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रविवार, 31 जुलाई 2016

m.s धोनी .महेंद्र सिंह धोनी का जीवन-चरित्र. m.s. dhoni ,Mahendra Singh Dhoni's biography,jivni,jeevan,

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m.s धोनी .महेंद्र सिंह धोनी का जीवन-चरित्र. m.s. dhoni ,Mahendra Singh Dhoni's biography,jivni,jeevan,

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पूरा नाम  – महेंद्र सिंह धोनी / Mahendra Singh Dhoni
जन्म     – 7 जुलाई 1981
जन्मस्थान – रांची, बिहार(झारखण्ड)
पिता     – पान सिंह
माता     – देवकी देवी
विवाह    – साक्षी सिंह रावत

MS Dhoni Biography In Hindi

धोनी एक भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान भारतीय अंतर्राष्ट्रीय टीम के कप्तान है. एक दाए हात के आक्रामक मध्यक्रम बल्लेबाज और विकेट-कीपर है, अपनी आक्रामक शैली से मैच को खत्म करने वाले बल्लेबाज के रूप में वे जाने जाते है.
उन्होंने दिसम्बर 2004 से बांग्लादेश के विरुद्ध अपने एकदिवसीय क्रिकेट की शुरुवात की और अपना पहला टेस्ट क्रिकेट एक साल बाद ही श्रीलंका के विरुद्ध खेला.
एम. एस. धोनी / Mahendra Singh Dhoni ने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम के कई रिकार्ड्स भी बनाये जैसे किसी भी कप्तान की तुलना ने उन्होंने भारत को एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक जीत दिलाई और साथ ही एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट में भारत को लगातार जीत दिलाते रहने वाले वे अकेले कप्तान है. उन्होंने 2007 में राहुल द्रविड़ से कप्तानी ली और अपनी कप्तानी में उन्होंने भारतीय टीम को श्रीलंका और न्यू-ज़ीलैण्ड में पहली दफा जीत का स्वाद चखाया. उनकी कप्तानी में, भारत ने 2007 ICC World Twenty20, CB सीरीज 2007-08, एशिया कप 2010, 2011 ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2013 ICC चैंपियंस ट्राफी जीती. 2011 के वर्ल्ड कप फाइनल में धोनी ने 79 गेंदों में नाबाद 91 रन की पारी खेली जो भारत को विश्व चैंपियन बनाने के लिए बहोत मदतगार साबित हुई, और इस वजह से उन्हें उस मैच का “मैन ऑफ़ द मैच” का पुरस्कार नही दिया गया. जून 2013 में,इंग्लेंड में जब भारत ने चैंपियंस ट्राफी के फाइनल में इंग्लेंड को पराजित किया था, उसी वक़्त धोनी भारत को तीनो सिमित-ओवर की ट्राफी(वर्ल्ड कप चैंपियंस ट्राफी और वर्ल्ड ट्वेंटी-ट्वेंटी) दिलाने वाले पहले कप्तान बन गये थे. 2008 में टेस्ट मैचों की भी कप्तानी लेने के बाद उन्होंने टीम को सफलता के शिखर पर ले जाकर न्यू-ज़ीलैण्ड और वेस्ट-इंडीज में जीत दिलाई और साथ ही बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी 2008,2010 और 2013 में भी जीत दिलाई. 2009 में, धोनी ने पहली बार भारतीय टीम को टेस्ट रैंकिंग में पहले पायदान पर पहोचाया. 2013 में, उनकी कप्तानी में भारत 40 सालो बाद पहली ऐसी टीम बनी जिसने ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट मैचों में वाइट-वाश किया था. और इंडियन प्रीमियर लीग में वे चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान बने 2010 और 2011 के सीजन में इतिहास रचा और 2010 और 2014 की चैंपियंस लीग ट्वेंटी ट्वेंटी भी जीती. और उन्होंने दिसम्बर 2014 में टेस्ट क्रिकेट से अपने सन्यास की घोषणा की.
एयर इंडिया से निर्वासित (रिजाइन) करने के बाद, धोनी ने इंडिया सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड के उपाध्यक्ष का पद भी लिया है. इंडिया सीमेंट ये आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स की मालक है, और पहले आईपीएल सीजन से धोनी उस टीम के भी कप्तान है. धोनी इंडियन सुपर लीग टीम चेंनैयीं FC के सह-मालक भी है.
धोनी कई [उरास्कार के हकदार रह चुके है, जिनमे 2008 और 2009 में ICC ODI प्लेयर ऑफ़ द इयर(दो बार ये पुरस्कार जितने वाले पहले खिलाडी), 2007 में राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड और पदम् श्री, 2009 में भारत के चौथे सिविलियन का सम्मान उन्हें प्राप्त है. उनका नाम 2009 के ICC वर्ल्ड टेस्ट इलेवन और ICC वर्ल्ड ODI इलेवन के कप्तान के रूप में भी रखा गया है. कपिल देव के बाद वे दुसरे भारतीय खिलाडी है जिन्हें इंडियन आर्मी का भी सम्मान पद मिला है. 2011 में, दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूचि में भी धोनी का नाम लिखा गया था. 2012 में, दुनिया के सबसे कीमती खिलाडियों में 16 वे नंबर पर है. जून 2015 में, फ़ोर्ब्स ने धोनी को सबसे ज्यादा कीमती खिलाडियों की सूचि में 23 वे नंबर पर रखा, और उनके अनुसार उनकी कमाई US$31 मिलियन रही
