loading...

जो आपको चाहिए यहाँ खोज करे

loading...
काला जादू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
काला जादू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 7 अगस्त 2017

भारत की शापित जगह जहां से कोई जिन्दा नहीं आता India's cursed place from where no one lives

By
भारत में कुछ ऐसे स्थान है जिनके बारे में बहुत से लोग नही जानते पर वहा जाना मौत को गले लगाने से कम नही है . अर्थात किसी पुराने शाप के चलते अब ये या तो भूतिया हो गए हैं  या फिर उजाड़ पड़े हैं. हालांकि ऐसे भी स्थान है जो किसी शाप के चलते अब एक तीर्थ बन गए हैं.
ये भी देखे -

बहुत लोगों का मानना है कि इन जगहों पर जाने से हमारा अहित हो सकता है फिर भी  कुछ यहां अपने रोमांच के लिए जाते हैं. हालांकि कुछ ऐसे भी स्थान है जो शापित तो नहीं है, लेकिन किसी न किसी शाप से जुड़े हैं और वहां जाकर व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो सकता है.
आइए जानते हैं कि भारत में कहां-कहां स्थित है ऐसे शापित स्थान जहां आज भी शाप का असर कायम है. शापित होने का मतलब कतई यह नहीं की यह स्थान बुरे हैं. यहां आज भी हजारों की तादाद में लोग जाते हैं.
जमीन में दफन शापित नगरी 
जमीन में दफन शापित नगरी भारत की शापित जगह जहां से कोई जिन्दा नहीं आता India's cursed place from where no one lives
मध्यप्रदेश के देवास जिले के गांव गंधर्वपुरी को शापित गांव माना जाता है. यह गांव प्राचीनकाल में राजा गंधर्वसेन के शाप से पूरा पाषाण में बदल गया था. यहां का हर व्यक्ति, पशु और पक्षी सभी शाप से पत्थर के हो गए थे. फिर एक ‘धूकोट’ (धूलभरी आंधी) चला, जिससे यह पूरी नगरी जमीन में दफन हो गई.देवास की सोनकच्छ तहसील में स्थित है एक ऐसा गांव जो भारत के बौद्धकालीन इतिहास का गवाह है. इस गांव का नाम पहले चंपावती था. चंपावती के पुत्र गंधर्वसेन के नाम पर बाद में गंधर्वपुरी हो गया. आज भी इसका नाम गंधर्वपुरी है.जनश्रुति के अनुसार यहां मालव क्षत्रप गंधर्वसेन, जिन्हें गर्धभिल्ल भी कहते थे, के शाप से पूरी गंधर्व नगरी पाषाण की हो गई थी. राजा गंधर्वसेन के बारे में अनेकानेक किस्से प्रचलित हैं, लेकिन इस स्थान से जुड़ी कहानी कुछ अजीब ही है. कहते हैं कि गंधर्वसेन ने चार विवाह किए थे. उनकी पत्नियां चारों वर्णों से थीं. क्षत्राणी से उनके तीन पुत्र हुए सेनापति शंख, राजा विक्रमादित्य तथा ऋषि भर्तृहरि.
यहां के स्थानीय निवासी कमल सोनी बताते हैं कि यह बहुत ही प्राचीन नगरी है. यहां आज भी जिस जगह पर भी खुदाई होती है वहां से मूर्ति निकलती है.बताते हैं कि इस नगरी के राजा की पुत्री ने राजा की मर्जी के खिलाफ गधे के मुख के गंधर्वसेन से विवाह रचाया था. गंधर्वसेन दिन में गधे और रात में गधे की खोल उतारकर राजकुमार बन जाते थे. जब एक दिन राजा को इस बात का पता चला तो उन्होंने रात को उस चमत्कारिक खोल को जलवा दिया, जिससे गंधर्वसेन भी जलने लगे तब जलते-जलते उन्होंने राजा सहित पूरी नगरी को शाप दे दिया कि जो भी इस नगर में रहते हैं, वे पत्थर के हो जाएं.गंधर्वसेन गधे क्यों हुए और वे कौन थे यह एक लम्बी दास्तान है. इस संबंध में हमने गांव के सरपंच विक्रमसिंह चौहान से बात की, तो उन्होंने कहा कि यह सही है कि इस गांव के नीचे एक प्राचीन नगरी दबी हुई है. यहां हजारों मूर्तियां हैं.