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गुरुवार, 11 जनवरी 2018

ये गुप्त बाते जानकर लड़की को आसानी से पटाए These secret things, knowing the girl easily in love

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 आप पार्टी में है..और आपको वह कोई लड़की पसंद आ गयी ..तो आपको करना ये है की आप उस लड़की के पास जाये और उस से बातें करें..अपना परिचय दें . धीरे धीरे बातचीत का सिलसिला शुरू होगा. और अगर किस्मत अच्छी  हुई तो लड़की पट ही जाएग
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  • ये  गुप्त बाते जानकर लड़की को आसानी से पटाए These secret things, knowing the girl easily in love
  • अगर आपको अपनी पड़ोसन ही पसंद है तो ..वो जब भी स्कूल/कॉलेज जाने के लिए निकले तो आप भी उनके साथ हो लें. उनसे बातें करते हुए चलें. लगातार 4 दिन तक अगर आप ऐसा करेंगे और अगर पांचवे दिन आप उनके साथ ना जाये तो वो जरुर आपके बारे में पूछेगी.  अगर उसने पूछा तो समझिये वो आपे से इम्प्रेस हो चुकी है 
  • लड़कियों को रोमांस बहुत पसंद होता है. आप अपने मोबाइल में कोई रोमांटिक रिंगटोन ही रखें जिस से वे आपसे और ज्यादा इम्प्रेस हो जाएँगी.
  • आप उन्हें स्पेशल महसूस करवाएं. जैसे की आप उस से उनका ऑटोग्राफ ही मांग लें ” क्या मुझे आपका ऑटोग्राफ मिल सकता है ??”. ऐसा कहने पर वो बहुत खुश होंगी… और आपकी  लड़की पटाने की सम्भावना काफी बद जाती है -
  • लड़कियों के सामने तो कभी भी भूल के भी स्मोकिंग या ड्रिंकिंग न करें . याद रखें..लड़की केवल अच्छे स्वाभाव वाले लड़कों को ही पसंद करती है .
  • लड़की के साथ बहस तो बिलकुल भी न करें ..उनका साथ दें.
  • अगर लड़की अपने माँ या पिताजी के साथ कही दिख जाये तो उनके पेरेंट्स को पाँव छू कर प्रणाम जरुर करें. यह हमारी संस्कृति भी है. इस से लड़की बिना इम्प्रेस हुए नहीं रह सकती. 

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सोमवार, 8 जनवरी 2018

किन्नरो का रहस्य जानना चाहते हो ? Want to know the secret of eunuchs?

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इंसान की पहचान ही उसके वजूद को जीने की वजह देती है. लेकिन जब पहचान, परेशानी और परेशानी दाग बन जाए तो जीना मुहाल हो जाता है. फिर उनकी तो सबसे बड़ी परेशानी यही थी कि उन्हें पूरा समाज ना तो मर्द मानता था और ना ही औरत.किन्नर की शादी ,किन्नर की मौत .या फिर किन्नर की शव यात्रा कैसे निकली जाती है ये सवाल आपकें -और क्या औरत या लड़की भी किन्नर या हिजड़ा होती है -किन्नरो का रहस्य जानना चाहते हो ? Want to know the secret of eunuchs?


किन्नरो का रहस्य जानना चाहते हो ? Want to know the secret of eunuchs?किन्नर का राज ,किन्नर की शादी ,किन्नर की योनी ,किन्नर के बारे में ,किन्‍नरों की जिंदगी रहस्‍यमय होती है और यही समाज के दूसरे लोगों को उनके प्रति उत्‍सुक रखता है. किन्‍नरों हिजडा कैसे बनते है किन्नर कैसे पैदा हो जाते हैं किन्नर की पहचान कैसे करें किन्नर कैसे बनते है किन्नर ka ling हिजड़ा की पहचान किन्नर प्राइवेट पार्ट वीडियो किन्नर की पहचान कैसे हो अंग भाग किन्नर के जननांग ,महिला किन्नर ,स्त्री किन्नर के अंग ,लड़की किन्नर ,