महेंद्र सिंह धोनी का प्रारंभिक जीवन – Early Life Of MS Dhoni :
धोनी का जन्म रांची, बिहार(झारखण्ड) में हुआ. उनके पिता का नाम पान सिंह व् माता श्रीमती देवकी देवी उनके पैत्रक गाव, लावली उत्तरखंड के अल्मोरा जिले के अंतर्गत लामगढ़ा ब्लाक में है. उनके पिता माता उत्तरखंड से रांची चले आये जहा उनके पिताजी श्री पण सिंह मेकोन कंपनी जे जूनियर मैनेजमेंट वर्ग में काम करने लगे. धोनी की एक बहन है जिनका नाम है जयंती और एक भाई है जिनका नाम है नरेंद्र. धोनी एडम गिलक्रिस्ट के बहोत बड़े फेन है, और उनके बचपन के आदर्श खिलाडी उनके अभी के सह-खिलाडी सचिन तेंदुलकर थे, और बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन उन्हें पसंद थे और गायक में वे लता मंगेशकर को पसंद करते थे.
धोनी दी ए वि जवाहर विद्यालय मंदिर, श्यामली, रांची, झारखण्ड में पढ़ते थे जहा उन्होंने शुरू से ही बैडमिंटन और फुटबॉल में अपना हुनर प्रदर्शन किया जिस कारन वे जिला व् क्लब लेवल में भी चुने गए. धोनी अपने फुटबॉल टीम के गोलकीपर भी रह चुके है. उन्हें लोकल क्रिकेट क्लब में क्रिकेट खेलने के लिए उनके फुटबॉल कोच ने भेजा था. हालाँकि उसने कभी क्रिकेट नहीं खेला था, फिर भी धोनी ने अपने विकेट-कीपिंग के कौशल से सबको प्रभावित किया और कमांडो क्रिकेट क्लब के (1995-1998) में नियमित विकेटकीपर बने. क्रिकेट क्लब में उनके अच्छे प्रदर्शन के कारन उन्हंप 1997-98 सीजन के विनु मांकड़ ट्राफी अंडर सिक्सटीन चैंपियनशिप में चुने गए जहा उन्होंने बहेतरिन प्रदर्शन किया. दसवी कक्षा के बाद ही धोनी ने क्रिकेट में अपना ध्यान दिया. धोनी दक्षिण रेलवे के 2001 से 2003 तक खरगपुर रेलवे स्टेशन पर टीटीई (ट्रेन टिकेट एग्जामिनर) रह चुके है, वे हमेशा उनकी शरराती हरकतों के लिए जाने जाते थे. एक बार, धोनी जब किसी स्टेशन के रेलवे क्वार्टर पर रह रहे थे, तब धोनी और उनके दोस्त ने खुद को सफ़ेद कम्बल से पूरी तरह ढक लिया था और देर रात तक स्टेशन पर घूम रहे थे. वहा पर उपस्थित पहरेदार उन्हें देख कर घबरा गया क्यू की उसे यकीं नहीं हो रहा था की इतनी रात में वहा कोई भुत घूम रहा है. उनकी यही शरारत दुसरे दिन एक बड़ी खबर बन गयी थी.
धोनी का वैयक्तिक जीवन / MS Dhoni Family & Personal Life :
धोनी ने साक्षी सिंह रावत से शादी की जो उनकी दी. ए. वि. जवाहर विद्यालय मंदिर श्यामली में उनकी सहकर्मी थी. वो जन्मजात देहरादून, उत्तराखंड से थी. उनकी शादी के समय, वो होटल मैनेजमेंट की पढाई कर रही थी और प्रशिक्षक की तरह तेज बंगाल कोलकाता में काम कर रहीं थी. बाद में उनकी शादी हुई
और धोनी 6 फेब्रुअरी 2015 को एकं नवजात बेटी “जीवा” के पिता बने.
महेंद्र सिंह धोनी की खेल शैली – MS Dhoni Playing Style :
धोनी एक आक्रमक दाये हात के बल्लेबाज और विकेटकीपर है. धोनी साधारणतः माध्यम वर्ग के बल्लेबाज है लेकिन मैच की दशा और दिशा देखकर वे अपने बेटिंग स्टाइल को बदलते रहते है. क्यू की एक कप्तान की तरह ये उनकी जवाबदारी है. वो एक शक्तिशाली हीटर और सबसे तेजी से रन बनाने वाले बल्लेबाजो में से एक है.
उनके विकेटकीपर की अनोखी स्टाइल को कई क्रिकेट विद्वानों ने भी सराहा. और उन्होंने अपनी विकेट कीपिंग से कई विश्व रिकार्ड्स भी बनाये.
निच्छित ही धोनी आने वाले युवा खिलाडियों के प्रेरणास्त्रोत है.
निच्छित ही धोनी आने वाले युवा खिलाडियों के प्रेरणास्त्रोत है. ऐसा नहीं है की धोनी शुरुवात से ही क्रिकेट जगत में सफल होते गये, उनके सामने कई चुनौतिया आई. कप्तान बनने के बाद कई बार लोगो ने उनकी आलोचना भी की. लेकिन उन्होंने उन आलोचनाओ की ओर ध्यान ना देते हुए अपने खेल को और अधिक सुन्दर बनाने का प्रयास किया. और पूरी भारतीय टीम को विश्व में प्रथम स्थान पर ला खड़ा किया. और आज वे पुरे भारत के चहेते बन गये है.
कई बार लोग किसी काम को इसी वजह से छोड़ देते है की जब वे वो काम करेंगे तो “लोग क्या कहेंगे?”. इस प्रश्न के दिमाग में आते ही कई लोग अपने काम को बिच में ही छोड़ देते है. लेकिन अगर हम किसी भी महापुरुष की जीवनी को देखे तो हमें ऐसा दिखेगा की उन्होंने किसी भी नए काम की शुरुवात लोगो की चिंता किये बिना ही शुरू किया. और बाद में जो लोग उनकी आलोचना करते थे वही लोग उनका साथ देने लगे.

