए थे, जबकि रामायण के अनुसार सीता से विवाह के बाद जब श्रीराम पुन: अयोध्या लौट रहे थे, तब परशुराम वहां आए और उन्होंने श्रीराम से अपने  धनुष पर बाण चढ़ाने के लिए कहा। श्रीराम के द्वारा बाण चढ़ा देने पर परशुराम वहां से चले गए थे।

6- वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार रावण अपने पुष्पक विमान से कहीं जा रहा था, तभी उसे एक सुंदर स्त्री दिखाई दी, उसका नाम वेदवती था। वह भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी। रावण ने उसके बाल पकड़े और अपने साथ चलने को कहा। उस तपस्विनी ने उसी क्षण अपनी देह त्याग दी और रावण को श्राप दिया कि एक स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी। उसी स्त्री ने दूसरे जन्म में सीता के रूप में जन्म लिया।

7- जिस समय भगवान श्रीराम वनवास गए, उस समय उनकी आयु लगभग 27 वर्ष की थी। राजा दशरथ श्रीराम को वनवास नहीं भेजना चाहते थे, लेकिन वे वचनबद्ध थे। जब श्रीराम को रोकने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने श्रीराम से यह भी कह दिया कि तुम मुझे बंदी बनाकर स्वयं राजा बन जाओ।

8- अपने पिता राजा दशरथ की मृत्यु का आभास भरत को पहले ही एक स्वप्न के माध्यम से हो गया था। सपने में भरत ने राजा दशरथ को काले वस्त्र पहने हुए देखा था। उनके ऊपर पीले रंग की स्त्रियां प्रहार कर रही थीं। सपने में राजा दशरथ लाल रंग के फूलों की माला पहने और लाल चंदन लगाए गधे जुते हुए रथ पर बैठकर तेजी से दक्षिण (यम की दिशा) की ओर जा रहे थे।

9- हिंदू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं की मान्यता है, जबकि रामायण के अरण्यकांड के चौदहवे सर्ग के चौदहवे श्लोक में सिर्फ तैंतीस देवता ही बताए गए हैं। उसके अनुसार बारह आदित्य, आठ वसु, ग्यारह रुद्र और दो अश्विनी कुमार, ये ही कुल तैंतीस देवता हैं।

10- रघुवंश में एक परम प्रतापी राजा हुए थे, जिनका नाम अनरण्य था। जब रावण विश्वविजय करने निकला तो राजा अनरण्य से उसका भयंकर युद्ध हुआ। उस युद्ध में राजा अनरण्य की मृत्यु हो गई, लेकिन मरने से पहले उन्होंने रावण को श्राप दिया कि मेरे ही वंश में उत्पन्न एक युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा।

11- रावण जब विश्व विजय पर निकला तो वह यमलोक भी जा पहुंचा। वहां यमराज और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जब यमराज ने रावण के प्राण लेने के लिए कालदण्ड का प्रयोग करना चाहा तो ब्रह्मा ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि किसी देवता द्वारा रावण का वध संभव नहीं था।

12- सीताहरण करते समय जटायु नामक गिद्ध ने रावण को रोकने का प्रयास किया था। रामायण के अनुसार जटायु के पिता अरुण बताए गए हैं। ये अरुण ही भगवान सूर्यदेव के रथ के सारथी हैं।

13- जिस दिन रावण सीता का हरण कर अपनी अशोक वाटिका में लाया। उसी रात को भगवान ब्रह्मा के कहने पर देवराज इंद्र माता सीता के लिए खीर लेकर आए, पहले देवराज ने अशोक वाटिका में उपस्थित सभी राक्षसों को मोहित कर सुला दिया। उसके बाद माता सीता को खीर अर्पित की, जिसके खाने से सीता की भूख-प्यास शांत हो गई।

14- जब भगवान राम और लक्ष्मण वन में सीता की खोज कर रहे थे। उस समय कबंध नामक राक्षस का राम-लक्ष्मण ने वध कर दिया। वास्तव में कबंध एक श्राप के कारण ऐसा हो गया था। जब श्रीराम ने उसके शरीर को अग्नि के हवाले किया तो वह श्राप से मुक्त हो गया। कबंध ने ही श्रीराम को सुग्रीव से मित्रता करने के लिए कहा था।

15-  श्रीरामचरितमानस के अनुसार समुद्र ने लंका जाने के लिए रास्ता नहीं दिया तो लक्ष्मण बहुत क्रोधित हो गए थे, जबकि वाल्मीकि रामायण में वर्णन है कि लक्ष्मण नहीं बल्कि भगवान श्रीराम समुद्र पर क्रोधित हुए थे और उन्होंने समुद्र को सुखा देने वाले बाण भी छोड़ दिए थे। तब लक्ष्मण व अन्य लोगों ने भगवान श्रीराम को समझाया था।