समाज के बनाए दस्तूर में अब तक बस दो जेंडर या यूं कहें कि दो ही दर्जा है. यानी आप या तो मर्द हो सकते हैं या औरत. लेकिन देश की सबड़े बड़ी अदालत ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश को एक तीसरा जेंडर यानी तीसरा दर्जा दे दिया. जी हां, अब देश में मौजूद पचास लाख से भी ज्यादा किन्नरों को तीसरे दर्जे में शामिल कर लिया गया है.
जब अचानक टिक जाती हैं उनपर नजरें
कभी भीड़ में तो कभी घर के आंगन में. कभी सड़क पर तो कभी किसी महफिल में. कभी ढोलक की थाप पर तो कभी तालियों की आवाज पर थिरकते उन चेहरों को आपने कई बार देखा होगा. ये वो हैं जो जब-जब सामने आते हैं नजरें ना चाहते हुए भी उनपर टिक जाती हैं. इनकी पहचान ही कुछ ऐसी बनी हई थी कि हर खासो-आम इनसे बस किसी तरह पीछा छुड़ाना चाहता था. लेकिन जब खुद ये किसी के पीछे पड़ जाएं तो फिर इनसे पीछा छुड़ाना आसान नहीं होता.
दुनिया में और दुनिया के साथ-साथ हिंदुस्तान में भी अब तक र थीं और इन्हीं दो दर्जों यानी मर्द और औरत को तमाम जरूरी पहचान, हक, सुविधाएं, अधिकार हासिल थीं. मगर 15 अप्रैल को देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि उस फैसले के आते ही अचानक अब एक तीसरा जेंडर यानी तीसरे दर्जे ने जन्म ले लिया है.
पिछड़ी जातियों के समान अधिकार
देश की पचास लाख से भी ज्यादा किन्नरों को इजज्त से सिर उठा कर जीने का हक दे दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें थर्ड जेंडर करार देकर वो सारे अधिकार देने को कहा है जो पिछड़ी जातियों को हासिल हैं. इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी, आरक्षण सभी शामिल हैं. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में किन्नरों को बच्चा गोद लेने का अधिकार देने के साथ-साथ उन्हें सेक्स चेंज करवाकर औरत या मर्द बनने का भी अधिकार दे दिया है.
अपने इस हक के लिए किन्नर बिरादरी वर्षों से लड़ाई लड़ रही थी. 1871 से पहले तक भारत में किन्नरों को ट्रांसजेंडर का अधिकार मिला हुआ था. मगर 1871 में अंग्रेजों ने किन्नरों को क्रिमिनल ट्राइब्स यानी जरायमपेशा जनजाति की श्रेणी में डाल दिया था. बाद में आजाद हिंदुस्तान का जब नया संविधान बना तो 1951 में किन्नरों क्रिमिनल ट्राइब्स से निकाल दिया गया. मगर उन्हें उनका हक तब भी नहीं मिला था.
हालांकि तब से अब तक ये किन्नर उसी दुनिया में रह रहे थे, जिसमें हम और आप रहते हैं. लेकिन इनसे हमारी और आपकी मुलाकात सिर्फ खुशियों के मौके पर होती है. मर्जी से या जबरदस्ती. जिन्हें बदनसीब समझा जाता है उनका काम है सिर्फ दुआएं देना. लेकिन इन दुआ देने वालों का भी एक सच है.
हर साल 40-50 हजार किन्‍नर, लेकिन कैसे?
हमारे और आपके लिए किन्नर सिर्फ किन्नर होते हैं. ज्यादातर लोग या तो किन्नरों का सामना करने से बचते हैं या फिर उनसे नफरत करते हैं. शायद ही कोई हो जो किन्नरों को करीब से जानने की कोशिश करता हो. शायद ही कोई हो जिसने किन्नरों की दुनिया में झांकने की कोशिश की हो.
किन्‍नरों की दुनिया की सच्‍चाई बेहद खौफनाक और खुलासों भरा है. देश में हर साल किन्‍नरों की संख्‍या में 40-50 हजार की वृद्धि होती है. देशभर के तमाम किन्‍नरों में से 90 फीसद ऐसे होते हैं जिन्‍हें बनाया जाता है. फिलहाल देश में किन्‍नरों की चार देवियां हैं. समय के साथ किन्‍नर बिरादरी में वो लोग भी शामिल होते चले गए जो जनाना भाव रखते हैं.
किन्‍नरों की दुनिया के अपने कानून हैं और अपने रिवाज. किन्‍नरों की जब मौत होती है तो उसे किसी गैर किन्‍नर को नहीं दिखाया जाता. ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से मरने वाला अगले जन्‍म भी किन्‍नर ही पैदा लेगा. किन्‍नर मुर्दे को जलाते नहीं बल्कि दफनाते हैं.
ख्‍वाब और हकीकत के बीच
किन्‍नरों की जिंदगी रहस्‍यमय होती है और यही समाज के दूसरे लोगों को उनके प्रति उत्‍सुक रखता है. किन्‍नरों की दुनिया का एक खौफनाक सच यह भी है कि यह समाज ऐसे लड़कों की तलाश में रहता है जो खूबसूरत हो. जिसकी चाल-ढाल थोड़ी कोमल हो और जो ऊंचा उठने के ख्‍वाब देखता हो. यह समुदाय उससे नजदीकी बढ़ाता है और फिर समय आते ही उसे बधिया कर दिया जाता है. बधिया, यानी उसके शरीर के हिस्‍से के उस अंग को काट देना, जिसके बाद वह कभी लड़का नहीं रहता.
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सोमवार, 4 दिसंबर 2017

स्त्री चरित्र पर वैज्ञानिक शोध ये कहता है --Scientific research on the feminine character, it says -

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स्त्री चरित्र पर वैज्ञानिक शोध ये कहता है --Scientific research on the feminine character, it says स्त्री चरित्र ।। आधुनिक  शोध् ।Female character .. Adhunik research,ओरत का चरित्र ,स्त्री के बारे में ,ओरत के बारे में ,त्रिया चरित्र ,स्त्री चरित्र पर वैज्ञानिक शोध ये कहता है --Scientific research on the feminine character, it says-स्त्री को क्या चाहिए-चरित्रहीन स्त्री-स्त्री की नाभि-चरित्रहीन की पहचान-चरित्रहीन पत्नी-स्त्री की छाती-स्त्री वशीकरण-चरित्रहीन महिलाओं के लक्षण-चरित्रहीन स्त्री की पहचान चरित्रहीन पत्नी के लक्षण त्रिया चरित्र गरम स्त्री चरित्रहीन महिलाओं की पहचान स्त्री के प्रकार चरित्रहीन लड़कियों की पहचान चरित्रहीन पुरुष की पहचान-


