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रविवार, 8 अप्रैल 2018
बुधवार, 28 फ़रवरी 2018
कुंवारी लड़की की पहचान ,कुंवारी पत्नी की पहचान .Virgin girl's identity, the identity of the virgin wife,
कुंवारी लड़की की पहचान ,कुंवारी पत्नी की पहचान .Virgin girl's identity, the identity of the virgin wife,
Identification Of Virgin Girl-एक कुँवारी लड़की की पहचान-
लड़की कुंवारी है या नहीं यह बाहर से देखकर पता नही चलता- कुंवारी की परिभाषा है ऐसी लड़की जिसका हाइमन बरकरार हो- कई लोगों के लिए कौमार्य का अर्थ है ऐसा लड़का या लड़की जिसने पहले कभी संभोग ना किया हो- योनि मुख की परतों में योनि कोरोना/हाइमन के भीतर 1-2 सेमी की श्लेष्मा झिल्ली होती है- जब एक लड़की पहली बार संभोग करती है तो यह हाइमन खिंचाव से फट सकता है- इस से ड़ी पीड़ा के साथ कुछ रक्त भी निकल सकता है- हालांकि ऐसे बहुत से मामले देखने में आए हैं जिनमें कौमार्य बरकरार होने के बावजूद हाइमन अक्षत नहीं था- कई मामलों में, पहली बार सहवास के दौरान भी रक्तस्राव बिल्कुल नहीं हुआ- वहीं कुछ मामलों में हाइमन ऑपरेशन, चोट, हस्तमैथुन, रूई के फाहे घुसने से या किसी प्रकार के अन्य दबाव के कारण फट गया था-
वर्जिनिटी शब्द पर अकसर डिबेट चलती रहती है। अधिकतर लोगों का मानना होता है कि जो लड़की वर्जिन है उसी से शादी करनी चाहिए। लेकिन इन लोगों को यह नहीं पता होता कि वर्जिनिटी होती क्या है। आईये आज हम आपको बताते हैं कि वर्जिनिटी क्या होती है-
पुराने दौर से ही महिलाओं की वर्जिनिटी (कौमार्य) को बेशकीमती माना जाता रहा है। हम दुनिया भर के अब तक के इतिहास पर नजर डालें, तो पता चलेगा कि वर्जिनिटी को मूल्यों और संस्कारों से जोड़कर देखा जाता रहा है- खास तौर पर महिलाओं की वर्जिनिटी पर ज्यादा जोर दिया जाता है-लेकिन अब यह मान्यता टूट रही है। शादी से पहले सेक्स अब कोई वर्जित विषय नहीं रहा- पुरानी पीढ़ी की मान्यताओं और शिकायतों से परे शादी से पहले सेक्स आज की जरूरत बन चुका है। फिर भी कुछ लोग वर्जिनिटी को बड़ा इश्यू मानते हैं-
वर्जिनिटी को इश्यू बनाते हैं मर्द-
जो कपल्स रिलेशनशिप में रह रहे हैं, वे सेक्स को लेकर फ्री माइंडेड हैं। वे पाबंदी और नैतिकता के बंधनों से आजाद हैं। वे मनमर्जी से सेक्स करते हैं। उनके लिए यह जरूरी नहीं है कि रिलेशनशिप शादी में तब्दील हो जाए। मगर जब भी शादी और खासकर अरेंज मैरेज की बात आती images (2)है, तो उनकी भौहें चढ़ जाती हैं। खासकर महिलाओं के यह बात काफी मुश्किलें पैदा कर देती है, क्योंकि पुरुष महिलाओं की वर्जिनिटी को काफी बड़ा इश्यू मानते हैं-
गाइनकॉलजिस्ट महेंद्र वत्स के मुताबिक हमारे समाज में इस तरह की मानसिकता वाले लोगों की तादाद बड़ी संख्या में है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये सारी बातें हमारी संस्कृति और परंपरा में मजबूती से बनी हुई हैं। डॉक्टर वत्स के मुताबिक, ‘एक आम सवाल से मुझे हमेशा दो-चार होना पड़ता है। मैं कैसे पता करूं कि मेरी गर्लफ्रेंड या होने वाली पत्नी वर्जिन है? इसका साफ जवाब है कि इसे जानने का कोई रास्ता नहीं है-
डॉ. राजन भोसले के मुताबिक वैसे तो वर्जिनिटी कोई बड़ा इश्यू नहीं है, मगर मर्दों की पुरानी शिकायत है कि पहली रात में उनकी पत्नी को ब्लीड नहीं हुआ। यह पूरी तरह से बेवकूफाना सोच है कि ब्लीड नहीं हुआ तो वह वर्जिन नहीं है। ऐसा सभी के साथ जरूरी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं कि वर्जिन नहीं है इसलिए ऐसा हुआ-
क्या नकली हाइमन लगवाई जा सकती है-
कोई लड़की वर्जिन है या नहीं, इसका पता दो ही तरीकों से चल सकता है- या तो वह प्रेगनेंट हो चुकी हो या फिर वह खुद स्वीकार कर ले- एक सेफ हाइमन कभी भी वर्जिनिटी का सबूत नहीं हो सकती, क्योंकि आजकल तो एक छोटा सा ऑपरेशन करवाकर भी आर्टिफिशल हाइमन लगाई सकती है। कई सारे डॉक्टरों के पास ऐसे केस आ रहे हैं। अब मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि एक प्लास्टिक सर्जन आसानी से हाइमन की तरह के टिश्यूज़ बना सकते हैं। इस प्रक्रिया को हाइमनोप्लास्टी कहते हैं-
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शनिवार, 16 दिसंबर 2017
इन तरीको से गले लगाने से लडकियों की वासना जाग जाती है The desire of the girls gets awakened by embracing these methods.
अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने लाइफ पार्टनर को प्यार जताना चाहते हैं, मगर लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं। फिर जब हम उसे गले लगाते हैं तो शरीर की गर्माहट हमारी हर फीलिंग को बयां कर देती है। गले लगना सिर्फ इंटिमेसी ही नहीं है बल्कि यह एक एहसास है जो उस मूमेंट को स्पेशल बना देता है। चाहे मिलने की खुशी हो या दूर जाने का गम, ये हर मौके पर काम आती है।
आज हम आपको गले लगने के ऐसे ही कुछ टाइप बताने जा रहे हैं जो आपका पार्टनर आपसे चाहता है। अगर आप उसे इस तरह से 'हग' करेंगे तो आपके लिए अपनी फीलिंग को उसे बता पाना और ज्यादा आसान हो जाएगा। और तो और यह बात उसे आपकी नार्मल 'हग' से भी ज्यादा अच्छी फील होगी।
तो फिर देर किस बात की है। आइए जानते हैं पूरा मामला।
पार्टनर से लिपटकर जमीन से उठ जान
अक्सर लड़कियां जब अपने पार्टनर से कुछ समय के लिए दूर चली जाती हैं तो वो मिलने पर उसे इसी तरह 'हग' करना चाहती हैं। जरूरी नहीं कि वो समय कुछ साल या महीने का हो। कुछ लोगों के लिए एक दिन भी अपने पार्टनर से दूर रहना लम्बा समय होता है।
पार्टनर से गले मिलने का तरीका बहुत कुछ दर्शाता है आपके रिश्ते के बारे में
लिपटकर घूमना
अगर आप अपने पार्टनर को 'हग' कर कुछ देर हवा में घूम जाते हैं तो यह भी उसे काफी अच्छा लगता है। आमतौर पर ये तब होता है जब आप खुश या एक्ससाइटेड होते हैं।
कसकर 'हग' करना
जब आप अपने पार्टनर को कसकर गले लगाते हैं तो उसे एहसास होता है कि आप उसकी कितनी फिक्र करते हैं। उसे इस तरह की 'हग' बहुत पसंद होती है।
'हग' करते हुए उसे जमीन से उठाते रहन
जब आप 'हग' करते हुए अपने-अपने पार्टनर को बार-बार जमीन से ऊपर उठाते हैं तो आपका पार्टनर इसे बहुत पसंद करता है। इससे उसे आपकी केयर और स्ट्रेंथ का पता चलता है।
आगे देखिये 'हग' से कैसे बयां करें कि आपका पार्टनर बहुत खूबसूरत है।
'हग' करते समय उसका चेहरा देखना
जब आप 'हग' करते समय अपने पार्टनर को देखते हैं तो इससे उसे एहसास होता है कि वो आपके लिए कितनी खूबसूरत हैं। आप हमेशा उसके साथ रहना चाहते हैं।
देर तक 'हग' किये रहना
जब आप अपने पार्टनर को काफी देर तक 'हग' किये रहते हैं तो इससे उसे सुकून मिलता है। आपकी बाहों की गर्मी उसकी टेंशन को काफी हद तक कम कर देती है।
आगे देखिये 'हग' से कैसे सरप्राइज करें अपने पार्टनर को।
अपनी दाढ़ी को उसके सिर पर रखना
इस तरह की 'हग' उन लोगों के लिए है जो अपने पार्टनर से लम्बे होते हैं। जब वो अपनी दाढ़ी उसके सिर पर रखते हैं और वो उनके सीने पर सिर रखती है तो उसे काफी हल्का फील होता है।
पीछे से 'हग' करना
जब आप अपने पार्टनर को पीछे से 'हग' कर लेते हैं तो यह उसके लिए एक सरप्राइज जैसा होता है और महिलाओं को सरप्राइज बहुत अच्छे लगते हैं।
आगे देखिये 'हग' से कैसे बयां करें कि वो आपके लिए बहुत जरूरी है।
लेटकर 'हग' करते हुए उसकी बातें सुनना
जब आप रात के वक्त लेटकर 'हग' किये हुए उसकी बातें सुनते हैं तो उसे एहसास होता है कि वो आपके लिए कितनी जरूरी है।
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तो फिर देर किस बात की है। आइए जानते हैं पूरा मामला।
पार्टनर से लिपटकर जमीन से उठ जान
अक्सर लड़कियां जब अपने पार्टनर से कुछ समय के लिए दूर चली जाती हैं तो वो मिलने पर उसे इसी तरह 'हग' करना चाहती हैं। जरूरी नहीं कि वो समय कुछ साल या महीने का हो। कुछ लोगों के लिए एक दिन भी अपने पार्टनर से दूर रहना लम्बा समय होता है।
पार्टनर से गले मिलने का तरीका बहुत कुछ दर्शाता है आपके रिश्ते के बारे में
लिपटकर घूमना
अगर आप अपने पार्टनर को 'हग' कर कुछ देर हवा में घूम जाते हैं तो यह भी उसे काफी अच्छा लगता है। आमतौर पर ये तब होता है जब आप खुश या एक्ससाइटेड होते हैं।
कसकर 'हग' करना
जब आप अपने पार्टनर को कसकर गले लगाते हैं तो उसे एहसास होता है कि आप उसकी कितनी फिक्र करते हैं। उसे इस तरह की 'हग' बहुत पसंद होती है।
'हग' करते हुए उसे जमीन से उठाते रहन
जब आप 'हग' करते हुए अपने-अपने पार्टनर को बार-बार जमीन से ऊपर उठाते हैं तो आपका पार्टनर इसे बहुत पसंद करता है। इससे उसे आपकी केयर और स्ट्रेंथ का पता चलता है।
आगे देखिये 'हग' से कैसे बयां करें कि आपका पार्टनर बहुत खूबसूरत है।
'हग' करते समय उसका चेहरा देखना
जब आप 'हग' करते समय अपने पार्टनर को देखते हैं तो इससे उसे एहसास होता है कि वो आपके लिए कितनी खूबसूरत हैं। आप हमेशा उसके साथ रहना चाहते हैं।
देर तक 'हग' किये रहना
जब आप अपने पार्टनर को काफी देर तक 'हग' किये रहते हैं तो इससे उसे सुकून मिलता है। आपकी बाहों की गर्मी उसकी टेंशन को काफी हद तक कम कर देती है।
आगे देखिये 'हग' से कैसे सरप्राइज करें अपने पार्टनर को।
अपनी दाढ़ी को उसके सिर पर रखना
इस तरह की 'हग' उन लोगों के लिए है जो अपने पार्टनर से लम्बे होते हैं। जब वो अपनी दाढ़ी उसके सिर पर रखते हैं और वो उनके सीने पर सिर रखती है तो उसे काफी हल्का फील होता है।
पीछे से 'हग' करना
जब आप अपने पार्टनर को पीछे से 'हग' कर लेते हैं तो यह उसके लिए एक सरप्राइज जैसा होता है और महिलाओं को सरप्राइज बहुत अच्छे लगते हैं।
आगे देखिये 'हग' से कैसे बयां करें कि वो आपके लिए बहुत जरूरी है।
लेटकर 'हग' करते हुए उसकी बातें सुनना
जब आप रात के वक्त लेटकर 'हग' किये हुए उसकी बातें सुनते हैं तो उसे एहसास होता है कि वो आपके लिए कितनी जरूरी है।
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गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
मर्दों में सब से ज्यादा होने वाले गुप्त रोग जानकारी -Most of all the information secret disease in men -
स्वपनदोष ( Night emission )
स्वपन मेँ किसी के साथ रति क्रिया करते हुए वीर्यपात का होना । कारण जिन्होँने 12-17 वर्ष अर्थात् Teens के समय मेँ अपने हाथोँ से वीर्यवाहक नली Spermatic cord को आघात पहुचाया हो और अपनी वीर्य नष्ट किया हो , जिनके विचार गंदे है । लेकिन समय पर ध्यान न रखा गया तो यही रोग बढ़कर गहरी नीँद मेँ वीर्यपात होकर ऐसे व्यक्ति को सुबह ज्ञात होता है कि रात मेँ क्या हुआ था । केवल सुबह मेँ वीर्य लगा था । स्वपनदोष को माह मे 1 से 2 बार होना चिँताजनक नहीँ परंतु अधिक होने पर शरीर खोखला हो जाता है । लक्षण कमर मेँ दर्द , सिर चकराना , दिल ज्यादा धड़कना , किसी काम मेँ मन न लगना , लिखते-पढ़ते आँखोँ के नीचे अँधेरा आना , पढ़ा लिका याद न रहना इत्यादि ।
