loading...

जो आपको चाहिए यहाँ खोज करे

loading...
संतान प्राप्ति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
संतान प्राप्ति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

संतान प्राप्ति के नियम और उपाय,और बांझपन का कारण -What should we do to the Son, and the cause of infertility -

By
  पुत्र प्राप्ति के लिए क्या क्या करने होंगे आप ये जन ले-संतान प्राप्ति के नियम और उपाय-Progeny of the rules and measures in hindi-पुत्र प्राप्ति के लिए हमें क्या करना चाहिए-पुत्र प्राप्ति के लिए मंत्र-पुत्र प्राप्ति के सरल उपाय-पुत्र प्राप्ति के योग-पुत्र प्राप्ति हेतु उपाय-पुत्र जीवक बीज-लडका होने के लक्षण-लडका कैसे पैदा करे--बाँझपन का कारण,उसके लक्षण,और उपचार।Cause sterility, its symptoms, and treatments.--क्या आप जानते हैं कि हमारे आसपास का प्रदूषण एक स्त्री के शारीरिक अंगों पर कितना प्रभावी है? हमें दिखाई तो नहीं देता लेकिन धीरे-धीरे यह प्रदूषण उस महिला के अंदरूनी अंगों को नष्ट करता है। प्रदूषण के अलावा सिगरेट-बीड़ी का धुंआ भी बांझपन के लिए जिम्मेदार वस्तुओं की लिस्ट में काफी ऊपर है।
बाँझपन का कारण,उसके लक्षण,और उपचार।Cause sterility, its symptoms, and treatments.बच्चे केसे होते है ,बाँझपन का इलाज -पुत्र प्राप्ति के लिए क्या क्या करने होंगे आप ये जन ले-संतान प्राप्ति के नियम और उपाय-Progeny of the rules and measures in hindi-पुत्र प्राप्ति के लिए हमें क्या करना चाहिए-पुत्र प्राप्ति के लिए मंत्र-पुत्र प्राप्ति के सरल उपाय-पुत्र प्राप्ति के योग-पुत्र प्राप्ति हेतु उपाय-पुत्र जीवक बीज-लडका होने के लक्षण-लडका कैसे पैदा करे--बाँझपन का कारण,उसके लक्षण,और उपचार।Cause sterility, its symptoms, and treatments संतान प्राप्ति के योग संतान प्राप्ति के आयुर्वेदिक उपाय संतान प्राप्ति के उपाय इन लाल किता पुत्र प्राप्ति का अचूक मंत्र संतान बाधा का निवारण संतान प्राप्ति के लिए व्रत संतान प्राप्ति के लिए शिव पूजा संतान न होने के कारण संतान प्राप्ति में देरी के कारण संतान दोष संतान बाधक योग संतान प्राप्ति ग्रह संतान प्राप्ति कब होगी संतान प्राप्ति के लिए उपाय संतान पाने के उपाय संतान योग कैलकुलेटर गर्भ धारण करने का सही समय गर्भधारण की प्रक्रिया गर्भ ठहरने की विधि गर्भ ठहरने की दवा गर्भधारण के लक्षण गर्भ ठहरने का समय गर्भवती कैसे होती है गर्भवती होने से कैसे बचे