बुरे लोग अंग्रेज़ों में भी हैं लेकिन उनके बहुसंख्यक लोगों का स्वभाव शोध करने का बन चुका है। बात चाहे कितनी ही मामूली क्यों न हो लेकिन बात मानने से पहले वे यह ज़रूर देखेंगे कि बात में सच्चाई कितनी है ?
और यह हमारे लिए कितनी हितकारी है ?
मस्लन औरत की वफ़ा के साथ उसकी बेवफ़ाई के क़िस्से भी सदा से ही आम हैं और बेवफ़ा औरत के लिए ही भारत में त्रिया चरित्र बोला जाता है लेकिन अंग्रेज़ों ने इस पर भी शोध कर डाला।
देखिए आप भी यह दिलचस्प शोध :--
 धोखा देने में महिलाएं भी नहीं हैं कुछ कम---
    आमतौर पर केवल पुरुषों के विषय में ही यह माना जाता है कि वह अपने प्रेम-संबंधों को लेकर संजीदा नहीं रहते. वह जरूरत पड़ने पर अपने साथी को धोखा देने से भी नहीं चूकते. लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारी मानसिकता बिल्कुल बेबुनियाद है क्योंकि विश्वासघात और संबंधों से खेलना केवल पुरुषों का ही शौक नहीं है बल्कि महिलाएं भी इन तौर-तरीकों को अपनाने से नहीं हिचकतीं. प्रेमी को धोखा देने और उसके पीठ पीछे दूसरा प्रेम-संबंध बनाने में महिलाएं पुरुष के समान नहीं बल्कि उनसे कहीं ज्यादा आगे हैं.
    डेली एक्सप्रेस में छपे एक शोध के नतीजों ने यह खुलासा किया है कि केवल पुरुष नहीं बल्कि महिलाएं भी अपने रिश्ते की गंभीरता को समझने में चूक कर बैठती हैं. लव-ट्राएंगल जैसे संबंधों में महिलाओं की भागीदारी अधिक देखी जा सकती है. इस सर्वेक्षण में 2,000 लोगों को शामिल किया गया था जिनमें से लगभग एक चौथाई महिलाओं ने यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने एक ही समय में एक से ज्यादा पुरुषों के साथ प्रेम-संबंध स्थापित किए हैं. जबकि केवल 15% पुरुषों ने ही यह माना है कि उन्होंने एक बार में दो से ज्यादा महिलाओं से प्रेम किया है.
    शोधकर्ताओं ने पाया कि लव-ट्राएंगल में महिलाओं की अधिक संलिप्तता का कारण यह है कि वह पुरुषों की अपेक्षा जल्द ही भावनात्मक तौर पर जुड़ जाती हैं जिसके कारण वह प्रेम और आकर्षण में भिन्नता नहीं कर पातीं. फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों के आगमन से भी लोगों की जीवनशैली बहुत हद तक प्रभावित हुई है. ऐसी साइटों पर पर अधिक समय बिताने के कारण महिलाएं विभिन्न स्वभाव और व्यक्तित्व वाले पुरुषों के संपर्क में आ जाती हैं. लगातार बात करने और एक-दूसरे के संपर्क में रहने के कारण वह उनके साथ जुड़ाव महसूस करने लगती हैं और अपनी भावनाओं पर काबू ना रख पाने के कारण वह जल्द ही लव ट्राएंगल के फेर में पड़ जाती हैं.
    इस शोध की सबसे हैरान करने वाली स्थापना यह है कि अधिकांश लोग यह मानते हैं कि एक समय में दो या दो से अधिक लोगों से प्यार करना और उनके साथ संबंध बनाना कोई गलत बात नहीं हैं. व्यक्ति चाहे तो वह दो लोगों से प्यार कर सकता है.
    महिलाओं के विषय में एक और बात सामने आई है कि वे अधिक आमदनी वाले पुरुषों की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं. धन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए महिलाएं आर्थिक रूप से सुदृढ़ पुरुष को मना नहीं कर पातीं.
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रविवार, 18 सितंबर 2016

दुनिया कैसे बनी,हम कहा से आये है रहस्य जाने आप भी।How did the world, we have come to say to you the secret.

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why are we here ? Where we came from
दुनिया कैसे बनी,हम कहा से आये है रहस्य जाने आप भी।How did the world, we have come to say to you the secret.


हम यहां क्यों हैं ? हम कहां से आए हैं ?----स्टीफिन हाकिंग--stephen hawking in hindi

 सेंट्रल अफ्रीका के बोशोंगो लोगों के मुताबिक, मानव जाति के आगमन से पहले दुनिया में केवल तीन चीजें थीं, गहरा अंधेरा, पानी और महान देवता बुंबा। एक दिन बुंबा के पेट में तेज दर्द उठा जिससे उन्हें उल्टी हुई। इस उल्टी के साथ सूरज बाहर निकल पड़ा। सूरज की तेज गर्मी से कुछ पानी सूख गया, जिससे जमीन सामने आई। लेकिन पेट से सूरज के निकलने के बावजूद बुंबा की तबीयत ठीक नहीं हुई और एक के बाद उल्टियों के साथ उनके मुंह से चंद्रमा, सितारे और उसके बाद तेंदुए, मगरमच्छ, कछुए और अंत में मानव निकल पड़े।