धातुक्षीनता ( Spermatorrhea)
पैखाना या पेशाब के समय लसदार धातु निकलना का नाम है शुक्रमेह या धातुक्षीनता । कारण स्वपनदोष और कब्ज लक्षण मल-मुत्र त्यागते समय थोड़ा ज्यादा जोड़ लगाने से वीर्य निकलने लगता है । हस्त-मैथुन स्त्रियोँ के दर्शन से ही वीर्य पतन होने लगता है । रोग बढ़ने पर मन मेँ बेचैनी , सलज्जा भाव स्मृति की हानी , निरुतसाह , शारीरिक कमजोरी , भुख की कमी , कब्ज , पेट फुलना , छाती धड़कन , सिर दर्द , अक्स्मात खड़ा होने पर अंधकार दिखाई देना , आँख के चारो ओर काले दाग , स्वपनदोष एवं शीध्रपतन आदि । फिर भी रोगी को पता नहीँ चलता कि मुझे क्या हुआ है , अंत मेँ मर्दाना शक्ति चला जाता है । पुरुष-स्त्री संभोग से हाथ धो बैठता है , औलाद का मुह देखना नसीब नहीँ होता । पुरुष स्त्री को कभी भी संतुष्ट नही कर पाता रोगी दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जाता है ।
शीध्रपतन ( Premature ejaculation )
संभोग के समय वीर्य शीध्र निकल जाने को शीध्रपतन कहते है । जिस प्रकार पानी से भरी बोतल को उलटने से जल्द गिर जता है , उसी प्रकार गाढ़ी शहद के बोतल को उलटने से जल्द न गिरता है वही दशा वीर्य का है । वीर्य पतला होने पर शीध्र निकलता परंतु गाढ़ा वीर्य जल्द नही निकलता । शीध्रपतन के रोगी संभोग मेँ सदा असफल रहता है । नोट : इस रोग मेँ अफीम , नशीली दवाये या पदार्थ सेवन से बचना चाहिए । इस रोग का व्यक्ति संभोग करने की इच्छा होती है पर लिँग मेँ भी उत्तेजना आती है परंतु अकारण वीर्यपात हो जाता है । शीध्रपतन रोग पुरुष को शर्मिँदा करने वाला रोग है । स्त्री के ह्रदय से नफरत उत्पन्न कर देने वाली बिमारी से छुटकारा न मिलने पर पुरुष सदा स्त्री के नजर मेँ गिर जाता है । स्त्री अपने ह्रदय ठंडा करने के लिए रिस्तेदारोँ , पड़ोँसियोँ आदि से कामेच्छ पूरी करने के लिए संभोग करवाती है । जिसका परिणाम धन , धर्म , इज्जत सभी नष्ट होता है । रोगी शर्म के मारे मौत को अधिक पसंद करने लगता है । इलाज स्वपनदोष , धातुक्षीनता एवं शीध्रपतन का एक इलाज कि प्रात:काल बरगद के वृक्ष के निचे जाएँ और एक बताशे मेँ 10 बुँदे बरगद का दुध रख कर 3 महिने तक खायेँ । और ब्रह्मचर्य का पालन करेँ तथा इलाज शुरु के 1 शाल तक वीर्यपात न करेँ । ब्रह्मचर्य हमारे अन्य नोट मेँ विस्तार से दिया गया है ।
नपुंसकता ( Empotency )
पुरुष जब संभोग क्रिया मेँ स्त्री को पूर्णरूप से संतुष्ट नहीँ कर सकेँ वीर्य मेँ शुक्रकीट का अभाव जो संतान पैदा न कर सके उसे नपुंसकता कहते है । इससे औरत अपना वासना की तृप्ति के लिए गलत मार्ग पर चल पड़ती है । सुखी दाम्पत्य जीवन तथा गृहस्थ जीवन बर्बाद हो जाता है । दवा आयुर्वेदिक "पावरफुल" (Powerful) का सेवन करेँ । सिफलिस , गर्मी , आतशक ,
विसर्प ( Syphilis )
यह रोग अत्यन्त भयानक रोगोँ मेँ एक है वैश्याओँ के साथ संभोग करने से होता है । इस रोग मेँ संभोग के कुछ दिन बाद इन्द्री पर छोटी फुन्सि पैदा हो जाती है । जो जल्द ही फैलकर जख्म बन जाती है इसका प्रथम भाव मामूली होता है लेकिन इलाज मेँ लापरवाही की जाएँ तो यह रोग पुश्तोँ तक पिछा नहीँ छोड़ती । इसकी प्रथम धाव केवल इन्द्री पर होते है और दूसरी श्रेणी मेँ शरीर पर काले दाग तथा ताँबे के रंग की फुन्सियाँ और धीरे-धीरे धाव हो जाते हैँ । तिसरी श्रेणी मेँ आतशक का प्रभाव हड्डियोँ मेँ चला जाता है तथा नाक की अस्तियाँ गल जाती है । यदि आतशक के जीवाणु दिमाग पर आक्रमण करेँ तो रोगी अंधा हो जाता है अंत मेँ मृत्यु को प्राप्त करता है |
सुजाक ( Geonorhoea )
यह रोग गंदे स्त्री के साथ संभोग करने से होता है इसमेँ संभोग के कुछ दिनोँ बाद रोगी पेशाब करते समय अधिक जलन और चुभन होती हैँ कि रोगी सचमुच मेँ कठारता है और पेशाब करने मेँ धबराता है । कुछ दिनोँ बाद लिँग मेँ हर समय पीप निकलनी शुरू हो जाती है । कभी-कभी पेशाब मेँ खुन आ जाता है । ज्योँ ज्योँ यह रोग पुराना होता है , पीड़ा और जलन बढ़ती जाती है । और पीप बहता रहता है 1 यदि पीप रोगी के आँख मेँ लग जाये तो अंधा होने का डर रहता है , इसलिए यह रोग का जरा भी लक्षण दिखाई देँ , फौरन इसका उचित और पूरा इलाज करा लेना चाहिए । सिफलिस और गोनोरिया एवं नपुंसकता का इलाज किसी गुप्त रोग विशेषज्ञ से करायेँ क्योकि ये घरेलु इलाज के लिए नही है ।
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रविवार, 10 दिसंबर 2017
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इन तरीको से हसीन करे करे रात को और हेरान करे जीवनसाथी को \These ways to make beautiful your spouse at night and shocked-पत्नी को सेक्स में मजा और पूरा आनंद देने के लिए --
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वैवाहिक जीवन का मूल आधार सेक्स जीवन होता है। जब तक आप अपने सेक्स जीवन से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं होंगे आपका वैवाहिक जीवन सुख और शांती से नहीं बितेगा। जब आपके दिल में प्यार का सागर उमड़ रहा होता है उस वक्त पूरे रात आप इस प्यार भरे लम्हों के साथ ही रहना चाहते हैं। उन लम्हों में आपको शारीरिक और मानसिक तौर पर पूर्ण स्वस्थ होना चाहिए तभी सेक्स जीवन का पूरा आनंद उठा पायेंगे और एक दूसरे को संतुष्ट कर पायेंगे। कभी-कभी उस वक्त आप इतना थकान महसूस करने लगते हैं कि दिल में प्यार होने के बावजुद आनंद नहीं उठा पाते हैं और अपने हमसफर को नाराज कर बैठते हैं।
इसलिए प्यार भरा शारीरिक संबंध स्थापित करने के पहले खुद को और अपने हमसफर को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना ज़रूरी होता है ताकि सेक्स के सुख का आनंद लंबे समय तक उठा सके। इन लम्हों को जीने के लिए अपने हमसफर के साथ मानसिक तौर पर गहरा संबंध स्थापित करना ज़रूरी होता है। जितना आप एक दूसरे के करीब होंगे उतना आप दोनों सेक्स जीवन का आनंद उठा पायेंगे।
इसलिए सेक्स जीवन का आनंद पूरी तरह से उठाने के लिए इन तरीकों को अपनायें-
सेक्स प्रक्रिया का आरंभ धीरे-धीरे करें-
सेक्स प्रक्रिया का आरंभ धीरे-धीरे करें-
सेक्स के चरम अवस्था का आनंद उठाने के लिए कभी भी जल्दबाजी न करें। प्यार भरे स्पर्श और प्यार भरे क्रियाओं के साथ सेक्स प्रक्रिया का आरंभ करें। इससे आप दोनों एक दूसरे के ज़्यादा से ज़्यादा करीब आ पायेंगे। एक दूसरे को चुंबन (kiss) के द्वारा शारीरिक और मानसिक तौर पर सेक्स के लिए तैयार करें ताकि आप इसके चरम आंनद का सुख उठा सके। यह कोई काम नहीं है बल्कि सुख है जिसको भोगने का सही तरीका आना चाहिए। तभी आप दोनों एक दूसरे के आत्मा का अंग बन पायेंगे।
