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गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

मुंह से दुर्गन्ध बदबू का कारगर इलाज ,The effective treatment of mouth deodorant

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teg- Desi Treatment for Mouth Odor-Desi Treatment for Mouth Odor-मुँह की दुर्गन्ध दूर करने के उपाय-मुँह की दुर्गन्ध का इलाज-मुंह की बदबू-सांसों की बदबू-मुह की बदबू का इलाज-मुंह से बदबू आना-बदबू in english-दांतो का पीलापन
जिस व्यक्ति के मुंह से बदबू आती है. उसके साथ रहना तथा उससे बात करना कोई भी पसंद नही करता. सभी उससे दूर भागते है. कभी – कभी मुंह की बदबू की वजह से ही कई जगह पर शर्मिंदा भी होना पड़ता है. लेकिन अब चिंता करने की कोई आवश्यकता नही है. कुछ घरेलू उपचारों को अपनाकर आप अपने मुंह की बदबू से राहत पा सकते है.
 मुंह से दुर्गन्ध बदबू का कारगर इलाज ,The effective treatment of mouth deodorant मुंह से दुर्गन्ध का कारगर इलाज ,The effective treatment of mouth deodorant,मुह की बदबू - Desi Treatment for Mouth Odor-Desi Treatment for Mouth Odor-मुँह की दुर्गन्ध दूर करने के उपाय-मुँह की दुर्गन्ध का इलाज-मुंह की बदबू-सांसों की बदबू-मुह की बदबू का इलाज-मुंह से बदबू आना-बदबू in english-दांतो का पीलापनकब्ज भी मुंह की दुर्गंध का कारण हो सकती है. इसके अलावा दांतों की सड़न, पायरिया या फिर दांतों और मसूड़ों की किसी बीमारी के चलते भी मुंह से बदबू आ सकती है. किसी भी उपाय को करने से पहले ये सबसे जरूरी है कि आप अपने दांतों को दिन में दो बार अच्छी तरह ब्रश करके साफ करे. टंग क्लीनर से जीभ को साफ करना भी जरूरी है.  मुंह की दुर्गंध मुंह से बदबू आने का कारण सांसों की बदबू पेट की बदब सांस की दुर्गंध बदबू आती रहती मुंह से बदबू आने के कारण और उपाय मुख की दुर्गन्ध दूर करने का उपाय


1.       मुंह से दुर्गन्ध आने पर जामुन के पत्ते तथा तुलसी के पत्तो का प्रयोग किया जा सकता है. 4 या 5 जामुन के हरे पत्ते तथा 3 या चार तुलसी के पत्तो को ले. इन दोनों को मुंह में डालकर धीरे – धीरे चबाये. आपके मुंह से बदबू  नही आएगी.
2.       मुंह से बदबू आने पर सूखे हुए धनिये का भी प्रयोग किया जाता है. मुंह की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए रोजाना थोडा सुखा धनिया चबाये.
3.       मुंह से दुर्गन्ध आने पर दांतों की अच्छे से सफाई करनी चाहिए. मुंह की बदबू को दूर करने के लिए नीम की दातुन करना चाहिए. मुंह की बदबू को दूर करने के लिए बबूल की दातुन  को भी किया जा सकता है.
4.       मुंह की दुर्गन्ध को खत्म करने के लिए खाने के बाद सौंफ को खूब चबा – चबा कर खाने से मुंह की बदबू दूर हो जाती है. सौंफ को खाने से गले को ठंडक मिलती है.
5.       मुंह की बदबू को दूर करने के लिए एक गिलास पानी को गरम कर ले. अब पानी में 2 चम्मच नींबू का रस मिलकर थोडा गुनगुने पानी से सुबह और शाम को कुल्ला करे. कुछ ही दिनों में मुंह की बदबू दूर हो जाएगी.
6.       मुंह की बदबू को खत्म करने के लिए मुलैठी और छोटी इलायची का भी उपयोग किया जा सकता है. मुंह की दुर्गन्ध को दूर करेने के लिए रोजाना थोड़ी सी मुलैठी और 2 या तीन छोटी इलायची को चबाये.

7.       मुंह की बदबू को दूर करने के लिए अनार के पेड़ की छाल का प्रयोग भी किया जा सकता है.इसके लिए अनार के पेड़ की छाल को ले. एक बर्तन में थोडा पानी गरम करे और उसमे अनार के पेड़ की छाल को डाल दे. अब पानी को थोड़ी देर उबाल ले. पानी को उबालकर थोडा ठंडा  करने के बाद छान ले. इस पानी को मुंह में थोड़ी देर तक रख कर गरारे करे. मुंह से दुर्गन्ध आना बंद हो जाएगी.
8.       मुंह से दुर्गन्ध आने का एक कारण पानी न पीना भी है. शरीर में पानी की मात्रा में कमी आने के कारण भी मुंह से बदबू आती है. इसलिए अगर आपके मुंह से बदबू आती है तो खूब पानी पीये. आपके मुंह से दुर्गन्ध आना बंद हो जाएगी.
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गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

मर्दों में सब से ज्यादा होने वाले गुप्त रोग जानकारी -Most of all the information secret disease in men -

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मर्दों में सब से ज्यादा होने वाले गुप्त रोग जानकारी -Most of all the information secret disease in men  मर्दों के प्रमुख यौन रोग , कारण , लक्षण एवं निवारण Men's top sexual dysfunction, causes, symptoms and prevention,स्वपनदोष ( Night emission ) ,धातुक्षीनता ( Spermatorrhea),शीध्रपतन ( Premature ejaculation ), नपुंसकता ( Empotency ),विसर्प ( Syphilis , सुजाक ( Geonorhoea )-मर्दों में सब से ज्यादा होने वाले गुप्त रोग जानकारी -Most of all the information secret disease in men -गुप्त रोगों का आयुर्वेदिक इलाज गुप्त रोगी निराश क्यों गुप्त रोगों का इलाज इन हिंदी गुप्त रोगाची लक्षणे gupt rog doctor gupt rog in hindi gupt rog medicine hindi धातु रोग का देसी इलाज-

स्वपनदोष ( Night emission 

स्वपन मेँ किसी के साथ रति क्रिया करते हुए वीर्यपात का होना । कारण जिन्होँने 12-17 वर्ष अर्थात्‌ Teens के समय मेँ अपने हाथोँ से वीर्यवाहक नली Spermatic cord को आघात पहुचाया हो और अपनी वीर्य नष्ट किया हो , जिनके विचार गंदे है । लेकिन समय पर ध्यान न रखा गया तो यही रोग बढ़कर गहरी नीँद मेँ वीर्यपात होकर ऐसे व्यक्ति को सुबह ज्ञात होता है कि रात मेँ क्या हुआ था । केवल सुबह मेँ वीर्य लगा था । स्वपनदोष को माह मे 1 से 2 बार होना चिँताजनक नहीँ परंतु अधिक होने पर शरीर खोखला हो जाता है । लक्षण कमर मेँ दर्द , सिर चकराना , दिल ज्यादा धड़कना , किसी काम मेँ मन न लगना , लिखते-पढ़ते आँखोँ के नीचे अँधेरा आना , पढ़ा लिका याद न रहना इत्यादि ।

धातुक्षीनता ( Spermatorrhea)

 पैखाना या पेशाब के समय लसदार धातु निकलना का नाम है शुक्रमेह या धातुक्षीनता । कारण स्वपनदोष और कब्ज लक्षण मल-मुत्र त्यागते समय थोड़ा ज्यादा जोड़ लगाने से वीर्य निकलने लगता है । हस्त-मैथुन स्त्रियोँ के दर्शन से ही वीर्य पतन होने लगता है । रोग बढ़ने पर मन मेँ बेचैनी , सलज्जा भाव स्मृति की हानी , निरुतसाह , शारीरिक कमजोरी , भुख की कमी , कब्ज , पेट फुलना , छाती धड़कन , सिर दर्द , अक्स्मात खड़ा होने पर अंधकार दिखाई देना , आँख के चारो ओर काले दाग , स्वपनदोष एवं शीध्रपतन आदि । फिर भी रोगी को पता नहीँ चलता कि मुझे क्या हुआ है , अंत मेँ मर्दाना शक्ति चला जाता है । पुरुष-स्त्री संभोग से हाथ धो बैठता है , औलाद का मुह देखना नसीब नहीँ होता । पुरुष स्त्री को कभी भी संतुष्ट नही कर पाता रोगी दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जाता है ।