सृष्टि और जीवन की शुरुआत को लेकर अलग-अलग संस्कृतियों में प्रचलित मिथकों में से ये भी एक मिथ है। लेकिन ये सभी मिथक ऐसे बहुत से सवालों से जूझते रहे हैं, जिनके जवाब तलाशने की कोशिश हम अब भी कर रहे हैं। अब जाकर हम पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि इन मूलभूत सवालों के जवाब पौराणिक संदर्भों में नहीं बल्कि साइंस में छिपे हैं। अपने अस्तित्व से जुड़े रहस्यों की बात करें तो इसके पहले वैज्ञानिक साक्ष्य की खोज करीब 92 साल पहले की गई थी, जब 1920 में एडविन हब्बल ने लॉस एंजिल्स काउंटी में मौजूद माउंट विल्सन ऑब्जरवेटरी के 100 इंच टेलिस्कोप से अपने मशहूर ऑब्जरवेशंस की शुरुआत की थी। आकाशगंगाओं से आ रही रोशनी को माप कर हब्बल उनकी गति की गणना कर सके। उन्होंने देखा कि कुछ आकाशगंगाएं हमारे पास आ रही हैं, जबकि कुछ हमसे दूर छिटकती चली जा रही हैं। हब्बल ये देखकर आश्चर्य से भर उठे थे कि करीब सभी आकाशगंगाएं गतिशील हैं। उन्होंने देखा कि ज्यादा फासले वाली आकाशगंगाएं ज्यादा तेज गति से दूर भाग रही हैं। गतिशील और लगातार फैलते जा रहे ब्रह्मांड की खोज 20वीं सदी की सबसे महान खोज है। इस खोज ने ब्रह्मांड के बारे में सदियों से जारी बहस की दिशा ही मोड़ दी। लोग अब ये सोंचने पर मजबूर हो गए कि क्या ब्रह्मांड की कोई शुरुआत भी थी? अगर आकाशगंगाएं आज दूर भाग रही हैं, तो शायद कल वो एक-दूसरे के करीब थीं। अगर उनकी गति स्थिर थी, तो अलमारी में तहाकर रखे गए कपड़ों की तरह, अरबों साल पहले उन्हें एक-दूसरे के ऊपर होना चाहिए था। क्या ब्रह्मांड की शुरुआत इसी तरह से हुई ?

ब्रह्मांड की शुरुआत का विचार लोगों को कभी ठीक नहीं लगा। उदाहरण को तौर पर मशहूर यूनानी दार्शनिक अरस्तु को यकीन था कि ब्रह्मांड का अस्तित्व शाश्वत है। अमरता का विचार हमेशा से लोगों को कहीं ज्यादा विश्वसनीय लगता है, बजाय इसके कि किसी चीज का निर्माण हुआ। निर्माण या शुरुआत का विचार इसलिए भी अखरता था क्योंकि उस वक्त लोग इसकी तुलना बाढ़ या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से बर्बाद होते शहरों और फिर से उनके पुनर्निर्माण से करते थे। यानि अगर ब्रह्मांड की शुरुआत हुई है, तो इसका मतलब ये भी हुआ कि इससे पहले उसका खात्मा हो चुका था। शाश्वत ब्रह्मांड में यकीन की वजह धार्मिक भी थी, कोई इस विश्वास को तोड़ना नहीं चाहता था कि एक सर्वशक्तिमान बाहरी एजेंसी ‘ईश्वर’ ने ब्रह्मांड को उत्पन्न किया और इसे वर्तमान शक्ल बक्श दी।

अब अगर आप कहें कि ब्रह्मांड की शुरुआत हुई थी, तो तुरंत ये सवाल उठेगा कि उस शुरुआत से पहले क्या हुआ था ? मैं पूछना चाहूंगा कि इस ब्रह्मांड को रचने से पहले ईश्वर क्या कर रहा था? क्या वो ऐसे सवाल पूछने वाले लोगों के लिए नर्क तैयार करने में व्यस्त था ? ब्रह्मांड की शुरुआत हुई या नहीं जर्मन दार्शनिक इमानुएल कांट के लिए ये बहुत बड़ा सवाल था। उनका मानना था कि दोनों ही मान्यताओं में कई तार्किक अंतरविरोध मौजूद हैं। अगर मान लें कि ब्रह्मांड की शुरुआत हुई थी, तो फिर उसने शुरुआत के लिए अनंत काल तक इंतजार क्यों किया ? कांट ने इसे ‘थेसिस’ का नाम दिया। दूसरी तरफ, अगर ब्रह्मांड का वजूद शाश्वत काल से है, तो फिर वर्तमान स्थिति तक आने के लिए इसने अनंत समय क्यों लिया? कांट ने इस विचार को ‘एंटीथेसिस’ कहा। ‘थेसिस’ और ‘एंटीथेसिस’ दोनों ही कांट की परिकल्पनाएं थीं, जैसा कि उस वक्त के और भी लोगों का मानना था कि समय निरपेक्ष और अपरिवर्तनशील है। यानि समय अनंत भूतकाल से होते हुए अनंत भविष्य की ओर बढ़ा चला जा रहा है। लोगों का मानना था कि समय इससे अप्रभावित है कि उसकी पृष्ठभूमि में किसी ब्रह्मांड का अस्तित्व है या नहीं।stephen hawking in hindi

ब्रह्मांड के उदभव को समझने के लिए हमें जनरल थ्योरी आफ रिलेटिविटी को क्वांटम थ्योरी के साथ मिलाने की जरूरत है। ‘सम ओवर हिस्टिरीज’ का फेनमैन का आइडिया, ऐसा करने का सबसे बढ़िया तरीका नजर आता है। रिचर्ड फेनमैन विविधताओं से भरे काफी रंगीले इंसान थे। वो पैसाडीना के एक स्ट्रिप ज्वाइंट में बोंगो ड्रम्स भी बजाते थे और कैलीफोर्निया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी में ब्रिलियंट फिजिसिस्ट भी थे। उन्होंने बताया कि कोई सिस्टम स्थिति A से स्थिति B तक जाने में हर मुमकिन रास्ते या ‘हिस्ट्री’ की मदद लेता है।