महिलाओं में बढ़ता बांझपन-
चिकित्सकीय संदर्भ से जानें तो पॉलिसिस्टिक ऑवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) भारतीय प्रजनन आयु की महिलाओं में अंत:स्रावी विकारों में एक ऐसा विकार है, जिससे बांझपन होता है। यदि कोई महिला दर्दनाक अनियमित मासिक धर्म या मुंहासे से ग्रस्त है और उसका वजन भी बढ़ रहा है, तो समझिए वह पीसीओएस नामक हार्मोन असुंतलन से गुजर रही है।
कुछ लक्षण--.
इस मुद्दे पर विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर ऐसे लक्षण किसी भी महिला में हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह भी बांझपन की शिकार है। वरन् जब यह लक्षण कुछ ज्यादा समय के लिए बढ़ जाएं तो उस महिला को सतर्क होने की आवश्यकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेने में एक मिनट भी ना हिचकिचाएं।
 इस सिंड्रोम के कारण होता है-
वैसे तो बांझपन उत्पन्न करने वाला पीसीओएस एक बेहद सामान्य सिंड्रोम है जो इन दिनों भारतीय महिलाओं में देखा गया है। लेकिन अभी भी अधिकांश महिलाएं इस सिंड्रोम से अनजान हैं। यह मुंहासे से लेकर, वजन बढ़ाने और हार्मोन असुंतलन जैसी अन्य समस्याएं भी उत्पन्न करता है।
जानें कुछ लक्षण-
इसके अलावा तैलीय त्वचा, जो पहले नहीं होती थी लेकिन कुछ समय से होने लगी है। किसी भी स्त्री की तैलीय त्वचा होना आम बात है, लेकिन ड्राई स्किन वाली स्त्रियों की अचानक बदलती स्किन पर गौर करना जरूरी है।
बाल झड़ने लगें तो--
इसके अलावा बालों का झड़ना या फिर हल्के हो जाना भी एक लक्षण है। यह भी हो सकता है कि जब किसी महिला में बांझपन जैसा विकार उत्पन्न हो रहा हो तो वह सामान्य से कुछ अजीब व्यवहार करने लगे। स्वभाव में चिड़चिड़ापन और बिना वजह के बातों को बढ़ाना, उनकी शारीरिक परेशानी को दर्शा सकता है।
शारीरिक अंगों में बदलाव-
लेकिन अंदरूनी बदलाव एक साथ एक महिला के बाहरी शारीरिक अंगों में बदलाव भी बांझपन के होने का संकेत देते हैं। अचानक स्तनों का विकास कम हो जाना या फिर त्वचा में झुनझुनाहट आना एक ऐसा लक्षण है जिस पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसा हो तो फौरन डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
 बाँझपन का उपचार के तरीके-
