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मंगलवार, 3 अप्रैल 2018

मरने के बाद रावण के शव का क्या हुआ था-What happened after the death of Ravana's body

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मरने के बाद रावण के शव का क्या हुआ था-What happened after the death of Ravana's body-  Ravan ke body shav ka kya huwa tha?

रामायण में भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध का विस्तृत वर्णन है। युद्ध में श्रीराम ने रावण का वध कर दिया था और लंका का शासन विभीषण को सौंप दिया। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि रावण के शव का क्या हुआ? उसका अंतिम संस्कार कहां किया गया?

मरने के बाद रावण के शव का क्या हुआ था-What happened after the death of Ravana's body

ऐसे तमाम सवाल आज भी बरकरार हैं लेकिन श्रीलंका के अनेक लोगों का मानना है कि रावण का शव आज भी धरती पर मौजूद है। उसे ‘ममी’ बनाकर सुरक्षित रखा हुआ है जैसे मिस्र के पिरामिडों में प्राचीन काल के राजाओं के शव रखे जाते थे। श्रीलंका के पुरातत्व विभाग ने भी इस बात का जिक्र किया था।
यह ममी वहां के रागला जंगलों में रखी हुई बताई जाती है। माना जाता है कि जब रावण का वध कर दिया गया तो उसके सैनिकों ने उसे पुनर्जीवित करने के अनेक प्रयास किए, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली।
वे अपने प्रिय राजा का शव जलाना नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने शव को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न रसायनों का इस्तेमाल किया और उसे ममी के रूप में रख दिया।
माना जाता है कि रागला के जंगलों में रावण की ममी आज भी रखी हुई है। यह काफी घना जंगल है जहां अनेक हिंसक पशु रहते हैं। ममी के आसपास के इलाके में कई जहरीले सांप निवास करते हैं।
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि ममी के नीचे रावण का खजाना है। हालांकि कई लोग इस बात से सहमत नहीं हैं, क्योंकि कि इतने वर्षों तक किसी खजाने की जानकारी होने के बाद वहां उसका शेष रहना संभव नहीं लगता।
रावण बहुत ताकतवर और पराक्रमी था। माना जाता है कि रावण की ममी की लंबाई करीब 18 फीट है। इसके अलावा भी श्रीलंका में रावण से जुड़े अनेक प्रमाण बताए जाते हैं। श्रीलंका के लोग अपने पूर्वजों से ये बातें सुनते आए हैं।
हो सकता है कि इनमें कई बातें विज्ञान की कसौटी पर खरी न उतरें लेकिन वहां के लोगों की अपनी मान्यताएं हैं और मान्यताएं प्रायः किसी वैज्ञानिक कसौटी की परवाह नहीं करतीं।

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

लड़कियो में भी होता है शीघ्रपतन स्वप्नदोष-Wet dreams and premature ejaculation occurs in girls

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यह बहुत कम लोगों को पता है, एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के मनोरोग चिकित्सक डॉक्टर एलेन लान कहते हैं- Premature ejaculation occurs in girls in hindi-लड़कियो में भी होता है शीघ्रपतन  स्वप्नदोष-Wet dreams and premature ejaculation occurs in girls-night fail


लड़कियो में भी होता है शीघ्रपतन।Premature ejaculation occurs in girls,लड़की का वीर्य ,लड़की का नाईट फेल  ,लड़की की योनी ,कुछ महिलाएं रात को तीव्र चरम सुख महसूस करके जाग जाती हैं, जिस में कोई स्खलन तो नहीं होता लेकिन योनी नम हो जाती हैलड़कियो ।शीघ्र स्खलन की दवा का नाम शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक दवा शीघ्र स्खलन की अंग्रेजी दवा शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक उपाय शीघ्र स्खलन की आयुर्वेदिक दवा शीघ्र स्खलन की होम्योपैथिक दवा हिंदी में जल्दी डिस्चार्ज समस्आ युर्वेदिक चिकित्सा शीघ्र स्खलन का इलाज पतंजलि दवा लडकियों की योनी का पानी ,लड़की का वीर्य ,ओरत स्त्री का जल्दी झड़ना ,जल्दी वीर्यपात ,

कुछ महिलाएं रात को तीव्र चरम सुख महसूस करके जाग जाती हैं, जिस में कोई स्खलन तो नहीं होता लेकिन योनी नम हो जाती हैलड़कियो ।

फिर भी महिलाओं में रात्रि-चरम मुख्य तौर पर एक रहस्य ही है, डॉक्टर लान कहते हैं, जो महिला और पुरुषों की कामोत्तेजना में अंतर के अध्यन विशेषज्ञ हैं।

"हम महिलाओं के अनुभवों के बारे में अधिक क्यूं नहीं जानते? क्योंकि स्त्रियों के जननांग शरीर के भीतर होते हैं। वो पुरुषों की तरह अपने जननांगों में हो रही प्रतिक्रिया को देख व महसूस नहीं कर सकती हैं।"

स्वस्थ

पुरुषों में, जब भी स्वप्नदोष या रात्रि-स्खलन होता है, तो बिस्तर पर गीलेपन की वजह से नींद टूटती है तो उन्हें पता चल जाता है। उन्हें लगता है कि शायद उन्होंने पेशाब कर दिया लेकिन वह वीर्य होता है। यह अपने आप होता है, और अधिकतर बिना यौन सम्बंधित स्वप्न होते है।

"पुरुषों में रात भर में करीब 4 से 5 बार लिंग उत्तेजित होता है, यह आँखों के तीव्र गतिविधि से जुड़ा होताहै," डॉक्टर लान का कहना है। "हमें लगता है यह इसलिए होता है कि जननांगों के लिए नियमित रक्त संचालन अच्छा होता है - यह ऊतकों के लिए स्वस्थ्य प्रद होता है।"

घर्षण  या दबाव

यही महिलाओं पर भी लागू होता है। "सोते समय योनी पर होने वाली प्रतिक्रियाओं के अध्यन में हमें वही पुरुषों में होने वाली उत्तेजना का पैटर्न नज़र आता है।"

हालाँकि महिलाओं के जननांगों में रक्त संचार बढ़ता है, कामोन्माद के लिए थोड़े उत्तेजना की ज़रुरत होती है।

"मानो कि आप इस घटनाक्रम में एक महिला हैं। अगर आपकी संवेदनशीलता की सीमा कम है, तो आप को कामोन्माद प्राप्ति के लिए जननांगों के आसपास थोड़े घर्षण या दबाव की ज़रुरत होगी। क्यूंकि आप अर्ध-निंद्रा में होते हैं इसलिए यह स्वाभाविक भी है।
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  • रविवार, 17 दिसंबर 2017

    आरुषि हत्या कांड ,क्या हुवा उस रात,,,Aarushi murder case, what happened that night ,,,

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    आरुषि का पूरा सच -आरुषि कौन थी -आरुषि कैसे मरी - एक बहुत ही साधारण सा जीवन जीने वाली एक लड़की जिसकी उसके ही माता – पिता ने बहुत बेरहमी से हत्या कर दी| इस हत्याकांड में अकेली आरुषि नहीं मारी गईथी , उसके साथ उनका नोकर हेमराज भी मारा गया था|

    आरुषि हत्या कांड ,क्या हुवा उस रात,,,Aarushi murder case, what happened that night ,,,हत्या कांड ,क्या हुवा उस रात,,,Aarushi murder case, what happened that night ,आरुषी का मर्डर ,आरुषि तलवार हेमराज मर्डर केस हत्याकांड की कहानीAarushi Talwar Hemraj hatyakand murder case in hindi, आरुषि हत्या का रहस्य (Murder mystery)आरुषि हत्याकांड निर्णय (Aarushi hatyakand result) आरुषि तलवार कैसे फुल स्टोरी आरुषि हेमराज रिलेशनशिप इन हिंदी आरुषि हत्याकांड रियल स्टोरी आरुषि की हत्या का कारण आरुषि मुरदरेड़ स्टोरी आरुषि हत्याकांड का पूरा सच आरुषि की मौत कैसे हुई आरुषि हत्याकांड का सच
    Aarushi Talwar Hemraj Banjade hatyakand murder case in hindi


    आरुषि तलवार हेमराज मर्डर केस हत्याकांड की कहानी
    Aarushi Talwar Hemraj hatyakand murder case in hindi

    भारत में बहु-प्रसिद्ध और भयावर हत्याकांड में से एक था आरुषि-हेमराज हत्याकांड| यह बहुत बड़ा और ददर्नाक हत्याकांड के रूप में अख़बार, टी.वी चेनलों व इंटरनेट के दवारा आम लोगों के सामने आया है| इस केस (case) के सबंध में सभी महत्वपूर्ण तथ्य आगे प्रस्तुत है-
        पीड़ित व्यक्ति कौन थे?
        हत्या का रहस्य
        वारदात की प्रमुख तथ्य
        निर्णय

    पीड़ित व्यक्ति कौन थे?