शनिवार, 30 जुलाई 2016

क्रिकेट इतिहास के दस सबसे अजीब बॉलिंग एक्शन-Cricket history's ten most weird bowling action

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क्रिकेट इतिहास के दस सबसे अजीब बॉलिंग एक्शन-Cricket history's ten most weird bowling action

क्रिकेट इतिहास के दस सबसे अजीब बॉलिंग एक्शन-Cricket history's ten most weird bowling action
ऑस्ट्रेलिया के इस बॉलर को हम सभी जानते हैं, वो 150 किमी/घंटे से ज़्यादा की बॉल फेंकने के लिए जाने जाते हैं। उनका एक्शन भी थोड़ा अजीब सा है। कुछ कहते हैं की उनकी बॉलों में इतनी गति इसलिए हैं क्योंकि उनका बॉलिंग एक्शन उन्हे इसमें मदद करता है।
टेट को कई बार चोट लगी है, और उसके पीछे उनका यह एक्शन भी जिम्मेदार है। इस कारण उन्होने टेस्ट क्रिकेट से एक अघोषित समय के लिए ब्रेक ले लिया है, और इसके साथ ही उन्होने 20-20 पर ध्यान देने के लिए एकदिवसीय क्रिकेट से भी सन्यास ले लिया है।

#9 शोएब अख्तर

क्रिकेट इतिहास के दस सबसे अजीब बॉलिंग एक्शन-Cricket history's ten most weird bowling action
यह एक सबसे विवादित तेज़ गेंदबाज रहे हैं, उनके एक्शन के बारे में भी काफी चर्चा हुई है। उनके हाथों और कंधों के बीच एक बीमारी थी, जिससे उनका एक्शन काफी संदेहजनक दिखता था।
उन्हे शुरू से ही एक्शन को लेकर कई बार संदेह भरी नज़रों से देखा गया है। इसके बाद भी उनका एक्शन हमेशा लोगों को याद रहेगा। वो काफी दूर से भाग कर आते थे, जिससे डेनिस लिली, जेफ थॉमप्सन और वेस हॉल की याद आती थी। चाहे कितना भी विवाद हुआ हो पर उन्हे हमेशा उनके एक्शन के लिए याद रखा जाएगा।

#8 देबाशीश मोहंती

क्रिकेट इतिहास के दस सबसे अजीब बॉलिंग एक्शन-Cricket history's ten most weird bowling action
भारत के लिए उड़ीसा का यह पहला खिलाड़ी था, मोहंती के करियर की शुरुआत काफी अच्छी थी। इस तेज़ गेंदबाज का एक सिम्पल सा दिखने वाला एक्शन था, पर बॉलिंग करते हुए वो अपने दोनों हाथों को उपर ले जाते थे, जो देखने में काफी अजीब लगता था। इसके साथ ही बॉलिंग करते हुए उनका चेहरा कुछ अजीब ही दिखता था।
1999 में उनके एक्शन के ऊपर आईसीसी ने वर्ल्ड कप का ग्राफिक लोगो भी बनाया था।

#7 पीटर स्लीप


जब शेन वॉर्न ऑस्ट्रेलिया का लेग स्पीनिंग में चेहरा नहीं बने थे तब यह बॉलर खेलता था, उस समय वो ऑस्ट्रेलिया के मुख्य बॉलर थे। हालांकि उन्होने इतना नाम नहीं कमाया, पर स्लीप को उनके एक्शन के कारण याद किया जाएगा। वो ज़्यादातर लेग स्पिन और गुगली ही फेंका करते थे, जिससे बाद में उनका हाथ घायल भी हो गया था।

#6 सुनील नारेन

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दुनिया का एक सबसे निडर बॉलर, उनका बॉलिंग एक्शन ऐसा लगता है मानो वो कभी लेग स्पिनर हों तो कभी ऑफ स्पिनर। पर उन्होने जो भी ख्याति पाई है वो आईपीएल में अपने अजीब से बॉलिंग एक्शन के कारण।
वो जब बॉल फेंकते हैं तो बल्लेबाज़ को पता नहीं लगता की वो ऑफ स्पिन करेंगे या लेग स्पिन या फिर स्ट्रेटर वन। इसी उलझन के कारण सुनील ने कई बल्लेबाजों को जमने से पहले ही आउट किया है। उनको शॉट खेलना काफी मुश्किल है

#5 लासिथ मलिंगा

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उनको स्लिंगा मलिंगा भी कहा जाता है। जब हम विचित्र एक्शन की बात करेंगे तो मलिंगा का एक्शन सबको हमेशा याद रहेगा। उनका यह एक्शन उन्हे कई बार विरोधी खेमों को तंग करने में मदद करता है।
एक बार की बात है जब मलिंगा, स्टीफन फ्लेमिंग को बॉलिंग कर रहे थे, उनकी बॉलिंग खेलके फ्लेमिंग इतना तंग हो गए की उन्होने अम्पायर को अपने कपड़े बदलने को ही कह दिया, क्योंकि बॉल का रंग कपड़ों के रंग से काफी मिल रहा था।

#4 सोहेल तनवीर

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इस बॉलर को इस लिए हमेशा याद रखा जाएगा क्योंकि ये बॉल को फेंकते हुए अपने सीधे पैर का प्रयोग करते थे। क्रिकेट में बॉलिंग करते हुए जब सीधे हाथ का बॉलर बॉल फेंकता है तो उसका सीधा पैर लाइन पे पड़ता है, और जो बाएँ हाथ से बॉलिंग करता है उसका बायाँ पैर लाइन पे पड़ता है, पर सोहेल इसका उल्टा ही करते थे।
सोहेल तनवीर अपने ही देश के मुहम्मद इरफान से पहले सबसे लंबे उल्टे हाथ के तेज़ बॉलर थे।

#3 अब्दुल क़ादिर

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उनको लेग स्पिन का जादूगर माना जाता था, और उनके एक्शन को भी काफी अलग देखा जाता था। वो अपना बॉलिंग रन अप काफी टेढ़ा भागकर लेते थे, कूदकर वो बॉल को तेज़ी से फेंका करते थे। कादिर ने बाद में इस बात को माना था की उनका बॉलिंग एक्शन उनकी रणनीति का एक हिस्सा था।
उनके समय को हमेशा याद रखा जाता है, उनको देखकर ही पाकिस्तान के कई बोलर्स ने बॉल फेंकना सीखा, जिनमें मुश्ताक़ अहमद एक है।

#2 क्रिस हैरिस

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उनको न्यूज़ीलैंड के अच्छे ऑल-राउंडर के रूप में भी जाना जाता है। वो ज़्यादातर बीच के ओवर्स फेंका करते थे। और रनों की गति को रोकना उनका मुख्य काम था। शायद हैरिस एक अलग ही तरह के स्पिनर थे, जो अपने एक्शन के लिए याद रखे जाएंगे।
उनके बॉलिंग एक्शन के बारे में एक सटीक शब्द कहना थोड़ा मुश्किल है, पर अगर हम उनको मीडियम पेसर/स्पिन बॉलर कहें तो यही उनका असली परिचय होगा। इससे भी अजीब था उनका बॉलिंग रन अप जो वसीम अकरम की तरह भाग कर आते थे। आज के समय में विराट कोहली का एक्शन उनकी याद दिलाता हैं।

#1 पॉल एडम्स

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ऐसा करना अपराध ही होगा अगर हम अजीब से बॉलिंग एक्शन की बात करें और हम पॉल एडम्स की बात ना करें। उनको चाइनामाइन बॉलिंग के लिए जाना जाता था, चाइनामाइन वो बॉलिंग होती है जब उल्टे हाथ का लेग स्पिनर का गुगली करता है। उनका एक्शन अजीब से कुछ ज़्यादा ही था, कई लोग उन्हे मेंढक वाला एक्शन भी कहते थे।
शायद ही कोई ऐसा कोच होगा जो अपने शिष्यों को इस तरह से बॉल फेंकने की अनुमति देगा, पर एडम्स वो बॉलर थे जिनको हमेशा उनके अजीब से बढ़कर निराले एक्शन के लिए जाना जाएगा।

मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

विराट कोहली के बारे में कुछ रोचक जानकारी जो आप नही जानते-Virat Kohli, who you do not know about some interesting information