सेक्स प्रक्रिया में फोरप्ले का महत्व-
प्यार के चरम आनंद के सुख को पाने के लिए दिल में सिर्फ प्यार होने से ही चलता नहीं है बल्कि उसको व्यक्त करने की भी ज़रूरत होती है। प्यार भरे बातों और प्यार भरे स्पर्शों के द्वारा भी आप अपने साथी को आकर्षित और सेक्स के लिए पूरी तरह से तैयार कर पायेंगे। साधारणतः पुरूष फोरप्ले को ज़्यादा महत्व नहीं देते हैं लेकिन महिलाओं में काम के उत्तेजना को बढ़ाने के लिए इन क्रियाओं को करना बहुत ज़रूरी होता है। आप हर बार नए-नए तरह के क्रियाओं की सृष्टि करने की कोशिश कीजिए जो आपके साथी को पसंद हो। क्योंकि यह प्रक्रिया शारीरिक से ज़्यादा भावनात्मक (emotional) होता है। भावनात्मक संबंध जितना गहरा होगा शारीरिक संबंध उतना ही संतोषप्रद होगा।
प्यार के चरम आनंद के सुख को पाने के लिए दिल में सिर्फ प्यार होने से ही चलता नहीं है बल्कि उसको व्यक्त करने की भी ज़रूरत होती है। प्यार भरे बातों और प्यार भरे स्पर्शों के द्वारा भी आप अपने साथी को आकर्षित और सेक्स के लिए पूरी तरह से तैयार कर पायेंगे। साधारणतः पुरूष फोरप्ले को ज़्यादा महत्व नहीं देते हैं लेकिन महिलाओं में काम के उत्तेजना को बढ़ाने के लिए इन क्रियाओं को करना बहुत ज़रूरी होता है। आप हर बार नए-नए तरह के क्रियाओं की सृष्टि करने की कोशिश कीजिए जो आपके साथी को पसंद हो। क्योंकि यह प्रक्रिया शारीरिक से ज़्यादा भावनात्मक (emotional) होता है। भावनात्मक संबंध जितना गहरा होगा शारीरिक संबंध उतना ही संतोषप्रद होगा।
सेक्स प्रक्रिया में प्यार भरे बातों का महत्व-
प्यार में गहराई लाने के लिए मन के सारे इंद्रियों (sense) को सतेज करना ज़रूरी होता है। सेक्स कभी भी गंभिर अवस्था में शुरू नहीं हो सकता है। इसको शु्रू करने के लिए अच्छी और मजेदार बातें करें। ताकि धीरे-धीरे मन और परिवेश दोनों अच्छा होने लगे। अपने साथी के साथ शरारत भरी बातें करें, छेड़खानी करें। किसी भी तरह के बात करने में शर्मिंदगी महसूस न करें। जितना आप एक दूसरे से बात करेंगे उतना एक दूसरे के करीब आ पायेंगे।
प्यार में गहराई लाने के लिए मन के सारे इंद्रियों (sense) को सतेज करना ज़रूरी होता है। सेक्स कभी भी गंभिर अवस्था में शुरू नहीं हो सकता है। इसको शु्रू करने के लिए अच्छी और मजेदार बातें करें। ताकि धीरे-धीरे मन और परिवेश दोनों अच्छा होने लगे। अपने साथी के साथ शरारत भरी बातें करें, छेड़खानी करें। किसी भी तरह के बात करने में शर्मिंदगी महसूस न करें। जितना आप एक दूसरे से बात करेंगे उतना एक दूसरे के करीब आ पायेंगे।
सेक्स प्रक्रिया में तनाव से दूर रहें-
सेक्स जीवन में कदम रखने के पहले किसी भी तरह से तनावग्रस्त न हो। अगर मन में किसी भी तरह की शंका है तो उसको दूर कर लें। क्योंकि तनाव कभी भी आपको सेक्स का पूरा आनंद नहीं उठाने देगा। तनाव के अवस्था में आप अपने साथी को संतुष्ट नहीं कर पायेंगे।
सेक्स जीवन में कदम रखने के पहले किसी भी तरह से तनावग्रस्त न हो। अगर मन में किसी भी तरह की शंका है तो उसको दूर कर लें। क्योंकि तनाव कभी भी आपको सेक्स का पूरा आनंद नहीं उठाने देगा। तनाव के अवस्था में आप अपने साथी को संतुष्ट नहीं कर पायेंगे।
सेक्स प्रक्रिया का आनंद लंबे समय तक उठाने के लिए व्यायाम करें-
पुश-अप्स – यह व्यायाम सिर्फ आपको फिट ही नहीं करता है बल्कि आपके शरीर के मांसपेशियों को शक्ति भी प्रदान करता है। इस व्यायाम को करने से आप लंबे समय तक सेक्स का आनंद उठा पायेंगे।
केगल एक्सरसाइज़ – यह व्यायाम करने से आपके सेक्स ऑर्गन अच्छी तरह से काम कर पाते हैं और सेक्स संबंधी किसी भी बीमारी को ठीक करने में यह बहुत कामगार साबित होता है।
योगासन – वज्रासन, भूजंगासन और सर्वांगासन आपके सेक्स जीवन को उन्नत करने में बहुत मदद करते हैं।
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कमजोरी,दुबलापन,पक्का उपाय-Weakness, thinness, certain measures
TEG--कमजोरी,दुबलापन,पक्का उपाय-Weakness, thinness, certain measures-दुबलापन कैसे दूर करे-दुबलापन दूर करने का उपाय-दुबलापन दूर करने के उपाय-दुबलापन कारण व उपचार-जल्दी मोटा होने के उपाय-मोटा होने के लिए दवा-दुबला पतला शरीर-कमजोरी के लक्षण-कमजोरी की देशी दवा-कमजोरी दूर करने के उपाय-कमजोरी के कारण-कमजोरी की दवा-कमजोरी लगना-शरीर की कमजोरी दूर करने के उपाय-शारीरिक कमजोरी के लक्षण
दुबलापन एक ऐसी समस्या है, जिससे ग्रसित लोग अक्सर आत्मविश्वास में कमी महसूस करते हैं और हेल्थ बढ़ाने के लिए कुछ भी करने को तैयार होते हैं। अगर आप भी दुबलेपन से परेशान हैं तो निराश न हों आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के सम्मिलित प्रयासों से दुबलेपन की समस्या के कारगर उपाय खोज निकाल लिए गए हैं। ये उपाय कुछ इस तरह है ----
ऊपर बताए इन प्रयोगों को यदि कोई लगातार दृढ़ संकल्पित होकर करें तो निश्चित रूप से उसे दुबलेपन और अन्य शारीरिक कमजोरियों से छुटकारा मिल जाएगा।
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- अध्वगंधा और शतावर का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 1 से 2 चम्मच प्रतिदिन शुद्ध दूध के साथ सोने से पहले सेवन करें।
- दूध में उबालकर प्रतिदिन 5 छुवारे यानी खारक का सेवन करें।
- एक गिलास दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सेवन करें।
- भोजन में सलाद, नाश्ते में अंकुरित अन्न, तथा फलों का प्रयोग प्रारंभ करें।
- यथा संभव नशीले पदार्थों चाय, कॉफी, गुटका-तम्बाकू, सिगरेट और शराब आदि से दूर रहें।ऊपर बताए इन प्रयोगों को यदि कोई लगातार दृढ़ संकल्पित होकर करें तो निश्चित रूप से उसे दुबलेपन और अन्य शारीरिक कमजोरियों से छुटकारा मिल जाएगा।
ऊपर बताए इन प्रयोगों को यदि कोई लगातार दृढ़ संकल्पित होकर करें तो निश्चित रूप से उसे दुबलेपन और अन्य शारीरिक कमजोरियों से छुटकारा मिल जाएगा।
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स्त्रियों के प्रमुख योन रोग । कारण,लक्षण,और उपचार,Women leading yon disease. Causes, symptoms, and treatment