आइंस्टीन की जनरल थ्योरी आफ रिलेटिविटी ने टाइम और स्पेस को स्पेस-टाइम के रूप में एकसाथ जोड़ दिया। लेकिन टाइम स्पेस से अलग है, ये एक गलियारे के जैसा है, जिसकी या तो एक शुरुआत होती है और एक अंत, या फिर वो हमेशा के लिए गतिमान रहता है। बहरहाल, जब कोई जनरल रिलेटिविटी को क्वांटम थ्योरी के साथ मिलाता है, जैसा कि जिम हर्टल और मैंने किया, तो हमने देखा कि चरम स्थितियों में टाइम, स्पेस में एक दूसरी दिशा की तरह बर्ताव करने लगता है।

मैंने और जिम हर्टल ने ब्रह्मांड की रचना खुद-ब-खुद और सूक्ष्म स्तर से (the spontaneous quantum creation of the universe) होने की जो तस्वीर विकसित की है, वो काफी हद तक खौलते पानी की ऊपरी सतह पर बनते-बिगड़ते भाप के बुलबुलों जैसी है। खौलते पानी की सतह को ध्यान से देखिए, वहां भाप के कई सारे छोटे-बड़े बुलबुले बनते-बिगड़ते नजर आएंगे। छोटे बुलबुले अगले ही पल खत्म हो जाते हैं, जबकि कुछ बड़े बुलबुले लंबे समय तक खुद को बचा ले जाते हैं। आइडिया ये है कि ब्रह्मांड की सबसे संभावित ‘हिस्ट्रीज’ इन बुलबुलों के सतह के जैसी होगी। बहुत से छोटे बुलबुले बनेंगे, लेकिन वो अगले ही पल गायब भी हो जाएंगे। इन्होंने एक सूक्ष्म ब्रह्मांड को विस्तार देने में योगदान तो दिया, लेकिन फिर से खत्म भी हो गए, क्योंकि इनका आकार बेहद छोटा था। इन्हें संभावित वैकल्पिक ब्रह्मांड कहा जा सकता है, लेकिन ये कोई खास महत्व के नहीं थे, क्योंकि ये उतनी देर तक अपना अस्तित्व बनाए नहीं रख सके ताकि आकाशगंगाओं, सितारों और किसी बुद्धिमान सभ्यता को जन्म दे सकें। इन नन्हें बुलबुलों में से कुछ ने अपना आकार इतना बढ़ा लिया कि वो फिर से फूट जाने से खुद को बचा सकें। लगातार बढ़ती रफ्तार के साथ इन बुलबुलों का फैलना जारी है, हमारा ब्रह्मांड भी ऐसा ही एक बुलबुला है, जिसमें हम रह रहे हैं।
पिछले सौ साल में कॉस्मोलॉजी ने बहुत शानदार विकास किया है। द जनरल थ्योरी आफ रिलेटिविटी और ब्राह्मांड के लगातार फैलने की खोज ने ब्रह्मांड की अनादि और अनंत वाली पुरानी तस्वीर उखाड़ फेंकी है। जनरल रिलेटिविटी तो कहती है कि ब्रह्मांड और खुद समय की शुरुआत भी बिगबैंग में हुई थी। इसका एक आंकलन ये भी है कि ब्लैकहोल्स में खुद समय का भी खात्मा हो जाएगा। कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और ब्लैक होल्स के ऑब्जरवेशंस से इन गणनाओं की पुष्टि हुई है। ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ और खुद वास्तविकता को समझने में ये बहुत बड़ा योगदान है।
हालांकि जनरल थ्योरी आफ रिलेटिविटी का आंकलन है कि भूतकाल में पीरियड आफ हाई करवेचर से ब्रह्मांड आया होगा। लेकिन ये नहीं बताती कि ब्रह्मांड बिगबैंग से उत्पन्न कैसे हुआ? इसलिए जनरल रिलेटिविटी अपने आप में कॉस्मोलॉजी के इस केंद्रीय सवाल का जवाब नहीं दे सकती कि ब्रह्मांड जैसा दिखता है, वैसा क्यों है? लेकिन अगर जनरल रिलेटिविटी को क्वांटम थ्योरी के साथ मिला दिया जाए, तो ये बताना संभव है कि ब्रह्मांड की शुरुआत कैसे हुई।
बिगबैंग के साथ ब्रह्मांड का जन्म हुआ और अगले ही क्षण से ये फैलने लगा। हम ये जान चुके हैं कि शुरुआती ब्रह्मांड का विस्तार बेहद तीव्र गति के साथ हुआ। सेकेंड के बेहद सूक्ष्म हिस्से भर में ब्रह्मांड का आकार दोगुना हो गया था। लगातार प्रसार से ब्रह्मांड का आकार बहुत विशाल हो गया और निर्माण-पुर्ननिर्माण प्रक्रिया से आकाशगंगाएं समायोजित होने लगीं। हालांकि ये पूरी तरह से एक जैसा नहीं था, अलग-अलग जगहों पर विभिन्नताएं भी नजर आने लगीं। इन विभिन्नताओं से शुरुआती ब्रह्मांड के तापमान में हल्के अंतर का जन्म हुआ, जिसे हम कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड में देख सकते हैं।
तापमान में इस अंतर का मतलब ये था कि ब्रह्मांड के कुछ इलाकों के विस्तार की गति कुछ कम है। धीमी गति वाले इन इलाकों का विस्तार थम गया और पुर्निनिर्माण की प्रक्रिया से वहां आकाशगंगाओं और सितारों ने जन्म लिया और इस तरह वहां बाद में सौरमंडल भी बनने लगे। उस आदि ब्रह्मांड के वक्त से लेकर अब तक ब्रह्मांड के कोने-कोने से गुरुत्व तरंगें निर्बाध विचरण करती हुई हम तक पहुंच रही हैं। जबकि इसके विपरीत, प्रकाश मुक्त इलेक्ट्रॉन्स कि जरिए कई बार बिखरता रहता है और रोशनी का ये बिखराव तब तक जारी रहता है, जब तक कि तीन लाख साल बाद इलेक्ट्रॉन्स फ्रीज नहीं हो जाते।

