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बुधवार, 11 अप्रैल 2018

लड़किया-स्त्रियां-कितने प्रकार की होती है -Girls-women-are the types of

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लड़किया-स्त्रियां-कितने प्रकार की होती है -ladkiya-striya-kitne prkar ki hoti hai-Girls-women-are the types of
स्त्रियां कितने प्रकार की होती है उनके लक्षण क्या होते है उनका स्वाभाव कैसा होता है इन बारे में काफी कुछ लिखा गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्त्रियों को मुख्यतः निम्न पांंच वर्गों में बाटा गया है

लड़किया-स्त्रियां-कितने प्रकार की होती है -Girls-women-are the types of लड़किया-स्त्रियां-कितने प्रकार की होती है -Girls-women-are the types of .पद्मिनी (Padmini) औरतें कितने प्रकार की होती हैं स्त्री के प्रकार छूट कितनी प्रकार की होती ह हस्तिनी नारी हस्तिनी स्त्री शंखिनी नारी पुरुष कितने प्रकार के होते हैं पुरुषों के प्रकार . चित्रिणी(Chitrini) पुंश्चली (Punshchali) पद्मिनी (Padmini) चरित्रहीन पत्नी के लक्षण  स्त्री चरित्र  औरतों की पहचान  चरित्रहीन पत्नी की पहचान  चरित्रहीन महिलाओं की पहचान  चरित्रहीन स्त्री के लक्षण  चरित्रहीन लड़कियों की पहचान  चरित्रहीन औरतों की पहचान

1. शंखिनी (Shankhini)


शंखिनी स्वभाव की स्त्रियां अन्य स्त्रियों से थोड़ी लंबी होती हैं। इनमें से कुछ मोटी और कुछ दुर्बल होती हैं। इनकी नाक मोटी, आंखें अस्थिर और आवाज गंभीर होती है। ये हमेशा अप्रसन्न ही दिखाई देती हैं और बिना कारण ही क्रोध किया करती हैं।
ये पति से रूठी रहती हैं, पति की बात मानना इन्हें गुलामी की तरह लगता है। इनका मन सदैव भोग-विलास में डूबा रहता है। इनमें दया भाव भी नहीं होता। इसलिए ये परिवार में रहते हुए भी उनसे अलग ही रहती हैं। ऐसी स्त्रियां संसार में अधिक होती हैं।
ऐसी लड़कियां चुगली करने वाली यानी इधर की बात उधर करने वाली होती हैं। ये अधिक बोलती हैं। इसलिए लोग इनके सामने कम ही बोलते हैं। इनकी आयु लंबी होती हैं। इनके सामने ही दोनों कुल (पिता व पति) नष्ट हो जाते हैं। अंत समय में बहुत दु:ख भोगती हैं। ये उस समय मरने की बारंबार इच्छा करती हैं, लेकिन इनकी मृत्यु नहीं होती।

2. चित्रिणी(Chitrini)

चित्रिणी स्त्रियां पतिव्रता, स्वजनों पर स्नेह करने वाली होती हैं। ये हर कार्य बड़ी ही शीघ्रता से करती हैं। इनमें भोग की इच्छा कम होती है। श्रृंगार आदि में इनका मन अधिक लगता है। इनसे अधिक मेहनत वाला काम नहीं होता, परंतु ये बुद्धिमान और विदुषी होती हैं।
गाना-बजाना और चित्रकला इन्हें विशेष प्रिय होता है। ये तीर्थ, व्रत और साधु-संतों की सेवा करने वाली होती हैं। ये दिखने में बहुत ही सुंदर होती हैं।
इनका मस्तक गोलाकार, अंग कोमल और आंखें चंचल होती हैं। इनका स्वर कोयल के समान होता है। बाल काले होते हैं। इस जाति की लड़कियां बहुत कम होती हैं। यदि इनका जन्म गरीब परिवार में भी हो तो ये अपने भविष्य में पटरानी के समान सुख भोगती हैं।
अधिक संतान होने पर भी इनकी लगभग तीन संतान ही जीवित रहती हैं, उनमें से एक को राजयोग होता है। इस जाति की लड़कियों की आयु लगभग 48 वर्ष होती है।

3. हस्तिनी (Hastini)