teg -स्त्रियों के प्रमुख योन रोग । कारण,लक्षण,और उपचार,Women leading yon disease. Causes, symptoms, and treatment-श्वेत प्रदर का घरेलू इलाज-श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक इलाज-श्वेत प्रदर का इलाज-सफेद पानी का घरेलू उपाय-स्त्री रोग प्रश्न-लिकोरिया का इलाज-श्वेत प्रदर के लक्षण-रक्त प्रदर-स्त्रियों के गुप्त रोगों की चिकित्सा-मासिक धर्म का रुक जाना-पेशाब में जलन -बवासीर का मस्सा-खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार-
अधिकांश महिला व पुरुष ऐसे होते हैं, जो संक्रमण के कारण इन रोगों की चपेट में आते हैं। सर्दियों की शुरुआत से ही ऐसे मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ जाती है। सर्दियों में लोग शरीर की सफाई ठीक से नहीं रखते। कपड़े कई दिनों तक नहीं बदले जाते हैं। लोग नहाने से परहेज करते हैं। नहाने से परहेज करने और कपड़ों के लगातार न बदलने के कारण संक्रमण से फैलने वाले गुप्त रोगों की संभावना बढ़ जाती है।सर्दियों में शरीर की सफाई न रखने और नहाने से परहेज करने के कारण लोगों में गुप्त रोग की संभावना बढ़ जाती हैं।
स्त्रियों के गुप्त रोगों की चिकित्सा :----
सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा प्रतिमास दो-चार बार होना, पेट में तकलीफ होना तथा कमर में दर्द बढ़ जाना आदि के उपचार में कच्चा पुदीना एक कट्टा लेकर दो गिलास पानी में उबालकर एक कप जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह (निराहार) एक बार और रात में सोते समय दूसरी बार पी लेना चाहिए। इस प्रकार 40 दिनों तक करते रहें। पथ्य में अचार, बैंगन, मुर्गी, अंडे तथा मछली आदि का प्रयोग न करें।
मासिक धर्म का रुक जाना ------
:तीन-तीन महीने तक मासिक धर्म का न होना तथा पेट में पीड़ा होना आदि के लिए एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह निराहार पेट रात में भोजनोपरांत सोते समय पी लेना चाहिए। इस प्रकार सेवन एक महीने तक करते रहें। आलू तथा बैंगन वर्जित हैं।
पेशाब में जलन :------
मूत्र नलियों में रक्त संचार सुचारू रूप से न होना और पेशाब से रक्त का जाना आदि में एक कप मौसम्मी का जूस लेकर उसमें आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर उसका सेवन करें। सुबह एक बार और दूसरी बार रात में सोने से पूर्व। दस दिन तक इस इलाज को जारी रखिए। खाने में गर्मी पैदा करने वाली वस्तुएं, मिर्च और खट्टी वस्तुओं का उपयोग कम करना चाहिए।
बवासीर का मस्सा :-------
एक चम्मच सिरके में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में दो बार मस्से की जगह पर लगाएं।
------तेल चुपड़ी रोटी शनिवार को कुत्ते को खिलाएं।
-----एक कटोरी केसर पानी में घोलकर मरीज के कमरे में रख दें।
क्या सावधानी रखें गुप्त रोग होने पर...????
----- नहाने से परहेज न करें।
----- प्रतिदिन अंत: वस्त्र व अन्य कपड़ों को बदलें।
- ---शौच के बाद शरीर के अंदरुनी अंगों को ठीक से साफ करें।
----- पूर्व में संक्रमण से पीड़ित या एलर्जी वाले लोगों को अधिक सतर्क होने की है जरूरत।
------- किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसे छुपाने की बजाय चिकित्सक से संपर्क करें।
-----------------------------------------------------------------------------------------------------
खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार---------
जब त्वचा की सतह पर जलन का एहसास होता है और त्वचा को खरोंचने का मन करता है तो उस बोध को खुजली कहते हैं। खुजली के कई कारण होते हैं जैसे कि तनाव और चिंता, शुष्क त्वचा, अधिक समय तक धूप में रहना, औषधि की विपरीत प्रतिक्रिया, मच्छर या किसी और जंतु का दंश, फंफुदीय संक्रमण, अवैध यौन संबंध के कारण, संक्रमित रोग की वजह से, या त्वचा पर फुंसियाँ, सिर या शरीर के अन्य हिस्सों में जुओं की मौजूदगी इत्यादि से।
खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार-----
------खुजली वाली जगह पर चन्दन का तेल लगाने से काफी राहत मिलती है।
----दशांग लेप, जो आयुर्वेद की 10 जड़ी बूटियों से तैयार किया गया है, खुजली से काफी हद तक आराम दिलाता है।
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अधिकांश महिला व पुरुष ऐसे होते हैं, जो संक्रमण के कारण इन रोगों की चपेट में आते हैं। सर्दियों की शुरुआत से ही ऐसे मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ जाती है। सर्दियों में लोग शरीर की सफाई ठीक से नहीं रखते। कपड़े कई दिनों तक नहीं बदले जाते हैं। लोग नहाने से परहेज करते हैं। नहाने से परहेज करने और कपड़ों के लगातार न बदलने के कारण संक्रमण से फैलने वाले गुप्त रोगों की संभावना बढ़ जाती है।सर्दियों में शरीर की सफाई न रखने और नहाने से परहेज करने के कारण लोगों में गुप्त रोग की संभावना बढ़ जाती हैं।
स्त्रियों के गुप्त रोगों की चिकित्सा :----
सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा प्रतिमास दो-चार बार होना, पेट में तकलीफ होना तथा कमर में दर्द बढ़ जाना आदि के उपचार में कच्चा पुदीना एक कट्टा लेकर दो गिलास पानी में उबालकर एक कप जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह (निराहार) एक बार और रात में सोते समय दूसरी बार पी लेना चाहिए। इस प्रकार 40 दिनों तक करते रहें। पथ्य में अचार, बैंगन, मुर्गी, अंडे तथा मछली आदि का प्रयोग न करें।
मासिक धर्म का रुक जाना ------
:तीन-तीन महीने तक मासिक धर्म का न होना तथा पेट में पीड़ा होना आदि के लिए एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह निराहार पेट रात में भोजनोपरांत सोते समय पी लेना चाहिए। इस प्रकार सेवन एक महीने तक करते रहें। आलू तथा बैंगन वर्जित हैं।
पेशाब में जलन :------
मूत्र नलियों में रक्त संचार सुचारू रूप से न होना और पेशाब से रक्त का जाना आदि में एक कप मौसम्मी का जूस लेकर उसमें आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर उसका सेवन करें। सुबह एक बार और दूसरी बार रात में सोने से पूर्व। दस दिन तक इस इलाज को जारी रखिए। खाने में गर्मी पैदा करने वाली वस्तुएं, मिर्च और खट्टी वस्तुओं का उपयोग कम करना चाहिए।
बवासीर का मस्सा :-------
एक चम्मच सिरके में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में दो बार मस्से की जगह पर लगाएं।
------तेल चुपड़ी रोटी शनिवार को कुत्ते को खिलाएं।
-----एक कटोरी केसर पानी में घोलकर मरीज के कमरे में रख दें।
क्या सावधानी रखें गुप्त रोग होने पर...????