    नोएडा,भारत के सेक्टर नंबर 25 (जलवायु विहार) में रहने वाली महज 14 साल की नाबालिक लड़की, जिसकी बेहरहमी से हत्या कर दी गयी| इसके साथ ही उसी घर में काम कर रहे नौकर हेमराज (45 वर्ष) की भी हत्या कर दी गई| इस तरह से यह दोहरे हत्याकांड के रूप में सामने आया|

    आरुषि हत्या का रहस्य (Murder mystery)

    15-16 मई,2008 की रात मे एक रहस्यमय हत्याकांड तब हुआ, जब की आरुषि के माता-पिता घर में ही मौजूद थे| आरुषि के पिता ने उसको मारने का आरोप उस घर के नौकर हेमराज पर लगाते हुए, एक एफ.आई.आर (FIR) पुलिस थाने मे दर्ज कराई|

    जिसमे सारा शक उस नौकर हेमराज की तरफ था| मीडिया के माध्यम से लोगो के सामने यह खबर तक सामने आयी, इस वारदात में हेमराज के साथ उसके 4 साथी के भी शामिल होने की शंका जताई जा रही थी|

    इस वारदात ने मोड़ तब लिया जबकि, हेमराज का शव भी उस बिल्डिंग की छत से बरामत हुआ| लम्बे समय तक बहुत छानबीन चली, जिसके चलते कई अनजाने से रहस्य समय-समय पर सामने आये| कहा जाता है आरुषि की हत्या इतने निर्दयी तरीके से हुई की उसकी आवाज तक किसी को नही आयी|

    चर्चित और चलित खबरों के मुताबिक आरुषि के पिता- डॉ.राजेश तलवार और माता- डॉ. नूपुर तलवार को शक था कि, बेटी (आरुषि) और नौकर (हेमराज) के अवैधानिक सम्बन्ध है|

    जिसके चलते तलवार दंपति ने आरुषि और हेमराज की गोल्फ-स्टिक, सर्जरी-ब्लेड से हत्या की |

    वारदात के प्रमुख तथ्य

        राजेश तलवार ने वारदात और उसकी सचाई जाने बिना, आवेश मे आकर 16 मई 2008 को, आरुषि और हेमराज की हत्या को अनजाम दे दिया|

    जिन स्त्रियों में हों ऐसे लक्षण उन्हें शास्त्रों में शुभ नहीं माना गया है-     अगले दिन 17 मई 2008 को हेमराज की death body बिल्डिंग की छत से मिली|

        जाँच के चलते 23 मई 2008 को डॉ. तलवार की गिरफ़्तारी हुई, और डॉ. तलवार मुख्य आरोपी माने गये|

        Case की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई (CBI) ने जाँच शुरू कर FIR दर्ज की|

        सबूतों के ना होने के कारण 12 जुलाई 2008 को घोषित हुए आरोपी को छोड़ दिया गया|

        तलवार दंपति व शक के आधार पर आरोपियों पर मुकदमा चला | कई जाँच और सत्यापन भी हुए|

        लगभग ढाई वर्ष (30 माह) की कार्यवाही के बाद CBI की जाँच में कुछ न मिलने के कारण, CBI ने अपनी खात्मा (क्लोज़र) रिपोर्ट कोर्ट को दी|

        इस दोहरे हत्याकांड में नोएडा पुलिस की लापरवाही, CBI जांच में सबूतों का ना मिलना, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को मिटाने की कोशिश की गयी|

        इस गंभीर अपराध को देखते हुए एक बार पुनः जांच करने की अनुमति ली गयी तथा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने 6 जनवरी 2012 को जांच के पुनः आदेश पारित किये|

        यह मामला गाजियाबाद की नयी सीबीआई जांच समिति विशेष अदालत के द्वारा चला|

        पुनः जांच के दौरान कई ऐसे सबूत व गवाह प्रस्तुत हुए जो कि पूरी तरह से सिद्ध कर रहे थे की अपराध हुआ है|इसके विपरित आरोपी के पास ऐसा कोई सबूत न था जिससे वो सिद्ध कर सके की वह निर्दोष है|

        सभी तथ्यों मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. तलवार दंपति पर

        भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा (Section) 302/34 (समान उद्देश्य से हत्या करना)
        इसके साथ ही IPC की Section 201, (साक्ष्य को छिपाना)
        IPC की Section 203 (फर्जी रिपोर्ट दर्ज करना)

    जैसे गंभीर आरोपों की पुष्टि हुई|

        आरोपियों की पुनः गिरफ़्तारी हुई, जांच हुई, गवाहों के बयान हुए सभी सबूतों और गवाहों को देखते हुए अदालत अपने अंतिम निर्णय तक पहुची |

    आरुषि हत्याकांड निर्णय (Aarushi hatyakand result)

    इतने संगीन अपराध के लिए न्यायालय ने आरुषि के माता-पिता को भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की मुख्य धारा 302 और अन्य धाराओं के तहद उम्र कैद की सजा और जुर्माना लगाया गया|
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    बुधवार, 13 दिसंबर 2017

    कैसे बनी पोर्न स्टार सन्नी लिओन जाने पूरी दास्ताँ Porn star Sunny Leone How did the full story

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    Sunny leone… एक नाम जिसे गूगल के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दबंग सलमान खान से भी ज्‍यादा सर्च किया गया। लेकिन क्‍या है इस नाम के पीछे का सच। Sunny leone का असली नाम करनजीत कौर वोहरा है। लेकिन उनकी पहचान पोर्न स्‍टार और अब फिल्‍म स्‍टार सनी लियोनी के तौर पर है।
    कैसे बनी पोर्न स्टार सन्नी लिओन जाने पूरी दास्ताँ  Porn star Sunny Leone How did the full story कैसे बनी पोर्न स्टार सन्नी लिओन जाने पूरी दास्ताँ  Porn star Sunny Leone How did the full story सेक्स sex,सनी लिओन की जीवनी ,सनी लिओन के बारे में ,सनी से जुड़ी कुछ दिलचस्‍प बातें-sanny leone-sunny leone hug me song-sunny leone songs-sunny leone songs mp3 download-पहला सेक्स कब किया -सन्नी लिओन ने पोर्न स्टार बनने के लिए क्या किया -पोर्न स्टार कैसे बनी सनी लियोनि - वजह जान हैरान रह क्या मज़बूरी थी बलात्कार क्यों हुवा था सन्नी लिओन का

    सनी लियोन का नाम सुनते ही आपके दिमाग में क्‍या आता हैा ये हमें बताने की जरूरत नहीं है क्‍योकि हमारे पाठक तो इतने समझदार तो हैं हीं लेकिन फिर भी हम आपको उनसे जुड़े राज और कुछ ऐसे तथ्‍यों से रूबरू कराएंगे जिनसे शायद आप वाकिफ नहीं होंगेा करनजीत कौर वोहरा उर्फ सनी लियोन, हां हां असली नाम यही है, इंडो-कनाडियन, अमेरिकन अभिनेत्री, व्‍यवसायी और पूर्व पॉर्न फिल्‍मों की अभिनेत्री हैंा उन्‍हें हिन्‍दी फिल्‍मों में आने से पहले कर्इ तरह के संगठनों का विरोध भी झेलना पड़ा क्‍योंकि जो उनका बैकग्राउंड रहा है, व‍‍ह तो जगजाहिर है और भारत जैसे देश में लोगों की भावनाएं जल्‍द ही आ‍हत हो जाती हैां खैर, इंडस्‍टी से भी कई लोगों की तरफ से उनके खिलाफ विरोध के स्‍वर उठे लेकिन आखिरकार उन्‍हें भट्ट कैंप के साथ हिन्‍दी फिल्‍मों में ब्रेक मिलाा उन्‍हें पहली बार जब बिग बॉस के घर में महेश भट्ट ने देखा तो तभी उन्‍हें अपनी फिल्‍म में कास्‍ट करने का ऑफर दे दियाा
    पृष्‍ठभूमि-
    सनी का जन्‍म सार्निया, ओंटेरियो, कनाडा में एक सिख पंजाबी परिवार में हुआ थाा उनके पिता का जन्‍म तिब्‍बत में हुआ, बाद में वे दिल्‍ली में रहने लगे थेा वहीं उनकी मां हिमाचल प्रदेश की हैंा
    पढ़ाई- 
    उनके परिवार ने सनी का दाखिला कैथलिक स्‍कूल में करायाा ऐसा इसलिए हुआ क्‍योंकि वे सोचते थे कि पब्लिक स्‍कूल में जाना सनी के लिए सुरक्षित नहीं हैा
    शादी-
    सनी ने डेनियल वेबर से शादी की हैा
    करियर-
    हिन्‍दी फिल्‍मों में उनके करियर की शुरूआत फिल्‍म 'जिस्‍म 2' से हुई थी जिसको आलोच‍कों की तो कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली लेकिन फिल्‍म ने ठीकठाक कमाई कर लीा
    प्रसिद्ध फिल्‍में-
    जिस्‍म 2, जैकपॉट, रागिनी एमएमएस 2 जैसी फिल्‍मों में वे अपनी पुरानी छवि की छाप छोड़ चुकी हैं और दर्शकों ने भी इसे काफी पसंद किया हैा आलम यह था कि लोग इन फिल्‍मों को सिर्फ सनी लियोन के नाम पर देखने गएा
    सनी से जुड़ी कुछ दिलचस्‍प बातें-
    1. वे पॉर्न फिल्‍मों में लंबे वक्‍त तक काम कर चुकी हैंा
    2. बिग बॉस के घर में दाखिल होने और हिन्‍दी फिल्‍मों में आने से पहले उनका भरसक विरोध हुआ थाा
    3. फिल्‍म जिस्‍म 2 के पोस्‍टर को लेकर भी तब खूब बवाल मचा जब यह पोस्‍टर कई लोगों को काफी उत्‍तेजक लगाा इसका काफी ज्‍यादा विरोध हुआा