यहां पर 1966 में एक संग्रहालय का निर्माण किया गया, जहां कुछ खास मूर्तियां एकत्रित ‍कर ली गई हैं. संग्रहालय के केयर टेकर रामप्रसाद कुंडलिया बताते हैं कि उस खुले संग्रहालय में अब तक 300 मूर्तियों को संग्रहित किया गया. इसके अलावा अनेक मूर्तियां राजा गंधर्वसेन के मंदिर में हैं और अनेक नगर में यहां-वहां बिखरी पड़ी हैं.जमीन की खुदाई के दौरान यहां आज भी बुद्ध, महावीर, विष्‍णु के अलावा ग्रामीणों की दिनचर्या के दृश्यों से सजी मोहक मूर्तियां मिलती रहती हैं. ग्रामीणों की सूचना के बाद उन्हें संग्रहालय में रख दिया जाता है. स्थानीय निवासी बताते हैं क‍ि यहां से सैकड़ों मूर्तियां लापता हो गई हैं. खैर, अब आप ही तय करें क‍ि आखिर इस ऐतिहासिक नगरी का सच क्या है.
शापित किराडु शहर 
शापित किराडु शहर भारत की शापित जगह जहां से कोई जिन्दा नहीं आता India's cursed place from where no one lives
अब इसे आप चमत्कार कहें या अंधविश्‍वास, लेकिन एक शहर में एक ऐसा भी स्थान हैं, जहां जाकर लोग हमेशा-हमेशा के लिए पत्थर बन जाते हैं. कोई कहता है कि इस शहर पर किसी भूत का साया है तो कोई कहता है कि इस शहर पर एक साधु के शाप का असर है, यहां के सभी लोग उसके शाप के चलते पत्थर बन गए थे और यही वजह है कि आज भी उस शाप के डर के चलते लोग वहां नहीं जाते हैं. लोगों में अब वहम बैठ गया है. राजस्थान में बाड़मेर के पास किराडु शहर का आखिर सच क्या है?कहते हैं कि राजस्थान के बाड़मेर के पास एक ऐसा गांव है, जहां के मंदिरों के खंडहरों में रात में कदम रखते ही लोग हमेशा-हमेशा के लिए पत्थर बन जाते हैं. यह कोई शाप है, जादू है, चमत्कार है या भूतों की हरकत- कोई नहीं जानता. हालांकि किसी ने यह जानने की हिम्मत भी नहीं की कि क्या सच में यहां रात रुकने पर वह पत्थर बन जाएगा? कौन ऐसी रिस्क ले सकता है? तभी तो आज तक इसका रहस्य बरकरार है. कैसे जान पाएगा कोई कि अगर ऐसा होता है तो इसके पीछे कारण क्या है? भारत में शोध और रिसर्च को न तो बढ़ावा दिया जाता और न ही सरकार इस पर कोई खर्च करती है, तो आज भी देश का इतिहास इसी तरह खंडहरों में दफन है.बाड़मेर (राजस्थान) का किराडु शहर ऐसे ही किसी रहस्य को अपने भीतर दफन किए हुए है. कहते हैं कि एक समय था, जब यह स्थान भी आम जगहों की तरह चहल-पहल से भरा था और लोग यहां खुशहाल जीवन जी रहे थे. यहां हर तरह की सुख-सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन एक दिन अचानक इस शहर की किस्मत बदल गई. कहना चाहिए कि इस पर वज्रपात हुआ और सभी अपना जीवन खो बैठे.मान्यता है कि इस शहर पर एक साधु का शाप लगा हुआ है. यह लगभग 900 साल पहले की बात है, जबकि यहां परमारों का शासन था. तब इस शहर में एक सिद्ध संत ने डेरा डाला. कुछ दिन रहने के बाद जब वे संत तीर्थ भ्रमण पर निकले तो उन्होंने अपने साथियों को स्थानीय लोगों के सहारे छोड़ दिया कि आप इनको भोजन-पानी देना और इनकी सुरक्षा करना.संत के जाने के बाद उनके सारे शिष्य बीमार पड़ गए और बस एक कुम्हारिन को छोड़कर अन्य किसी भी व्यक्ति ने उनकी सहायता नहीं की. बहुत दिनों के बाद जब संत पुन: उस शहर में लौटे तो उन्होंने देखा कि मेरे सभी शिष्य भूख से तड़प रहे हैं और वे बहुत ही बीमार अवस्था में हैं. यह सब देखकर संत को बहुत क्रोध आया.