हमारा अस्तित्व ब्रह्मांड की इन विभिन्नताओं से सीधे-सीधे जुड़ा हुआ है। अगर शुरुआती ब्रह्मांड पूरी तरह एक जैसा और बिना किसी हलचल वाला होता तो न तो सितारे जन्म लेते और न आकाशगंगाएं बनतीं। ऐसे में जीवन की शुरुआत और उसका विकास कैसे होता? हमारी संपूर्ण मानव जाति और जीवन के ये विभिन्न स्वरूप सब के सब बिगबैंग के बाद ब्रह्मांड की उसी आदि हलचल की ही देन हैं। अब भी हम युगों पुराने इन महान सवालों के जवाब की तलाश में आगे बढ़ रहे हैं और उत्तर के बेहद करीब तक भी जा पहुंचे हैं, कि हम यहां क्यों हैं ? हम कहां से आए हैं ? सवाल ये भी, कि ये सवाल पूछने वाले क्या हम अकेले हैं?

                                                                                     stephen hawking in hindi लेखक स्टीफिन हाकिंग ------    ये भी देखे ---संसार के 10 अजीब रहस्ये हिंदी में जाने

शनिवार, 17 सितंबर 2016

किन्नर क्या होते है केसे बनते है -What are Trans How is made

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किन्नर जब भी हमे दिखाई देते है तो हमारे मन में अजीब ही जिज्ञासा होती है की ये कोन होते हे और केसे होते है . इन्ही सवालो का जबाब हम लेकर आये हे -
किन्नर क्या होते है केसे बनते है -What are Trans How is made

1. किन्नर कौन है पहले ये जान ले
किन्नररों की दुनिया एक अलग तरह की दुनिया है जिनके बारे में आम लोगों को जानकारी कम ही होती है। इसके अलावा किन्नारों पर न ही ज्यादा शोध किया गया है। भारत में बीस लाख से ज्यादा किन्नहर है और निरंतर इनकी संख्या घट रही है, मगर फिर भी हिंजड़े को संतान मिल ही जाती है।

2. किन्नर की संतान का क्या होता है
ये उनका लालन-पालन बड़े अच्छे ढंग से करते हैं। जहां तक एक से बच्चे को बिरादरी में सम्मिलित करने की बात है तो बनी प्रथा के अनुसार बालिग होने पर ही रीति संस्कार द्वारा किसी को बिरादरी में शामिल किया जाता है।

3. रीती, रिवाज़ और किन्नर केसे होते है
रीति संस्कार से एक दिन पूर्व नाच गाना होता है तथा सभी का खाना एक ही चुल्हे पर बनता है। अगले दिन जिसे किन्नदर बनना होता है, उसे नहला-धुलाकर अगरबत्ती और इत्र की सुगंध के साथ तिलक किया जाता है।

4. किन्नर अलग दुनिया में रहते है
शुद्धिकरण उपरांत उसे सम्मानपूर्वक ऊंचे मंच पर बिठाकर उसकी जननेन्द्रिय काट दी जाती है और उसे हमेशा के लिए साड़ी, गहने व चूडिय़ां पहनाकर नया नाम देकर बिरादरी में शामिल कर लिया जाता है।

5. हमारी ख़ुशी मे शामिल होते है किन्नर
किसी के घर विवाह है या पुत्र रतन की प्राप्ति की सूचना मौहल्लों में छोड़े मुखबिरों से उन्हें मिल जाती है। कुछ जानकारी नगर परिषद में जन्म-मरण रिकार्ड से नव जन्में बच्चे की जानकारी मिल जाती है, जबकि शादी का पता विभिन्न धर्मशालाओं एवं मैरिज पैलेस की बुकिंग से चल जाता है।

6. हमसे अलग होते है  किन्नर
मनुष्य के रूप में जन्म लेने के बावजूद किन्नर अभिशप्त जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। किन्नरों के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव से उनका मनोबल टूटता है। उनके लिए न रोजगार की व्यवस्था है और न ही उनकी खुद की कोई परिवार जैसी इकाई है। सामाजिक भेदभाव की यह स्थिति समाप्त होनी चाहिए।

7. किन्नर से बुरा बरताव किया जाता है
समय-समय पर दुनिया भर में विभिन्न मंचों पर मानवाधिकार उल्लंघन और मानवाधिकारों की बदतर स्थिति की चर्चा की जाती है, लेकिन कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित और समाज की प्रताडऩा के शिकार किन्नरों की स्थिति पर बहुत कम लोगों का ध्यान जाता है।