 शीध्रपतन ( Premature ejaculation )

 संभोग के समय वीर्य शीध्र निकल जाने को शीध्रपतन कहते है । जिस प्रकार पानी से भरी बोतल को उलटने से जल्द गिर जता है , उसी प्रकार गाढ़ी शहद के बोतल को उलटने से जल्द न गिरता है वही दशा वीर्य का है । वीर्य पतला होने पर शीध्र निकलता परंतु गाढ़ा वीर्य जल्द नही निकलता । शीध्रपतन के रोगी संभोग मेँ सदा असफल रहता है । नोट : इस रोग मेँ अफीम , नशीली दवाये या पदार्थ सेवन से बचना चाहिए । इस रोग का व्यक्ति संभोग करने की इच्छा होती है पर लिँग मेँ भी उत्तेजना आती है परंतु अकारण वीर्यपात हो जाता है । शीध्रपतन रोग पुरुष को शर्मिँदा करने वाला रोग है । स्त्री के ह्रदय से नफरत उत्पन्न कर देने वाली बिमारी से छुटकारा न मिलने पर पुरुष सदा स्त्री के नजर मेँ गिर जाता है । स्त्री अपने ह्रदय ठंडा करने के लिए रिस्तेदारोँ , पड़ोँसियोँ आदि से कामेच्छ पूरी करने के लिए संभोग करवाती है । जिसका परिणाम धन , धर्म , इज्जत सभी नष्ट होता है । रोगी शर्म के मारे मौत को अधिक पसंद करने लगता है । इलाज स्वपनदोष , धातुक्षीनता एवं शीध्रपतन का एक इलाज कि प्रात:काल बरगद के वृक्ष के निचे जाएँ और एक बताशे मेँ 10 बुँदे बरगद का दुध रख कर 3 महिने तक खायेँ । और ब्रह्मचर्य का पालन करेँ तथा इलाज शुरु के 1 शाल तक वीर्यपात न करेँ । ब्रह्मचर्य हमारे अन्य नोट मेँ विस्तार से दिया गया है ।

 नपुंसकता ( Empotency )

 पुरुष जब संभोग क्रिया मेँ स्त्री को पूर्णरूप से संतुष्ट नहीँ कर सकेँ वीर्य मेँ शुक्रकीट का अभाव जो संतान पैदा न कर सके उसे नपुंसकता कहते है । इससे औरत अपना वासना की तृप्ति के लिए गलत मार्ग पर चल पड़ती है । सुखी दाम्पत्य जीवन तथा गृहस्थ जीवन बर्बाद हो जाता है । दवा आयुर्वेदिक "पावरफुल" (Powerful) का सेवन करेँ । सिफलिस , गर्मी , आतशक , 

विसर्प ( Syphilis )

 यह रोग अत्यन्त भयानक रोगोँ मेँ एक है वैश्याओँ के साथ संभोग करने से होता है । इस रोग मेँ संभोग के कुछ दिन बाद इन्द्री पर छोटी फुन्सि पैदा हो जाती है । जो जल्द ही फैलकर जख्म बन जाती है इसका प्रथम भाव मामूली होता है लेकिन इलाज मेँ लापरवाही की जाएँ तो यह रोग पुश्तोँ तक पिछा नहीँ छोड़ती । इसकी प्रथम धाव केवल इन्द्री पर होते है और दूसरी श्रेणी मेँ शरीर पर काले दाग तथा ताँबे के रंग की फुन्सियाँ और धीरे-धीरे धाव हो जाते हैँ । तिसरी श्रेणी मेँ आतशक का प्रभाव हड्डियोँ मेँ चला जाता है तथा नाक की अस्तियाँ गल जाती है । यदि आतशक के जीवाणु दिमाग पर आक्रमण करेँ तो रोगी अंधा हो जाता है अंत मेँ मृत्यु को प्राप्त करता है |

 सुजाक ( Geonorhoea )

 यह रोग गंदे स्त्री के साथ संभोग करने से होता है इसमेँ संभोग के कुछ दिनोँ बाद रोगी पेशाब करते समय अधिक जलन और चुभन होती हैँ कि रोगी सचमुच मेँ कठारता है और पेशाब करने मेँ धबराता है । कुछ दिनोँ बाद लिँग मेँ हर समय पीप निकलनी शुरू हो जाती है । कभी-कभी पेशाब मेँ खुन आ जाता है । ज्योँ ज्योँ यह रोग पुराना होता है , पीड़ा और जलन बढ़ती जाती है । और पीप बहता रहता है 1 यदि पीप रोगी के आँख मेँ लग जाये तो अंधा होने का डर रहता है , इसलिए यह रोग का जरा भी लक्षण दिखाई देँ , फौरन इसका उचित और पूरा इलाज करा लेना चाहिए । सिफलिस और गोनोरिया एवं नपुंसकता का इलाज किसी गुप्त रोग विशेषज्ञ से करायेँ क्योकि ये घरेलु इलाज के लिए नही है । 
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शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

चमड़ी ,त्वचा के रोग , कारण लक्षण ,और इलाज- Skin diseases, symptoms, and treatment

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चमड़ी ,त्वचा के रोग , कारण लक्षण ,और इलाज- Skin diseases, symptoms, and treatment
चर्म रोग बेहद गंभीर रोग है जिसमें त्वचा में दाद के काले निशान पड़ जाते हैं। इसे एक्जिमा भी कहा जाता है। इस रोग में त्वचा पर खुजली, दर्द और जलन होती रहती है। आखिर क्यों होता है 
चमड़ी ,त्वचा के रोग , कारण लक्षण ,और इलाज- Skin diseases, symptoms, and treatment त्वचा के रोग , कारण लक्षण ,और इलाज\ Skin diseases, symptoms, and treatment,चर्म रोग के कारण,चर्म रोग के लक्षणचर्म रोग के उपचार,अलसी के इस्तेमाल से भी चर्म रोग ठीक होता है। अलसी में मौजूद ओमेगा थ्री एसिड शरीर के पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है जिससे चर्म रोग में आराम मिलता है। अलसी के तेल की 1 से 2 चम्मच का सेवन करें। चर्म रोग कष्टदायी रोग है जिसका समय रहते उपचार कराना जरूरी है। क्योंकि यह धीरे-धीर सारे शरीर में फैल जाता है और रोगी को बेहद परेशानी होती है। इन उपायों के जरिए आप चर्म रोग यानि एक्जिमा से मुक्ति पा सकते हो। यदि एक्जिमा बेहद गंभीर हो तो चिकित्सक को दिखाने में देर न करें। त्वचा रोगों की सूची चर्म रोग की दवा patanjali त्वचा रोग विशेषज्ञ चर्म रोग की अंग्रेजी दवा छाजन रोग चर्म रोग विशेषज्ञ छाल रोग चर्म रोग के कारण चर्म रोग, स्किन एलर्जी | घरेलू इलाज त्वचा रोग (Skin Desease) कारण लक्षण तथा उनके उपचार चमड़ी की एलर्जी सिहुली रोग चर्म रोग के प्रकार छाल रोग त्वचा रोगों की सूची सिहुली स्किन मेडिसिन सिहुली किस कारण से होता है सिहुली ों स्किन

चर्म रोग के कारण
1. रसायनिक चीजों का ज्यादा प्रयोग करना जैसे साबुन, चूना, सोड़ा और डिटर्जेट का अधिक इस्तेमाल करना।
2. पेट में कब्ज का अधिक समय तक होने से भी चर्म रोग होता है।
3. रक्त विकार होने की वजह से भी चर्म रोग होता है।
4. महिलाओं में मासिकधर्म की परेशानी की वजह से भी उन्हें एक्जिमा हो सकता है।
5. किसी एक्जिमा पीड़ित इसान के कपड़े पहनने से भी। यह रोग हो सकता है।