उस सिद्ध संत ने कहा कि जिस स्थान पर साधुओं के प्रति दयाभाव ही नहीं है, तो अन्य के साथ क्या दयाभाव होगा? ऐसे स्थान पर मानव जाति को नहीं रहना चाहिए. उन्होंने क्रोध में अपने कमंडल से जल निकाला और हाथ में लेकर कहा कि जो जहां जैसा है, शाम होते ही पत्‍थर बन जाएगा. उन्होंने संपूर्ण नगरवासियों को पत्थर बन जाने का शाप दे दियाफिर उन्होंने जिस कुम्हारिन ने उनके शिष्यों की सेवा की थी, उसे बुलाया और कहा कि तू शाम होने से पहले इस शहर को छोड़ देना और जाते वक्त पीछे मुड़कर मत देखना. कुम्हारिन शाम होते ही वह शहर छोड़कर चलने लगी लेकिन जिज्ञासावश उसने पीछे मुड़कर देख लिया तो कुछ दूर चलकर वह भी पत्थर बन गई. इस शाप के चलते पूरा गांव आज पत्थर का बना हुआ है. जो जैसा काम कर रहा था, वह तुरंत ही पत्थर का बन गया.इस शाप के कारण ही आस-पास के गांव के लोगों में दहशत फैल गई जिसके चलते आज भी लोगों में यह मान्यता है कि जो भी इस शहर में शाम को कदम रखेगा या रुकेगा, वह भी पत्थर का बन जाएगा.किराडु के मंदिरों का निर्माण किसने कराया इस बारे में कोई तथ्य मौजूद नहीं है. यहां पर पर विक्रम शताब्दी 12 के तीन शिलालेख उपलब्ध हैं. पहला शिलालेख विक्रम संवत 1209 माघ वदी 14 तदनुसार 24 जनवरी 1153 का है जो कि गुजरात के चालुक्य कुमार पाल के समय का है. दूसरा विक्रम संवत 1218, ईस्वी 1161 का है जिसमें परमार सिंधुराज से लेकर सोमेश्वर तक की वंशावली दी गई है और तीसरा यह विक्रम संवत 1235 का है जो गुजरात के चालुक्य राजा भीमदेव द्वितीय के सामन्त चौहान मदन ब्रह्मदेव का है. इतिहासकारों का मत है कि किराडु के मंदिरों का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था तथा इनका निर्माण परमार वंश के राजा दुलशालराज और उनके वंशजों ने किया था.यहां मुख्यत: पांच मंदिर है जिसमें से केवल विष्णु मंदिर और सोमेश्वर मंदिर ही ठीक हालत में है. बाकी तीन मंदिर खंडहरों में बदल चुके हैं.खजुराहो के मंदिरों की शैली में बने इन मंदिरों की भव्यता देखते ही बनती है. हालांकि आज यह पूरा क्षेत्र विराने में बदल गया है लेकिन यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. इन मंदिरों को क्यों बनाया गया और इसके पीछे इनका इतिहास क्या रहा है इस सब पर शोध किए जाने की आवश्यकता है.
भानगढ़ का किला :
भानगढ़ का किला भारत की शापित जगह जहां से कोई जिन्दा नहीं आता India's cursed place from where no one lives
भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित एक एक शहर है. हालांकि इस शहर में कोई नहीं रहता है क्योंकि अब यह शहर पूरा का पूरा खंडहर में बदल चुका है. यहां का एक किला और महल सबसे ज्याता शापित माने जाते हैं. भानगढ़ के किले को आमेर के राजा भगवानदास ने 1573 ई. में बनवाया था.यहां बाजार, गलियां, हवेलियां, महल, कुएं और बावड़िया तथा बाग-बगीचे आदि सब कुछ हैं, लेकिन सब के सब खंडहर हैं. जैसे एक ही रात में सब कुछ उजड़ गया हो. पूरे शहर में एक भी घर या हवेली ऐसी नहीं है, जिस पर छत हो, लेकिन मंदिरों के शिखर आत्ममुग्ध खड़े दिखाई देते हैं.गुरु बालू का शाप : कहते हैं कि भानगढ़ में एक गुरु बालूनाथ रहते थे. उन्होंने भानगढ़ के महल के मूल निर्माण की मंजूरी दी थी लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी थी कि महल की ऊंचाई इतनी रखी जाए कि उसकी छाया उनके ध्यान स्थान से आगे न निकले अन्यथा पूरा नगर ध्वस्त हो जाएगा. बालूनाथ की ये चेतावनी किसी ने सुनी नहीं और राजवंश के राजा अजब सिंह ने उस महल की ऊंचाई बढ़ा दी जिससे की महल की छाया ने गुरु बालूनाथ के ध्यान स्थान को ढंक लिया और तभी से यह महल शापित हो गया.