16- सभी जानते हैं कि समुद्र पर पुल का निर्माण नल और नील नामक वानरों ने किया था। क्योंकि उसे श्राप मिला था कि उसके द्वारा पानी में फेंकी गई वस्तु पानी में डूबेगी नहीं, जबकि वाल्मीकि रामायण के अनुसार नल देवताओं के शिल्पी (इंजीनियर) विश्वकर्मा के पुत्र थे और वह स्वयं भी शिल्पकला में निपुण था। अपनी इसी कला से उसने समुद्र पर सेतु का निर्माण किया था।

17- रामायण के अनुसार समुद्र पर पुल बनाने में पांच दिन का समय लगा। पहले दिन वानरों ने 14 योजन, दूसरे दिन 20 योजन, तीसरे दिन 21 योजन, चौथे दिन 22 योजन और पांचवे दिन 23 योजन पुल बनाया था। इस प्रकार कुल 100 योजन लंबाई का पुल समुद्र पर बनाया गया। यह पुल 10 योजन चौड़ा था। (एक योजन लगभग 13-16 किमी होता है)

18- एक बार रावण जब भगवान शंकर से मिलने कैलाश गया। वहां उसने नंदीजी को देखकर उनके स्वरूप की हंसी उड़ाई और उन्हें बंदर के समान मुख वाला कहा। तब नंदीजी ने रावण को श्राप दिया कि बंदरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा।

19- रामायण के अनुसार जब रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कैलाश पर्वत उठा लिया तब माता पार्वती भयभीत हो गई थी और उन्होंने रावण को श्राप दिया था कि तेरी मृत्यु किसी स्त्री के कारण ही होगी।

20- जिस समय राम-रावण का अंतिम युद्ध चल रहा था, उस समय देवराज इंद्र ने अपना दिव्य रथ श्रीराम के लिए भेजा था। उस रथ में बैठकर ही भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था।

21- जब काफी समय तक राम-रावण का युद्ध चलता रहा तब अगस्त्य मुनि ने श्रीराम से आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करने को कहा, जिसके प्रभाव से भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया।

22- रामायण के अनुसार रावण जिस सोने की लंका में रहता था वह लंका पहले रावण के भाई कुबेर की थी। जब रावण ने विश्व विजय पर निकला तो उसने अपने भाई कुबेर को हराकर सोने की लंका तथा पुष्पक विमान पर अपना कब्जा कर लिया।

23- रावण ने अपनी पत्नी की बड़ी बहन माया के साथ भी छल किया था। माया के पति वैजयंतपुर के शंभर राजा थे। एक दिन रावण शंभर के यहां गया। वहां रावण ने माया को अपनी बातों में फंसा लिया। इस बात का पता लगते ही शंभर ने रावण को बंदी बना लिया। उसी समय शंभर पर राजा दशरथ ने आक्रमण कर दिया। उस युद्ध में शंभर की मृत्यु हो गई। जब माया सती होने लगी तो रावण ने उसे अपने साथ चलने को कहा। तब माया ने कहा कि तुमने वासनायुक्त मेरा सतित्व भंग करने का प्रयास किया इसलिए मेरे पति की मृत्यु हो गई, अत: तुम्हारी मृत्यु भी इसी कारण होगी।

24- रावण के पुत्र मेघनाद ने जब युद्ध में इंद्र को बंदी बना लिया तो ब्रह्माजी ने देवराज इंद्र को छोडऩे को कहा। इंद्र पर विजय प्राप्त करने के कारण ही मेघनाद इंद्रजीत के नाम से विख्यात हुआ।

25- रावण जब विशव विजय पर निकला तब वह यमलोक भी जा पहुंचा।  वहां रावण और यमराज के बीच भयंकर युद्ध हुआ।  जब यमराज ने कालदंड के प्रयोग द्वारा रावण के प्राण लेने चाहे तो ब्रह्मा ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि किसी देवता द्वारा रावण का वध संभव नहीं था।

26- वाल्मीकि रामायण में 24 हज़ार श्लोक, 500 उपखण्ड, तथा सात कांड है।
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रविवार, 31 दिसंबर 2017

सम्मोहन क्या है केसे करे किसी को सम्मोहित-What is hypnosis how to hypnotize someone

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सम्मोहन क्या है केसे करे किसी को सम्मोहित-What is hypnosis how to hypnotize someone
सम्मोहन (Hypnosis) -Hypnosis Secrets of Powe