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विराट कोहली के बारे में कुछ रोचक जानकारी जो आप नही जानते-Virat Kohli, who you do not know about some interesting information

विराट कोहली के बारे में कुछ रोचकFACTS-
विराट कोहली के बारे में कुछ रोचक जानकारी जो आप नही जानते-Virat Kohli, who you do not know about some interesting information

 :1. बचपन में दिया अवॉर्डकहते हैं समय बदलते देर नहीं लगती। कुछऐसा ही विराट कोहली के साथहुआ। एक समय था जब स्कूली स्तर परशानदार प्रदर्शन करने के लिए इंडियनटीम के स्टार बॉलर आशीष नेहरा नेउन्हें पुरस्कृत किया था। नेहरा तब तकस्टार बन चुके थे और विराट लाइन मेंथे-

।2. फिर खेले कप्तानी में...एक वह समय भी आया जब विराटकोहली की कप्तानी में आशीषनेहरा चैलेंजर सीरीज-2013 में खेले। बतादें कि विराट कोहली नेहरा से लगभग10 साल छोटे हैं। आशीष नेहरा औरविराट कोहली एक साथ रणजीट्रॉफी में दिल्ली की ओर से भीखेले-

3. विराट कोहली को स्टार बनानेमें उनके एक पड़ोसी का भी बड़ाहाथ है। विराट को बचपन में हीउन्होंने भांप लिया था। उसपड़ोसी ने विराट के पिता प्रेमकोहली से कहा, "अपने बच्चे कोगुल्ली क्रिकेट मत खिलाओ।खिलवाना ही है तो प्रोफेशनलक्रिकेट में भर्ती करवाओ।" प्रेमकोहली को पड़ोसी की बात पसंदआ गई। उन्होंने 9 साल के विराट कोवेस्ट डेल्ही क्रिकेट एकेडमी में भर्तीकरा दिया-

4. चीकू यानी विराट कोहली को2002 में पॉली उमरीगर ट्रॉफी केलिए दिल्ली की टीम में शामिलकिया गया। उन्होंने अपने पहले नेशनलटूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए34.40 की औसत से 172 रन बनाए। इसकेअगले साल 2003-04 में उन्हें उमरीगरट्रॉफी के लिए दिल्ली टीम काकप्तान बनाया गया। इस बारउन्होंने पांच पारियों में दो शतकऔर दो अर्धशतक की बदौलत 390 रनबना डाले। यही वह समय था जबविराट कोहली के सितारे बुलंदीकी ओर थे। 9 साल की उम्र में ट्रेनिंगलेने आया चीकू अब क्रिकेटर बन गयाथा-

5. जुलाई, 2006 में विराट कासिलेक्शन इंग्लैंड टूर के लिए अंडर-19टीम में किया गया। विराटकोहली ने तीन वनडे में 105 और तीनटेस्ट में 49 की एवरेज से रन बनाए।भारतीय टीम ने वनडे और टेस्टसीरीज दोनों पर कब्जा जमाया।विराट ने सितंबर, 2006 मेंपाकिस्तान टूर किया। यहांउन्होंने टेस्ट सीरीज में वे 58 और वनडेमें 41.66 की औसत से रन बनाए-

6. विराट कोहली ने दिल्ली के लिएफर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर कीशुरुआत 18 साल की उम्र में तमिलनाडुके खिलाफ 2006 में किया। उन्होंनेडेब्यू इनिंग में 10 रन बनाए। क्रिकेट मेंपैर जमाने को संघर्षरत विराट लाइमलाइट में तब आए, जब उन्होंने दिसंबर,2006 में पिता की मौत के एक दिनबाद कर्नाटक के खिलाफविस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 90 रनकी पारी खेली। दिलचस्प यह है किवह पिता के अंतिम संस्कार से सीधेबल्लेबाजी करने आए थे-

7. 2008 में श्रीलंका टूर पर गईभारतीय टीम के लिए विराट कोशामिल गया गया। वनडे सीरीज केपहले मैच से पूर्व सचिन तेंडुलकर औरविरेंद्र सहवाग चोटिल हो गए। ऐसे में,विराट को गौतम गंभीर के साथओपनिंग करने के लिए भेजा गया।हालांकि, विराट कुछ अधिक नहींकर सके और 12 रनों के निजी स्कोरपर आउट हो गए थे-

8. विराट कोहली ने सबसे तेज 6000रन पूरे करने के दौरान कई रिकॉर्डतोड़े। विवियन रिचर्ड्स ने यहां तकपहुंचने के लिए 156 मैच की 141 पारीखेला था। अगर भारतीय रिकॉर्डकी बात करें, तो यह सौरव गांगुलीके नाम दर्ज था। उन्होंने 152 मैचों की147 पारियों में यह कारनामाकिया था। अब विराट ने मात्र136वीं पारी में ही
ये कारनामा कर दिया
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सोमवार, 21 दिसंबर 2015

सचिन के बारे में कुछ रोचक जानकारी- Some interesting information about Sachin

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सचिन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
क्रिकेट की दुनिया के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, मास्टर ब्लास्टर के नाम से भी जाने जाते हैं. शिर्फ 16 साल की उम्र से international क्रिकेट की शुरूआत करने वाले सचिन ने रिकार्ड की नई-नई इबारतें खड़ी कर दी हैं. चाहे वह one-day में सबसे पहले 200 बनाना हो जा फिर 100अंन्त्रराष्ट्रीय शतक बनाना हो. और भी कई रिकार्ड हैं जिन्हें बताने के लिए शायद एक दिन लग जाए. मगर हम आपको रिकार्ड के इस बादशाह के बारे में कुछ ऐसे रोचक तथ्य बताएँगे जिने पढ़ आप हैरान हो जाएगें. आइए पढ़ते हैं सचिन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य-