इसके अलावा और भी गहराई से देखा जाए तो ऐसे कई लक्षण निकलकर सामने आते हैं जो चौंकाने वाले हैं। लेकिन इसका इलाज होना भी संभव है। बांझपन के उपचारों के अंतर्गत पहला है डिंबक्षरण को खत्म करना। गर्भ धारण करने के लिए महिलाओं में अंडोत्सर्ग होना जरूरी है, लेकिन यह सिंड्रोम डिंबक्षरण में समस्याएं पैदा करता है, जिसे औषधि-प्रयोग द्वारा ठीक किया जा सकता है।
सर्जरी भी है मौजूद-
अगला है लैप्रोस्कोपी, जो एक ऐसा उपचार है जिसके द्वारा गर्भाशय और ट्यूब की जांच की जाती है। इसे की-होल सर्जरी भी कहा जाता है, इसमें अंडाशय की पुटिका विद्युतधारा प्रवाह के साथ पतली सुई के प्रयोग से जला दी जाती है। ऐसा करने से पीड़ित स्त्री में बने हुए हार्मोन के असुंतलन में सुधार आता है। साथ ही गर्भावस्था प्राप्त करने में भी सहायता प्राप्त होती है।
बाँझपन का कुछ घरेलू उपचार भी-
लेकिन यदि घरेलू उपचारों से भी बांझपन की दिक्कत को कोई महिला समाप्त करना चाहती है तो उसके लिए भी खासतौर पर कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो पीड़ित महिला के लिए लाभकारी हैं। इसमें पहला है फर्टिलिटी डाइट लेने का उपाय, एक ऐसी डाइट जो किसी सलाहकार से ली जा सकती है।
इससे गर्भवती होने के अवसर बढ़ सकते हैं-
इसकी मदद से किसी महिला के गर्भवती होने के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके अलावा जितना संभव हो उतना ही महिलाओं को अपने रोज़ाना के भोजन से अधिक से अधिक मात्रा में प्रोटीन फूड लेना चाहिए। कोई चाहे तो किसी न्यूट्रिशनिस्ट से प्रोटीन डाइट भी बनावाई जा सकती है।
खाना-पीना रखें ध्यान -
इसके अलावा भोजन करने का समय सही रखें, देरी तो बिलकुल भी ना करें। क्योंकि पहले से ही कुछ कमज़ोरियों के कारण एक महिला का शरीर बांझपन का शिकार हो जाता है। ऐसे में खाने में आने वाली कमियां इस बीमारी को और भी बढ़ा सकती हैं।
व्यायाम भी है जरूरी-
इसके अलावा रोज़ाना या फिर कम से कम 2-3 दिनों के बाद व्यायाम करना भी जरूरी है। व्यायाम ऐसा नहीं जो जिम में जाकर किया जाए, इसके लिए महिलाएं डॉक्टर की सलाह ले सकती हैं जिससे उन्हें कुछ खास कसरत के तरीके पता लग सकते हैं।
कॉफी को करें ना-
आखिरी सलाह लेकिन काफी जरूरी सलाह उन सभी महिलाओं के लिए है जिनकी शादी हो गई है, होने वाली है या फिर वे बेबी प्लानिंग कर रही हैं। जितना संभव हो सके कॉफी का सेवन करना छोड़ दें, या फिर कभी भूलकर भी इसे ना पीयें। ऐसा माना गया है कि कॉफी के सेवन को कम करने से एस्ट्रोजन स्तरों में काफी कमी आ सकती है, जिससे गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।
ये जरुर  देखे --