    4. उन्‍हें हिन्‍दी फिल्‍मों में एकता कपूर का भरपूर साथ मिला हैा
    5. रागिनी एमएमएस 2 के प्रमोशन के दौरान वे मुंबई के सिद्धीविनायक मंदिर में अपनी आने वाली फिल्‍म की कामयाबी के लिए मन्‍नत मांगने गईं थींा उस दौरान भी कई संगठनों और पुजारियों ने इसका विरोध किया थाा
    6. उस समय भी विवाद काफी गहरा गया जब ट्विटर पर कमाल खान और सनी के बीच कमेंट में ही काफी तू तू मैं मैं हो गईा
    7. 2014 में गूगल पर सबसे ज्‍यादा सर्च की जाने वाली सेलिब्रिटी हैं सनी लियोना
    8. वे पहली ऐसी एडल्‍ट फिल्‍मों की अभिनेत्री हैं जो कि मुख्‍यधारा के हिन्‍दी सिनेमा में इतनी ज्‍यादा चर्चित हैंा
    9. उन्‍हें कई पुरस्‍कारों से भी सम्‍मानित किया जा चुका है जैसे 2008 में वेब बेब ऑफ द ईयर, 2010 में वेब स्‍टारलेट ऑफ द ईयर, 2012 में पोर्न सार्इट ऑफ द ईयर इत्‍यादिा
    10. सनी लियोन ने अपनी कंपनी एलएलसी के नाम से अपना बिजनेस शुरू किया। उन्‍होंने बताया कि उनकी साइट पर 80 फीसदी लोग भारत से आते हैं। यही नहीं साइट से होने वाली कमाई का 60 फीसदी भारत से आता है। जरा सोचिये बॉलीवुड से आने से पहले ही सनी ने भारत से ही कितने पैसे कमाये।

    11. सनी बिग बॉस 5 से पहले भी भारतीय टेलीविजन पर दिखी थीं लेकिन तब उन्‍हें शायद ही कोई जानता था। उन्‍हें पहली बार एमटीवी इंडिया पर एमटीवी अवार्ड में कवर किया गया।
    12. सनी को निर्देशक मोहित सूरी ने कई साल पहले फिल्‍म कलयुग के लिये संपर्क किया था लेकिन उस समय सनी ने फिल्‍म में काम करने के लिए 10 लाख डॉलर की मांग की थी जिस वजह से सनी को फिल्‍म में नहीं लिया गयाा
    13. फिल्‍म 'शूटआउट एट वडाला' का गाना 'लैला तेरी' काफी पापुलर हुआ और इसके बाद फिल्‍म इंडस्‍ट्री में उनकी मांग और बढ़ गईा
    14. वर्ष 2013 की सबसे अमीर पोर्न स्‍टार्स की सूची देखें तो सन्‍नी लियोन 19वें स्‍थान पर रही हैं।

    शनिवार, 9 दिसंबर 2017

    डॉ ज़ाकिर नायक परिचय और विवाद और हकीकत -Dr Zakir Naik from controversy and reality -

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    डॉ ज़ाकिर नायक परिचय और विवाद और हकीकत -Dr Zakir Naik from controversy and reality -
    डॉ ज़ाकिर नायक परिचय और विवाद और हकीकत -Dr Zakir Naik from controversy and reality - डॉ ज़ाकिर नायक परिचय और विवाद ।Dr Zakir Naik introduction and controversy.जाकिर नायक की जीवनी ,जाकिर नायक का राज भारतीय इस्लामी विद्वान और तुलनात्मक धर्म विशेषज्ञ डॉ. जाकिर अब्‍दुल करीम नायक दूसरे धर्मों से मुनाजिरों के हवाले से पहचाने जाते हैं, काम के लिहाज  से एम. बी. बी. एस. डाक्‍टर हैं । स्‍वयं को कुरआन के मुताबिक मुस्लिम कहते हैं लेकिन उनके विरोधियों का कहना है कि नायक अहले हदीस  हैं , अफ्रीका के प्रसिद्ध  धर्म प्रचारक अहमद दीदात को गुरू मानते हैं, 1991 से इस्‍लाम के प्रचार को पूरी दिलचस्‍पी के साथ अपना लिया,  हिन्‍दू, जैन, इसाई आदि से Debate मुनाजरे मशहूर हुए , बहुत से लोंगो ने नायक के द्वारा इस्‍लाम धर्म अपनाया, मुम्‍बई में  पैदा होने वाले नायक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं और दुनिया के प्रसिद्ध गैर अरबी जाकिर नाइक का बयान डॉ जाकिर नाइक हिंदी ज़ाकिर नायक पुस्तकें zakir naik videos डॉक्टर जाकिर नायक dr zakir naik in hind फरहत नाइक ज़ाकिर नाइक पुस्तकेंजाकिर नाईक हैं कौन और आख़िरकार क्या है उनका कुसूर
    भारतीय इस्लामी विद्वान और तुलनात्मक धर्म विशेषज्ञ डॉ. जाकिर अब्‍दुल करीम नायक दूसरे धर्मों से मुनाजिरों के हवाले से पहचाने जाते हैं, काम के लिहाज  से एम. बी. बी. एस. डाक्‍टर हैं । स्‍वयं को कुरआन के मुताबिक मुस्लिम कहते हैं लेकिन उनके विरोधियों का कहना है कि नायक अहले हदीस  हैं , अफ्रीका के प्रसिद्ध  धर्म प्रचारक अहमद दीदात को गुरू मानते हैं, 1991 से इस्‍लाम के प्रचार को पूरी दिलचस्‍पी के साथ अपना लिया,  हिन्‍दू, जैन, इसाई आदि से Debate मुनाजरे मशहूर हुए , बहुत से लोंगो ने नायक के द्वारा इस्‍लाम धर्म अपनाया, मुम्‍बई में  पैदा होने वाले नायक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं और दुनिया के प्रसिद्ध गैर अरबी भाषी इस्लामी विद्वानों में से एक हैं. इस्‍लामी चैनल पीस टीवी के नाम से चला रहे हैं,   हाजिर जवाबी और मुनाजरों में दस्‍तरस रखते हैं, विलियम केम्‍पबेल से मुनाजिरे के कारण अंतरराष्ट्रीय वक्ता के रूप में प्रसिद्ध हुए, उर्दू-हिंदी मराठी स्‍टाइल में बोलते हैं, अरूण शौरी, योगी आदित्‍यानाथ, तस्लीमा नसरीन जैसी बडी कई धार्मिक और राजनितिक हस्तियों को नायक चुनौती दे चुके हैं तो अपने को सुन्नि मोलवी से बना पंडित कहने वाले महिंद्रपाल और शिया से नास्तिक बना अली सीना जैसे दर्जन से अधिक उनको चुनौती दे रहे हैं । गुरू रामपाल ने तो बहस का झूटा इशतहार तक टीवी पर चलवा दिया था,  अंतरराष्ट्रीय वक्ता के रूप में प्रसिद्ध लगभग 50 वर्षीय जाकिर नायक की पत्नि फरहत नायक, बेटा फारिक नायक और बेटी रूशदा नायक भी प्रचारकों की दुनिया में अपनी पहचान बना चुके।
    किसी मुद्दे या ग़लत फेहमी दूर दूर करने के लिए तैयारी के साथ पब्लिक के सामने जो बात करते हैं वो पीस टीवी के कैमरों द्वारा रिकोर्ड करके प्रसारित करदी जाती है । फिर वो वीडियोज समर्थकों के द्वारा ऑनलाइन अपलोड करदी जाती जिसे पसंद करने वाले अपनी भाषाओं में अनुवाद करके प्रकाशित कर लेते हैं।  ऐसे ही तैयार हुई जाकिर नायक की 5 हिंदी पुस्‍तकें खाकसार कैरानवी द्वारा आनलाइन उपलब्‍ध कर दी गयी हैं