चर्म रोग के लक्षण
एक्जिमा रोग में त्वचा पर छोटे-छोटे दाने निकलने लगते हैं। और फिर ये लाल रंग में बदलने लगते हैं और इनमें खुजली होती रहती है। और खुजलाने से जलन होती है फिर ये दाग के रूप में त्वचा में फैलने लगता है। यदि सारे शरीर में एक्जिमा होता है उससे रोगी को बुखार भी आने लगता है।
चर्म रोग के उपचार
1. समुद्र के पानी से प्रतिदिन नहाने से एक्जिमा ठीक हो जाता है।
2. नमक का सेवन कम कर दें। हो सके तो कुछ समय तक नमक का सेवन बंद ही कर दें।
3. नीम के पत्तों को पानी में उबाल कर उससे रोज स्नान करें। 
4. साफ सुतरे कपड़े पहना करें।
5. खट्टे, चटपटे, और मीठी चीजों का इस्तेमाल न करें। क्योंकि ये रोग को और बढ़ाते हैं।
6. यदि चर्म रोग गीले किस्म का है तो इस पर पानी का प्रयोग न करें।
गेंदे के फूल में एंटी बैक्टीरियल के साथ एंटी वायरल तत्व होते हैं जो चर्म रोग में लाभ देता है। गेंदे की पत्तियों को पानी में अच्छे से उबाल लें और दिन में तीन बार चर्म रोग से प्रभावित जगह पर लगाएं।
अलसी के इस्तेमाल से भी चर्म रोग ठीक होता है । अलसी में मौजूद ओमेगा थ्री एसिड शरीर के पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है जिससे चर्म रोग में आराम मिलता है। अलसी के तेल की 1 से 2 चम्मच का सेवन करें।
चर्म रोग कष्टदायी रोग है जिसका समय रहते उपचार कराना जरूरी है। क्योंकि यह धीरे-धीर सारे शरीर में फैल जाता है और रोगी को बेहद परेशानी होती है। इन उपायों के जरिए आप चर्म रोग यानि एक्जिमा से मुक्ति पा सकते हो। यदि एक्जिमा बेहद गंभीर हो तो चिकित्सक को दिखाने में देर न करें।
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सोमवार, 4 दिसंबर 2017

स्त्रियों के प्रमुख योन रोग । कारण,लक्षण,और उपचार,Women leading yon disease. Causes, symptoms, and treatment

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 teg -स्त्रियों के प्रमुख योन रोग । कारण,लक्षण,और उपचार,Women leading yon disease. Causes, symptoms, and treatment-श्वेत प्रदर का घरेलू इलाज-श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक इलाज-श्वेत प्रदर का इलाज-सफेद पानी का घरेलू उपाय-स्त्री रोग प्रश्न-लिकोरिया का इलाज-श्वेत प्रदर के लक्षण-रक्त प्रदर-स्त्रियों के गुप्त रोगों की चिकित्सा-मासिक धर्म का रुक जाना-पेशाब में जलन -बवासीर का मस्सा-खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार-
अधिकांश महिला व पुरुष ऐसे होते हैं, जो संक्रमण के कारण इन रोगों की चपेट में आते हैं। सर्दियों की शुरुआत से ही ऐसे मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ जाती है। सर्दियों में लोग शरीर की सफाई ठीक से नहीं रखते। कपड़े कई दिनों तक नहीं बदले जाते हैं। लोग नहाने से परहेज करते हैं। नहाने से परहेज करने और कपड़ों के लगातार न बदलने के कारण संक्रमण से फैलने वाले गुप्त रोगों की संभावना बढ़ जाती है।सर्दियों में शरीर की सफाई न रखने और नहाने से परहेज करने के कारण लोगों में गुप्त रोग की संभावना बढ़ जाती हैं।



स्त्रियों के प्रमुख योन रोग । कारण,लक्षण,और उपचार,Women leading yon disease. Causes, symptoms, and treatment स्त्रियों के प्रमुख योन रोग । कारण,लक्षण,और उपचार,Women leading yon disease. Causes, symptoms, and treatment.ओरतो के योन रोग ,स्त्रियों के गुप्त रोगों की चिकित्सा,-स्त्रियों के प्रमुख योन रोग । कारण,लक्षण,और उपचार,Women leading yon disease. Causes, symptoms, and treatment-श्वेत प्रदर का घरेलू इलाज-श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक इलाज-श्वेत प्रदर का इलाज-सफेद पानी का घरेलू उपाय-स्त्री रोग प्रश्न-लिकोरिया का इलाज-श्वेत प्रदर के लक्षण-रक्त प्रदर-स्त्रियों के गुप्त रोगों की चिकित्सा-मासिक धर्म का रुक जाना-पेशाब में जलन -बवासीर का मस्सा-खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार-स्त्री रोग का उपचार स्त्री रोग प्रश्न स्त्री रोग हिंदी स्त्री रोग सफेद पानी गर्भाशय के रोग स्त्री बीज स्त्री रोग स्पेशलिस्ट स्त्री रोग तज्ञ
स्त्रियों के गुप्त रोगों की चिकित्सा :----
सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा प्रतिमास दो-चार बार होना, पेट में तकलीफ होना तथा कमर में दर्द बढ़ जाना आदि के उपचार में कच्चा पुदीना एक कट्टा लेकर दो गिलास पानी में उबालकर एक कप जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह (निराहार) एक बार और रात में सोते समय दूसरी बार पी लेना चाहिए। इस प्रकार 40 दिनों तक करते रहें। पथ्य में अचार, बैंगन, मुर्गी, अंडे तथा मछली आदि का प्रयोग न करें।
मासिक धर्म का रुक जाना ------
:तीन-तीन महीने तक मासिक धर्म का न होना तथा पेट में पीड़ा होना आदि के लिए एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह निराहार पेट रात में भोजनोपरांत सोते समय पी लेना चाहिए। इस प्रकार सेवन एक महीने तक करते रहें। आलू तथा बैंगन वर्जित हैं।
पेशाब में जलन :------
मूत्र नलियों में रक्त संचार सुचारू रूप से न होना और पेशाब से रक्त का जाना आदि में एक कप मौसम्मी का जूस लेकर उसमें आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर उसका सेवन करें। सुबह एक बार और दूसरी बार रात में सोने से पूर्व। दस दिन तक इस इलाज को जारी रखिए। खाने में गर्मी पैदा करने वाली वस्तुएं, मिर्च और खट्टी वस्तुओं का उपयोग कम करना चाहिए।
बवासीर का मस्सा :-------
एक चम्मच सिरके में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में दो बार मस्से की जगह पर लगाएं।
------तेल चुपड़ी रोटी शनिवार को कुत्ते को खिलाएं।
-----एक कटोरी केसर पानी में घोलकर मरीज के कमरे में रख दें।

क्या सावधानी रखें गुप्त रोग होने पर...????
----- नहाने से परहेज न करें।
----- प्रतिदिन अंत: वस्त्र व अन्य कपड़ों को बदलें।
- ---शौच के बाद शरीर के अंदरुनी अंगों को ठीक से साफ करें।
----- पूर्व में संक्रमण से पीड़ित या एलर्जी वाले लोगों को अधिक सतर्क होने की है जरूरत।
------- किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसे छुपाने की बजाय चिकित्सक से संपर्क करें।
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खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार---------
जब त्वचा की सतह पर जलन का एहसास होता है और त्वचा को खरोंचने का मन करता है तो उस बोध को खुजली कहते हैं। खुजली के कई कारण होते हैं जैसे कि तनाव और चिंता, शुष्क त्वचा, अधिक समय तक धूप में रहना, औषधि की विपरीत प्रतिक्रिया, मच्छर या किसी और जंतु का दंश, फंफुदीय संक्रमण, अवैध यौन संबंध के कारण, संक्रमित रोग की वजह से, या त्वचा पर फुंसियाँ, सिर या शरीर के अन्य हिस्सों में जुओं की मौजूदगी इत्यादि से।
खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार-----
------खुजली वाली जगह पर चन्दन का तेल लगाने से काफी राहत मिलती है।
----दशांग लेप, जो आयुर्वेद की 10 जड़ी बूटियों से तैयार किया गया है, खुजली से काफी हद तक आराम दिलाता है।
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रविवार, 3 दिसंबर 2017

शीघ्रपतन होता है -पक्का इलाज बता रहा हु -Premature ejaculation is the surest cure I am told -

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शीघ्रपतन होता है -पक्का इलाज बता रहा हु -Premature ejaculation is the surest cure I am told-शीघ्रपतन रोकने के आसान उपायEasy Tips To Prevent Premature Ejaculation,लिंग का ढीलापन, कमजोरी, दुर्बलता, शिथिलता,वीर्य की बढ़ोतरी होती, शरीर में ताकत,संभोग करते समय चरम सुख,बचपन की गलतीइन उपाय आप घर पर करे -सभी तरह की कमजोरी दूर हो जतेगी 