8. किन्नरों का विकास जरूरी है
तमिलनाडु में किन्नरों के विकास के लिए सरकार द्वारा एक बोर्ड का भी गठन किया गया है। वास्तव में इनकी बातों में एक पीड़ा है जिसके अहसास से हमारा समाज कोशों दूर है। देश की आजादी को 64 साल बीत गए हैं, लेकिन आज भी हमारे समाज का एक तबका आजादी के बाद मिले कई अधिकारों से वंचित है।

9. समाज किन्नर को अपनाता नही
आज किन्नर जैसा कोई देश नहीं है लेकिन किन्नर देश में रहते जरूर हैं। किन्नरों का अस्तित्व दुनिया के हर देश में है समाज में उनकी पहचान भी है फिर भी उन्हें आम इंसानों की तरह नहीं समझा जाता, उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं दिया जाता, उन्हें सरकार कोई आरक्षण नही देती, व्यवसायी वर्ग उन्हें नौकरी नहीं देता और तो और गाने बजाने और नाचने के अलावा कोई उनसे दोस्ती नहीं करता, उनसे बात नहीं करता क्योंकि वो समाज में हेय दृष्टि से देखे जाते हैं मानो वो कोई परग्रही हों आखिर क्यों किन्नर एक अजूबा है? क्यों उन्हें इस तरह सामाजिक तिरस्कार झेलना पड़ता है। क्यों समाज उनके प्रति लचीला रुख नहीं अपनाता? सवाल बहुत से हैं लेकिन उत्तर नहीं।

10. किन्नर को खबर पहुचने पर देते है कमीशन
किन्नररों तक खबर पहुंचाने वाले को तयशुदा कमीशन भी मिलता है। किन्‍नर सरकार और समाज से सिर्फ इतना चाहते है कि समाज उनका मजाक न उड़ाए और न ही घृणा की दृष्टि से देखें, जबकि समाज के प्रति ऐसी सम्मानित भावना उपरांत भी किन्न र समाज में तिरस्कृत तथा बहिष्कृजत है।

11. किन्नर को समाज में अपनाना चाहिए
इनके आधे अधूरे पन की वजह से भले ही समाज इन्हें अपना अंग मानने से इंकार करता रहे, मगर वास्तविकता यही है कि ये समाज के अंग है। अंधे, कोढ़ी और अपंग लोगों की तरह किन्न,र भी लाचार है, जबकि किन्नेरों को तिरस्कार व उपेक्षा की नहीं, बल्कि प्यार और सम्मान देने की जरूरत है।
12. किन्नरों की शव यात्रा केसे होती है
किन्नउरों के बारे में कई प्रकार की रस्मे आज भी हमारे समाज में मौजूद है, जैसे कि हिंजड़ों की शव यात्राएं रात्रि को निकाली जाती है। शव यात्रा को उठाने से पूर्व जूतों-चप्पलों से पीटा जाता है। किन्निर के मरने उपरांत पूरा हिंजड़ा समुदाय एक सप्ताह तक भूखा रहता है।

13. शव यात्रा अब वेसी नही
एक वर्ग इन्हे भ्रांतियों मानता है। इस संबंध में किन्नधर का दूसरा वर्ग भी इन रस्मों को इंकार तो नहीं करते, मगर इससे नाममात्र ही बताते है। भारत के किन्न रों के दर्दनाक जीवन की अकाक्षाओं, संघर्ष और सदस्यों की अनदेखी करना ज्यादती होगी। किन्नतरों के संबंध में जानकारी मिली है कि कुछ किन्नसर जन्मजात होते है, जबकि कुछ ऐसे है कि पहले पुरूष थे, परंतु बध्याकरण की प्रकिया से किन्नसर बने है।

14. किन्नरों को कोई नोकरी नही देता
अपनी आजीविका चलाने वाले किन्न र विवाह-शादी या बच्चा होने पर नाच-गाना करके बधाई में धनराशि व वस्त्र इत्यादि लेते है, जबकि त्यौहारों के अवसर पर दुकानों इत्यादि सेभी धनराशी एकत्रित कर लेते है।

15. गुरू शिष्य की परंपरा होती है किन्नरो में
हमारे समुदाय में गुरू शिष्य जैसे प्राचीन परम्परा आज भी यथावत बनी हुई है। किन्नर समुदाय के सदस्य स्वयं को मंगल मुखी कहते है क्योंकि ये सिर्फ मांगलिक कार्यो में ही हिस्सा लेते हैं मातम में नहीं । हमारे समाज कि सबसे बड़ी विशेषता है मरने के बाद हम मातम नहीं मानते हैं। हमारे समाज में मान्यता है कि मरने के बाद इस नर्क रूपी जीवन से छुटकारा मिल जाता है। इसीलिए मरने के बाद हम खुशी मानते हैं । ये लोग स्वंय के पैसो से कई दान कार्य भी करवाते हंै ताकि पुन: उन्हें इस रूप में पैदा ना होना पड़े। लेकिन यह एक विडंबना है कि सामाजिक विधिक संदर्भ में व्यक्ति की परिभाषा में केवल पुरूष व स्त्री को ही शामिल किया जाता रहा है।