तंत्रिक का शाप : एक अन्य किंवदंति के अनुसार अरावली की पहाडि़यों में सिंघिया नाम का तांत्रिक अपने तंत्र-मंत्र और टोटकों के लिए जाना जाता था. कहते हैं कि वह मन ही मन भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती को चाहने लगा था. राजकुमारी को पाने के लिए उसने सिर में लगाने वाले तेल को अभिमंत्रित कर दिया था. कहा जाता है कि रत्नावली भी तंत्र-मंत्र और टोटके की जानकार थी. उसने अपनी शक्ति से तेल के टोटके को पहचान लिया और तेल एक बड़ी शिला पर डाल दिया. इस प्रयोग के बाद शिला तांत्रिक की ओर उड़ चली. चट्टान को अपनी ओर आते देख तांत्रिक क्रोधित हो गया.उसने शिला से कुचलकर मरने से पहले एक और तंत्र किया और शिला को समूचे भानगढ़ को बर्बाद करने का आदेश दिया. चट्टान ने रातों-रात भानगढ़ के महल, बाजारों और घरों को खंडहर में तब्दील कर दिया. लेकिन मंदिरों और धार्मिक स्थानों पर तांत्रिक का तंत्र नहीं चला और मंदिरों के शिखर ध्वस्त होने से बच गए.
असीरगढ़ का किला :
असीरगढ़ का किला भारत की शापित जगह जहां से कोई जिन्दा नहीं आता India's cursed place from where no one lives
कहते हैं यहाँ स्थित शिव मंदिर में महाभारतकाल के अश्वत्थामा आज भी पूजा-अर्चना करने आते हैं. असीरगढ़ का किला मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर है. कहते हैं कि जो एक बार अश्वत्थामा को देख लेता है, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है.ब्रह्मास्त्र चलाने के बारण भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को कलियुग में एक निश्‍चित तिथि तक भटकते रहने का शाप दे दिया था. यही कारण है कि पिछले लगभग पांच हजार वर्षों से अश्वत्थामा आज भी भटक रहे हैं. उनके बारे में कई जगहों पर उनके देखे जाने की जनश्रुतियां प्रचलित है उसी में से एक असीरगढ़ का किला सबसे ज्यादा प्रचलित है.
शापित है कृष्ण का गोवर्धन पर्वत :
शापित है कृष्ण का गोवर्धन पर्वत भारत की शापित जगह जहां से कोई जिन्दा नहीं आता India's cursed place from where no one lives
गोवर्धन पर्वत को गिरिराज पर्वत भी कहा जाता है. पांच हजार साल पहले यह गोवर्धन पर्वत 30 हजार मीटर ऊंचा हुआ करता था और अब शायद 30 मीटर ही रह गया है. पुलस्त्य ऋषि के शाप के कारण यह पर्वत एक मुट्ठी रोज कम होता जा रहा है. इसी पर्वत को भगवान कृष्ण ने अपनी चींटी अंगुली पर उठा लिया था. श्रीगोवर्धन पर्वत मथुरा से 22 किमी की दूरी पर स्थित है.पौराणिक मान्यता अनुसार श्रीगिरिराजजी को पुलस्त्य ऋषि द्रौणाचल पर्वत से ब्रज में लाए थे. दूसरी मान्यता यह भी है कि जब रामसेतुबंध का कार्य चल रहा था तो हनुमानजी इस पर्वत को उत्तराखंड से ला रहे थे, लेकिन तभी देववाणी हुई की सेतुबंध का कार्य पूर्ण हो गया है, तो यह सुनकर हनुमानजी इस पर्वत को ब्रज में स्थापित कर दक्षिण की ओर पुन: लौट गए.क्यों उठाया गोवर्धन पर्वत : इस पर्वत को भगवान कृष्ण ने अपनी चींटी अंगुली से उठा लिया था. कारण यह था कि मथुरा, गोकुल, वृंदावन आदि के लोगों को वह अति जलवृष्टि से बचाना चाहते थे. नगरवासियों ने इस पर्वत के नीचे इकठ्ठा होकर अपनी जान बचाई. अति जलवृष्टि इंद्र ने कराई थी. लोग इंद्र से डरते थे और डर के मारे सभी इंद्र की पूजा करते थे, तो कृष्ण ने कहा था कि आप डरना छोड़ दे…मैं हूं ना.