  सचिन के बारे में कुछ रोचक जानकारी- Some interesting information about Sachin


  1. पहले सचिन एक fast bowler बनना चाहते थे मगर M.R.F फाउंडेशन के डेनिस लिली ने साल 1987 में उन्हें खारिज कर दिया. लिली ने सचिन को सिर्फ बैटिंग पर ध्यान देने के लिए कहा.
  2. सचिन जब दुसरे खिलाड़ियों के साथ practice करते थे तो उनके कोच स्टंप पर एक सिक्का रख देते थे और दुसरे खिलाड़ियों को कहते कि वह सचिन को बोंलिंग करें. जो खिलाड़ी सचिन को out कर देता तो सिक्का उसका , अगर सचिन को कोई भी खिलाड़ी out न कर सके तो सिक्का सचिन का होता था. सचिन के पास आज भी इस तरह से इकट्ठे हुए 13 सिक्के हैं.
  3. 1988 में मुंबई के ब्रेबॉन स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच एक practice match हुआ था. इस मैच में सचिन ने पाकिस्तान के लिए फील्डिंग की थी.
  4. सचिन गेंदबाजी और बल्लेबाजी right hand से करते है मगर लिखते left hand से हैं. इसके इलावा वह टेनिस भी left hand से ही खेलते हैं.
  5. सचिन ने 79 मैंचों के बाद पहली one-day सेंचुरी बनाई थी. मगर इस दौरान सचिन ने 7 टेस्ट सेंचुरी बना ली थी.
  6. 2008 में भारत और आस्ट्रेलीया के बीच मोहाली में एक टैस्ट मैच हुआ था. जिस में सचिन ने सर्वाधिक टेस्ट रन का रिकार्ड तोड़ा. मैदान पर इतना उत्साह था कि आतिशबाजी के कारण 20 मिनट तक खेल रोकना पड़ा ताकि धुंआ छट जाए.
  7. सचिन क्रिकेट में ऐसे पहले बल्लेबाज हैं जिन्हें third umpire ने out दिया. 1992 में भारत और दक्षिण अफरीका के बीच हुए डरबन टेस्ट मैच में महान फिलडर जॉंटी रोड्स के थ्रो पर third umpire ने सचिन को टीवी रिप्ले देखकर out करार दिया.
  8. सचिन कभी-कभी अपने घर पर पत्नी अंजलि और बच्चों के लिए नाश्ता भी बनाते हैं, यहां ही नही , उन्होंने साल 1998 में पूरी टीम के लिए बैंगन का भर्ता भी बनाया था.
  9. सचिन ने सबसे पहले 'Boost' कंम्पनी की तरफ से विज्ञापन किया था.
  10. सचिन के पिता एक उपन्यासकार थे. उन्होंने सचिन का नाम अपने प्रिय संगीतकार सचिन देवबर्मन के नाम पर रखा था.
  11. सचिन ने रणजी, दलीप और ईरानी ट्राफी के अपने पहले मैचों में ही शतक जमा दिए थे. ऐसा करने वाले वे भारत के एकलौते खिलाड़ी हैं. उनका यह रिकर्ड आज तक कोई भी नही तोड़ पाया है.
  12. सचिन ने अपना पहला first class क्रिकेट मैच मुंबई के लिए 14 वर्ष की आयु में खेला था.
  13. सचिन ने रणजी ट्रॉफी के अपने पहले मैच में रवि शास्त्री के साथ पारी की शुरूआत की थी.
  14. सचिन ने अपने पहले टेस्ट मैच में सुनील गावस्कर द्वारा गिफ्ट दिए गए पैड़स को पहना था.
  15. F1 race के चैंपियन माइकल शुमाकर ने 2002 में सचिन को फरारी कार तब भेंट की थी जब उन्होंने सर डॉन ब्रैडमैन के 29 टेस्ट शतकों की बराबरी कर ली थी. सचिन ने यह कार 2011 में सूरत के एक व्यापारी को 1.5 करोड़ में बेच दी थी.
  16. इंग्लैंड के स्पिन गेंदबाज एक्ष्ले गिल्स ने सबसे पहले सचिन को स्टंप आउट किया था.
  17. सचिन 23 साल की आयु में पहली बार भारतीय टीम के कप्तान बने थे.
  18. सचिन ने भारत की तरफ से लगातार 185 वनडे मैच खेले हैं जो कि एक रिकार्ड है.
  19. साल 1996 और 2003 के worldcups में सचिन 'Man of the tournament' बने थे.
  20. सचिन जब बैंटिंग कर रहे होते हैं तो उनकी पत्नी अंजली न कुछ खाती है और न कुछ पीती है.
  21. सचिन को घड़ियां और cents एकत्र करने का शौंक है.
  22. सचिन तेंदुलकर और गांगुली ने 128 मैचों मे पारी की शुरूआत करते हुए कुल 6271 रन बनाए है जो कि एक रिकार्ड है. मगर एक बार गांगुली मैच की पहली गेंद पर ही आउट हो गए थे और उसके बाद राहुल द्रविड़ सचिन के साथ बैंटिंग करने आए तो कमाल ही हो गया. सचिन और राहुल ने धुआंधार बल्लेबाजी की और वनड़े में 331 रन की रिकार्ड partnership कर डाली.
  23. तेंदुलकर साल 1995 में भेष बदलकर फिलम 'रोजा' देखने गए थे, पर उनका चश्मा गिरते ही सिनेमा हॉल में मौजुद लोगो ने उन्हें पहचान लिया


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गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

क्रिकेट के 10 रोचक तथ्य,10 interesting facts of cricket

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 क्रिकेट के 10 रोचक तथ्य,10 interesting facts of cricket 

1. क्रिस गेल अकेले बल्लेबाज है, जिन्होंने टेस्ट मैच की पहली गेंद पर छक्का मारा है. बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने ये कारनामा किया है.
2. सुनिल गावस्कर ऐसे बल्लेबाज है, जो टेस्ट क्रिकेट की पहली ही गेंद पर तीन बार आउट हुए है.
3. भारत के लाला अमरनाथ अकेले गेंदबाज थे, जिन्होंने डॉन ब्रैडमन को हिट विकेट आउट किया था.
 क्रिकेट के 10 रोचक तथ्य,10 interesting facts of cricket क्रिकेट के 10 रोचक तथ्य, क्रिकेट के 10 रोचक तथ्य,10 interesting facts of cricket,1. रोचक जानकारी अजीब क्रिस गेल अकेले बल्लेबाज है, जिन्होंने टेस्ट मैच की पहली गेंद पर छक्का मारा है. बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने ये कारनामा किया है. 2. सुनिल गावस्कर ऐसे बल्लेबाज है, जो टेस्ट क्रिकेट की पहली ही गेंद पर तीन बार आउट हुए है. 3. भारत के लाला अमरनाथ अकेले गेंदबाज थे, जिन्होंने डॉन ब्रैडमन को हिट विकेट आउट किया था. 4. भारतीय टीम अकेली ऐसी टीम है, जिन्होंने 60 ओवर, 50 ओवर, और 20 ओवर का विश्वकप जीता है. 5. इंग्लैंड के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज एलेक्स स्टुअर्ट का जन्म 8-4-63 को हुआ था. और उनके टेस्ट में रन भी 8463 ही है. 6. साल 2000 में, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच खेले गये टेस्ट की चारों पारियां एक ही दिन खेली गयी थी. 7. ये मैच दक्षिण अफ्रिका और अॉस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था. उस दिन तारीख थी, 11-11-11, और अफ्रीका को जीतने के लिए चाहिए 111 रन, और उस वक्त समय था 11:11. 8. अॉस्ट्रेलिया के पीटर सीडल एकलौते ऐसे गेंदबाज है, जिन्होंने अपने जन्मदिन पर टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक ली है. 9. सनथ जयसूर्या ने वनडे क्रिकेट में शेन वॉर्न से ज्यादा विकेट लिए है. 10. जब अफरीदी ने सबसे तेज वनडे शतक लगाया था, तब वे सचिन के बल्ले से खेले थे.
4. भारतीय टीम अकेली ऐसी टीम है, जिन्होंने 60 ओवर, 50 ओवर, और 20 ओवर का विश्वकप जीता है.
5. इंग्लैंड के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज एलेक्स स्टुअर्ट का जन्म 8-4-63 को हुआ था. और उनके टेस्ट में रन भी 8463 ही है.
6. साल 2000 में, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच खेले गये टेस्ट की चारों पारियां एक ही दिन खेली गयी थी.
7. ये मैच दक्षिण अफ्रिका और अॉस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था. उस दिन तारीख थी, 11-11-11, और अफ्रीका को जीतने के लिए चाहिए 111 रन, और उस वक्त समय था 11:11.
8. अॉस्ट्रेलिया के पीटर सीडल एकलौते ऐसे गेंदबाज है, जिन्होंने अपने जन्मदिन पर टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक ली है.
9. सनथ जयसूर्या ने वनडे क्रिकेट में शेन वॉर्न से ज्यादा विकेट लिए है.