----- नहाने से परहेज न करें।
----- प्रतिदिन अंत: वस्त्र व अन्य कपड़ों को बदलें।
- ---शौच के बाद शरीर के अंदरुनी अंगों को ठीक से साफ करें।
----- पूर्व में संक्रमण से पीड़ित या एलर्जी वाले लोगों को अधिक सतर्क होने की है जरूरत।
------- किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसे छुपाने की बजाय चिकित्सक से संपर्क करें।
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खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार---------
जब त्वचा की सतह पर जलन का एहसास होता है और त्वचा को खरोंचने का मन करता है तो उस बोध को खुजली कहते हैं। खुजली के कई कारण होते हैं जैसे कि तनाव और चिंता, शुष्क त्वचा, अधिक समय तक धूप में रहना, औषधि की विपरीत प्रतिक्रिया, मच्छर या किसी और जंतु का दंश, फंफुदीय संक्रमण, अवैध यौन संबंध के कारण, संक्रमित रोग की वजह से, या त्वचा पर फुंसियाँ, सिर या शरीर के अन्य हिस्सों में जुओं की मौजूदगी इत्यादि से।
खुजली के लिए आयुर्वेदिक उपचार-----
------खुजली वाली जगह पर चन्दन का तेल लगाने से काफी राहत मिलती है।
----दशांग लेप, जो आयुर्वेद की 10 जड़ी बूटियों से तैयार किया गया है, खुजली से काफी हद तक आराम दिलाता है।
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रविवार, 3 दिसंबर 2017
औरत का सीना ,स्तन ,का आकर बढ़ जाता है ये पक्का इलाज है-Woman's breast, the breast, the size of the increases is the surest cure
teg-औरत का सीना ,स्तन ,का आकर बढ़ जाता है ये पक्का इलाज है-Woman's breast, the breast, the size of the increases is the surest cure-किशोरी-लड़की-लडकिया-स्थन फोटो-ब्रेस्ट का आकार बढ़ाने के आसान तरीके-छाती बनाने के उपाय-ब्रेस्ट क्रीम-ब्रेस्ट बड़ा करने के उपाय-बुब्स-छाती बढ़ाने के उपाय-चेस्ट बढाने के उपाय
आज एक औरत को और अधिक आकर्षक लगने के लिए उसके पास शारीरिक ऊंचाई और वजन से मेल खाते स्तनों की आदर्श जोड़ी का होना आवश्यक माना जा रहा है। अगर छोटे और बड़े स्तन वाली महिला में अंतर की बात करें तो छोटे स्तनों की अपेक्षा सुडौल और बड़े स्तन वाली महिला देखने में तो अधिक सुंदर लगती ही है साथ में बड़े स्तन वाली महिलाओं के अंदर आत्मविश्वास भी अधिक होता है इसी कारण आत्मविश्वास से भरी महिला जहाँ जाती है उनका नैतिक सम्मान भी बढ़ जाता है।आकर्षक शारीरिक विशेषताओं में सुडौल और बड़े स्तनो के महत्व को समझ कर ही आज महिलाएं स्वाभाविक रूप से स्तन के आकार बढ़ाने के उपाय जानने के लिए उत्सुक रहती है पर ज्यादातर महिलायें स्तन का आकार बढ़ाने लिए महंगी प्रक्रिया सर्जरी को ही चुनती है लेकिन स्तन वृद्धि की प्रक्रिया हमेशा परिणाम प्रदान करने वाली सर्जरी कई बार दुष्प्रभाव भी छोड़ जाती है इसलिए ब्रेस्ट का साइज बढाने के लिए हम कुछ सफल और आसान उपाय लेकर आये है जो ब्रेस्ट का साइज बढाने में आपकी मदद जरुर करेंगे।
आयुर्वेद में उपाय जो पक्का काम करते है --
- लसोडे की पत्तियों का सत्व, छोटी इलायची, कमल गट्टे की मिंगी का पावडर, अनार का पांचांग (जड़, डंढल, पत्ता फूल, फल या अनार के छिलके) माजूफल, शतावरी सबको मिला कर उसका लेप तैयार कर लें। अब स्तन पर लेप करें। ये लेप त्वचा के भीतर तक जाकर स्तनों की मांसपेशियों को पुष्ट बनाते हैं।
- अश्वगंधा चूर्ण (बाजार में उपलब्ध) रोजाना छह से दस ग्राम तक दूध के साथ सेवन करें।
- अनार पांचांग तेल ये भी स्तनों के विकास के लिये जरूरी है। इस तेल से नियमित दिन में दो बार मालिश करते रहें। स्तन फिर से सुडौल होने लगेंगे। अनार तेल के मसाज से कोशिकाओ में रक्त संचार तेजी से शुरू होता है। स्तनों की मांस पेशिययों में तंतुओं की मात्रा बढ़ने लगती है। स्तन में मजबूती व कठोरता आने लगती है। ये उपयोग लगातार एक माह तक अवश्य करें।
- नोट - यदि अनार तेल न मिले, तो ऊपर बताया गया पांचांग का मतलब उसे लेकर सरसों के तेल में पकायें सत आ जाने पर छानकर रख लें।
- स्तनों पर सरसों के तेल से करीब आधा घंटा हल्के हाथ से मालिश करें। नीचे से ऊपर की ओर करें। फिर दस पंद्रह ठंडे पानी की पट्टियां एक के बाद एक रखते रहें। स्तन का आकार बढ़ेगा।
- नोट - स्तनों की मालिश हमेंशा नीचे से ऊपर की ओर ही करनी चाहिये।
शीघ्रपतन होता है -पक्का इलाज बता रहा हु -Premature ejaculation is the surest cure I am told -
शीघ्रपतन होता है -पक्का इलाज बता रहा हु -Premature ejaculation is the surest cure I am told-शीघ्रपतन रोकने के आसान उपायEasy Tips To Prevent Premature Ejaculation,लिंग का ढीलापन, कमजोरी, दुर्बलता, शिथिलता,वीर्य की बढ़ोतरी होती, शरीर में ताकत,संभोग करते समय चरम सुख,बचपन की गलतीइन उपाय आप घर पर करे -सभी तरह की कमजोरी दूर हो जतेगी
* कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से भी जाना जाता है। संभोग करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोगकरने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए।इसके बाद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बनालेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।
* शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है।
* मोचरस, कौंच के बीज, शतावरी, तालमखाना को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर लगभग 400 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से बुढ़ापे में भी संभोग क्रिया का पूरा आनंद लिया जा सकता है। इस योग को लगभग2-3 महीने तक सेवन करना लाभकारी रहता है।
* लगभग 6 चम्मच अदरक का रस, 8 चम्मच सफेद प्याज का रस, 2 चम्मच देशी घी और 4 चम्मच शहद को एक साथ मिलाकर किसी साफ कांच के बर्तन में रख लें। इस योग को रोजाना 4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।
* बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां औरगोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रखलें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योगशीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।
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शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017
जाने लडकियों के सबसे कामुक अंगो के बारे में -The girls about the sensual organs
कामुक और सेक्सी हिस्सा कौनसा है योनि से पानी आता है स्त्री औरत लड़की वेसे तो लडकियों का पूरा शारीर ही इस तरह बना होता है कि मर्द उनकी हर अदा पर फ़िदा हो जाता है /
कानों के चारों ओर चैतन्य नसों का जमावड़ा होता है, जो कान को उत्तेजना के प्रति अतिरिक्त चैतन्य बनाती हैं. अपनी उंगलियों से उन्हें हल्के से सहलाइए या खींचिये, कान के पीछे की ओर चूमे और कान के निचले गुद्देदार हिस्से को हल्के से काटे. इससे महिलाओं में उत्तेजना पूर्ण सनसनाहट का संचार होता है. कई महिलाएं अपने कान में जीभ फेरना पसंद नहीं करती लेकिन सौम्य तरीके से कान के चारों ओर जीभ घुमाना भी उनमें उत्तेजना का संचार करता है.