परिक्रमा का महत्व : सभी हिंदूजनों के लिए इस पर्वत की परिक्रमा का महत्व है. वल्लभ सम्प्रदाय के वैष्णवमार्गी लोग तो इसकी परिक्रमा अवश्य ही करते हैं क्योंकि वल्लभ संप्रदाय में भगवान कृष्ण के उस स्वरूप की आराधना की जाती है जिसमें उन्होंने बाएं हाथ से गोवर्धन पर्वत उठा रखा है और उनका दायां हाथ कमर पर है.इस पर्वत की परिक्रमा के लिए समूचे विश्व से कृष्णभक्त, वैष्णवजन और वल्लभ संप्रदाय के लोग आते हैं. यह पूरी परिक्रमा 7 कोस अर्थात लगभग 21 किलोमीटर है.परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख स्थल आन्यौर, जातिपुरा, मुखार्विद मंदिर, राधाकुंड, कुसुम सरोवर, मानसी गंगा, गोविन्द कुंड, पूंछरी का लौठा, दानघाटी इत्यादि हैं. गोवर्धन में सुरभि गाय, ऐरावत हाथी तथा एक शिला पर भगवान कृष्ण के चरण चिह्न हैं.परिक्रमा की शुरुआत वैष्णवजन जातिपुरा से और सामान्यजन मानसी गंगा से करते हैं और पुन: वहीं पहुंच जाते हैं. पूंछरी का लौठा में दर्शन करना आवश्यक माना गया है, क्योंकि यहां आने से इस बात की पुष्टि मानी जाती है कि आप यहां परिक्रमा करने आए हैं. यह अर्जी लगाने जैसा है. पूंछरी का लौठा क्षेत्र राजस्थान में आता है.वैष्णवजन मानते हैं कि गिरिराज पर्वत के ऊपर गोविंदजी का मंदिर है. कहते हैं कि भगवान कृष्ण यहां शयन करते हैं. उक्त मंदिर में उनका शयनकक्ष है. यहीं मंदिर में स्थित गुफा है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह राजस्थान स्थित श्रीनाथद्वारा तक जाती है.गोवर्धन की परिक्रमा का पौराणिक महत्व है. प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णिमा तक लाखों भक्त यहां की सप्तकोसी परिक्रमा करते हैं. प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा पर यहां की परिक्रमा लगाने का विशेष महत्व है. श्रीगिरिराज पर्वत की तलहटी समस्त गौड़ीय सम्प्रदाय, अष्टछाप कवि एवं अनेक वैष्णव रसिक संतों की साधाना स्थली रही है.अब बात करते हैं पर्वत की स्थिति की. क्या सचमुच ही पिछले पांच हजार वर्ष से यह स्वत: ही रोज एक मुठ्ठी खत्म हो रहा है या कि शहरीकरण और मौसम की मार ने इसे लगभग खत्म कर दिया. आज यह कछुए की पीठ जैसा भर रह गया है.हालांकि स्थानीय सरकार ने इसके चारों और तारबंदी कर रखी है फिर भी 21 किलोमीटर के अंडाकार इस पर्वत को देखने पर ऐसा लगता है कि मानो बड़े-बड़े पत्‍थरों के बीच भूरी मिट्टी और कुछ घास जबरन भर दी गई हो. छोटी-मोटी झाड़ियां भी दिखाई देती है.पर्वत को चारों तरफ से गोवर्धन शहर और कुछ गांवों ने घेर रखा है. गौर से देखने पर पता चलता है कि पूरा शहर ही पर्वत पर बसा है, जिसमें दो हिस्से छूट गए है उसे ही गिर्राज (गिरिराज) पर्वत कहा जाता है. इसके पहले हिस्से में जातिपुरा, मुखार्विद मंदिर, पूंछरी का लौठा प्रमुख स्थान है तो दूसरे हिस्से में राधाकुंड, गोविंद कुंड और मानसी गंगा प्रमुख स्थान है.बीच में शहर की मुख्य सड़क है उस सड़क पर एक भव्य मंदिर हैं, उस मंदिर में पर्वत की सिल्ला के दर्शन करने के बाद मंदिर के सामने के रास्ते से यात्रा प्रारंभ होती है और पुन: उसी मंदिर के पास आकर उसके पास पीछे के रास्ते से जाकर मानसी गंगा पर यात्रा समाप्त होती है.मानसी गंगा के थोड़ा आगे चलो तो फिर से शहर की वही मुख्य सड़क दिखाई देती है. कुछ समझ में नहीं आता कि गोवर्धन के दोनों और सड़क है या कि सड़क के दोनों और गोवर्धन? ऐसा लगता है कि सड़क, आबादी और शासन की लापरवाही ने खत्म कर दिया है गोवर्धन पर्वत को.