पाकिस्तान के दिग्गज ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी की भारत में बीवी है - The legendary all-rounder Shahid Afridi interesting information about Pakistan

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पाकिस्तान के दिग्गज ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी की भारत में बीवी है - The legendary all-rounder Shahid Afridi interesting information about Pakistan

 पाकिस्तान के दिग्गज ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी चर्चा में हैं। इसी सप्ताह उन्होंने 30 मिनट तक क्रिकेट फैन्स के रोचक सवालों के जवाब फेसबुक पर लाइव दिया। आफरीदी उन चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हैं, जिनके रहते विपक्षी कप्तान चैन की सांस नहीं लेता। बॉलर्स वह हर जुगत करता है, जिससे वे जल्दी आउट हो जाएं। टेस्ट और वनडे से रिटायर हो चुके आफरीदी फिलहाल टी-20 खेल रहे हैं। आपको शाहिद आफरीदी के बारे में उन रोचक बातों की जानकारी दे रहा है, जिन्हें हर क्रिकेट फैन्स जानना चाहेगा।


पहले मैच में फ्लॉप

दिग्गज स्पिनर मुश्ताक अहमद के चोटिल होने पर 16 साल के शाहिद आफरीदी को पाकिस्तान टीम में शामिल किया गया। 2 अक्टूबर, 1996 को केन्या के खिलाफ उन्होंने वनडे डेब्यू तो किया, लेकिन बैटिंग का मौका नहीं मिला। यही नहीं, बॉलिंग में 10 ओवर्स फेंकने के बाद 32 रन खर्च किए, लेकिन एक भी विकेट नहीं ले सके। किसी को क्या पता था पहले मैच के फ्लॉप स्टार शाहिद का 'ट्रेलर और पूरी फिल्म' एक ही साथ अगले मैच में देखने को मिलेगी।

वर्ल्ड रिकॉर्ड से 'बैटिंग डेब्यू'

दूसरे मैच यानी 4 अक्टूबर, 1996 को श्रीलंका के खिलाफ कप्तान सईद अनवर को न जाने क्या सूझा कि उन्होंने शाहिद को थर्ड डाउन भेज दिया। फिर क्या था 16 साल के आफरीदी ने पिच पर पहुंचते ही बैट को गदा की तरह भाजा। देखते ही देखते आफरीदी ने 11 छक्के और 4 चौके की मदद से सिर्फ 37 बॉल्स में ही सेन्चुरी लगा दी। किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि वे 'बैटिंग डेब्यू' (वनडे में पहली बार बैटिंग करने उतरे) में ही वर्ल्ड रिकॉर्ड बना देंगे। हालांकि बाद में यह रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के कोरी एंडरसन (36 बॉल) और अब एबी डिविलियर्स (31 बॉल) के नाम है।