        कुरआन और विज्ञान
        क्‍या कुरआन ईश्वरीय ग्रन्थ है?  "IS THE QURAN GOD'S WORD?"
        गैर मुस्लिमों के 20 सवालों के जवाब
        इस्लाम में औरतों (नारियों) के अधिकार
        ''इस्‍लाम आतंकवाद या भाईचारा''
    डॉ. जाकिर नाइक को सऊदी अरब के नए शाह ने इस्लाम धर्म के प्रति अभूतपूर्व योगदान के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक से सम्मानित किया..मालूम हो के इस से पहले  अवॉर्ड इस्लाम के मशहूर उलेमा मौलाना अबुल हसन नदवी को 1980 मे दिया गया था.
    शाह सलमान ने शानदार पुरस्कार समारोह में किंग फैसल अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार (केएफआईपी) इस्लाम की गैरमामूली सेवा के लिये प्रदान किया. यह पुरस्कार नोबेल पुरस्कार के जैसा मुस्लिम दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। पांच श्रेणियों - इस्लाम की सेवा, इस्लामिक अध्ययन, अरबी भाषा एवं साहित्य, चिकित्सा और विज्ञान में दिए जाते हैं. हर पुरस्कार के साथ विजेता की उपलब्धियों से जुड़ा अरबी का एक हस्तलिखित प्रमाणपत्र, एक 24 कैरेट 200 ग्राम सोने का स्मारक पदक और 2,00,000 डॉलर की पुरस्कार राशि दी जाती है.
    पुरस्कार समारोह में देश के मंत्री, शाही परिवार के सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद् और प्रतिष्ठित विद्वान मौजूद थे. नाइक ने समारोह के दौरान दिखाई गई एक वीडियो बायोग्राफी में कहा था कि  'इस्लाम एकमात्र धर्म है जो पूरी मानवता के लिए शांति ला सकता है। .वर्तमान में जो यह 1 करोड 32 लाख रूपए से अधिक की राशि होती है यह जाकिर नायक द्वारा पीस टीवी नेटवर्क के वक्फ में दे दान कर दी गयी।
    डॉ जाकिर नायक इस्लामी दृष्टिकोण स्पष्ट करने के लिए कारण, तर्क और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ साथ साथ अपनी अच्छी याददाश्त से कुरआन, प्रामाणिक हदीस और अन्य धार्मिक ग्रंथों का उपयोग  हवालों के साथ करके, इस्लाम के बारे में दूसरों की गलतफहमी को दूर करना चाहते हैं । वार्ता के बाद दर्शकों से उत्पन्न चुनौतीपूर्ण प्रश्‍नों को समझाने के दिए गए उनके उत्‍तर बेहद पसंद किए जाते हैं।
    ज़ाकिर नायक अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, आस्‍टे्लिया, चाईना सहित 30 से अधिक देशों में प्रोगराम में अपने फन का मुजाहिरा लाखों की भीड के सामने कर चुके हैं।
    इंग्लिश समाचार पत्र 'इंडियन एक्‍सप्रेस'  ने हिन्‍दुस्‍तान के करोंडों मुसलमानों में से टाप 100 ताकतवर मुसलमानों 2009 की लिस्‍ट में 82 और 2010 ई. में 89 नम्‍बर पर रखा था, 2009 के हिंदुस्‍तान के टाप के दस आध्यात्मिक गुरुओं में उनको तीसरा नम्‍बर दिया गया तो 2010 में सबसे ऊपर जाकिर नायक का नाम दिया गया।
    डॉ विलियम कैम्पबेल के साथ उनका सार्वजनिक संवाद, 1 अप्रैल 2000 को "कुरआन और विज्ञान के प्रकाश में बाईबिल" विषय पर शिकागो, संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित एक प्रोगराम में हुआ, इस संवाद को मुस्लिम दुनिया में बेहद पसंद किया गया, प्रमुख हिंदू गुरू श्री श्री रवि शंकर के साथ उनकी आपसी बातचीत, "पवित्र ग्रंथों के प्रकाश में हिंदू धर्म और इस्लाम में ईश्वर की अवधारणा' को विषय को देखते हुए दोनों धर्मों के मानने वालों में पसंद किया गया । यह धार्मिक गुरूओं से बातचीत ऑनलाइन मक़बूल होने के पश्चात अब उर्दू,हिंदी और इंग्लिश में छप भी चुकी हैं।
    “Deedat Plus”
    शेख अहमद दीदात इस्लाम और तुलनात्मक धर्म पर विश्व प्रसिद्ध वक्ता ने 1994 में इस्‍लाम की दावत और तुलनात्मक धर्म पर नायक के अध्ययन पर एवार्ड देते हुए जाकिर नायक को "दीदात प्लस" कहते हुए कहा कि ', अल्‍हम्‍दु लिल्‍लाह,बेटा जितना काम तुमने 4 साल में कर दिखाया इतना काम करने में मुझे 40 साल लग गए थे'
    दुबई के शासक के प्रधानमंत्री ने 29 जुलाई 2013 को डॉ जाकिर नाइक को प्रतिष्ठित दुबई अंतर्राष्ट्रीय पवित्र कुरआन एवार्ड  अर्थात  '2013 का इस्लामी व्यक्तित्व' और मीडिया, शिक्षा और परोपकार में विश्व स्तर पर इस्लाम और मुसलमानों के लिए काम पर प्रशस्ति पत्र और 272,000 अमेरिकन डालर दिए गए जिन्‍हें जाकिर नायक ने पीस टीवी नेटवर्क में देकर उससे वक़्फ़ फंड शुरू करवा दिया।
    मलेशिया के बादशाह द्वारा मलेशिया के सर्वोच्च पुरस्कार अर्थात गणमान्य अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व 2013 अवार्ड नायक की बेमिसाल इस्‍लाम की खिदमत और इस्‍लाम को मजबूती देने के लिए दिया गया साथ ही मलेशिया के प्रधानमंत्री द्वारा हस्ताक्षर किया गया प्रशस्ति पत्र भी 5 नवंबर 2013 में दिया गया था।
    शारजाह के शासक द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लाम के लिए स्वैच्छिक सेवा के लिए वर्ष 2013 के लिए डॉ जाकिर नाइक को 16 जनवरी 2014 को 'स्वैच्छिक कार्य के लिए शारजाह पुरस्कार 2013' दिया गया
    गाम्बिया गणराज्य के राष्ट्रपति 15 अक्टूबर 2014 को 'गाम्बिया गणराज्य के राष्ट्रीय आदेश के कमांडर का प्रतीक चिन्ह 2015' सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार से डॉ जाकिर नाइक को सम्मानित किया साथ ही गाम्बिया के विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा, उनके उत्कृष्ट योगदान और ज्ञान के प्रसार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामुदायिक सेवाओं के अनुसंधान और प्रसव को बढ़ावा देने के लिए डाक्टरेट की मानद उपाधि दी गयी
    फेसबुक पेज पर जून 2015 तक की स्थिति के अनुसार, डॉ जाकिर नाईक पेज को दो वर्ष में अल्‍हम्‍दु लिल्‍लाह 8 लाख लाइक मिले, यह न केवल धर्म पर अंग्रेजी में बोलने वाले मुसलमानों के बीच सबसे अधिक में से एक है बल्कि किसी भी अंग्रेजी वक्ता के बीच सबसे अधिक पसंद किया जा रहा  है, यूट्यूब उपाध्यक्ष, टॉम पिकेट, ने बताया है कि यूटयूब पर जाकिर नायक पर लाइक यानि पसंद ओर लोकप्रियता बहुत अच्‍छी है।
    डॉ जाकिर नाइक दुनिया के 200 से अधिक देशों में कई अंतरराष्ट्रीय टीवी चैनलों पर नियमित रूप से दिखाई देते हैं। नियमित रूप से टीवी और रेडियो साक्षात्कार के लिए उन्‍हें आमंत्रित किया जाता है। संवाद, बहस और संगोष्ठियों के एक सौ से अधिक डीवीडी उपलब्ध हैं। इस्लाम और तुलनात्मक धर्म पर कई किताबें भी लिखी है।
    दूसरों तक आसानी से इस्‍लाम का पैगाम पहुंचाने के लिए पीस टीवी नेटवर्क डॉ जाकिर नायक की सोच का नतीजा है, जनवरी 2006 में पीस टीवी अंग्रेजी में भी शुरू किया गया, 100 मिलियन से अधिक दर्शकों की संख्या के साथ, वर्तमान में दुनिया में 'किसी भी धार्मिक' उपग्रह टीवी चैनल पर यह सबसे अधिक दर्शेकों की संख्‍या हैं जिनमें 25% गैर-मुसलमान हैं, इस सफलता को देखते हुए 2009 में पीस टीवी उर्दू  और 2011 में बंग्‍ला भाषा में शुभारंभ किया गया, 2015 के अंत तक चीनी भाषा सहित विश्‍व की प्रमुख भाषाओ में भी पीस टीवी अपनी सेवा आरम्‍भ कर रहा है । परदे बारे में नायक का एक सवाल के उत्‍तर में कहना था कि तीन सैंकिंड से अधिक महिला का चहरा पीस टी वी पर नहीं दिया जाता जिससे पहली नजर माफ वाली बात पर अमल हो सके।
    पीस टीवी का लाइसेंस अरब अमीरात से लिया गया था भारत में इसकी सफलताओं को देखते हुए विरोधियों ने इस पर पाबंदियां लगवायी आज केबल आप्रेटर गंदा या नंगा चैनल दिखा देता है मगर पीस टीवी के लिए बताया जाता है कि डी एम की मंजूरी जरूरी है ,पीस कान्‍फ्रेंस भी बेहद कामयाबी के साथ जारी थी कि उसको भी विरोधियों ने बंद करवादिया अब इधर हालत यह है कि भारत में सभी तरह के लोग अपने प्रोगराम कर सकते हैं लेकिन जाकिर नायक कोई प्रोगराम नहीं कर सकता, वैसे इसके भी अच्‍छे नतीजे रहे कि जाकिर नायक भारत के लिए काफी काम कर चुके अब जरूरत थी विश्‍व स्‍तर पर काम करने की तो उसका मौका पा‍बंदियों से मिल गया।
    पीस टीवी पर हो jरही  पाबंदियों को देखते हुए पीस मोबाइल लांच किया गया है जिस में मुसलमान की जरूरतों का पूरा खयाल रखा गया है ।
    आर्य समाजी महेंद्रपाल द्वारा चैलंज पर दोनों ओर के समर्थर्कों का विवाद डा. मुहम्मद असलम कासमी की पुस्‍तक
    "महेन्द्रपाल आर्य बनाम कथित महबूब अली" के द्वारा उठाई गयी आपत्तियों की विश्लेषणात्मक समीक्षा
    से आसानी से समझा जा सकता है, असलम कासमी लिखते हैं
        श्रीमान महेंद्रपाल जी के द्वारा इन्टरनेट पर एक वीडियो डाली गयी है जिसका शीर्षक है महेंन्द्रपाल ने डाक्टर ज़ाकिर नायक के उस्ताद अब्दुल्लाह तारिक को हराया।
         पहली बात तो यह है कि उक्त विडियो जिस प्रोग्राम की है वह कोई शास्त्रार्थ का प्रोगराम नहीं था अपितु आपसी भाईचारे पर आधारित प्रोग्राम था और अगर महेंद्रपाल जी उसे शास्त्रार्थ ही का प्रोग्राम मानते हैं तो फिर बताएं उसमें जज किसे नियुक्त किया गया था, उसमें अधिक संख्या महेन्द्रपाल जी के अनुयाईयों की थी उन्होंने ही प्रोग्राम का आयोजन किया था, और अब्दुल्लाह तारिक को बतौर अतिथि बुलाया गया था।
         अब्दुल्लाह तारिक रियासत रामपुर के रहने वाले मशहूर इस्लामी स्कालर हैं उनके प्रोग्राम पीस टीवी से प्रसारित  होते रहते हैं। परन्तु जाक़िर नायक से उनका कोई गुरू-शिषय का संबंध नहीं है बल्कि उनकी जाक़िर नायक से एक दो मुलाकातों के अलावा अन्य कोई राबता नहीं है। ऐसे में उनको ज़ाकिर नायक का उस्ताद लिखना केवल अज्ञानता है।
         जहाँ तक उनको हराने की बात है। नेट पर मौजूद विडियो में ऐसी कोई बात नहीं दिखती। महेंद्रपाल और अब्दुल्लाह तारिक की बातचीत की इस विडियो को देखकर लगता है कि महेंद्रपाल सच्चाई को जानने समझने और सही बात को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है बल्कि आक्रमक अंदाज में बेवजह चीख रहे हैं। जबकि अब्दुल्लाह तारिक सभ्यता और शाइस्तगी से बात समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
    दूसरी बात यह कि आर्य समाजी महेंद्रपाल के समर्थकों को पता नहीं कि नेट में उपलब्‍ध विडियो में पंडित जी स्‍वयं यह बता रहे हैं कि जाकिर नायक ने पंडित महिंद्रपाल को 2004 में सम्‍मेलन में मुम्‍बई में सादर आमंत्रित किया था मगर पंडित जी नहीं पहुंचे,
    शियाओं से विवाद
    जाकिर नायक की शिया मुफती से टी वी पर बहस सुनने से पता चलता है कि वो देवलबंद, जमाते इस्‍लामी, अहले हदीस आदि से फतवा मंगा चुके, उन फतवों में उन्‍हें यह जवाब दिया गया कि वो यजीद के लिए दुआओं के अल्‍फाज कह सकते हैं, किसी ने मु‍स्‍तहिब कहा है मना किसी ने नहीं किया, फतवों को देख कर नायक का कहना है कि वो आलिमों को कहना मानेंगे, जिन्‍होंने मना नहीं किया, उनका इस बातचीत में यह भी कहना था कि हदीस के मुताबिक जो उस जंग में शरीक हुआ वो जन्‍नती है, यजीद के बारे में गवाही है कि वो उस जंग में कमांडर थे,  अर्थात हजूर की बशारत के मुताबिक जन्‍नती हुए, इस लिए नाम के साथ दुआओं के अलफाज के हकदार हैं,  इमाम गजाली और बुखारी शरीफ की शरह लिखने वाले हाफिज असकलानी से भी उन्‍होंने बताया कि उनका कहना है कि यजीद मुसलमान था, यह भी कहा कि हम जब मुसलमानों के लिए दुआ करते हैं तो सबके साथ उसमें वो भी शरीक होते हैं, यह भी कहा कि वो हजरत हुसैन को पूरी इज्‍जत देते हैं जिसने उनका कतल किया उसको बुरा समझते हैं, लेकिन उस समय यजीद या उस समय की पूरी मुस्लिम फौज को बुरा कहना गलत मानते हैं साथ ही यह भी कहा कि हदीस के मुताबिक अगर हम किसी गलत आदमी के लिए दुआ करते हैं तो वो लगती नहीं और अगर सही आदमी को लानत भेजते हैं तो वो वापस आती है इस लिए लानत भेजने वालों को गोर करने की जरूरत है कि वो सही या गलत पर लानत भेज रहे हैं, उनका यह भी कहना था कि शिया हजरात मुझे बदनाम करने का कुछ बहाना ढूंडते रहते हैं जबकि वो शिया-सुन्‍नी इखतलाफी बातों से बचते रहते हैं कि अगर वो कुछ कहेंगे तो शिया हजरात को जवाब देना में मुश्किल होगी
        उपरोक्‍त टीवी बहस में इस बात की ओर इशारा है कि इमाम गजाली फरमाते हैं '' यजीद की तरफ से हजरत हुसैन (रजिअल्‍लाह अन्‍हू) को कतल करना, या उनके कतल करने का हुकुम देना या उनके कतल पर राजी होना, तीनों बातें दुरूस्‍त नहीं और जब यह बातें यजीद के मुताल्लिक साबित ही नहीं तो फिर यह भी जायज नहीं कि उसके मुताल्लिक ऐसी बदगुमानी रखी जाए क्‍यूंकि कुरआन मजीद में अल्‍लाह का फरमान है कि मुसलमान के मुताल्लिक बदगुमानी हराम है, ( बहवाला मिनहाजु सुन्‍नत, जिल्‍द 4, पृष्‍ठ 5455)
    शायद इन सब बातों को देखते हुए ही रामपुर के अब्‍दुल्‍लाह तारिक के साथ मौलाना सलमान नदवी भी नायक के पीस टी वी चैनल से जुड चुके हैं, नए मुस्‍लमान हुई कई विश्‍व में नाम कमा चुकी हस्तियां पहले ही चैनल से जुडे हुए हैं। पब्लिक में जो शंका थी वो सऊदी बादशाह द्वारा इस्‍लाम की गेर मामूली खिदमात पर किंग फेसल इनाम 2015 मिलने से दूर हो गयी, यह किंग फेसल इनाम अली मियां को भी मिल चुका है।