राजा जगतपाल सिंह का शापित किला :
राजा जगतपाल सिंह का शापित किला भारत की शापित जगह जहां से कोई जिन्दा नहीं आता India's cursed place from where no one lives
झारखण्ड की राजधानी से 18 किलोमीटर की दुरी पर रांची-पतरातू मार्ग के पिठौरिया गांव में 2 शताब्दी पुराना राजा जगतपाल सिंह का किला स्थित है. यह 100 कमरों वाला विशाल महल अब खंडहर में परिवर्तित हो चुका है. इसके खंडहर में परिवर्तित होने का कारण इस किले पर हर साल बिजली गिरना है.आश्चर्य जनक रूप से इस किले पर दशकों से हर साल बिजली गिरती आ रही है जिससे की हर साल इसका कुछ हिस्सा टूट कर गिर जाता है. दशकों से ऐसा होते रहने के कारण यह किला अब बिलकुल खंडहर हो चुका है.ग्रामिणों के अनुसार इस किले पर हर साल बिजली एक क्रांतिकारी द्वारा राजा जगतपाल सिंह को दिए गए शाप के कारण गिरती है. वैसे तो बिजली गिरना एक प्राकृति घटना है, लेकिन एक ही जगह पर दशकों से लगातार बिजली गिरना अवश्य ही आश्चर्यजनक है.कौन थे राजा जगतपाल सिंह? इतिहासकारों के अनुसार पिठौरिया प्रारम्भ से ही मुंडा और नागवंशी राजाओं का प्रमुख केंद्र रहा है. यह इलाका 1831-32 में हुए कौल विद्रोह के कारण इतिहास में जाना जाता है. पिठौरिया के राजा जगतपाल सिंह ने अपने क्षेत्र का विकास कर उसे व्यापार और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना दिया था. वो अपने क्षेत्र की जनता में काफी लोकप्रिय थे लेकिन उनकी कुछ गलतीयों ने उनका नाम इतिहास में खलनायकों और गद्दारों की सूचि में शामिल करवा दिया.सबसे पहली गलती तो उन्होंने 1831 के विद्रोह के समय की. 1831 में सिंदराय और बिंदराय के नेतृत्व में आदिवासियों ने आंदोलन किया था लेकिन यहां की भौगोलिक परस्तिथियों से अनजान अंग्रेज विद्रोह को दबा नहीं पा रह थे. इसलिए अंग्रेज अधिकारी विलकिंगसन ने राजा जगतपाल सिंह के पास सहायता का संदेश भिजवाया जिसे की जगतपाल सिंह ने स्वीकार करते हुए अंग्रेजों की मदद की. उनकी इस मदद के बदले तत्कालीन गवर्नर जनरल विलियम वैंटिक ने उन्हें 313 रुपए प्रतिमाह आजीवन पेंशन दी. दूसरा और सबसे बड़ा गुनाह उन्होंने 1857 की क्रांति में किया.1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों को रोकने के लिए उन्होंने पिठौरिया घाटी की घेराबंदी की थी, ताकि क्रांतिकारी अपने मकसद में सफल न हो सके. इतना ही नहीं वे क्रांतिकारियों की हर गतिविधियों की जानकारी अंग्रेज तक पहुंचाते थे. इससे राज्य में राजा के प्रति नाराजगी अपने चरम पर पहुंच गई. उनकी गद्दारी के चलते ही उस समय क्रांतिकारी ठाकुर विश्वनाथ नाथ शाहदेव उन्हें सबक सिखाने पिठौरिया पहुंचे और उन पर आक्रमण किया. बाद में वे गिरफ्तार हो गए और जगतपाल सिंह की गवाही के कारण उन्हें 16 अप्रैल 1858 को रांची जिला स्कूल के सामने कदम्ब के वृक्ष पर फांसी पर लटका दिया गया. जानकार बताते हैं कि उनकी ही गवाही पर कई अन्य क्रांतिकारियों को भी फांसी पर लटकाने का काम किया गया.लोकमान्यता है कि विश्वनाथ शाहदेव ने जगतपाल सिंह को अंग्रेजों का साथ देने और देश के साथ गद्दारी करने पर यह शाप दिया कि आने वाले समय में जगतपाल सिंह का कोई नाम लेवा नहीं रहेगा और उसके किले पर हर साल उस समय तक वज्रपात होता रहेगा, जब तक यह किला पूरी तरह बर्बाद नहीं हो जाता. तब से हर साल पिठौरिया स्थित जगतपाल सिंह के किले पर वज्रपात हो रहा है.