होंठ
चूमना… किसी महिला के लिए एक बड़ा टर्निंग प्वांइट होता है. जब रिलेशन बन रहे होते हैं तो किस(kiss) ऐसी पहली चीज होती है सर्वप्रथम अस्वीकार की जाती है, लेकिन इसमें देर नहीं करना चाहिये. होंठ उत्तेजक नसों से लबालब भरे होते हैं. इन्हें तुरंत सीधे तौर पर इसलिए जीभ में नहीं डुबाना चाहिये. आपकी किस द्वारा सौम्यता से कामुकता में तीव्रता से परिवर्तन होता है. सबसे पहले उसके निचले होंठो पर अपनी जीभ फेरें फिर उसे अपने होंठों के बीच फंसाकर चूसे साथ ही उसे भी ऐसा करने दें. जब आप उसे किस कर रहें हो तो अपने हाथ उसकी गर्दन पर रखे या फिर उसकी कमर या नितंबों पर या फिर इस दौरान उसके इन सभी जगहों पर हाथ फेर सकते हैं यह दिखाने के लिये कि आप उससे कितना कुछ चाहते हैं
गर्दन
इसे चूमना, चाटना, सौम्य तरीके से काटना और हल्के से थपथपाना उसको सिसकने के मजबूर कर देता है. लेकिन यहां जोर से नहीं काटना चाहिये क्योंकि यहां की त्वचा ब्रेक हो सकती है
कंधे
गर्दन की तरह- कई महिलाएं कंधों को चूमने और आलिंगन करने से काफी उत्तेजना का अनुभव करती हैं. पूर्व की तरह जो प्रक्रिया गर्दन में कर रहे हैं वही करते हुए कंधों तक आएं ताकि उस पता चल सके कि आप कितने सेन्सुअल लवर हैं.
कोहनी
कोहनी के अंदर की ओर चूमने से महिलाओं में हल्की उत्तेजना का संचार होता है. कोहने के अंदर की ओर की त्वचा कोमल होती है, इस जगह हल्के से काटते हुए किस करते चले जाएं. देखें इससे उसे कैसे आनंद की अनुभूति होती है.
अंगुलियां
महिलाओं की उंगलियां भी काफी उत्तेजक होती हैं लेकिन ज्यादातर लोग इस ओर ध्यान नहीं देते. उंगलियों के पोरों को हल्के-हल्के सहलाते हुए दबाने से महिलाओं में तीव्र उत्तेजना का संचार होता है. साथ ही जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ती जाती है आपको उसकी उंगलियों को अपने होंठों के बीच ले जाना चाहिए फिर होंठो से सहलाते हुए धीरे धीरे चूसना चाहिए. इस क्रिया से वह नशे की सी स्थिति में आ जाएगी. यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि उंगलियों में सर्वाधिक कामुक बिन्दु उसके पोर होते हैं.
स्तन
स्तन महिला के सेक्सुअल और कामुक अंगों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. यह महिलाओं में सेक्सुअल आकांक्षा के साथ सेक्सुअल उत्तेजना जागृत करने में सहायक होता है साथ ही सेक्सुअल उत्तेजना के लिये अत्यंत संवेदनशील होता है. परन्तु इसके लिए सीधे छलांग नहीं लगा देनी चाहिये. आप अपने रास्ते उसके शरीर में नीचे की ओर जाते जाएं व उन्हें सहलाते रहे लेकिन स्तनों को तब तक न छुएं जब तक कि आपको यह न पता चल जाए कि वह स्वयं चाह रही है कि आप उसके स्तनों को छुएं. शुरुआती दौर में उनके साथ सौम्य तरीके से पेश आएं. इसके लिये शुरुआत किनारे से करें, फिर केन्द्रीभूत तरीके से गोल घेरे में अपनी उंगलियां उसके स्तनों के चारों ओर घूमाएं, ऐसा तब तक करें कि जब तक कि स्तनों के निप्पल के चारों ओर के गुलाबी या भूरे रंग के गोल घेरे तक न पहुंच जाएं, यहां कुछ देर तक उंगलियां फिराने के बाद निप्पल तक पहुंचना चाहिए. अब आप तो निप्पल को सहलाते हुए थपथपाएं, खींचे, दबाएं, चूमे और चूसे. इस दौरान आप चाहें तो सौम्य तरीके से हल्के से दांतो से काट सकते हैं. जब आप का मुंह एक स्तन पर है तो इस दौरान आपका हाथ दूसरे स्तन पर खेलना चाहिए तभी वह सब कुछ सौंपने को आतुर होगी. इसके पश्चात स्तन बदल कर यही क्रिया दोहराएं. फिर दोनों हाथों से स्तनों को जम कर दबाना चाहिये साथ ही बीच में अपने पार्टनर से पूछें कि उसे स्तनों में कौन सी क्रिया आनंददायी लगती है. कभी भी पार्टनर की इच्छाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिये. स्तनों के बीच की हिस्सा कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है जबकि यह भी कामुक क्षेत्र होता है.