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    शनिवार, 2 दिसंबर 2017

    नरेंद्र मोदी की वो गुप्त बाते जो कोई नही जनता Narendra Modi not people who talk that secret

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    नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय-नरेंद्र मोदी की जीवनी-नरेंद्र मोदी की जाति-जशोदाबेन मोदी
    नरेन्द्र मोदी, हर भारतवासी की जुबान पर यही नाम है। देश ही नहीं, विदेशों में भी नरेन्द्र मोदी की चर्चा हो रही है। हर कोई नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के जिंदगी की हर छोटी-मोटी बात को जानना चाहता है। आइए जानते हैं नरेन्द्र मोदी के बारे में रोचक 30 बातें-

    रेंद्र मोदी की वो गुप्त बाते जो कोई नही जनता Narendra Modi not people who talk that secret जो कोई नही जनता Narendra Modi not people who talk that secret,नरेन्द्र मोदी का जन्म .नरेन्द्र मोदी को बचपन,,नरेन्द्र मोदी के पिता,.नरेन्द्र मोदी नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय-नरेंद्र मोदी की जीवनी-नरेंद्र मोदी की जाति-जशोदाबेन मोदीअपने आप को एक लेखक और कवि-नरेंद्र मोदी के बारे में  नरेंद्र मोदी की जीवनी  नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय  नरेंद्र मोदी वीडियो  दामोदरदास मूलचंद मोदी  नरेन्द्र मोदी की जाति क्या है  narendra modi पिछले कार्य काल  नरेंद्र मोदी पर निबंध

    1.नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को वड़नगर में दामोदार दास मूलचंद मोदी और हीराबेन के यहां हुआ।

    2.नरेन्द्र मोदी 5 भाई-बहनों में से दूसरे नंबर की संतान हैं।

    3.नरेन्द्र मोदी को बचपन में नरिया कहकर बुलाया जाता था।

    4.नरेन्द्र मोदी के पिता की रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान थी।

    5. 1965में भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने स्टेशन से गुजर रहे सैनिकों को चाय पिलाई।

    6.नरेंद्र मोदी बचपन में आम बच्चों से बिलकुल अलग थे।

    7.नरेंद्र मोदी वड़नगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे। नरेन्द्र मोदी स्कूल में औसत छात्र थे।

    8.उन्हें बचपन में एक्टिंग का शौक था।

    9.नरेन्द्र मोदी बचपन में स्कूल में एक्टिंग, वाद-विवाद,नाटकों में भाग लेते और पुरस्कार जीतते थे। एनसीसी में भी शामिल हुए।

    10.वे एक बार शर्मिष्ठा तालाब से एक घड़ियाल का बच्चा पकड़कर घर लेकर आ गए। मां के समझाने पर वे वापस उसे तालाबछोड़कर आए।

    11.नरेन्द्र मोदी बचपन में साधु-संतों से प्रभावित हुए। वे बचपन से ही संन्यासी बनना चाहते थे।

    12.संन्यासी बनने के लिए मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे। इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे।

    13.नरेंद्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे। 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी।

    14.वे बहुत मेहनती कार्यकर्ता थे। वे आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में मैनेजमेंट का हुनर दिखाते थे। आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था।

    15.हिमालय में कई महीनों तक साधुओं के साथ रहे। दो साल बाद जब वह हिमालय से वापस लौटे तब उन्होंने संन्यास जीवन त्यागने का फैसला लिया।

    16.हिमालय से लौटने के बाद मोदी ने अपने भाई के साथमिलकर अहमदाबाद की कई स्थानों पर चाय की दुकान भी लगाईं। उन्होंने हर कठिनाई को सहते हुए चाय बेची।

    17.अठारह साल की उम्र में नरेन्द्र मोदी का विवाह उनकी मां ने बांसकाठा जिले के राजोसाना गांव में रहने वाली जसोदा बेन से किया गया था।

    18.नरेन्द्र मोदी बाद में घर छोड़कर संघ के प्रचारक बन गए।

    19.नरेन्द्र मोदी अहमदाबाद संघ मुख्यालय में रहतेतो वहां सारे छोटे काम करते जैसे साफ-सफाई, चाय बनाना, और बुर्जुग नेताओं के कपड़े धोना शामिल है

    20.नरेन्द्र मोदी कोई भी नया काम शुरू करने से पहले अपनी मां का आशीर्वाद जरूर लेते हैं। चुनाव में मिली जीतके बाद उन्होंने अपनी मां से जाकर आशीर्वाद लिया।

    21.जब नरेन्द्र मोदी प्रचारक थे तो उन्हें स्कूटर चलाना नहीं आता था। शकरसिंह वाघेला उन्हें अपनी स्कूटर पर घुमाया करते थे।

    22.नरेन्द्र मोदी संघ में कुर्ते की बांह छोटी करवा लीं, ताकि वह ज्यादा खराब न हो, जो वर्तमान में मोदी ब्रांड का कुर्ता बन गया है और देशभर में मशहूर है।

    23.नरेन्द्र मोदी ने अन्य प्रचारकों के विपरीत दाढ़ी रखते और उसे ट्रीम भी करवाते।

    24.वे 1975 में इमरजेंसी के दौरान सरदार का रूप धरकर ढाई सालों तक पुलिस को छकाते रहे।

    25.नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में मैनेजमेंट और पब्लिक रिलेशन से संबंधित तीन महीने का कोर्स किया है।

    26.नरेन्द्र मोदी अपने आप को एक लेखक और कवि मानते हैं।

    27.उन्होंने गुजराती भाषा में हिंदुत्व से संबंधित कई लेख भी लिखे हैं।

    28.मोदी महान विचारक और युवा दार्शनिक संत स्वामी विवेकानंद से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं। उन्होंने गुजरात में ‘विवेकानंद युवा विकास यात्रा’ निकाली थी।

    29.नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं। उन्होंने सिगरेट, शराब को कभी हाथ नहीं लगाया।

    30.नरेन्द्र मोदी हर छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखते हैं। जैसे भाषण से पहले उसकी तैयारी करना, बालों, कपड़ों की स्टाइल।
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    मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017

    ईशरत जहा फर्जी एनकाउंटर क्यों हुवा था ,पूरा सच -sarat fake encounter where the story was.