ये भी देखे -

रविवार, 16 जुलाई 2017

बाल काटने की घटना का पूरा रहस्य जानिए Find the complete secret of hair cutting incident

By
बाल काटने की घटना का पूरा रहस्य जानिए Find the complete secret of hair cutting incident
बालोतरा। बाड़मेर का भाटा गांव। रात को अपने परिवार के साथ सोई गला देवी सुबह उठी तो चोटी कटी हुई थी। इसी तरह बालोतरा के शास्त्री कॉलोनी में सोई किशोरी जब सुबह उठी तो उसके बाल कटे हुए थे। और घर के बाहर कुछ बाल पड़े थे। जिले में ये सिर्फ दो घटनाएं नहीं हैं। पिछले कुछ दिनों में बाड़मेर के कई गांवों से ऐसी दर्जनों खबरें सामने चुकी हैं।
बाल काटने की घटना का पूरा रहस्य जानिए Find the complete secret of hair cutting incident

 बालोतरा शहर में भी पिछले एक हफ्ते में ऐसे 3 मामले सामने चुके हैं। बाल-नाखून काटने, शरीर पर त्रिशूल बनाने, काजल-बिंदिया लगाने के बाद बेहोश होने की अफवाहों से गांव तो गांव अब शहरी भी आतंकित हो रहे हैं। इन घटनाओं का औपचारिक कोई गवाह नहीं है। पुलिस के पास मामले पहुंच रहे हैं, लेकिन पहेली अभी तक सुलझी नहीं है। लोग इतने डरे हुए हैं कि गांवों में रात को पहरेदारी शुरू हो गई है। संदिग्ध को पकड़ने के चक्कर में कई जगह निर्दोष लोग भी ग्रामीणों से पिट चुके हैं। 
बाल काटने की घटना का पूरा रहस्य जानिए Find the complete secret of hair cutting incident

ऐसे ही एक-दूसरे मामले में एक महिला को डॉक्टर ने जांच के बाद मानसिक रोगी बताया। आपको बता दे की यह पूरी कहानी करीब 15-20 दिन पहले बीकानेर और नागौर से शुरू हुई। रात को बाल काटने की अफवाहों का ऐसा दौर शुरू हुआ कि लोगों में घबराहट फैल गई। 18 जून को जोधपुर के चिमाणा में ऐसी ही घटना सामने आई। एक किशोर के बाल काट लिए गए। पेट पर त्रिशूल बना दिया गया।
 बहरहाल, परिजन ने केस तो दर्ज कराया ही साथ ही तंत्र-मंत्र भी करवा लिया। इसके बाद           तोबाड़मेर,बालोतरा,महाबार,भीमरलाई,बुड़ीवाड़ा,पादरू, बायतु जैसे गांवों से मामलों की कतार लग गईं। अब ताे जिलेभर में ऐसी घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। अफवाहों की आड़ में लोग लुट भी रहे हैं।
किसी भी घर में ऐसी घटना होने पर घबराए परिजन तांत्रिक को बुलाते हैं। भोपा भी तंत्र-मंत्र के नाम पर रुपए तक वसूल रहे हैं।
 तांत्रिको और भोपे का यह टोना-टोटका भी गांव वालों के लिए रोज़ का तमाशा बना हुआ है।
राजकीय नाहटा अस्पताल के पीएमओ डॉ बलराज सिंह पंवार का कहना है की ऐसी घटनाओ से महिलाए टोने टोटके का सहारा ले रही है जिससे बेहोशी की हालत पैदा हो रही हे। बाल काटने जैसा मामला कोई सामने नहीं आया है। कुछ लोग खुद ही भोपो के चक्कर में अपने ऊपर आने वाली कथित विपदा के डर से खुद ही अपने बाल काट रहे है। उन्होंने कहा की लोग डरे नहीं तेज गर्मी में डर व घबराहट के कारण बेहोशी है महिलाओ में तो वे सीधे अस्पताल पहुंचकर अपना इलाज करवाए।

अभी तक क्षेत्र में जितने भी मामले सामने आये है उनमे जांच के दौरान बाल काटने जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। कोई शरारती तत्व ऐसी अफवाहे फैला रहे है। जिससे घबराहट में महिलाए बेहोश हो रही है। उसके बाद महिलाए भोपो का सहारा ले लेती है उन्होंने कहा की किसी को डरने की कोई जरुरत नहीं है बाल काटने जैसी घटनाए मात्र कोरी अफवाह है। बाड़मेर के गांवों में शरारती तत्व सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं अफवाहें
यह तरीका अपना रहे है परिजन
टोने टोटके का सहारा न ले महिलाए, गर्मी में घबराहट की वजह से हो रही है बेहोशी
अभी तक के मामलो में ऐसा कुछ नहीं निकला
ये भी देखे -