शनिवार, 12 दिसंबर 2015

क्रिकेट क्या और कैसे जाने,What and how to cricket

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सर्वोच्च नियंत्रण निकाय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद
उपनाम "The Gentleman's game" "सज्जनों का खेल"
सबसे पहले खेला गया १६वीं शताब्दी
विशेषताएँ
दल के सदस्य प्रत्येक दल में ११ खिलाड़ी
स्थानापन्न खिलाड़ी केवल क्षेत्ररक्षण के लिए
मिश्रित लिंग एकल लिंग खेल
वर्गीकरण दलीय खेल, बल्ले और गेंद का
उपकरण क्रिकेट बाल, क्रिकेट बैट,
व़िकेट: स्टंप, गुल्ली
स्थल क्रिकेट मैदान
ओलंपिक १९००
क्रिकेट एक बल्ले और गेंद का दलीय खेल है जिसकी शुरुआत दक्षिणी इंग्लैंड में हुई थी। इसका सबसे प्राचीन निश्चित संदर्भ १५९८ में मिलता है, अब यह १०० से अधिक देशों में खेला जाता है।[1]क्रिकेट के कई प्रारूप हैं, इसका उच्चतम स्तर टेस्ट क्रिकेट है, जिसमें वर्तमान प्रमुख राष्ट्रीय टीमें इंडिया(भारत), ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैण्ड, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैण्ड, पाकिस्तान व बांग्लादेश हैं।[2]
वरीयता में टेस्ट क्रिकेट के बाद एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को गिना जाता है जिसका 2011 का क्रिकेट विश्वकप भारत ने जीता था; इस टूर्नामेंट को २०० से अधिक देशों में टेलीविजन पर दिखाया गया था और अनुमानतः २ बिलियन से अधिक दर्शकों ने देखा था।[3][4] एक क्रिकेट मुकाबले में ११ खिलाड़ियों के दो दल होते हैं[5] इसे घास के मैदान में खेला जाता है, जिसके केन्द्र में भूमि की एक समतल लम्बी पट्टी होती है जिसे पिच कहते हैं। विकेट लकड़ी से बनी होती हैं, जिसे पिच के प्रत्येक सिरे में लगाया जाता है और उसका प्रयोग एक लक्ष्य के रूप में किया जाता है। गेंदबाज क्षेत्ररक्षण टीम का एक खिलाड़ी होता है, जो गेंदबाजी के लिए एक सख्त, चमड़े की मुट्ठी के आकार की 5.5 औंस (160 ग्रा) क्रिकेट की गेंद को एक विकेट के पास से दूसरे विकेट की और डालता है, जिसे विपक्षी टीम के एक खिलाड़ी बल्लेबाज के द्वारा बचाया जाता है।
आम तौर पर गेंद बल्लेबाज के पास पहुँचने से पहले एक बार टप्पा खाती है। अपने विकेट की रक्षा करने के लिए बल्लेबाज लकड़ी के क्रिकेट के बल्ले से गेंद को खेलता है। इसी बीच गेंदबाज की टीम के अन्य सदस्य मैदान में क्षेत्ररक्षक के रूप में अलग-अलग स्थितियों में खड़े रहते हैं, ये खिलाड़ी बल्लेबाज को दौड़ बनाने से रोकने के लिए गेंद को पकड़ने का प्रयास करते हैं और यदि सम्भव हो तो उसे आउट करने की कोशिश करते हैं। बल्लेबाज यदि आउट नहीं होता है तो वो विकेटों के बीच में भाग कर दूसरे बल्लेबाज ("गैर स्ट्राइकर") से अपनी स्थिति को बदल सकता है, जो पिच के दूसरी ओर खड़ा होता है। इस प्रकार एक बार स्थिति बदल लेने से एक रन बन जाता है। यदि बल्लेबाज गेंद को मैदान की सीमारेखा तक हिट कर देता है तो भी रन बन जाते हैं। स्कोर किए गए रनों की संख्या और आउट होने वाले खिलाड़ियों की संख्या मैच के परिणाम को निर्धारित करने वाले मुख्य कारक हैं।
यह कई बातों पर निर्भर करता है कि क्रिकेट के खेल को ख़त्म होने में कितना समय लगेगा। पेशेवर क्रिकेट में यह सीमा हर पक्ष के लिए २० ओवरों से लेकर ५ दिन खेलने तक की हो सकती है। खेल की अवधि के आधार पर विभिन्न नियम हैं जो खेल में जीत, हार, अनिर्णीत (ड्रा), या बराबरी (टाई) का निर्धारण करते हैं।
क्रिकेट मुख्यतः एक बाहरी खेल है और कुछ मुकाबले कृत्रिम प्रकाश (फ्लड लाइट्स) में भी खेले जाते हैं। उदाहरण के लिए, गरमी के मौसम में इसे संयुक्त राजशाही, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में खेला जाता है जबकि वेस्ट इंडीज, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में ज्यादातर मानसून के बाद सर्दियों में खेला जाता है।
मुख्य रूप से इसका प्रशासन दुबई में स्थित अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के द्वारा किया जाता है, जो इसके सदस्य राष्ट्रों के घरेलू नियंत्रित निकायों के माध्यम से विश्व भर में खेल का आयोजन करती है। आईसीसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले पुरूष और महिला क्रिकेट दोनों का नियंत्रण करती है। हालांकि पुरूष, महिला क्रिकेट नहीं खेल सकते हैं पर नियमों के अनुसार महिलाएं पुरुषों की टीम में खेल सकती हैं।
नियम संहिता के रूप में होते हैं जो, क्रिकेट के कानून कहलाते हैं[6] और इनका अनुरक्षण लंदन में स्थित मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एम सी सी) के द्वारा किया जाता है। इसमें आई सी सी और अन्य घरेलू बोर्डों का परामर्श भी शामिल होता है।

जानिए क्रिकेट के रोचक इतिहास के बारे में ,History of Cricket,

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 क्रिकेट का इतिहास

क्रिकेट के ज्ञात मूल से लेकर इंग्लैंड का प्रमुख खेल बन जाने और अन्य देशों में इसकी शुरुआत किये जाने तक इस खेल के विकास के पदचिह्न 1725 तक क्रिकेट का इतिहास में दर्ज हैं।
जानिए क्रिकेट के रोचक इतिहास के बारे में ,History of Cricket,


क्रिकेट पर पुराना निश्चित सन्दर्भ 1598 में मिलता है और इससे साफ हो जाता है कि क्रिकेट 1550 की सदी में खेला जाता था, लेकिन इसकी असली उत्पत्ति एक रहस्य ही है। एक निश्चित हद तक इतना कहा जा सकता है कि इसकी शुरूआत 1550 से पहले हुई थी, दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड के केंट, ससेक्स, सरे में से कहीं से हुई, ज्यादा संभावना उस क्षेत्र से जो वेल्ड के रूप में जाना जाता है। दूसरे खेलों जैसे कि स्टूलबॉल और राउंडर्स की तरह, बल्लेबाज़, गेंदबाज़ और क्षेत्ररक्षकों के साथ क्रिकेट अपेक्षाकृत छोटे घास पर खेला जा सकता है, विशेष रूप से 1760 के दशक तक गेंद मैदान में दिया जाता था। इसलिए जंगलों की सफाई और जहां भेड़ चरते हैं, खेल के लिए उपयुक्त जगह हो सकती है।

क्रिकेट के बारे में छिटपुट उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि मूल रूप से यह बच्चों का खेल था। इसके बाद 17वीं शताब्दी में इसे कर्मचारियों द्वारा अपना लिया गया। चार्ल्स प्रथम के शासनकाल के दौरान इसके संरक्षक और कभी-कभी खिलाड़ी के रूप में कुलीन वर्ग की दिलचस्पी इसमें बढ़ने लगी। उनके लिए इसमें सबसे बड़ा आकर्षण यह था कि इस खेल में जुआ खेलने की गुंजाइश थी और इसी कारण प्रत्यावर्तन के बाद के वर्षों में यह फैलता गया। हनोवेरियन शासन के समय से, क्रिकेट में निवेश ने पेशेवर खिलाड़ी और पहला प्रमुख क्लब तैयार किया, इस तरह लंदन और दक्षिण इंग्लैंड में यह खेल लोकप्रिय सामाजिक गतिविधि के रूप में स्थापित हुआ। इस बीच अंग्रेज़ उपनिवेशवादियों ने उत्तर अमेरिका और वेस्ट इंडीज में क्रिकेट की शुरुआत की; और ईस्ट इंडिया कंपनी के नाविक और व्यापारी इसे भारतीय उपमहाद्वीप ले गये।