16. महाभारत -पौराणिक काल मे किन्नर?
पौराणिक काल के काफी बाद महाभारत काल में भी अपने अज्ञातवास में अर्जुन का वृहन्नला का रूप धरना भी यही साबित करता है कि उभयलेंगिकों के लिए समाज में पर्याप्त स्थान था। महाभारत का ही शिखंडी जो नारी रूप में पैदा हुआ लेकिन एक पुरुष के रूप में पला और बढ़ा। परंतु आज समाजिक विभेद के कारण ये समाज अपने पक्ष से भटक रहा है। आवश्यकता है एक पहल की ताकी इन्हें भी समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।

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               --महिला नागा साधू रहस्यमय दुनिया

रविवार, 14 अगस्त 2016

3500 साल पुरानी शापित फिरौन की लाश का रहस्य-firon ki shaapit lash ka rahasya

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3500 साल पुरानी शापित फिरौन की लाश का रहस्य-firon ki shaapit lash ka rahasya1898 मे जब मिस्र मे लाल सागर के किनारे एक अति प्राचीन मानव शरीर मिला जो आश्चर्यजनक रूप से हज़ारों साल गुजर जाने के बाद भी सुरक्षित था, सभी को इस मृत शरीर का रहस्य जानने की उत्सुकता रहती थी इसीलिए इस शरीर को 1981 मे चिकित्सकीय खोज के लिए फ्रांस मंगवाया गया और इस शरीर पर डाक्टर मौरिस ने परिक्षण किये -
3500 साल पुरानी शापित फिरौन की लाश का रहस्य-firon ki shaapit lash ka rahasya

परीक्षणों से डाक्टर मौरिस ने निष्कर्ष निकाले कि जिस व्यक्ति की ये मृत देह है उसकी मौत समुद्र मे डूबने के कारण हुई थी क्योंकि डाक्टर मौरिस को उस मृत शरीर मे समुद्री नमक का कुछ भाग मिला था, साथ ही ये भी पता चला कि इस व्यक्ति को डूबने के कुछ ही समय बाद पानी से बाहर निकाल लिया गया था …. लेकिन ये बात डाक्टर मौरिस के समक्ष अब भी एक पहेली थी कि आखिर ये शरीर अपनी मौत के हजारो साल बाद भी सड़ गल कर नष्ट क्यों नहीं हुआ ….
तभी उन्हें अपने एक सहकर्मी से पता चला कि मुस्लिम लोग बिना जांच रिपोर्ट के सामने आए ही ये कह रहे हैं कि ये व्यक्ति समुद्र मे डूब कर मरा था, और ये मृत देह उस फिरऔन की है जिसने अल्लाह के नबी हजरत मूसा (अलैहि सलाम) और उनके अनुयायियों का कत्ले आम कराना चाहा था, क्योंकि फिरऔन की लाश के सदा सुरक्षित रहने और उसके समुद्र मे डूब कर मरने की बात उनकी पवित्र पुस्तक कुरान मे लिखी है जिसपर वो विश्वास करते हैं …


मौरिस को ये सोचकर बहुत हैरत हुई कि इस मृत देह के समुद्र मे डूब कर मरने की जिस बात का पता मैंने बड़ी बड़ी अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से लगाया वो बात मुस्लिमों को पहले से कैसे मालूम चल गई ? और जबकि इस लाश के अपनी मृत्यु के हजारों साल बाद भी नष्ट न होने का पता 1981से महज़ 83 साल पहले चला है, तो उनकी कुरान मे ये बात 1400 साल पहले कैसे लिख ली गई ??
इस शरीर की मौत के हजारों साल बाद भी इस शरीर के बचे रह जाने का कोई वैज्ञानिक कारण डाक्टर मौरिस या अन्य वैज्ञानिक जब पता न लगा सके तो इसे ईश्वर के चमत्कार के अतिरिक्त और क्या माना जा सकता था


बाइबल में भी है जिक्र -
बाइबल के आधार पर भी मृत देह के मिलने की लोकेशन और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर उस मृत शरीर की लगभग 3000 वर्ष की उम्र होने के कारण मौरिस को ये विश्वास तो हो रहा था कि ये शरीर फिरऔन का ही है, अत: डाक्टर ने फिरऔन के विषय मे अधिक जानने के लिए तौरात शरीफ (बाइबल : ओल्ड टेस्टामेण्ट) का अध्ययन करने का निर्णय किया, लेकिन तौरात मे उन्हें सिर्फ इतना लिखा हुआ मिला कि फिरऔन और उसकी फौज समुद्र मे डूब गए और उनमें से एक भी नहीं बचा . लेकिन फिरऔन की लाश का कहीं जिक्र तक न था …
मौरिस के ज़हन मे कई सवाल खटकते रहे, और आखिरकार वो इन सवालों के जवाब हासिल करने सऊदी अरब मे चल रही एक बड़ी मेडिकल सेमिनार मे हिस्सा लेने पहुंच गए, जहाँ उन्होंने फिरऔन की मृत देह के परीक्षण मे जो पाया वो बताया, उसी वक्त डाक्टर मौरिस की बात सुनकर एक मुस्लिम डाक्टर ने कुरान पाक खोलकर सूरह यूनुस की ये आयत पढ़कर सुना दी कि…
कुरान में भी है जिक्र -
♥ अल कुरान: “इसलिए हम तेरे जिस्म को बचा लेंगे, ताकि तू अपने बाद वालों के लिए एक निशानी हो जाए ! बेशक बहुत से लोग हमारी निशानियों की तरफ से लापरवाह रहते हैं ” - [सुरह: यूनुस:आयत-92] –

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