सोमवार, 7 अगस्त 2017

पीरियड्स के कितने दिनों बाद या पहले गर्भ धारण होता है How many days of pregnancy occur before or after birth

By
आमतोर पर लड़कियां जब सेक्स sambhndh। जिनका जवाब उनके पास नहीं होता है और वह अंदर ही अंदर डरती रहती हैं। लेकिन, ऐसी महिलाओं को अब डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है क्योंकि आपके हर वो एक सवालों का जवाब हमारे पास है। हालाँकि, देखा जाए तो इन दिनों जो महिलाओं के मन में सबसे ज्यादा सवाल उठते हैं, वो इस तरह के होते हैं जो निचे बताए जा रहे हैं-
पीरियड्स के कितने दिनों बाद या पहले गर्भ धारण होता है How many days of pregnancy occur before or after birth

पीरियड्स के कितने दिनों बाद प्रेगनेंसी होती है ?How many days of pregnancy do pregnancy occur?
पीरियड्स शुरू होने के 14 दिन बाद आप गर्भवती हो सकती हैं, यदि आपका साइकल 28 दिनों का होता है तब। क्योंकि यह समय ओवुलेशन के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, इस दौरान यदि आप संभोग करती हैं तब आपके गर्भवती होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, इस समय आपके अंडाशय से अंडा रिलीज होता है, जो कि 12 से 24 घंटे तक रहता है। हालाँकि, इसके लिए आपके ओव्‍यूलेशन साइकिल का सही होना बहुत जरूरी है। ऐसे में, गर्भधारण के लिए, जब भी संबंध बनायें तो ओव्‍यूलेशन पीरियड का जरूर ध्‍यान रखें। उदहारण के लिए यदि आपके पीरियड्स का समय 30 को है तब आपके ओव्‍यूलेशन का समय 14 से 17 के बीच होता है। इसलिए, इस दौरान आप संबंध बनाने की कोशिश करें।
प्रेगनेंसी में पीरियड होते हैं क्या ?Are there periods in pregnancy?
बिल्कुल नहीं, प्रेगनेंसी में पीरियड्स नहीं होते हैं, लेकिन कुछ महिलाओं में स्पॉट की समस्या देखने को मिलती है। हालाँकि, इसमें चिंता की कोई बात नहीं होती, लेकिन फिर भी तुरंत इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। क्योंकि, गर्भावस्था के शुरुआती चरण में रक्तस्त्राव के अनेक कारण हो सकते हैं, जैसे कि- संक्रमण, एक्टोपिक प्रेगनेंसी (फेलोपियन ट्यूब में बच्चे का विकास), सर्वाइकल इरोजन, अंडे के निषेचन के दौरान आदि इस तरह की समस्या देखने को मिल सकती है।
प्रेगनेंसी टेस्ट कितने दिन बाद करें ?How many days after pregnancy test do?
प्रेगनेंसी टेस्ट आप अपने पीरियड्स डेट के निकलने के पहले या दूसरे ही दिन किया जाना चाहिए। यदि आप घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करती हैं तब इसके लिए आप सुबह के समय पहले यूरिन से करें। क्योंकि, आपके पेशाब में गर्भावस्था के हॉर्मोन ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोफिन (एच.सी.जी/hCG) की मौजूदगी का पता चलता है। हालाँकि, ज्यादातर प्रेग्नेंसी टेस्ट किट इतनी संवेदनशील होती हैं, कि वे पीरियड्स की निय​त तिथि के पहले दिन ही पेशाब में एच.सी.जी. की मौजूदगी का पता लगा लेती हैं।
प्रेगनेंसी का कितने दिन में पता चलता है ?How many days of pregnancy are detected?
प्रेगनेंसी का पता आपके पीरियड्स मिस होने के बाद चलता है, जब आप होम प्रेगनेंसी टेस्ट करती हैं। आमतौर पर, फर्टिलाइज़ेशन के करीब दो हफ्ते बाद, गर्भावस्था की जांच की जाए, तो अधिकांश प्रेग्नेंसी टेस्ट सटीक परिणाम देते हैं।
यदि आपके मन में गर्भावस्था से संबंधित किसी भी तरह के और भी सवाल हैं तब आप हमारे ज़ेन पैरेंट के कम्युनिटी में जाकर पूछ सकते हैं। जहाँ आपको न केवल गर्भावस्था से संबंधित बल्कि आपके बच्चों के बारे भी विस्तृत जानकारियाँ मिलेंगी। इतना ही नहीं, आप पेरेंटिंग से संबंधित और भी आर्टिकल पड़ सकती हैं।
ये भी देखे -

शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016

गर्भावस्था में खून आता है तो डरे नही -Bleeding in pregnancy is not afraid -

By
गर्भावस्था में खून आना या गर्भावस्था में रक्तस्राव होता है तो डरे नही। आमतौर पर, गर्भावस्था के 24 हफ्तों के पहले मानव शरीर में ऐसा होने का वर्णन है। गर्भावस्था के प्रारंभिक दिनों में गर्भस्राव का होना आम समस्या है।प्रारंभिक गर्भस्राव, जो एलएमपी (LMP) (औरत के आखिरी मासिक धर्म) के छठे सप्ताह से पहले होता है, उसे चिकित्सकीय भाषा में गर्भावस्था के प्रारंभिक दौर में नुकसान या रासायनिक गर्भावस्था कहा जाता है। अंतिम मासिक धर्म एलएमपी (LMP) के छठे सप्ताह के बाद होने वाले एलएमपी (LMP) को चिकित्सकीय भाषा में नैदानिक स्वतःप्रवर्तित गर्भपात कहा जाता है।

गर्भावस्था में खून आता है तो डरे नही -Bleeding in pregnancy is not afraid -

गर्भावस्था के पहले 20 सप्ताह के दौरान ब्लीडिंग

गर्भवती महिलाओं में से करीब 20 फीसदी को गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान वैजाइनल ब्लीडिंग हो सकती है। डॉ. मुखर्जी के अनुसार गर्भावस्था की पहली आधी अवधि के दौरान स्पॉटिंग या ब्लीडिंग होने की कई वजहें हो सकती हैं।