पीठ
शुरुआत हल्के तरीके से सहलाने से करें. इसके लिए कंधों के निचले हिस्से से शुरू करें फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर आती जायें(इस दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधे छूने से बचे यह खतरनाक हो सकता है). इस दौरान पीठ पर मिले जुले कभी हल्के कभी तेज थपथपाहट करनी चाहिये. इसे और बेहतर बनाने के लिये टेलकम पावडर या तेल का प्रयोग कर सकते हैं. यहां यह ध्यान दें कि उसकी पीठ के किस हिस्से में टच करने पर ज्यादा उत्तेजना का संचार होता हैं इसके लिये आप चाहें तो अपने पार्टनर से पूछ सकते हैं. फिर उसकी पीठ के मध्य में रीढ़ की हड्डी के उपर बने नालीदार हिस्से पर हल्के हाथ से उंगलियां फिराते हुए नीचे की ओर नितंबों तक आना चाहिये यह क्रिया चाहें तो कई बार दोहरा सकते हैं. ऐसा करने से उसे आराम की अनुभूति तो होगी ही, साथ ही इससे रक्त का संचार उसके पेल्विक क्षेत्र की ओर होने लगता है- इससे उसकी उत्तेजना चरम की ओर पहुंचने लगती है. उसकी पीठ के निचले हिस्से में या ठीक नितंब के उपर बने गङ्ढे (dimple) भी उत्तेजक अंग होते हैं. उसकी रीढ़ के समानान्तर ऊपर से नीचे की ओर(top to the bottom) जीभ फेरने पर उसके उत्तेजना की आग सुलग उठती है.
शुरुआत हल्के तरीके से सहलाने से करें. इसके लिए कंधों के निचले हिस्से से शुरू करें फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर आती जायें(इस दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधे छूने से बचे यह खतरनाक हो सकता है). इस दौरान पीठ पर मिले जुले कभी हल्के कभी तेज थपथपाहट करनी चाहिये. इसे और बेहतर बनाने के लिये टेलकम पावडर या तेल का प्रयोग कर सकते हैं. यहां यह ध्यान दें कि उसकी पीठ के किस हिस्से में टच करने पर ज्यादा उत्तेजना का संचार होता हैं इसके लिये आप चाहें तो अपने पार्टनर से पूछ सकते हैं. फिर उसकी पीठ के मध्य में रीढ़ की हड्डी के उपर बने नालीदार हिस्से पर हल्के हाथ से उंगलियां फिराते हुए नीचे की ओर नितंबों तक आना चाहिये यह क्रिया चाहें तो कई बार दोहरा सकते हैं. ऐसा करने से उसे आराम की अनुभूति तो होगी ही, साथ ही इससे रक्त का संचार उसके पेल्विक क्षेत्र की ओर होने लगता है- इससे उसकी उत्तेजना चरम की ओर पहुंचने लगती है. उसकी पीठ के निचले हिस्से में या ठीक नितंब के उपर बने गङ्ढे (dimple) भी उत्तेजक अंग होते हैं. उसकी रीढ़ के समानान्तर ऊपर से नीचे की ओर(top to the bottom) जीभ फेरने पर उसके उत्तेजना की आग सुलग उठती है.
नितंब या कूल्हे
कई महिलाएं अपने नितंबों को जोर से दबाना या तेज दबाव की मालिश पसंद करती हैं. आप यहां पर शरीर के अन्य अंगों की अपेक्षा ज्यादा दबाव दे सकते हैं. कुछ महिलाएं नितंब पर हल्के थप्पड़ो का प्रहार पसंद करती हैं- किन्तु ऐसा करने से पहले अपने पार्टनर से पूछ लें.इस मामले को जोर का दबाव या थपथपाहट मजाक का विषय नहीं बनाना चाहिये – क्योंकि कई महिलाएं अपने नितंब के आकार को लेकर काफी आशंकित रहती हैं.
मोन्स
जैसे ही आप भग क्षेत्र या बाह्य जननेन्द्रियों (genital area) को पाते हैं, तो उसमें छलांग लगाना काफी सरल होता है लेकिन उसके पहले भगशिश्न के उपर स्थित उस गुद्देदार क्षेत्र को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जो रोमों (pubic hair) से घिरा होता है. इसे थपथपाना और रगड़ना उसे सिसकने को मजबूर कर देगा वहीं रोमों को(यदि हैं तो) उंगलियों में फंसाकर हल्के से खींचने पर उसे मीठे दर्द की अनुभूति होती है जो उसमें उत्तेजना का संचार करती है.
भगशिश्न
यह महिलाओं का सबसे कामुक अंग होता है. भगशिश्न को आसानी से खोजा जा सकता है. यह भगोष्ठ (vaginal lips) के उपर की ओर उभरा हुआ हिस्सा होता है. यह उत्तेजक उत्तकों से बना हुआ होता है और इसका काम पुरुषों को शिश्न मुण्ड की ही तरह होता है. उत्तेजना के दौरान यह रक्त से भरा रहता है. कुछ महिलाओं का भगशिश्न इतना सेन्सटिव होता है कि कई बार परेशानी का सबब भी बन जाता हैं क्योंकि हल्की सी छुअन भी उसमें उत्तेजना भर देती है. इस तरह की स्थितियों में इसे सीधे न छूकर इसके किनारों से स्पर्श करना चाहिए और उस नीचे (base) से उत्तेजित करना चाहिये. कुछ महिलाएं जैसे-जैसे उत्तेजित होती जाती हैं वैसे-वैसे वे अपने भगशिश्न में ज्यादा दबाव चाहती हैं. लेकिन भगशिश्न में दबाव व स्पर्श के लिये पार्टनर से पूछ कर ही हरकत करना चाहिये. यदि आप मुखमैथुन कर रहें हैं तो भगशिश्न तक किनारे से पहुंचे. इस तरीके से उसे ज्यादा आनंद आएगा.
योनि
योनि वह दूसरा क्षेत्र है जहां कई आदमी स्तनों को उत्तेजित करने के बाद सीधे पहुंच जाते हैं. जब आप वहां पहुंच जाएं तो उसके बाहर रुके, तब आपको काफी पसंदीदा तरीके से अंदर के लिये वेलकम किया जाएगा. जैसे ही महिला उत्तेजित होती है उसका गर्भद्वार उपर की ओर खिसक जाता है जिससे योनि की
गहराई बढ़ जाती है और आपको गहरे तक प्रवेश का आनंद मिलता है. इस लिए यह आपकी पसंद का मामला है कि आप उसे कितना गीला कर सकते हैं. जितना समय यहां दिया जाएगा उतना ही आनंद आपको लिंग प्रवेश पर मिलेगा.
जी-स्पॉट
योनि की गहराई के एक तिहाई रास्ते पर यह क्षेत्र योनि की बाहरी दीवार पर (आमाशय या पेट के सामने न कि गुदा की ओर ) एक स्पंजी क्षेत्र पाया जाता है यह लगभग मुंह के उपरी हिस्से की तरह होता है जब जीभ से छुआ जाता है. यदि इस जगह पर लगातार उंगली चलाई जाती है तो कई महिलाएं काफी मात्रा में पानी छोड़ती है. पानी की यह धार काफी तेज भी होती है. वहीं कुछ महिलाओं को ऐसा अनुभव होता है कि मानों उन्हें पेशाब जाना हो, तो कई को कुछ और ही अनुभूति होती है. कुल मिला कर जी-स्पाट उत्तेजना के महिलाओं में अलग-अलग अनुभव होते हैं. इसलिए अपने पार्टनर से पूछिये कि उसे क्या अनुभूति हो रही है और उसे कैसा लग रहा है-
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