बच्चों के खेल के रूप में जन्म

क्रिकेट के जन्म के बारे में व्यापक रूप से स्वीकृत सिद्धांत यह है कि मध्ययुगीन काल की शुरूआत में वेल्ड, जो कि केंट और सुसेक्स के बीच स्थित है, के कृषि और धातु के काम से जुड़े समुदाय ने इसे विकसित किया। ये काउंटी और पड़ोसी सरे उत्कृष्टता के प्रारंभिक केंद्र हुआ करते थे और यहीं से यह खेल जल्द ही लंदन, जहां इसकी स्थायी लोकप्रियता सुनिश्चित थी और बर्कशायर, एसेक्स, हैम्पशायर और मिडलसेक्स जैसे दक्षिण के काउंटी में पहुंचा।

उस समय बहुत सारे शब्दों के आम उपयोग हुआ करते थे, जो "क्रिकेट" नाम के लिए मुमकिन स्रोत माने जाते हैं। 1598 में सबसे आरंभिक काल के ज्ञात सन्दर्भ में यह क्रेक्केट (creckett) कहलाता था। दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड और फ्लैंडर्स के प्रांत, जो तब बरगुंडी के डच के अंतर्गत था, के बीच मजबूत मध्ययुगीन व्यापार संबंध के हवाले से कहा जा सकता है कि यह नाम मध्य डच के क्रिक (-ए), यानि छड़ी से व्युत्पन्न है; या फिर पुरानी अंग्रेज़ी के क्रिक या क्राइके अर्थात बैसाखी या लाठी से लिया गया है।सामुएल जॉनसन के अंग्रेज़ी भाषा के शब्दकोश (1755) में उन्होंने क्रिकेट की व्युत्पत्ति "क्राइके, सक्सोन, एक छड़ी" से बताया है। पुरानी फ्रांसीसी भाषा में, क्रिक्वेट का मतलब लगता है कि एक किस्म का मुगदर या छड़ी हुआ करता था, हालांकि यह क्रोकेट का मूल हो सकता है। एक अन्य संभावित स्रोत मध्य डच शब्द क्रिकस्टोल संभाव्य स्रोत है, जिसका अर्थ एक लंबा हल्का स्टूल है, जिसका उपयोग चर्च में घुटने टेकने के लिए किया जाता था, इसका आकार शुरूआती क्रिकेट में इस्तेमाल होनेवाले दो स्टंप विकेट से मिलता-जुलता था। बॉन युनिवर्सिटी के यूरोपीय भाषा के विशेषज्ञ हाइनर गिलमेस्टर के अनुसार, हॉकी के लिए मध्य डच भाषा का शब्द मेट डी (क्रिक केट) सेन [met de (krik ket)sen] (अर्थात छड़ी के साथ पीछा करना) से "क्रिकेट" की व्युत्पत्ति हुई है। गिलमेस्टर का मानना है कि यह खेल मूल रूप से फ्लेमि‍यन मूल का है, लेकिन इस मामले में वहां अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।संभवत: क्रिकेट बच्चों द्वारा ही आविष्कृत है और कई पीढ़ियों से ‍अनिवार्य तौर पर बच्चों के खेल के रूप में यह जारी रहा है। गेंद फेंकने को पुराना खेल मानकर, संभवत: इसका चलन लकड़ी की गेंद से हुआ हो, जिसे लक्ष्य तक पहुंचने से रोकने के लिए बल्लेबाज द्वारा रोकने की कोशिश की जाती थी। मूल रूप से भेड़ के ऊन की गांठ (या फिर पत्थर या छोटी लकड़ी का गोला) को गेंद; छड़ी या गड़ेरिये की लग्गी या कोई अन्य कृषि उपकरण को बल्ला; और एक तिपाही या पेड़ के ठूंठ को एक प्रवेशद्वार (जैसे कि विकेट द्वार) को विकेट मान कर भेड़ के चारागाह या वृक्षविहीन स्थान पर यह खेल हुआ करता था। हो सकता है, इस खेल का आविष्कार 1300 से पहले किसी समय नॉर्मन या प्लांटाजेनेट के समय में हुआ हो; या फिर 1066 से पहले सक्सोन काल में। क्रिकेट तत्वतः स्टूलबॉल, राउंडर्स और बेसबॉल की तरह ही एक प्रकार का खेल है, लेकिन यह इनमें से किससे विकसित हुआ या विपरीत क्रम में अन्य खेल इससे विकसित हुए, इसे तय नहीं किया जा सकता है। इस निर्दिष्ट क्षेत्र के बारे में ऑक्सफोर्डशायर में स्टूलबॉल पर 1523 सन्दर्भ हैं; हो सकता है यह किसी ऐसे खेल का जातिगत शब्द हो, जिसमें गेंद को किसी भी तरह से बल्ले या छड़ी से मारा जाता हो। 18वीं शताब्दी के सन्दर्भों में क्रिकेट के साथ स्टूलबॉल का संयोजन किया जाए तो यह साफ संकेत देता है कि यह एक अलग कार्यकलाप था।
"क्ररें

गुरुवार 10 मार्च 1300 को (जूलियन कैलेंडर, जबकि ग्रेगोरियन साल 1301 होगा), इंग्लैंड के राजा एडवर्ड प्रथम के निजी खाते में जॉन डी लीक ऑफ मोनीज को दी गयी उस धन राशि का भी उल्लेख है, जो उन्होंने वेस्टमिंस्टर और नेवेडेन में युवराज ‍एडवर्ड के "क्रेग और अन्य खेल" खेलने के सिलसिले में भुगतान किया था। राजकुमार एडवर्ड, वेल्स के भावी युवराज की उम्र उस समय 15 वर्ष थी। माना जाता है कि "क्रेग" क्रिकेट का आरंभिक रूप था। इस ‍सोच के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं है और हो सकता है क्रेग एकदम से कुछ अलग ही हो।[2] ऐसा कहा गया है कि क्रेग क्रैक की पुरानी वर्तनी है, इस आयरिश शब्द का अर्थ आमोद, मनोरंजन, या सुखद संभाषण होता है। क्रैक (crack) शब्द का यह अर्थ आयरिश अंग्रेज़ी, स्कॉटिश अंग्रेज़ी और पूर्वोत्तर इंग्लैंड के जॉर्डी में पाया जाता है। आयरलैंड में क्रैक (crack) के बजाए क्रैक (craic) वर्तनी ज्यादा प्रचलित है।
प्रारंभिक निश्चित सन्दर्भसंपादित करें
गिल्डफोर्ड में द रोयल ग्रामर स्कूल जहां जॉन डेरीक और उनके दोस्त "क्रिकेट" खेला करते थे.

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