शीघ्रपतन रोकने के आसान उपायEasy Tips To Prevent Premature Ejaculation,लिंग का ढीलापन, कमजोरी, दुर्बलता, शिथिलता,वीर्य की बढ़ोतरी होती, शरीर में ताकत,संभोग करते समय चरम सुख,बचपन की गलती शीघ्र स्खलन के उपाय शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक उपाय शीघ्र स्खलन का आयुर्वेदिक इलाज शीघ्र स्खलन का इलाज पतंजलि दवा shighrapatan ramdev baba shighrapatan ki medicine शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक दव हिंदी में जल्दी डिस्चार्ज समस्या आयुर्वेदिक चिकित्सा शीघ्र स्खलन का कारण शीघ्र स्खलन क्या है शीघ्र स्खलन का आयुर्वेदिक उपचार शीघ्र स्खलन की पतंजलि दवा शीघ्र स्खलन कारण व निवारण शीघ्र स्खलन की अंग्रेजी दवा का नाम शीघ्र स्खलन की एलोपैथिक दवा शीघ्र स्खलन का आयुर्वेदिक इलाज स्खलन  स्क्वीज़ तकनीक  erectile dysfunction  जल्दी डिस्चार्ज से दिलाए राहत  शीघ्र स्खलन की होम्योपैथिक दवा  shighrapatan  शीघ्र स्खलन कारण व निवारण  शीघ्र स्खलन की आयुर्वेदिक दवा

* कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से भी जाना जाता है। संभोग करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोगकरने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए।इसके बाद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बनालेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

* शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है।

* मोचरस, कौंच के बीज, शतावरी, तालमखाना को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर लगभग 400 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से बुढ़ापे में भी संभोग क्रिया का पूरा आनंद लिया जा सकता है। इस योग को लगभग2-3 महीने तक सेवन करना लाभकारी रहता है।

* लगभग 6 चम्मच अदरक का रस, 8 चम्मच सफेद प्याज का रस, 2 चम्मच देशी घी और 4 चम्मच शहद को एक साथ मिलाकर किसी साफ कांच के बर्तन में रख लें। इस योग को रोजाना 4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।

* बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां औरगोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रखलें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योगशीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।

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बुधवार, 14 जून 2017

मधुमेह का बिलकुल सफल इलाज उपचार-Very simple treatment of diabetes treatment

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मधुमेह का बिलकुल सफल इलाज उपचार-Very simple treatment of diabetes treatment
मधुमेह चयापचयी विकारों से पनपने वाला रोग है जो शरीर की इन्सुलिन पैदा करने या इन्सुलिन का उपयोग करने की क्षमता को प्रभावित करता है। आंकड़ों की मानें तो भारत में ये रोग पूरी दुनिया के मुकाबले तेज़ी से बढ़ रहा है। युवाओं में इस रोग की बढ़ती तादाद से परेशान डॉक्टर इससे लड़ने की नई तकनीकों की तलाश में हैं। अगर
मधुमेह का बिलकुल सफल इलाज उपचार-Very simple treatment of diabetes treatment मधुमेह का ताकतवर घरेलू उपचार,,Diabetes powerful home remedies ,दमा का इलाज ,दमा का उपचार ,मधुमेह का पूरा इलाज-मधुमेह का बिलकुल सफल इलाज उपचार-Very simple treatment of diabetes treatment डायबिटीज का घरेलू उपचार  डायबिटीज क्या है  डायबिटीज के कारण  डायबिटीज के लक्षण  डायबिटीज कंट्रोल  टाइप २ डायबिटीज  डायबिटीज की दवा  डायबिटीज से बचने के उपाय मधुमेह के लिए योग  मधुमेह का रामबाण इलाज  मधुमेह आहार  मधुमेह का जड़ से इलाज  मधुमेह से छुटकारा  मधुमेह टाइप 2 के उपचार  मधुमेह के कारण  मधुमेह के लक्षण
आपको ब्लड-शुगर को नियंत्रण में रखने का कोई घरेलू उपाय मिल जाए तो? जी हां, ऐसा उपाय है।
तुलसी के पत्ते-Basil leaves
तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन बनता है। ये सारे तत्व मिलकर इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। इससे इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। एक और फ़ायदा ये है कि पत्तियों में मौजूद ऐन्टीआक्सिडन्ट  आक्सिडेटिव स्ट्रेस संबंधी कुप्रभावों को दूर करते हैं।
नुस्खा: शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें।
पटसन के बीज-Flax seeds
 इनमें फाइबर सामग्री बहुल मात्रा में पाई जाती है जो पाचन में तो मदद करते ही हैं साथ ही फैट और शुगर के अवशोषण में भी सहायक होते हैं। पटसन के बीज खाने से मधुमेह से ग्रसित मरीजों में शुगर की मात्रा 28 प्रतिशततक कम होती है।
नीलबदरी के पत्ते-Bilberry leaf
 मधुमेह को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से हो रहा है. जर्नल ऑफ़ न्यूट्रीशन ने
कहा है कि इसकी पत्तियों में एंथोसियानीडीनस भारी मात्रा में मौजूद होते हैं जो चयापचय की प्रक्रिया और ग्लूकोज़ को शरीरके विभिन्न भागों में पहुंचाने की प्रक्रिया को समृद्ध करता है। अपने इस ख़ास गुण के कारण नीलबदरी के पत्ते ब्लड शुगरलेवल को कम करने में काफी कारगर होते हैं।
दालचीनी-Cinnamon
ये इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारने के साथ-साथ ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को भी कम करता है। अगर सिर्फ आधी चम्मच दालचीनी रोज़ ली जाए तो इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारा और अपने वज़न को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ह्रदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो जाता है।
नुस्खा: लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद मिलेगी।
ग्रीन टी-Green tea
ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं जो एक मज़बूत एंटी-ऑक्सीडेंट और हाइपो-ग्लाइसेमिक तत्व हैं, इससे ब्लड शुगर को रिलीज़ करने में मदद मिलाती है और शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमाल कर पाता है।
सहजन के पत्ते-Drumstick leaves
 इसे मोरिंगा भी कहते हैं, इसके पत्तों में इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह के मामलों में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है।
इसबगोल-Isabgul
 पानी में मिलने के बाद इसबगोल की भूसी ‘जेल’ जैसा तत्व बनाती है जिसका सेवन ब्लड ग्लूकोज़ के अवशोषण और भोजन के पाचन को सुगम बनाता है। ये अल्सर और एसिडिटी से भी बचाता है।
करेला -bitter gourd
करेले में इन्सुलिन-पोलिपेपटाइड होता है, ये एक ऐसा बायो-कैमिकल तत्व है जो ब्लड-शुगर को कम करने में उपयोगी है।
नुस्खा , तरीका ये है --
 हर हफ्ते कम से कम एक बार करेले की सब्जी या कढी ज़रूर लें. अगर आप जल्द असर चाहते हैं तो तीन दिनमें एक बार खाली पेट करेले का जूस लें।
नीम-Azadirachta indica-
 देश में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले नीम के पत्ते स्वाद में कडवे होते हैं पर इनमें बहुत सी खासियतें हैं।  नीम इन्सुलिन रिसेप्टर सेंसिटिविटी बढाने के साथ साथ शिराओं व धमनियों में रक्त प्रवाह को ठीक करता है और हाइपो ग्लाय्केमिक ड्रग्स पर निर्भर होने से बचाता है।
नुस्खा: बेहतर नतीजों के लिए नीम के पत्तों का जूस रोज़ सुबह खाली पेट लें।

काला जामुन-Black Berries
ये ब्लड शुगर Blood sugar-को कम करने में मदद करता है और ह्रदय संबंधी बीमारियों से शरीर को दूर रखता है।
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रविवार, 18 सितंबर 2016

नि संतान,बांझपन,संतान प्राप्ति का पक्का इलाज-Free child, infertility, certain cure of progeny

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 गर्भ ठहरने के उपाय-बांझपन का कारण एवं चिकित्सा-पुत्र प्राप्ति के सरल उपाय-पुत्र प्राप्ति के लिए क्या करें


नि संतान,बांझपन,संतान प्राप्ति का पक्का इलाज-Free child, infertility, certain cure of progeny
गर्भ धारण अथवा गर्भ स्थापना के लिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे :-
1. एक चम्मच असगंध का चूर्ण, एक चम्मच देशी घी के साथ मिलाकर मिश्री मिले हुए दूध के साथ मासिक धर्म के छठे दिन से पुरे माह पीने से बंध्यापन दूर होकर गर्भधारण होता है ! यह प्रयोग सुबह खाली पेट प्रयोग करना चाहिए और जब तक लाभ ना हो तब तक दोहराते रहना चाहिए !!