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    ईशरत जहा फर्जी एनकाउंटर क्यों हुवा था ,पूरा सच -sarat fake encounter where the story was. 15 जून 2004 को अहमदाबाद में एक मुठभेड में चार आतंकी मारे गए थे, जिनमें इशरत जहां नाम की एक कॉलेज जाने वाली छात्रा भी थी। उसका दूसरा साथी जावेद शेख था। दो अन्य आतंकी भी उसके साथ थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे पाकिस्तानी नागरिक थे।इनके मरने के बाद कुछ लोगों ने यह आरोप लगाने शुरू किए कि यह लोग आतंकी नहीं थे और पुलिस ने इनको गोली मारकर मार दिया और मरे हुए लोगों के हाथ में हथियार थमा दिए। कुछ मानवाधिकार संगठन इस मामले को लेकर पूरे घटनाक्रम की जांच करने की मांग करने लगे।
    ईशरत जहा फर्जी एनकाउंटर क्यों हुवा था ,पूरा सच -sarat fake encounter where the story was.ईशरत जहा फर्जी एनकाउंटर पूरी कहानी क्या थी।Isarat fake encounter where the story was-इशरत जहां केस इशरत जहां एनकाउंटर इशरत जहां कौन थी इशरत जहां बिहार की बेटी इशरत जहां wiki इशरत जहां एनकाउंटर केस इसरत जहाँ इशरत जहां मुठभेड़शरत जहां एनकाउंटर केस  इशरत meaning  सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस

    अहमदाबाद पुलिस ने इशरत जहां और अन्य तीन लोगों को आतंकी बताकर मुठभेड़ में मार गिराया था। मजिस्ट्रेट जांच में मुठभेड़ को फर्जी पाया गया। तब पता चला कि सरकार से तमगे हासिल करने के लिए पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में उनकी हत्या की थी।
    इशरत जहां के बारे में कहा जा रहा था कि उसका ताल्लुक लश्कर से था और वो मानव बम थी। यह बात अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली ने भारतीय अधिकारियों को शिकागो में बताई थी। अब इसको लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या यह माना जाए कि मजिस्ट्रेट तमांग की जांच रिपोर्ट गलत थी?
    इस मामले में कई सवाल ऐसे हैं जो मुठभेड़ के वक्त भी जिंदा थे और अब भी जिंदा हैं। इशरत जहां की मुठभेड़ के समय कहा गया था कि इंटेलीजेंस ने पक्के सबूतों के आधार पर यह रिपोर्ट दी थी कि लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मुंबई से अहमदाबाद निकल पड़े हैं और उनका मकसद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करना है।
    यहां यह भी सवाल किया जा सकता है कि कथित आतंकवादियों को मुंबई में ही रोक कर गिरफ्तार करने की कोशिश क्यों नहीं की गयी थी? उनका अहमदाबाद तक आने का इंतजार क्यों किया गया था? अहमदाबाद में घुसने के बाद ही मुठभेड़ क्यों हुईअमेरिका के जेल में बंद आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने आज जब मुंह खोला तो भारत की राजनीति में हड़कंप मच गया। उसने खुलासा किया कि अहमदाबाद में एनकाउंटर में मारी गई लड़की इशरत जहां लश्कर ए तैयबा की आत्मघाती हमलावार थी। हेडली ने कहा कि उसे इशरत के बारे में मुजम्म‍िल भट्ट ने बताया था।
    बाल ठाकरे तो सोने की अंडा देने वाली मुर्गी हैं, उनको नहीं मारता: हेडली
    Ishrat Jahan
    हेडली ने बताया कि, 'भट्ट ने मुझे कहा कि उसे जकीउर रहमान लखवी ने बताया था कि उनकी एक महिला लड़ाका भारत में एनकाउंटर में मारी गई है।' उल्लेखनीय है कि इस एनकाउंटर को विरोधी दलों ने फर्जी बताया था। हेडली के बयान के बाद भाजपा नेता शहनवाज हुसैन ने सवाल उठाया है कि क्या अब वो लोग देश की जनता से माफी मांगेंगे जो इशरत को 'बेटी' और शहीद का 'दर्जा' दे रहे थे। आईए इशरत जहां की पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं।

    कौन थी इशरत जहां-


     इशरत जहां मुंबई के मुंब्रा इलाके की रहने वाली थी।
     कॉलेज में पढ़ रही 19 वर्षीय इशरत निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से थी।
     2002 में पिता की मृत्यु के बाद सात भाई-बहनों में दूसरे नंबर की इशरत घर में इकलौती कमाने वाली थी।
    था एनकाउंटर मामला
    15 जून 2004 को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक एनकाउंटर किया था।
    इस एनकाउंटर में इशरत जहां और उसके चार साथियों की मौत हो गई थी।
    गुजरात पुलिस का दावा था कि इशरत और उसके तीनों साथी गुजरात के तब के सीएम और अब पीएम नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने अहमदाबाद आए थे।
        गुजरात हाईकोर्ट के ऑर्डर पर बनाई गई एसआईटी ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार दिया था।
        कोर्ट के ऑर्डर पर सीबीआई ने इस एनकाउंटर की जांच शुरू की।
        कई सीनियर पुलिस ऑफिसर्स पर सवाल उठे।
        CBI ने एक आरोपी को सरकारी गवाह भी बनाया।

    एनकाउंटर में किसकी-किसकी हुई मौत


        प्रणेश पिल्लै उर्फ जावेद शेख: नकली नोटों की तस्करी में शामिल था। इशरत का दोस्त था।
        अमजद अली राणा: पाकिस्तानी नागरिक था। उसके बारे में कभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई।
        जीशान जौहार: कहा जाता है कि पाकिस्तानी नागरिक था। अमजद और जीशान की लाशों पर किसी ने भी दावा नहीं किया था।

    एनकाउंटर को लेकर मचा था बवाल

    एनकाउंटर को विपक्षी पार्टियों ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया और फर्जी बताया। जिसे लेकर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग भी हुई थी। इस मुठभेड के बाद लोगों ने यह कहा कि यह चारों लोग आतंकवादी नहीं थे। पुलिस ने इन्हें गोली मार दी और मरे हुए लोगों के हाथ में हथियार थमा दिए।

    पुलिसवाले भी फंसे थे एनकाउंटर में

        डीजी वंजारा: उनका नाम सोहराबुद्दीन-तुलसीराम एनकाउंटर के बाद इशरत जहां मामले में भी सामने आया था। कोर्ट की इजाजत के बाद सीबीआई ने 2013 में उन्हें साबरमति जेल से हिरासत में लिया था।
        डीएसपी जेजी परमार: परमार सादिक जमाल एनकाउंटर में जेल में थे। उन्हें भी इस केस में आरोपी बनाया गया।
        एसीपी एनके अमीन: अमीन एनकाउंटर करने वाली क्राइम ब्रांच की टीम को स्पॉट पर लीड कर रहे थे।
        एडीजीपी पीपी पांडे: ये भी इसी मामले में गिरफ्तार हुए थे। सीबीआइ का दावा है कि पांडे ही इस एनकाउंटर के मास्टरमाइंड थे।?



    रविवार, 16 जुलाई 2017

    'मुगले-आजम' के रचयिता k.आसिफ का जीवन परिचय K. Asif's book introduces the life of 'Mughle-Azam'

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    'मुगल-ए-आजम'
    महज आठवीं जमात तक पढ़े थे. पैदाइश से जवानी तक का वक्त गरीबी में गुजारा था. फिर उन्होंने भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी, भव्य और सफल फिल्म का निर्माण किया. यह इसलिए मुमकिन हुआ, क्योंकि उन्हें सिर्फ इतना पता था कि उनकी फिल्म के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा
    हम बात कर रहे हैं फिल्म इंडस्ट्री के महान डायरेक्टर्स में से एक करीमुद्दीन आसिफ की, जिन्हें लोग के. आसिफ के नाम से जानते हैं और वह फिल्म थी ‘मुगल-ए-आजम’.
    'मुगले-आजम' के रचयिता k.आसिफ का जीवन परिचय K. Asif's book introduces the life of 'Mughle-Azam'