सम्मोहन क्या है केसे करे किसी को सम्मोहित-What is hypnosis how to hypnotize someone http://www.hindirhsygyan.com/2016/01/hypnosis-secrets-of-power.htmlसम्मोहन शक्ति का रहस्य |Hypnosis Secrets of Power |सम्मोहन (Hypnosis) दैनिक जीवन में सम्मोहन,सम्मोहन क्रिया  सम्मोहन विधि  सम्मोहन कला  सम्मोहन मंत्र  आत्म सम्मोहन  सम्मोहन साधना  सम्मोहन शक्ति कैसे प्राप्त करें  गुप्त सम्मोहन कैसे किया जाता हैवह कला है जिसके द्वारा मनुष्य उस अर्धचेतनावस्था में लाया जा सकता है जो समाधि, या स्वप्नावस्था, से मिलती-जुलती होती है, किंतु सम्मोहित अवस्था में मनुष्य की कुछ या सब इंद्रियाँ उसके वश में रहती हैं। वह बोल, चल और लिख सकता है; हिसाब लगा सकता है तथा जाग्रतावस्था में उसके लिए जो कुछ संभव है, वह सब कुछ कर सकता है, किंतु यह सब कार्य वह सम्मोहनकर्ता के सुझाव पर करता है।


इतिहास

भारत में अति प्राचीन काल से सम्मोहन तथा इसी प्रकार की अन्य रहस्यमय, अद्भुत प्रभावोत्पादक, गुप्त क्रियाएँ प्रचलित हैं। अन्य पूर्वी देशों में भी ये अज्ञात नहीं रही हैं। यह निश्चय है कि यदि सबने नहीं तो इनमें से अधिकांश ने इन क्रियाओं का ज्ञान भारत से प्राप्त किया, जैसेतिब्बत ने। नटों, साधुओं तथा योगियों में इन क्रियाओं के जाननेवाले पाए जाते हैं। इन विशिष्ट मंडलों के लोगों को छोड़कर अन्य मनुष्यों में इनका ज्ञान बहुत थोड़ा, या कुछ भी नहीं, रहता। अनधिकारी के ज्ञाता होने से अनिष्ट की आशंका समझ, पूर्वी देशों में इस विषय के समर्थ लोगों ने इसे सर्वथा गोपनीय रखा। इस कारण आज भी इस संबंध में जो कुछ निश्चित रूप से लिखा जा सकता है वह यूरोप की देन है, जहाँ इसका वैज्ञानिक अध्ययन करने की चेष्टा की गई है।
अठारहवीं सदी के मध्य में फ्रांज़ ए. मेस्मर नामक वियना के एक चिकित्सक ने सर्वप्रथम सम्मोहन का अध्ययन प्रारम्भ किया। इन्होंने कुछ सफलता तथा बड़ी प्रसिद्धि प्राप्त की, किंतु इस संबंध में जिन सिद्धांतों की इन्होंने कल्पना की वे गलत सिद्ध हुए। जो सिद्धांत आजकल स्वीकृत हैं, उनका विवेचन लीबाल्ट (Liebault) तथा वेर्नहाइम (Bernheim) नामक दो फ्रांसीसी डाक्टरों ने किया था। इनके अनुसार सम्मोहन का अनिवार्य प्रवर्तक सुझाव या प्रेरणा का संकेत होता है।

स्वरूप

यह निश्चित रूप से समझ लेना चाहिए कि सम्मोहनकर्ता जादूगर, अथवा दैवी शक्तियों का स्वामी, नहीं होता। मनुष्यों में से अधिकांश प्रेरणा या सुझाव के प्रभाव में आ जाते हैं। यदि कोई आज्ञा, जैसे "आप खड़े हो जाँए" या "कुर्सी छोड़ दें", हाकिमाना ढंग से दी जाए, तो बहुत से लोग इसका तुरंत पालन करते हैं। यह तो सभी ने अनुभव किया है कि यदि हम किसी को उबासी लेते देखते हैं, तो इच्छा न रहने पर भी स्वयं उबासी लेने लग जाते हैं। दूसरों के हँसने पर स्वयं भी हँसते या मुस्कराते हैं तथा दूसरों को रोते देखकर उदास हो जाते हैं।
जो लोग दूसरों के सुझावों को इच्छा न रहते हुए भी मान लेते हैं, वे सरलता से सम्मोहित हो जाते हैं। सम्मोहित व्यक्ति के व्यवहार में निम्नलिखित समरूपता पाई जाती है :

आज्ञाकारिता

कुछ लोगों का मत है कि जो मनुष्य पूर्ण रूप से सम्मोहित हो जाता है वह सम्मोहनकर्ता की दी हुई सब आज्ञाओं का पालन करता है, किंतु कुछ अन्य का कहना है कि सम्मोहित व्यक्ति के विश्वासों के अनुसार यदि आज्ञा अनैतिक या अनुचित हुई, तो वह उसका पालन नहीं करता और जाग जाता है।