2. अपामार्ग की जड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ ऋतुकाल के बाद 21 दिनों तक सेवन करने से गर्भ धारण होता है !!
पुत्र प्राप्ति के लिए क्या करें
3. अशोक के फूल दही के साथ नियमित रूप से सेवन करते रहने से भी गर्भ स्थापित होता है !!

4. नीलकमल का चूर्ण और धाय (धातकी) के पुष्पों का चूर्ण समभाग मिलाकर ऋतुकाल प्रारम्भ होने के दिन से 4 दिनों तक नियमित रूप से एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से गर्भधारण होता है ! प्रयोग असफल होने अगले ऋतुकाल से पुनः दोहराए !!

5. पीपल के सूखे फलों का चूर्ण आधे चम्मच की मात्रा में कच्चे दूध के साथ मासिक धर्म शुरू होने के पांचवें दिन से दो हफ्ते तक सुबह शाम प्रयोग करने से गर्भधारण होता है ! लाभ नहीं होने से अगले महीने भी इसको जारी रखें !!

संतान प्राप्ति के लिए टोटके -
पुत्र प्राप्ति के लिए क्या करें
1. संतान प्राप्ति के लिए पति-पत्नी दोनों को रामेश्वरम् की यात्रा करनी चाहिए तथा वहां सर्प-पूजन करवाना चाहिए। इस कार्य को करने से संतान-दोष समाप्त होता है।
2. स्त्री में कमी के कारण संतान होने में बाधा आ रही हो, तो लाल गाय व बछड़े की सेवा करनी चाहिए। लाल या भूरा कुत्ता पालना भी शुभ रहता है।
3. यदि विवाह के दस या बारह वर्ष बाद भी संतान न हो, तो मदार की जड़ को शुक्रवार को उखाड़ लें। उसे कमर में बांधने से स्त्री अवश्य ही गर्भवती हो जाएगी।
4. जब गर्भ धारण हो गया हो, तो चांदी की एक बांसुरी बनाकर राधा-कृष्ण के मंदिर में पति-पत्नी दोनों गुरुवार के दिन चढ़ायें तो गर्भपात का भय/खतरा नहीं होता।

गर्भधारण करने का नया फार्मूला

एक नए शोध के मुताबिक जो महिलाएँ किसी कारण से गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं, यदि वे जीभर कर आइसक्रीम खाएँ तो गर्भधारण की संभावना कई गुना ब़ढ़ जाती है. इसके लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि डेयरी उत्पाद कम वसा वाले बिलकुल न हों.

शोध की रिपोर्ट कहती है कि गर्भधारण से पूर्व महिलाओं को अधिक से अधिक वसायुक्त दूध और आइसक्रीम का सेवन करना चाहिए. इससे न सिर्फ उनके शरीर में भरपूर ऊर्जा का संचार होगा, बल्कि गर्भधारण में आ रही परेशानियाँ भी काफी हद तक कम हो जाएँगी.

रिपोर्ट में चेतावनी देने वाली जो बातें कही गई हैं उनके अनुसार सपरेटा दूध, दही और कम वसा वाले दुग्ध उत्पादों का इस्तेमाल नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अपने शोध के दौरान पाया कि यदि महिलाएँ दिन में दो से तीन बार तक कम वसा वाले दुग्ध उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं, तो उनमें गर्भधारण करने की क्षमता 85 प्रतिशत तक कम हो जाती है.
ye bbhi dekhe -----बाँझपन का कारण,उसके लक्षण,और उपचार

जोड़ो और घुटनों के दर्द सफल इलाज है ये -The successful treatment of pain and knee joints

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जोड़ों कैknee jointsसा भी दर्द हो ये नुस्खेघुटने के दर्द का इलाज जोड़ों के दर्द का तेलजोड़ों का दर्द के लक्षणचूक हैंदर्द निवारक तेल बनाने
की knee jointsविधि
हर दिन सैकड़ों नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। चिकित्सा विज्ञान जब तक एक रोग का इलाज खोज पाता है, तब तक चार नए रोग सीना तान कर खड़े हो जाते हैं। जोड़ों का दर्द हो भी गलत खान-पान और प्रदूषण के दुष्प्रभाव का ही एक नतीजा है। असल में हमार शरीर इस प्रकृति का ही एक हिस्सा है। इसलिये शरीर से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी हमें प्रकृति की गोद में ही मिल सकता है। आइये देखते हैं जोड़ों के दर्द का क्या है उत्तम समाधान....


जोड़ो और घुटनों के दर्द सफल इलाज है ये -The successful treatment of pain and knee joints

1- दो तीन दिन के अंतर से खाली पेट अरण्डी का 2 से 20 मि.ली. तेल पियें। इस दौरान चाय-कॉफी न लें। साथ में दर्दवाले स्थान पर अरण्डी का तेल लगाकर, उबाले हुए बेल के पत्तों को गर्म-गर्म बाँधने से वात-दर्द में लाभ होता है।

2- निर्गुण्डी के पत्तों का 10 से 40 मि.ली. रस लेने से अथवा सेंकी हुई मेथी का कपड़छन चूर्ण तीन ग्राम, सुबह-शाम पानी के साथ लेने से वात रोग में लाभ होता है। यह मेथीवाला प्रयोग घुटने के वातरोग में भी लाभदायक है। साथ में वज्रासन करें।
3- अच्युताय संधिशूलहर योग चूर्ण से जोड़ो व कमर का दर्द ठीक होता है ।हड्डियाँ व नसे मजबूत बनती है । गठिया,मधुमेह,सायटिका व मोटापे आदि में लाभदायी ।

4- लहसुन की 10 कलियों को 100 ग्राम पानी एवं 100 ग्राम दूध में मिलाकर पकायें। पानी जल जाने पर लहसुन खाकर दूध पीने से दर्द में लाभ होता है।

5- 250 मि.ली. दूध एवं उतने ही पानी में दो लहसुन की कलियाँ, 1-1 चम्मच सोंठ और हरड़ तथा 1-1 दालचीनी और छोटी इलायची डालकर पकायें। पानी जल जाने पर वही दूध पीयें।

6- सिंहनाद गुगल की 2-2 गोली सुबह, दोपहर व शाम पानी के साथ लें।

7-चित्रकादिवटी' की 2-2 गोली सुबह-शाम अदरक के साथ 20 मि.ली. रस व 1 चम्मच घी के साथ लें।
ये भी देखे --सर्दियो में बड़ जता है दमा (asthma)उपाय ये करे 

शनिवार, 20 अगस्त 2016

माइग्रेन,अधकपारी,सिर में तेज दर्द का कारगर इलाज -Migraine, Migraine, effective treatment of severe pain in the head

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जब भी माइग्रेन सर में होता है तो वो अनुभव वो ही महसूस कर सकता है जिस के सर में माइग्रेन हो रहा हो 
और इसका अंदाज नही लगा सकता ,सिरदर्द से हर किसी का वास्ता है। ये एक ऐसा रोग है जिसके कई कारण हो सकते हैं। कई बार तो ऐसा लगता है जैसे बेवजह सिरदर्द के शिकार हो गए हों। सिरदर्द का एक गंभीर रूप जो बार-बार या लगातार होता है, उसे माइग्रेन कहते हैं। माइग्रेन को आम बोलचाल की भाषा में अधकपारी भी कहते हैं।Migraine, Migraine, effective treatment of severe pain in the head
माइग्रेन,अधकपारी,सिर में तेज दर्द का कारगर इलाज -migraine,adhkapari,sir me tej dard ka kargar ilaj


माइग्रेन के लक्षण

आम तौर पर इसका शिकार होने पर सिर के आधे हिस्से में दर्द रहता है। जबकि आधा दर्द से मुक्त होता है। जिस हिस्से में दर्द होता है, उसकी भयावह चुभन भरी पीड़ा से आदमी ऐसा त्रस्त होता है कि सिर क्या बाकी शरीर का होना भी भूल जाता है।
माइग्रेन मूल रूप से तो न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें रह-रह कर सिर में एक तरफ बहुत ही चुभन भरा दर्द होता है। ये कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है। इसमें सिरदर्द के साथ-साथ गैस्टिक, जी मिचलाने, उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
इसके अलावा फोटोफोबिया यानी रोशनी से परेशानी और फोनोफोबिया यानी शोर से मुश्किल भी आम बात है। माइग्रेन से परेशान एक तिहाई लोगों को इसकी जद में आने का एहसास पहले से ही हो जाता है। पर्याप्त नींद न लेना, भूखे पेट रहना और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना जैसे कुछ छोटे-छोटे कारणों से भी आपको माइग्रेन की शिकायत हो सकती है।