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग
कुछ महिलाओं को गर्भावस्था की शुरूआत में थोड़ी सामान्य स्पॉटिंग हो सकती है क्योंकि इस दौरान फर्टिलाइज़्ड अंडा गर्भाशय की लाइनिंग पर इंप्लांट होता है। डॉ. मुखर्जी बताती हैं, ’’फर्टिलाइज़्ड अंडा फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय में पहुंचता है, जहां यह गर्भाशय की लाइनिंग से जुड़ जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान गर्भाशय में माता की कुछ रक्त धमनियों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सर्विक्स और योनि से थोड़ा रक्त प्रवाह हो सकता है। चूंकि इंप्लांटेशन ब्लीडिंग गर्भावस्था की बिल्कुल शुरूआत में होती है और इसलिए अक्सर इसे हल्के पीरियड के तौर पर भी देखा जा सकता है।’’

हॉर्मोन स्तर में बदलाव
आमतौर पर मासिक धर्म का नियंत्रण करने वाले हॉर्मोन की वजह से भी गर्भावस्था की शुरूआत में ब्लीडिंग हो सकती है।

सर्वाइकल (गर्भाशयग्रीवा) या योनि में संक्रमण
सर्विक्स, योनि या यौन संक्रमण (जैसे क्लेमीडिया, गोनोरिया या हर्प्स) की वजह से भी गर्भावस्था की पहली तिमाही में ब्लीडिंग हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान होने वाले संक्रमणों का डॉक्टर की सलाह से जल्दी इलाज कराएं।

यौन संबंध
गर्भावस्था के दौरान सर्विक्स में अतिरिक्त रक्त का प्रवाह होता है। गर्भावस्था के दौरान निकलने वाले हॉर्मोन सर्विक्स की सतह में बदलाव कर देते हैं, जिससे घर्षण जैसे यौन संबंध बनाने के बाद इसमें ब्लीडिंग की आशंका बढ़ जाती है।

फाइब्रॉइड्स
कई बार प्लेसेंटा गर्भाशय में ऐसी जगह जुड़ जाता है, जहां उसकी लाइनिंग में फाइब्रॉइड या कोई और विकास हो, इस वजह से भी कई बार ब्लीडिंग हो जाती है। लेकिन इससे गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान नहीं होता है।

कई बार पहले 20 सप्ताह में ब्लीडिंग होना किसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसकी वजह निम्नलिखित में से कुछ भी हो सकती है:

गर्भपात
गर्भावस्था के पहले 12 सप्ताह के दौरान गर्भपात होना सबसे सामान्य होता है और पहली तिमाही में ब्लीडिंग होने पर गर्भपात की आशंका सताने लगती है। आमतौर पर गर्भावस्था की शुरूआत में गर्भपात तब होता है, जब भू्रण सही ढंग से विकास नहीं कर रहा हो। डॉ. मुखर्जी कहती हैं,  “कुछ महिलाओं को उनके गर्भवती होने का अहसास होने से पहले ही उनका गर्भपात हो जाता है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पीरियड चल रहे हैं।’’

सबकोरियॉनिक हैमोरोज
गर्भावस्था के शुरूआती दौर में ब्लीडिंग होना या प्लेसेंटा के आसपास खून के छोटे-छोटे थक्के जम सकते हैं।

एक्टोपिक गर्भावस्था
एक्टोपिक गर्भावस्था में फर्टिलाइज़्ड भू्रण गर्भाशय के बाहर इंप्लांट हो जाता है आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में। अगर भू्रण वहां विकसित होता रहा तो फैलोपियन ट्यूब फट सकती है, जो माता के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

मोलर गर्भावस्था
मोलर गर्भावस्था एक दुर्लभ स्थिति होती है, जिसमें आसामान्य कोशिकाएं भू्रण के बजाय गर्भाशय में विकसित होने लगती हैं। ऐसा तब होता है, जब भू्रण सही ढंग से विकसित नहीं हो रहा हो लेकिन गर्भाशय की कुछ कोशिकाएं बढ़ने और गुणा होने लगती हैं। दुर्लभ मामलों में कोशिका कैंसरयुक्त हो सकती है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती है।