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

काला जादू ,किसी भी लड़की के लिए आसान तरीका Black magic, easy way for any girl -

By
काला जादू भारत की बहुत ही प्राचीन विद्या है जो सदियों पुरानी है ,ये सकती योग या साधना से प्राप्त नही होती ये शक्ति दुसरो की सकती हो हर कर या जीत कर प्राप्त की जाती है और मन्त्र किसी का मनोबल गिराने का काम करता है जिससे उस आदमी को वश के करना आसान हो जाता है
काला जादू ,किसी भी लड़की के लिए आसान तरीका Black magic, easy way for any girl -

काला जादू एक बहुत पुरानी विधा है जिसका प्रयोग किसी के भी साथ गलत और सही दोनों वजह के लिए किया जा सकता है | काला जादू तंत्र मंत्र का समूह है जिसके द्वारा मन पसंद काम को सफल किया जा सकता है इसके किये विभिन्न प्रकार के टोटके किये जाते है जिसके द्वारे हम इच्छित परिणाम प्राप्त कर सकते है | आप सभी लोग ये सोचते होंगे की काला जादू कैसे किया जाता है और इसका प्रयोग कहाँ पे कर सकते है | तो जरा धयान रहे की इसको कही भी प्रयोग किया जस सकता है यहाँ तक की दुशमन को भी तबाह किया जा सकता है और किसी को भी आबाद किया जा सकता है तो मई बताना चाहता हु की कला जादू से हम किसी को भी अपने वस में कर सकते है |
और देखे -

वशीकरण करे किसी को भी काला जादू के पान से -Black Magic To Captivate Anyone 


हम काला जादू प्रयोग किसी लड़के/लडकी को पटाने के लिए भी कर सकते है जिसको आप पसंद करते है उसके ऊपर कुछ कला जादू टोटके करने होते है बाद में वो आपके अनुसार ही चलने लगेगा और किसी पर भी अपना अधिकार जमा सकते है | कला जादू के द्वारा किसी को भी अपने प्यार में लाया जा सकता है लेकिन आजकल इसका प्रयोग गलत तरीके के लिए बहुत हो रहा है सो कृपा करके गलत प्रयोग न करे इसके किसी के दिल पर चोट पहुँच सकती है | काला जादू करने का मंत्र बहुत होते है हर प्रकार के काम के लिए अलग अलग मंत्र होते है सो आप हमे बताये की किस तरह का मंत्र और तंत्र चाइये आपको कला जादू करने के लिए और हम आपको सही ढंग से कला जादू करने की विधि और उसके उपाय बतेयेंगे |

आप यहाँ पर काला जादू सीखने का तरीका और उसके लक्षण के बारे में जान सकते है अगर किसी के ऊपर कला जादू किया गया है हम इसको कैसे पहचानेंगे | कला जादू बहुत बड़ा तंत्र मंत्र है जिसके द्वारा संसार का कोई भी काम सिद्ध किया जा सकता है तो आप हमें अपनी समस्या बताकर उसके समाधान के हिसाब से टोटके और मंत्र प्राप्त कर सकते है |

यह पर आप हमारे तांत्रिक गुरु से किसी भी बंदिश का तोड़ पा सकते है जैसे की काला जादू वशीकरण, काला जादू सीखने के तरीके, काला जादू कैसे करे, काला जादू के लक्षण, काला जादू वशीकरण मंत्र, काला जादू कैसे सीखे, काला जादू करने का मंत्र, काला जादू करने के तरीके, जादू कैसे किया जाता है, काला जादू मंत्र, लडकी पटाने का टोटका, लडकी पटाने का मंतर, लडकी पटाने के टिप्स, लडकी वशीकरण टोटका, लडकी को वश मे करना, काला जादू वशीकरण इत्यादि |

यदि किसी लड़की को कला जादू वशीकरण से किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहते है तो कर सकते है क्योंकि ये एक अति प्रबल तांत्रिक क्रिया है | जिसके द्वारा की भी स्त्री या पुरुष को अपने वश में कर सकते है | यदि आप किसी लड़की को या किसी लड़के को अपना बनाना चाहते है तो संपर्क करे और अपने प्रेम को अपने वश में करे |
ये भी देखे -
loading...
loading...