माइग्रेन के कारण

माइग्रेन के कारण कई हो सकते हैं। एक तरफ तो कुछ स्थितियां हैं और दूसरी तरफ कुछ रोग भी होते हैं।
ज्यादातर लोगों को भावनात्मक वजहों से माइग्रेन की दिक्कत होती है। इसीलिए जिन लोगों को हाई या लो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और तनाव जैसी समस्याएं होती हैं उनके माइग्रेन से ग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है। कई बार तो केवल इन्हीं कारणों से माइग्रेन हो जाता है। इसके अलावा हैंगओवर, किसी तरह का संक्रमण और शरीर में विषैले तत्वों का जमाव भी इसकी वजह हो सकता है।
एलर्जी के कारण भी माइग्रेन हो सकता है और अलग-अलग लोगों में एलर्जी के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों के लिए खाने-पीने की चीजें भी एलर्जी का कारण बन जाती हैं। कुछ लोगों को दूध और उससे बनी चीजें खाने से एलर्जी होती है तो कुछ के लिए साग-सब्जी एलर्जी का कारण हो सकती है। किसी को धूल से एलर्जी होती है तो किसी को धुएं से। इसलिए अगर आपको पता हो कि आपको किन चीजों से एलर्जी है तो उनसे बच कर रहें।

कैसे बचें माइग्रेन से...

अब आपको बताते हैं कि आखिर आप कैसे बचें माइग्रेन से। वैसे तो ये बीमारी किसी को भी हो सकती है लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। फिर भी थोड़ी सी सावधानी रखकर आप इस बीमारी को खुद से दूर रख सकते हैं।
ऐसा नहीं कि माइग्रेन लाइलाज बीमारी है। अगर आप माइग्रेन से परेशान हैं और आपको कुछ सूझ नहीं रहा है तो ध्यान रखें। थोड़ी सी सावधानी आपको माइग्रेन से मुक्ति दिला सकती है। इसके लिए सबसे जरूरी है खुद के लाइफ स्टाइल को बदलना। खानपान में बदलाव लाना।

माइग्रेन में क्या न खाएं

अगर आपको माइग्रेन है तो आप डिब्बाबंद पदार्थों और जंक फूड का सेवन एकदम न करें। इससे आपका माइग्रेन और खतरनाक होता जाएगा। चूंकि जंक फूड में मैदे की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए इसे कम से कम खाएं। चूंकि इनमें ऐसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जो माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं।
ऐसे में सवाल ये है कि माइग्रेन में क्या खाएं।

="color: red;">माइग्रेन में क्या खाएं

अगर आपको माइग्रेन है तो नाश्ते में ताजा और सूखे फलों का खूब सेवन करें। लंच में उन चीजों का इस्तेमाल करें जिनमें प्रोटीन भरपूर हो। मसलन दूध, दही, पनीर, दालें, मांस और मछली आदि। डिनर में चोकरयुक्त रोटी, चावल या आलू जैसी स्टार्च वाली चीजों के साथ सलाद भी लें। ज्यादा मिर्च-मसाले वाली चीजों से परहेज करें।

माइग्रेन से छुटकारा का उपचार 

माइग्रेन की अचूक दवा है योग और ध्यान। अगर योग नहीं कर सकते हैं तो व्यायाम करें। इससे आपका तनाव कम होगा। और तनाव कम होने से आपका डिप्रेशन दूर होगा।माइग्रेन का दर्द होने पर आप देशी घी में गुड खायें यह आधे सिर मे होने वाले दर्द से निजात दिलाता है। यदि दर्द सुबह से ही होने लगे तो आप दूध में जलेबी या रबड़ी का सेवन करें। एैसा करने से आधे सीसी का दर्द रूक जाता है।माइग्रेन के दर्द से यदि उल्टी हो रही हो तो खाने के समय में रोगी को शहद खिलाएं एैसा करने से उल्टी और दर्द बंद हो जाता है।

यदि दर्द सुबह से ही शुरू हो जाता है तो तुलसी के पत्तों को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें और फिर इसमें शहद मिलाकर दिन में तीन बार चाटें। यह दर्द में राहत देगा और धीरे-धीरे माइग्रेन के प्रभाव को कम करेगा।

आधे सिर के हिस्से में दर्द ज्यादा हो तो आप रोगी को आधा चम्मच शहद में आधा चम्मच नमक मिलाकर चटाएं। हींग भी माइग्रेन के दर्द से रहात देने में असरकारी है। आप पानी में हींग को अच्छी तरह से घोल लें फिर इसे सूंघे और इसका लेप माथे पर लगाएं। दर्द से निजात मिलेगा।

अंगूर का रस सुबह पीने से माइग्रेन के दर्द से निजात मिलता है। सुबह से शुरू होने वाले दर्द में आप सुबह-सुबह ही 150 ग्राम पानी में 50 ग्राम शक्कर मिलाकर धीरे-धीरे पीएं यह सिर दर्द से मुक्ति दिलवाता है।

आधे सिर के दर्द से निजात पाने के लिए आप सूर्योदय से पहले उठकर 25 ग्राम खील को शहद के साथ सेवन करें और फिर आधे घंटे की नींद लें एैसा 1 सप्ताह तक करने से माइग्रेन के दर्द से मुक्ति मिलती है।
लहसुन माइग्रेन के दर्द से निजात दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लहसुन को पीस कर उसका लेप दर्द वाली जगह पर लगाने से दर्द से निजात मिलता है साथ ही आप लहसून के रस की दो छोटी बूंदे नाक के छिद्र में डालें।
ये भी देखे -देसी उपचार --घरेलू उपाय 

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

क्या जुकाम से परेशान है तो ये जबरदस्त उपाय- So this is what bothered by colds strong measures

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teg--सर्दी जुकाम और खांसी-सर्दी जुकाम बुखार-सर्दी जुकाम का घरेलू उपचार-सर्दी जुकाम के उपाय-सर्दी जुकाम की दवा-सर्दी जुकाम का घरेलू इलाज-सर्दी जुकाम का इलाज-जुकाम का उपचार

  • जुकाम होने पर हमे कोई भी काम करने में मन नहीं लगता है। कभी कभी ज्यादा जुकाम हो जाने पर हमें सुस्ती लगती है। ऐसे में आप एक चम्मच शहद में थोड़ा सा तुलसी के पत्ते का रस मिला कर दिन में कम से कम 3 से 4 बार ले। इससे आपको जुकाम में राहत मिलेगी। दो से तीन दिन तक ऐसा करने से जुकाम ठीक हो जाता है |Tulsi and honey - best for jukam remedy

क्या जुकाम से परेशान है तो ये जबरदस्त उपाय- So this is what bothered by colds strong measures
  • निलगिरी के तेल (eucalyptus oil) का दिन में कम से कम 2 बार भाप (steam) लेने से भी जुकाम में राहत मिलती है।
  • बहुतों को एलर्जी से भी जुकाम हो जाता है। अगर आप चाय पीना पसंद करते है तो आप दूध की जगह तुलसी और अदरक की चाय को पियें इससे आपको जुकाम में जल्द राहत मिलेगी ।