केमिकल गर्भावस्था
जब अंडा फर्टिलाइज़्ड हो लेकिन पूरी तरह गर्भाशय में इंप्लांट नहीं हुआ हो तो इससे केमिकल गर्भावस्था कहा जाता है। गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन स्तर की जांच से इसका पता लगाया जा सकता है।
ये भी देखे -अगर बेटे की चाहत है तो ये तरीका अपनाएं -If the child wants to adopt this method -

गुरुवार, 29 सितंबर 2016

अगर बेटे की चाहत है तो ये तरीका अपनाएं -If the child wants to adopt this method -

By
एक पुत्र की चाहत सब की होती है ,सब चाहते है की होने वाली पहली संतान एक बेटा ही हो ,लेकिन अज्ञानता वश और सही विधि का ध्यान नही होने से अधिकतर दम्पति के लड़की हो जाती ही ,इस विषय में हमारे शास्त्रों में बहुत अच्छे उपाए बताये गये है .अगर इन उपाए का सही से पालन किया जाये हो होने वाली संतान पुत्र ही होगी एसा कहना इन शास्त्रों का है -इसलिए हम इन शास्रो में से आपके लिए लाये है कुछ बहतरीन तरीके जिनका इस्तेमाल हमे करना चाहिए बेटे की चाहत रखने वालो को - लेकिन आज के जमाने में लड़का और लड़की सामान होते है --
अगर बेटे की चाहत है तो ये तरीका अपनाएं -If the child wants to adopt this method -


नियम -
अगर आपको बेटा चाहिए तो जबतक गर्भ ठहर नहीं जाता है, तबतक 5वीं, 7वीं, 9वीं, 11वीं, 13वीं तथा 15वीं रात को Sex नहीं करें. उसी तरह अगर आपको बेटी चाहिए तो चौथी, छठी, 8वीं, 10वीं, 12वीं, 14वीं और 16वीं रात को गर्भधारण होने से पहले Sex न करें
आपकी गिनती में 1 भी घंटे की गलती नहीं होनी चाहिए. गलत गिनती इच्छित परिणाम नहीं प्राप्त होने देगी.
जिस रात को आपने गर्भधारण के लिए चुना है,
गर्भ धारण के उपाय -
1. ध्यान रखें कि जिस रात को आपने गर्भ ठहरने के लिए चुना है. उस रात को गर्भ ठहरना चाहिए, न कि सिर्फ सम्भोग होना चाहिए. उसी रात को गर्भ ठहरे यह सुनिश्चित करने के लिए आपको उस रात को 2-3 बार सम्भोग करना चाहिए. आप जितनी ज्यादा बार सम्भोग करेंगे, गर्भ ठहरने की सम्भावना उतनी ज्यादा बनेगी.

2. गर्भ ठहरना सुनिश्चित करने के लिए, सेक्स करने के बाद लिंग को योनी से तबतक बाहर नहीं निकालिए जबतक वह खुद न बाहर आ जाए. और योनी को भी Sex के बाद तुरंत साफ न करें, अगले दिन नहाते समय हीं योनी साफ करें.

3. जिस रात को आपने गर्भधारण के लिए चुना है, उससे 2-4 दिन पहले से आप न तो सेक्स करें और न हस्तमैथुन. इससे शुक्राणुओं की प्रबलता बढ़ जाएगी.

4. उस दिन तनावमुक्त रहें और उस दिन मानसिक या शारीरिक थकावट न हो इस बार का ध्यान रखें. सम्भव हो तो उस दिन घर-बाहर सारे कामों से छुट्टी ले लें.

5. स्त्री के चरमोत्कर्ष पर पहुँचने के बाद वीर्य के स्खलित होने से गर्भधारण की सम्भावना बढ़ जाती है. अतः स्त्री के साथ Sex करने से पहले उसे पूरी तरह उत्तेजित कर लें.
ये भी देखे --नि संतान,बांझपन,संतान प्राप्ति का पक्का इलाज-Free child, infertility, certain cure of progeny
loading...
loading...