    करीमुद्दीन आसिफ का जन्म 14 जून, 1922 को हुआ था और 9 मार्च, 1971 को वह इस दुनिया से रुख्सत हो गए. इस मौके पर हम बता रहे हैं ‘मुगल-ए-आजम’ से जुड़े कुछ किस्से और फिल्म निर्माण को लेकर के. आसिफ का नजरिया. नोश फरमाइए.
    ये महान फिल्म 5 अगस्त, 1960 को रिलीज हुई थी. इसके प्रीमियर के लिए बंबई के मराठा मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया था और आसिफ खुद मेहमानों का स्वागत कर रहे थे. प्रीमियर में ओमप्रकाश, मुकरी, शम्मी कपूर, गीता बाली, नादिरा, राजेंद्र कुमार, सुरैया, शोभना समर्थ, वहीदा रहमान, गुरुदत्त, देवानंद, बिमल रॉय, जय किशन, लता मंगेशकर, माला सिन्हा, मीना कुमारी, कमाल अमरोही और जॉय मुखर्जी जैसे दिग्गज आए थे. राज कपूर तो उसी दिन बर्लिन से लौटे थे. 19वीं शताब्दी के मशहूर पारसी नेता सर काउसजी जहांगीर पहली बार कोई भारतीय फिल्म देखने आए थे.
    प्रीमियर देखकर किसी ने आसिफ से कहा कि फिल्म के डायलॉग बहुत ही कठिन उर्दू में हैं, लोगों को समझ नहीं आएंगे. आसिफ ने जवाब दिया कि हर फिल्म की अपनी जुबान होती है. लोगों को समझना होगा, तो वो समझ लेंगे.
    ये किस्सा सुनाते हुए समीक्षक जय प्रकाश चौकसे बताते हैं कि फिल्म के एक सीन में अकबर ‘यलगार हो’ बोलते हैं और सेना लड़ने के लिए दौड़ पड़ती है. ये शब्द इतना प्रचलित हुआ कि बाद में गुजरात तक में लोग इसका इस्तेमाल करते सुने गए.
    डायलॉग
    ‘यलगार’ से याद आया, ‘मुगल-ए-आजम’ के संवाद लिखने के लिए आसिफ ने चार लोगों से संपर्क किया था. इसके डायलॉग कमाल अमरोही, वजाहत मिर्जा, अहसान रिजवी और अमानउल्लाह खान ने मिलकर लिखे थे. ये चारों लोग मुगल इतिहास के जानकार थे.
    बताते हैं कि के. आसिफ को इस फिल्म का आइडिया 1944 में आया था. वो तब से इस पर काम कर रहे थे, लेकिन शूटिंग जैसे बड़े काम शुरू हुए 1950 के बाद. इतने लंबे समय तक एक ही प्रॉजेक्ट से जुड़े रहना मुश्किल है. इस विकसित तकनीक के जमाने में भी ‘बाहुबली’ बनने में पांच साल का वक्त लगा. सबसे ज्यादा परेशानी तो प्रोड्यूसर को संभालने में आती है. आखिर कौन होगा, जो लगातार 16 सालों तक पैसे देता रहेगा. ये आसिफ की लगन ही थी, जिससे फिल्म तैयार हुई. और जो तैयार हुई, लोग आज भी उसके दीवाने हैं.
    शूटिंग के समय जब आसिफ को कुछ कमजोर लगने लगता था (सेट से लेकर संवाद, अभिनय और प्रॉपर्टी तक), वो शूटिंग रोक देते. शीशमहल का सेट बनने की वजह से फिल्म दो साल रुकी रही. दिलीप कुमार के लिए सोने के जूते बनने और एक सीन के लिए मोती इकट्ठे करने के लिए भी फिल्म रुकी रही.
    इस फिल्म के प्रोड्यूसर थे शपूरजी पलौंजी मिस्त्री, जिन्हें सिनेमा बिल्कुल पसंद नहीं था. वो फिल्में नहीं देखते थे, लेकिन नाटक देखने के शौकीन थे और इसके लिए अक्सर ओपेरा हाउस जाया करते थे, जहां पृथ्वीराज कपूर के नाटक होते थे. पृथ्वीराज के. आसिफ के साथ फिल्म ‘फूल’ में काम कर चुके थे. पृथ्वीराज आसिफ के हुनर से परिचित थे. तो उन्होंने ही शपूरजी से कहा, ‘आपके पास बहुत पैसा है और आपके जैसा ही आसिफ जैसे पागल आदमी को फाइनेंस कर सकता है. पता नहीं कितने साल और कितना पैसा लगे, पर मैं इतना यकीन से कह सकता हूं कि वो फिल्म अभूतपूर्व बनाएगा.’
    पृथ्वीराज के कहने पर शपूरजी फिल्म के फाइनेंसर बने और तब फिल्म को निर्बाध पैसा मिलना शुरू हुआ. वैसे शपूरजी के इंट्रेस्ट के पीछे एक कहानी ये भी है कि शपूरजी अकबर की शख्सियत के दीवाने थे. आसिफ तो सलीम-अनारकली की मोहब्बत के कायल थे, जिसकी वजह से उन्होंने फिल्म बनाना शुरू किया, लेकिन शपूरजी का इंट्रेस्ट अकबर की वजह से जगा था. हालांकि, शपूरजी फिल्म के इकलौते फाइनेंसर नहीं थे. आसिफ ने इन 16 सालों में जो भी कमाया, सब इसी फिल्म में लगा दिया.
    ‘मुगल-ए-आजम’ का मकबूल गाना ‘जब प्यार किया तो डरना क्या’ शीशमहल में शूट किया गया था. पहले ये सेट साधारण शीशों को काटकर बनाया जा रहा था, लेकिन के. आसिफ को लगा कि इन शीशों से वह मन-मुताबिक आकर्षण पैदा नहीं कर पाएंगे, तो उन्होंने बेल्जियम से खास तरह के शीशे मंगवाए. मोहन स्टूडियो में बने इस 200 फीट लंबे, 80 फीट चौड़े और 35 फीट ऊंचे सेट में 10 लाख की लागत आई थी और बनने में 2 साल का वक्त लगा था. तब तक शूटिंग रुकी रही.
    रोचक बात ये है कि फिल्म बनाने से पहले पूरी फिल्म का बजट ही 10 लाख रुपए का रखा गया था. उतना तो अकेले इस सेट में लग गया. पूरी फिल्म में करीब डेढ़ करोड़ रुपए का खर्च आया. शीशमहल का सेट बनने के बाद इसकी लाइटिंग करने में भी टेक्नीशियन्स को छींके आ गई थीं. विदेशी टेक्नीशियन्स तक ने हाथ खड़े कर दिए थे. फिर कैमरामैन आरडी माथुर की मदद से सेट की लाइटिंग मुमकिन हुई. वो टेक्निकल कहानी है.
    सेट देखने विदेशों से आते थे मेहमान
    ‘मुगल-ए-आजम’ के सेट की खूबसूरती की इतनी चर्चा हुई कि देशभर से लोग इन्हें देखने आते थे. अहिस्ता-अहिस्ता बात जब देश के बाहर गई, तो कई विदेशी मेहमान भी सेट की भव्यता देखने भारत आए. इनमें अफगानिस्तान और सउदी अरब के शाही मेहमान, नेपाल के वजीर-ए-आजम, इटली के मशहूर डायरेक्टर रॉबर्तो रोज़ेलिनी और इंग्लैंड के बड़े फिल्ममेकर डेविड लीन शामिल हैं. चीन का कल्चरल डेलिगेशन भी सेट देखने आए थे और बेहद खुश हुआ.
    सेट ही नहीं, फिल्म भी देखने आए
    के. आसिफ ने ये फिल्म इतनी शानदार, बेमिसाल, लाजवाब बनाई थी कि लोग इसे देखने विदेशों से आते थे. हिंदुस्तानी तो इस कदर दीवाने हो गए थे कि टिकट की बिक्री से पहले दो-दो मील लंबी लाइनें लगाकर खड़े हो जाते थे. रजा मुराद बताते हैं कि कइयों ने तो सड़क पर बिस्तर ही डाल लिया था. वो फुटपाथ पर सोते थे और घरवालों से वहीं खाना मंगाते थे, ताकि टिकट लेकर फिल्म देख सकें.
    मराठा मंदिर सिनेमाहॉल में दो टिकट विंडो होती थीं. एक भारतीयों के लिए और दूसरी उनके लिए, जिनके पास पासपोर्ट होते थे. यानी विदेशी. पाकिस्तान से तो न जाने कितने लोग ये फिल्म देखने आए थे.
    ‘मुगल-ए-आजम’ में इस्तेमाल हुआ एक-एक लिबास, जंगी कपड़े, ढालें, तलवारें और जेवर वगैरह पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही तैयार किया गया था और वो किसी मायने में अकबरी जमाने से कमतर नहीं था. बंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में जब इस साजो-सामान की नुमाइश लगी, तो इसे देखने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था.
    इंडियन सिनेमा में ऐसे डायरेक्टर्स कम ही हुए हैं, जो फिल्म के हर हिस्से पर इतना ध्यान दें. सबसे बड़ी बात तो विजन है. न जाने कितने डायरेक्टर्स तरसते हैं कि वो ‘मुगल-ए-आजम’ की भव्यता का 100वां हिस्सा भी अपनी फिल्म में दिखा पाए. आसिफ सोच सकते थे और फिर उसे उतनी ही इंटेंसिटी से दिखा भी सकते थे.
    मोतियों की बारिश के लिए मंगाए असली मोती, फिल्म में एक सीन है, जब सलीम 14 साल बाद वापस आते हैं. उनके स्वागत में महल में मोतियों की बारिश करवाई जाती है. पहले तो शूटिंग में आर्टीफीशियल मोती इस्तेमाल हुए, लेकिन वो जमीन से टकराते ही टूट जाते थे. मन-मुताबिक काम न होते देख आसिफ ने असली मोतियों की मांग की और जब तक हजारों मोती इकट्ठे नहीं हो गए, शूटिंग रुकी रही. आसिफ कहते थे कि असली मोतियों के जमीन पर गिरने से जो खनक और खुशी मिलती है, उन्हें वही चाहिए और वो वही हासिल करके माने.

    भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसा शायद ही किसी फिल्म के लिए हुआ हो. फिल्म में सलीम के महल लौटने वाले सीन में एक रास्ता दिखाया गया है, जहां सलीम और उनके साथ सैकड़ों सैनिक महल की तरफ बढ़ते हैं. ये सीन राजस्थान के किसी भी पुराने इलाके में शूट किया जा सकता था, लेकिन आसिफ को वो रास्ता इतना पसंद आया कि उन्होंने वहीं शूटिंग करने का फैसला लिया. इसके लिए उन्होंने सरकार, नेताओं और अधिकारियों के साथ काफी मशक्कत की और आखिरकार उस रास्ते में लगे बिजली के सारे खंभे हटवा दिए गए.
    ‘मुगल-ए-आजम’ का म्यूजिक नौशाद ने कंपोज किया था. जब आसिफ ‘मोहे पनघट पर नंदलाल छेड़ गयो रे’ गाना लेकर नौशाद के पास गए, तो बस इतना ही बोले, ‘क्लासिक होना चाहिए ये’. नौशाद ने जवाब किया, ‘कोशिश करेंगे’. नौशाद की कोशिश इतना रंग लाई कि आसिफ को कहना पड़ा, ‘अहा! फर्स्ट क्लास.’ जब आसिफ को गाना जंच गया, तो नौशाद ने उनसे कहा, ‘इसमें कोई फिल्मी डांस मास्टर (कोरियोग्राफर) मत लीजिएगा.’
    फिर इस गाने की कोरियोग्राफी के लिए नौशाद लच्छू महाराज को आसिफ के पास ले गए. गाना सुनकर लच्छू महाराज रोने लगे. तब आसिफ ने नौशाद को किनारे लेकर कहा, ‘अमां वल्लाह ये क्या ड्रामा है. ये डांस का गाना है और ये बैठे रो रहे हैं’. इस पर नौशाद ने बताया, ‘वाजिद अली शाह के दरबार में इनके बाप जो थे, ये आस्ताई उनकी थी. आस्ताई उनकी ली है मैंने.’ इस पर आसिफ बच्चे की तरह खुश होकर बोले, ‘अरे फिर तो क्लासिक है.’ फिर लच्छू महाराज ने इस गाने पर मधुबाला को नचाया.

    जब नौशाद ने ‘मुगल-ए-आजम’ बनानी शुरू की थी, तभी फिल्मिस्तान स्टूडियो ने ‘अनारकली’ नाम की एक फिल्म बनाकर रिलीज कर दी. फिल्म चल भी गई. तो कुछ लोग आसिफ के पास आए और बोले कि अब आपका क्या होगा. इस पर आसिफ ने बड़े आत्मविश्वास और गर्व से कहा, ‘वो उनकी फिल्म है. मैं अपनी फिल्म अपने ढंग से बना रहा हूं.’ इसके बाद क्या हुआ, सब जानते हैं.

    आसिफ की ये बात उनका पूरा व्यक्तित्व बयां करती है. वो असल जिंदगी में इतने ही कॉन्फिडेंट थे. न तो उन्होंने बहुत पढ़ाई की थी और न फिल्ममेकिंग का कोई कोर्स. सिर्फ दो ही फिल्में हैं, जो वो पूरी बना पाए. उन्हें अपने काम और काम के लिए अपनी समझ पर भरोसा था. वो उन पैमानों से परे थे कि कोई बड़ा एक्टर है या कोई बड़ा डायरेक्टर है. उनके सामने सब बराबर थे. वो जितना सोचते थे, उसे वैसा ही दिखाने के लिए जी-जान एक कर देते थे. ‘मुगल-ए-आजम’ के निर्माण के दौरान न जाने कितनी ऐसी रातें गुजरीं, जब आसिफ मोहन स्टूडियो में चटाई पर सोए. वो फिल्म नहीं बनाते थे, तपस्या करते थे.

    जब फिल्म सिनेमाहॉल में लगने की बारी आई, तो डिस्ट्रीब्यूटर मदन कोठारी ने आसिफ से कहा कि ये कोई ऑर्डिनरी फिल्म तो है नहीं, तो इसके टिकट भी साधारण नहीं होने चाहिए. आसिफ ने कहा, ‘छपवा लीजिए.’ आसिफ की मंजूरी के बाद ऐसे टिकट छपवाए गए, जिसमें फिल्म का पोस्टर भी था. ये टिकट मराठा मंदिर और मुंबई के कुछ दूसरे सिनेमाघरों में बेचे गए. तब इन्हें छापने की लागत 85 हजार आई थी, जो आज के वक्त में करीब 25 लाख होती.

    आसिफ को अपने सामने देखने वाले लोग उनकी दो बातों का जिक्र हमेशा करते हैं. एक तो उनके पढ़े-लिखे न होने का और दूसरा उनकी सिगरेट पीने की अदा का. वो मुट्ठी बांधकर सिगरेट पीते थे, जैसे अक्सर रिक्शेवाले या चिलम पीने वाले पीते हैं. उनका शरीर बड़ा था. भारी-भरकम. चौड़ी छाती और कंधों वाला. दिल भी उनका उतना ही बड़ा था. दो-ढाई सौ लोगों की यूनिट के साथ काम करते थे. उनके साथ काम करने वाला हर शख्स उनकी तारीफ करता था. महज 48 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था.
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    रविवार, 9 अप्रैल 2017

    जानिए हमेशा अमर रहने वाले रहस्यमय योगी बाबा के बारे में -Learn about the mysterious Yogi Baba who is always immortal -

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    कभी न मरने वाले बाबा जी , हर कल और समय में नज़र आने वाले और गुरुओ के भी गुरु जो अपनी योग साधना से हमेशा इस दुनिया में रहते है | इन्होने मौत को भी जीत लिया है |
    जानिए हमेशा अमर रहने वाले रहस्यमय योगी बाबा के बारे में -Learn about the mysterious Yogi Baba who is always immortal -

    महावतार बाबा जी के बारे में परमहंस योगानंद ने अपनी पुस्तक योगी कथामृत में 1945 में बताया था। उन्होंने बताया कि किस प्रकार हिमालय में रहते हुए बाबा जी ने सदियों से आध्यात्मिक लोगों का मार्गदर्शन किया है।
    बाबाजी सिद्ध हैं जो साधारण मनुष्य कि सीमाओं को तोड़ कर समस्त मानव मात्र के आध्यात्मिक विकास के लिए चुपचाप काम कर रहे हैं। बताया जाता है आदि शंकराचार्य और ईसा मसीह ने भी बाबा जी से दीक्षा ली थी।
    जिसने जब भी देखा एक ही उम्र बताई बाबाजी के जन्मस्थान और परिवार के बारे में किसी को कुछ पता नहीं चल सका। जो लोग भी उनसे जब भी मिले, उन्होंने हमेशा उनकी उम्र 25-30 वर्ष ही बताई। लाहिड़ी महाराज ने बताया था कि उनकी शिष्य मंडली में दो अमेरिकी शिष्य भी थे। वे अपनी पूरी शिष्य मंडली के साथ कहीं भी कभी भी पहुंच जाया करते थे। परमहंस योगानंद ने अपनी पुस्तक में बाबाजी से जुड़ी दो घटनाओं का उल्लेख किया है जिनपर एक बार तो भरोसा नहीं होता।

    ऐसे टाल दी थी मौत -
    शिष्य की मृत्यु पहली घटना का उल्लेख करते हुए योगानंद ने लिखा है कि एक बार रात में बाबाजी अपने शिष्यों के साथ थे। पास ही में अग्नि जल रही थी। बाबाजी ने उस अग्नि से एक जलती हुई लकड़ी उठाकर अपने एक शिष्य के कंधे पर मार दी। जलती हुई लकड़ी से इस तरह मारे जाने पर बाबाजी के शिष्यों ने विरोध किया। इस पर बाबाजी ने उस शिष्य के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि मैंने तुम्हें कोई कष्ट नहीं पहुंचाया है बल्कि आज होने वाली तुम्हारी मृत्यु को टाल दिया है।

    मृतक यूं जिंदा हो गया
    इसी तरह जो दूसरी बात का उल्लेख योगानंद ने किया है, उसके अनुसार एक बार बाबाजी के पास एक व्यक्ति आया और वह जोर-जोर से उनसे दीक्षा देने की जिद करने लगा। बाबाजी ने जब मनाकर दिया तो उसने पहाड़ से नीचे कूद जाने की धमकी दी। इसपर बाबाजी ने कहा ‘कूद जाओ’, उस शख्स ने आव देखा न ताव पहाड़ी से कूद गया। यह दृश्य देख वहां मौजूद लोग हतप्रभ रह गए। तब बाबाजी ने शिष्यों से कहा- ‘पहाड़ी से नीचे जाओ और उसका शव लेकर आओ।’ शिष्य पहाड़ी से नीचे गए और क्षत-विक्षत शव लेकर आ गए। शव को बाबाजी के सामने रख दिया। बाबाजी ने शव के ऊपर जैसे ही हाथ रखा, वह मरा हुआ व्यक्ति सही सलामत जिंदा हो गया। इसके बाद बाबाजी ने उससे कहा कि ‘आज से तुम मेरी टोली में शामिल हो गए। तुम्हारी ये अंतिम परीक्षा थी।’
    साधकों की ऐसे करते हैं मदद, उन्हें पता ही नहीं चलता

    दुनिया के साधको पर रखते है नज़र -
    बाबाजी दुनियादारी से दूर रहकर योग साधकों को इस तरह सहायता करते हैं कि कई बार साधकों को उनके बारे में मालूम तक नहीं रहता। परमहंस योगानन्द ने ये भी बतलाया है कि सन् 1861 में लाहिड़ी महाशय को क्रिया योग की शिक्षा देने वाले बाबाजी ही हैं। बाद में लाहिड़ी महाशय ने अनेक साधकों को क्रिया योग की दीक्षा दी। लगभग 30 वर्ष बाद उन्होंने योगानंद के गुरु श्री युक्तेश्वर गिरी को दीक्षा दी। योगानंद ने 10 वर्ष अपने गुरु के साथ बिताए, जिसके बाद स्वयं बाबाजी ने उनके सामने प्रकट होकर उन्हें क्रिया योग के इस दिव्य ज्ञान को पाश्चात्य देशों में ले जाने का निर्देश दिया।
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