Tulsi aur adrak ki chai
  • अक्सर जुकाम होने पर हमारे नाक बंद हो जाते है जिसकी वजह से हमें सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे में रात को सोने से पहले सरसों तेल में लहसुन के 2 ,3 कली को डाल कर गर्म करे और अपने छाती पर और पैर के तलवे पर लगा कर पैर में मोज़े को पहन ले। इससे आपके शरीर को गर्मी पहुँचेगी जिससे आपके जुमक ठीक हो जायेंगे ।

lahsun

  • कई बार ज्यादा जुकाम हो जाने पर हमे चिड़चिड़ापन महशूस होता है और हम सोचते है की कब हमारा जुकाम ठीक होगा। ऐसे में दो चम्मच शहद (honey) में एक चम्मच निम्बू का रस(lemon juice) मिला कर हर 2 घंटे पर खाएं इससे आपको जुकाम में राहत मिलेगी ।
  • अगर आप नॉन वेज कहते है तो Chicken soup ले सकते हैं और यह एक कारगर इलाज है जुकाम को ठीक करने के लिए |  इसमें बहुत से पोषक तत्व (nutrients) और vitamins होते है जो जुकाम में आराम पहुचाते है।
  • अदरक (ginger), 2-3 लौंग(clove) और थोडा सा नमक (salt) को mix कर के उसका पेस्ट बना ले और फिर दिन दो बार 1½ चम्मच कर के इस paste को खाए इससे जुकाम में राहत मिलेगी ।
  • काढ़ा पिने से भी जुकाम ठीक होता है। काढ़ा बनाने के लिए 2 कप पानी में 6 से 7 तुलसी के पत्ते, 2-3 लौंग, थोड़ा सा अदरक कूचा हुआ, और 2-3 गोलकी के दाने को डाल कर थोड़ी देर उबाल ले । फिर दिन में 2 बार उस काढ़ा में आधा चम्मच घी डाल कर पिए । इससे जुकाम में राहत मिलता है। 
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बुधवार, 20 जनवरी 2016

आंखों की नजर तेज हो जाती इन तरीकों से -These eyes are the eyes of the fastest ways -

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teg--आंखों की नजर तेज हो जाती इन तरीकों से -These eyes are the eyes of the fastest ways --अखो की रौशनी बडाने के आसान घरेलू उपाए -Simple domestic measures to enhance sight-आंखों की बीमारी-आंखों की समस्या-आँखों की देखभाल-चश्मा हटाने के उपाय-आँखो की रोशनी बढाने के उपाय-आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए-आँखों के लिए योग-चश्मा उतारने के उपाय-आंखों की रोशनी के लिये-आंखों के रोग
आज इण्टरनेट का युग है टी.बी,मोबाइल, लेपटाप व अन्य डिवाइसों के बिना रहना अगर असम्भव नही तो कठिन अवश्य है।और यह भी विशेष बात है कि इन सब वस्तुओं से आँखें तुरन्त प्रभावित होती हैं यह शरीर का सबसे नाजुक अंग है और साथ ही साथ अति महत्व पूर्ण भी, परन्तु मैं यह नही कह सकता कि आँखो की खातिर आप इन बस्तुओं को प्रयोग ही न करें परन्तु इतना अवश्य कहूगा कि अति न करें चूकि अति सर्वत्र वर्जयेत के सिद्धांत से अति से बचें बाकी काम आयुर्वेद पर छोड़ दें।जितना आपके लिए इन वस्तुओं का प्रयोग जरुरी है उतने से कहीं ज्यादा जरुरी है आँखो की देखभाल
आंखों की नजर तेज हो जाती इन तरीकों से -These eyes are the eyes of the fastest ways -

 हम जानते है कि आँखें हमारे शरीर का ही अंग हैं और  उनकी रोशनी कम होने का मतलव है कि आपके शरीर में कमजोरी आ गयी है।और शरीर की कमजोरी बनती हैआपके पेट से अगर आपका पेट साफ रहता है तो रोग आपके आस पास भटकेगा भी नही अतः आँखों का इलाज करने से पहले आपका पेट साफ होना चाहिए।इसके लिए कुछ सामान्य उपाय वता रहा हूँ उन्हैं नोट कर लें।
1-    Early to bed &  Early to rise makes a man healthy wealthy & wise- के अनुसार जल्दी सोयें जल्दी जागें ।
2-उठते ही रात में रखा हुआ ताँवे के वर्तन का जल प्रतिदिन पियें।
3- भोजन हमेशा ताजा व पालथी लगाकर ही करें।
4-  रोजाना टहलने जरुर जाएं।
5- अगर no-2 पर लिखे उपाय काम न कर रहै हैं तव 10   ग्राम गुलकन्द  दूध के साथ ले
 नेत्र ज्योति वर्धक उपाय--
रात को दो गिलास पानी को एक  वर्तन में ले लें तथा एक मुठठी आँवला उसमें डाल कर फूलने रख दें ध्यान रखें आँवलों को पहले साफ कर लें।सुवह को आँवलों को मसल कर यदि ठण्ड का समय है तो आँवलों के पानी को थोड़ा कुनकना कर लें वाद में मसलें तथा छान लें एक चुटकी मेथी दाना मुँह में डाल कर आधा पानी पी जाऐं।वाकी पानी से आँखें धो लें।इस नुस्खे से आँखो की रोशनी भी बढे़गी साथ ही साथ कब्ज भी दुर होगी
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सोमवार, 18 जनवरी 2016

इलाइची के गुण जानकर हैरान हो जाओगे आप-You'll be shocked to learn the properties of cardamom-

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teg--इलाइची के गुण जानकर हैरान हो जाओगे आप-You'll be shocked to learn the properties of cardamom-इलायची है असरदार इन रोगों मे- Cardamom is effective in these disease-इलायची वशीकरण-बडी इलायची के फायदे-शत्रु नाश के टोटके-इलायची के नुकसान-टोटका उपाय-इलायची के-औषधीय गुण-छोटी इलायची के गुण-इलाइची खाने के फायदे
इलायची दो प्रकार की होती है-छोटी और बड़ी | आज हम आपको छोटी इलायची के विषय में जानकारी देंगे, इसे हम संस्कृत में एला भी कहते हैं | यह हमारे देश तथा इसके आस पास के गर्म देशों में अधिक मात्रा में पायी जाती है | इसके पेड़ हल्दी के पेड़ के सामान होते हैं | इलायची स्वादिष्ट होती है और आमतौर पर इसका प्रयोग खाने के पदार्थों में किया जाता है | छोटी इलायची खाने में शीतल होती है और इसका अधिक मात्रा में उपयोग आँतों के लिए हानिकारक होता है | इसका सेवन १-३ ग्राम की मात्रा में किया जा सकता है | यह कफ ,खांसी ,श्वास व बवासीर नाशक है और ह्रदय एवं गले की मलिनता को दूर करती है | इसे खाने से मुख की दुर्गन्ध दूर होती है और जी मिचलाना बंद हो जाता है | इलायची का प्रयोग हम विभिन्न रोगों के उपचार के लिए कर सकते हैं -
इलाइची के गुण जानकर हैरान हो जाओगे आप-You'll be shocked to learn the properties of cardamom-

इलायची -Cardamom -

  1. - लगभग १० ग्राम इलायची को १ लीटर पानी में डालकर पकाएं ,जब एक चौथाई (२५० ग्राम ) शेष रह जाए तब उसे उतारकर ठंडा कर लें | इस पानी को थड़ी -थोड़ी देर में घूँट -घूँट करके पीने से,हैजामूत्रावरोध रोगों में लाभ होता है | 
  2. - छोटी इलायची के दानों को तवे पर भून कर पीस लें | इस चूर्ण को शहद या देसी घी में मिलाकर सुबह -शाम चाटने से खांसी में लाभ होता है | 
  3. - दिन में कई बार इलायची चबाने से मुँह की दुर्गन्धसांस की बदबू ख़त्म होती है | 
  4. - इलायची को पानी के साथ पीसकर सिर पर लेप की तरह लगाने से सिर दर्द दूर हो जाता है | 
  5. इलायची ,काली मिर्च ,दालचीनी ,धनिया और सौंठ को बराबर मात्रा में लेकर इनको दरदरा पीस लें | इस चूर्ण की दो चम्मच लेकर २५० मिलीलीटर पानी में पकाएं | जब पानी आधा रह जाए तो छानकर गुनगुना पिलायें | इससे तेज़ जुकाम दूर हो जाता है | 
  6. छोटी इलायची को पीस लें | इस चूर्ण को शहद के साथ थोड़ा -थोड़ा चाटने से पेशाब की जलन शांत होती है |
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रविवार, 3 जनवरी 2016

भूलने की बीमारी है तो याददाश्त बढ़ाए पक्का इलाज -Surest cure amnesia increase the memory -

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teg -भूलने की बीमारी है तो याददाश्त बढ़ाए पक्का इलाज -Surest cure amnesia increase the memory -भूलने की बीमारी का इलाज -भूलने का कारण-याददाश्त बढाने के उपाय-दिमाग की नसें-अल्जाइमर रोग-मनोरोग के उपाय-डिमेंशिया-अल्जाइमर क्या है-
क्या आप भी अक्सर क्रेडिट कार्ड का बिल भरना भूल जाते हैं और बाद में लेट पेमेंट भरते हैं? याद किया हुआ हर उत्तर परीक्षा के दौरान भूल जाते हैं? या फिर जेब में चश्मा रखकर पूरे घर में खोजते हैं? बार-बार भूलने की दिक्कत से न सिर्फ आपको कई मौकों पर शर्मिंदगी उठानी पड़ती है बल्कि यह आपके लिए एल्जाइमर जैसे गंभीर रोग का इशारा हो सकती है।