मिथ्या प्रतीति तथा भ्रम

सम्मोहनकर्ता यदि कहता है कि दो और दो सात होते है, तो सम्मोहित व्यक्ति इसे मान लेता है। यदि उसे कहता है कि तुम घोड़ा हो, तो वह व्यक्ति हाथों और घुटनों के बल चलने लगता है।

मतिविभ्रम

सम्मोहित व्यक्ति को ऐसी वस्तुएँ जो उपस्थित नहीं है दिखाई तथा सुनाई जा सकती है और उनका स्पर्श व अनुभव कराया जा सकता है। इस अवस्था में यह भी मनवाया जा सकता है कि वह वस्तु उपस्थित नहीं है जो वास्तव में उपस्थित है। यदि प्रेरणा दी जाए कि जिस कुर्सी पर सम्मोहित व्यक्ति बैठा है वह वहाँ नहीं है, तो वह व्यक्ति मुँह के बल जमीन पर लुढ़क जाएगा।

ज्ञानेंद्रियों पर प्रभाव

सम्मोहनकर्ता के सुझाव पर सम्मोहित व्यक्ति के शरीर का कोई भाग सुन्न हो जा सकता है, यहाँ तक कि उस भाग को जलाने पर भी उसे वेदना न हो। इंद्रियों को तीव्र बनानेवाली प्रेरणा भी कार्यकारी हो सकती है, जिससे सम्मोहित व्यक्ति असाधारण बल का प्रयोग कर सकता है, या कही हुई बात को भी दूर से सुन सकता है।

रासंमोहन विस्मृति

साधारणतया सम्मोहनावस्था में हुई सब बातों को सम्मोहित व्यक्ति भूल जाता है।

सम्मोहनोत्तर प्रेरणा

व्यक्ति की सम्मोहनावस्था में दिए हुए सुझावों या आज्ञाओं का, पूर्ण चेतनता प्राप्त करने पर भी, वह पालन करता है। यदि उससे कहा गया है कि चैतन्य होने के दस मिनट बाद नहाना, तो उतना समय बीतने पर वह अपने आप ऐसा ही करता है।

दैनिक जीवन में सम्मोहन

प्रतिदिन के जीवन में सम्मोहन के अनेक दृष्टांत मिलते हैं। राजनीतिक या धार्मिक नेता अपने भाषणों से लोगों को सम्मोहित कर लेते हैं। आत्मसम्मोहन भी संभव है। किसी चमकीली वस्तु पर दृष्टि स्थिर रखकर यह अवस्था उत्पन्न की जा सकती है। अत्यधिक उत्तेजना, भय आदि से मनुष्य सम्मोहित अवस्था जैसा व्यवहार करने लगता है, या उत्तेजना के क्षण के पहले या बाद की घटनाओं को भूल जाता है। वह कौन है, उसका पिछला जीवन क्या था, यह भी भूल जा सकता है।
आकस्मिक शारीरिक चोट, मानसिक क्षोभ, अथवा उत्तेजना के कारण, हाथ पैर रहते कभी कभी मनुष्य लूले या लँगड़े के सदृश व्यवहार करने लगता है, दृष्टि का लोप हो जाता है, अथवा वह नींद में ही चलने फिरने लग जा सकता है। दृष्टि विभ्रम, या जाग्रत अवस्था में स्वप्न देखने के अनेक उदाहरण मिलते हैं। धार्मिक उत्तेजना से सम्मोहित होकर कुछ लोग अनजाने अर्धचेतनावस्था में हो जाते हैं और कल्पित होकर कुछ लोग अनजाने अर्धचेतनावस्था में हो जाते हैं और कल्पित दृश्य या वस्तुएँ देखते या सुनते हैं। बाद में उन्हें विश्वास हो जाता है कि यह सब वास्तविक था।
कुछ लोग सम्मोहन में कुशल होते हैं। अन्य लोग इनके प्रभाव में आकर, अर्धचेतनावस्था में कुर्सी, मेज आदि इधर उधर हटा देते हैं या हिलाते हैं, अनुपस्थित वस्तु देखते या सुनते हैं। श्रद्धा से रोगमुक्ति का आधार भी सम्मोहन ही है। भीड़ मे दूसरों से प्रभावित होकर मनुष्य सम्मोहित व्यक्ति के सदृश आचरण करने लगता है। भावातिरेक में भीड़ों के विवेकहीन आचरण का यही कारण है।

उपयोग

सम्मोहन का उपयोग कुछ रोगों को दूर करने में तथा प्रसव में किया जाता है। कुछ चिकित्सकों ने शल्यचिकित्सा में भी इसे वेदनाहर पाया है। सम्मोहन की कार्यपद्धति से मानस तथा मानसिक रोगों के अध्ययन में सहायता मिलती है।


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