भूलने की बीमारी है तो याददाश्त बढ़ाए पक्का इलाज -Surest cure amnesia increase the memory -
ऐसे में योग की मदद से आप अपनी याददाश्त तेज कर सकते हैं। हाल में हुए एक अमेरिकी शोध के अनुसार, प्रतिदिन 20 मिनट तक योगासनों का अभ्यास दिमाग के लिए ट्रेडमिल पर घंटों दौड़ने से अधिक फायदेमंद है। आइए जानें याददाश्त बढ़ाने और दिमाग तेज करने वाले कुछ प्रभावी योगासनों के बारे में।

सर्वांगासन
प्रतिदिन सर्वांगासन के अभ्यास से दिमाग में रक्त संचार अच्छी तरह रहता है और भूलने की दिक्कत ।
- इसे करने के लिए पीठ के बल सीधे लेट जाएं। दोनों पैरों को साथ रखें और हाथों को कमर पर रखें।
- सांस अंदर की ओर लेते हुए दोनों पैरों को को पहले 30 डिग्री के कोण तक उठाएं, कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद 60 डिग्री तक उठाएं और फिर 90 डिग्री तक उठाएं।
- अब सांस छोड़ते हुए दोनों पैरों को नीचे ले आएं और कुछ सेकंड शवासन में लेटें।
नोटः कमर और गर्दन में दर्द के मरीज इस आसन को न करें।

भुजंगासन
भुजंगासन न सिर्फ याददाश्त तेज रखता है बल्कि कमर दर्द से लेकर साटिका और स्लिप डिस्क जैसे रोगों में लाभदायक है।
- इसे करने के लिए पहले पेट के बल सीधे लेट जाएं और दोनों हाथों को कंधों के समानांतर रखें।
- अब सांस लेते हुए हाथों के बल शरीर के अग्रभाग को ऊपर की ओर उठाएं और जितना हो सकें उतना खींचें।
- 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

नोटः हार्निया के मरीज इस आसन को न करें।
कपालभाति प्राणायाम
इसे करने से श्वास की गति सामान्य होती है, एकाग्रता बढ़ती है और मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह अच्छी तरह होता है।
- इसे करने के लिए पहले सु‌खासन में बैठ जाएं।
- अब गहरी सांस लें और फिर मुंह बंद कर तेजी से सांस बाहर की ओर छोड़ें। इस दौरान पेट की गति साफ दिखनी चाहिए।
- 30 सेकंड बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं।
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बुधवार, 30 दिसंबर 2015

अल्सर के क्या कारण है और उपचार पक्का इलाज -What is the cause and treatment of ulcers treated sure -

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पेप्टिक अल्सर के कारण कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। जानिए, अल्सर से संबं‌धित कुछ जरूरी बातों के बारे में। 
अल्सर के क्या कारण है और उपचार पक्का इलाज -What is the cause and treatment of ulcers treated sure -

  1. पेप्टिक अल्सर पेट की अंदरूनी सतह पर बनने वाले छाले होते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर ये छाले जख्म में बदल जाते हैं। इसके बाद मरीज को कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं।
  2. पेप्टिक अल्‍सर या गैस्ट्रिक अल्‍सर अमाशय या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में होता है। यह तब बनता है, जब भोजन पचाने वाला अम्ल अमाशय या आंत की दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है।
  3. पेप्टिक अल्सर पेट या ड्यूडिनल में होता है। यह दो प्रकार का होता है, पहला गैस्ट्रिक अल्सर और दूसरा ड्यूडिनल अल्सर।
  4. अल्सर होने पर पेट दर्द, जलन, उल्टी और उसके साथ ब्लीडिंग होने लगती है। कुछ समय बाद अल्सर के पकने पर यह फट भी जाता है। इसे परफॉरेशन कहते हैं।

अल्सर होने के कारण---

खानपान की गलत आदतों और उसके कारण बनने वाला एसिड इस बीमारी को अधिक बढ़ा देता है। अनियमित दिनचर्या, खानपान की गलत आदतें और उसकी वजह से बनने वाला एसिड अल्सर की प्रमुख वजह है।

  • कई पेनकिलर्स और दवाओं की वजह से भी यह बीमारी हो जाती है। इसके अलावा तनाव भी अल्सर का बड़ा कारण है, क्योंकि इससे एसिड ज्यादा बनता है।
  • सिर्फ खानपान और पेट में एसिड बनने से पेप्टिक अल्सर नहीं होते, बल्कि हेलिकोबैक्टर पायलोरी बैक्टीरिया भी इसका एक कारण है। इसके अलावा धूम्रपान भी अल्सर के खतरे को बढ़ा देता है।
  • गैस्ट्रिक अल्सर में खाने के बाद पेट में दर्द होने लगता है। वहीं ड्यूडिनल अल्सर में खाली पेट रहने से दर्द होता है और भोजन करते ही दर्द ठीक हो जाता है।
अल्सर होने के लक्षण--

  • पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द होना अल्सर का पहला लक्षण हो सकता है। भोजन के बाद जब पेट में दर्द हो और डाइजिन जैसी एंटी-एसिड दवाओं से राहत मिले, तो इसे गैस्ट्रिक अल्सर का लक्षण माना जाता है।
  • ड्यूडिनल अल्सर में खाली पेट दर्द होता है और भोजन के बाद दर्द से राहत मिलती है। पेप्टिक अल्सर होने से मरीज को भूख कम लगती है।
  • इसके अलावा पेट में दर्द, जलन, उल्टी या मिचली आती है। कई बार उल्टियों में खून भी आने लगता है। अल्सर के पकने पर काले रंग का मल होने लगता है।

अल्सर का इलाज--

  • पेप्टिक अल्सर में एसिड कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं। मरीज को ये दवाएं डॉक्टर द्वारा बताए गए परहेज के साथ लेनी चाहिए।
  • अल्सर बढ़ने पर ऑपरेशन ही एकमात्र समाधान है। अगर यह अल्सर कैंसर में तब्दील हो गया है, तो मरीज की कीमोथैरेपी की जाती है।
  • अगर समय पर उपचार न हो तो अल्सर, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का रूप ले सकता है। जिसके चलते मौत हो सकती है।

 घरेलू उपाय --
इसके अलावा कई घरेलू उपाय भी हैं, जिन्हें अपनाकर फायदा मिलता है। लेकिन, डॉक्टरी परामर्श सबसे जरूरी है।

  • मिर्च-मसालेदार एवं गरिष्ठ खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। खाना आराम से और समय पर खाएं। अल्सर होने के बाद चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, जंक फूड एकदम छोड़ दें। स्मोकिंग से परहेज करें।
  • इसके अलावा तनावमुक्त रहने की कोशिश करें तथा व्यायाम को जिंदगी का हिस्सा बनाएं। दर्द या बुखार होने पर ज्यादा दवाओं का सेवन न करें।

डॉक्टरों की क्या हैं राय--
फरीदाबाद फोर्टिस अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. संजय कुमार कहते हैं कि अनियमित लाइफस्टाइल का असर अक्सर बीमारियों के रूप में सामने आता है। ऐसी ही एक खतरनाक बीमारी है अल्सर।
गलत खानपान और गैस्ट्रिक समस्या के कारण होने वाली इस बीमारी को गंभीरता से लें। 
पेप्टिक अल्सर से कैंसर का खतरा नहीं होता, लेकिन गैस्ट्रिक अल्सर से कैंसर हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इसका इलाज करा लिया जाए।
जल्दी पता चलने पर एसिड की दवाओं से इसे ठीक कर दिया जाता है। अल्सर के पकने पर ऑपरेशन कर दिया जाता है। लेकिन, कैंसर बनने के बाद कीमोथैरेपी से ही इलाज संभव हो पाता है।

नोट --खानपान का ध्यान रखना चाहिए। यह भी ध्यान रखें कि पेट खाली न रहे। दर्द निवारक दवाओं का सेवन डॉक्टरी सलाह पर ही करें। छोटी-छोटी चीजों के लिए खुद से दवा लेने की आदत छोड़ दें।
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