 इस जाति की लड़कियों का स्वभाव बदलता रहता है। इनमें भोग-विलास की इच्छा अधिक होती है। ये हंसमुख स्वभाव की होती हैं और भोजन अधिक करती हैं। इनका शरीर थोड़ा मोटा होता है। ये प्राय: आलसी होती हैं।
इनके गाल, नाक, कान और व मस्तक का रंग गोरा होता है। इन्हें क्रोध अधिक आता है। कभी-कभी इनका स्वभाव बहुत क्रूर हो जाता है। इनके पैरों की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं। इनकी संतानों में लड़के अधिक होते हैं। ये बिना रोग के ही रोगी बनी रहती हैं। इनका पति सुंदर और गुणवान होता है।
इनके गाल, नाक, कान और व मस्तक का रंग गोरा होता है। इन्हें क्रोध अधिक आता है। कभी-कभी इनका स्वभाव बहुत क्रूर हो जाता है। इनके पैरों की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं। इनकी संतानों में लड़के अधिक होते हैं। ये बिना रोग के ही रोगी बनी रहती हैं। इनका पति सुंदर और गुणवान होता है।
अपने झगड़ालू स्वभाव के कारण ये परिवार को क्लेश पहुंचाती हैं। इनके पति इनसे दु:खी होते हैं। धार्मिक कार्यों के प्रति इनकी आस्था नहीं होती। इन्हें स्वादिष्ट भोजन पसंद होता है। इनकी परम आयु 73 वर्ष होती है। विवाह के 4, 8, 12 अथवा 16वे वर्ष में इनके पति का भाग्योदय होता है। इनके कई गर्भ खंडित हो जाते हैं। इन्हें अपने जीवन में अनेक कष्ट झेलने पड़ते हैं, लेकिन इसका कारण भी ये स्वयं ही होती हैं। इनके दुष्ट स्वभाव के कारण ही परिवार में भी इनकी पूछ-परख नहीं होती।

4. पुंश्चली (Punshchali) :

 पुंश्चली स्वभाव की लड़कियों के मस्तक का चमकीला बिंदु भी मलीन दिखाई देता है। इस स्वभाव वाली महिलाएं अपने परिवार के लिए दु:ख का कारण बनती हैं।
इनमें लज्जा नहीं होती और ये अपने हाव-भाव से कटाक्ष करने वाली होती हैं। इनके हाथ में नव रेखाएं होती हैं जो सिद्ध (पुण्य, पद्म), स्वस्तिक आदि उत्तम रेखाओं से रहित होती हैं। इनका मन अपने पति की अपेक्षा पर पुरुषों में अधिक लगता है। इसलिए कोई इनका मान-सम्मान नहीं करता। सभी इनकी अपेक्षा करते हैं।
पुंश्चली स्त्रियों में युवावस्था के लक्षण 12 वर्ष की आयु में ही दिखाई देने लगते हैं। इनकी आंखें बड़ी और हाथ-पैर छोटे होते हैं। स्वर तीखा होता है।
यदि ये किसी से सामान्य रूप से बात भी करती हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे ये विवाद कर रही हैं। इनकी भाग्य रेखा व पुण्य रेखा छिन्न-भिन्न रहती है। इनके हाथ में दो शंख रेखाएं व नाक पर तिल होता है।

5. पद्मिनी (Padmini) 

 समुद्र शास्त्र के अनुसार पद्मिनी स्त्रियां सुशील, धर्म में विश्वास रखने वाली, माता-पिता की सेवा करने वाली व अति सुंदर होती हैं। इनके शरीर से कमल के समान सुगंध आती है। यह लंबे कद व कोमल बालों वाली होती हैं। इसकी बोली मधुर होती है। पहली नजर में ही ये सभी को आकर्षित कर लेती हैं। इनकी आंखें सामान्य से थोड़ी बड़ी होती हैं। ये अपने पति के प्रति समर्पित रहती हैं।
इनके नाक, कान और हाथ की उंगलियां छोटी होती हैं। इसकी गर्दन शंख के समान रहती है व इनके मुख पर सदा प्रसन्नता दिखाई देती है।पद्मिनी स्त्रियां प्रत्येक बड़े पुरुष को पिता के समान, अपनी उम्र के पुरुषों को भाई तथा छोटों को पुत्र के समान समझती हैं।
यह देवता, गंधर्व, मनुष्य सबका मन मोह लेने में सक्षम होती हैं। यह सौभाग्यवती, अल्प संतान वाली, पतिव्रताओं में श्रेष्ठ, योग्य संतान उत्तपन्न करने वाली तथा आश्रितों का पालन करने वाली होती हैं।
इन्हें लाल वस्त्र अधिक प्रिय होते हैं। इस जाति की लड़कियां बहुत कम होती हैं। जिनसे इनका विवाह होता है, वह पुरुष भी भाग्यशाली होता है।

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मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -What are the aliens come from, said aliens

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एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -aliens kya hote hai-aliean kha se aate hai-What are the aliens come from, said aliensक्या होते है एलियंस? इस ब्रह्माण्ड  में जो दुसरे गृह है उन गृह के प्राणियों को एलियंस कहा ज़ाता है. हालांकि ये अपने आप में खुद एक सवाल है कि क्या दुसरे गृह पर भी प्राणी होते है. लेकिन इसको लेकर भिन्न भिन्न लोगों के  भिन्न भिन्न  मत है. कुछ कहते है कि एलियंस होते है जबकि कुछ कहते है कि एलियंस नहीं होते है. कितना रोचक है ये विषय. एलियंस क़ा अध्ययन तो क्या इस अध्ययन से जुड़ना नहीं चाहेंगे? तो चलिए आइये  देखते हैं एलिएंस कि रिसर्च से जुडी कुछ खबरों को- 

एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -What are the aliens come from, said aliens,एलियंस क्या होते है-एलियंस कहा से आते है -aliens kya hote hai-aliean kha se aate hai- क्या होते है एलियंस? इस ब्रह्माण्ड  में जो दुसरे गृह है उन गृह के प्राणियों को एलियंस कहा ज़ाता है. हालांकि ये अपने आप में खुद एक सवाल है कि क्या दुसरे गृह पर भी प्राणी होते है. लेकिन इसको लेकर भिन्न भिन्न लोगों के  भिन्न भिन्न  मत है. कुछ कहते है कि एलियंस होते है जबकि कुछ कहते है कि एलियंस नहीं होते है. कितना रोचक है ये विषय. एलियंस क़ा अध्ययन तो क्या इस अध्ययन से जुड़ना नहीं चाहेंगे? तो चलिए आइये  देखते हैं एलिएंस कि रिसर्च से जुडी कुछ खबरों को-What are the aliens come from, said aliens,एलियंस क्या है  एलियंस का रहस्य  एलियंस का अस्तित्व  एलियंस इन इंडिया  एलियंस movie  एलियंस का सच  एलियंस के बारे में जानकारी  एलियंस इन हिंदी

अभी हाल ही में अमेरिकी अनुसंधान संस्थान के एक  वैज्ञानिक ने ये दावा किया है कि एलियंस होते हैं. असल में उन्हें एलियंस से सम्बंधित रिसर्च में कहा है कि एलियंस एक तरह क़ा बक्टीरिया क़ा जीवाश्म है जो कई वर्षो पूर्व अन्तरिक्ष से प्रथ्वी पर गिरे उल्कापिंडो  में पाया गया था. 

नासा के मार्शल स्पेस फ्लाईट  सेंटर के वैज्ञानिक डॉक्टर "रिचर्ड हूवर" ने इस दुनिया में पाए गये उल्कापिंडो पर एक शोध कार्य किया, जिसमें उन्होंने पाया कि एलियंस होते हैं. उन्होंने ये दावा "साइबेरिया और आलास्का" में पाए गये उल्कापिंडो के असाधारण नमूनों पर शोध कार्य करने के बाद किये जिससे कहीं ना कहीं ये सिद्ध होता है कि प्रथ्वी से परे भी जीवन है. 

एलियंस के अस्तित्व की धारणा को और मजबूत बनाने के लिए अब वैज्ञानिको ने इस खोज को और सरल बनाने के लिए आम आदमी को इससे जोड़ने की पहल की है. जिसमें आम आदमी एलियंस के बारे में अपने विचार, अपनी जिन्दगी में घटी कुछ अजीब और असामान्य घटनाओं के बारे इस शोध से जुड़े वैज्ञानिको को बाते सकते है.  इसलिए एलियंस कि खोज के लिए वैज्ञानिको ने एक वेबसाइट को लॉंच किया है जिसका एड्रेस है www.setilive.org अमेरिका के शहर लॉस एंजेल्स में TED (टेक्नोलोजी, इंटरटेनमेंट और डिज़ाइन) कॉंफ़्रेंस के दौरान इस वेबसाइट लॉंच किया गया है. वैज्ञानिको SETI वर्ड क़ा प्रयोग किया है जिसकी मतलब है "सर्च फॉर एक्सट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस". ये वेबसाइट सेटी एलेन टेलिस्कोप के द्वारा संचारित रेडियो तरंगों को सीधे प्रसारित करेगी और जो भी लोग .इसमें भाग लेंगे उनको कहा जाएगा कि कहा जाएगा कि अगर उन्हें कोई भी असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो वे फ़ौरन इसकी जानकारी वैज्ञानिको को दे. इस बारे में वैज्ञानिको क़ा ये मानना है कि कभी कभी इंसानों का दिमाग़ उन चीज़ो को भी देख सकता है जो कि शायद कोई स्वचालित मशीन भी नहीं देख पाए. 

जिलियन टार्टर इस योजना की प्रमुख कार्यकर्ता हैं डॉक्टर जिलियन टार्टर को 2009 में TED एवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. डॉक्टर टार्टर के बारे में बताया ज़ाता है कि उन्होने अपना पूरा करियर एलियन की खोज में लगा दिया है और उनका कहना है कि इस वेबसाइट के लॉच होने से एलियन की खोज में जुटे वैज्ञानिकों और दूसरे विशेषज्ञों को एक साथ आने का मौक़ा मिलेगा और साथ ही साथ आम आदमी के विचारों को जाने क़ा भी मौका मिलेगा जिसे एलियंस रिसर्च को और भी सरल बनाया जा सकेगा. क्योंकि उनका ये मानना है कि जायदा से जायदा वैग्यांकियो और व्यक्तियों के इस रीसर्च से जुड़ने पर उन तरंगों का अध्ययन  करना आसान हो जाएगा जिन पर अब तक ध्यान नहीं गया. इस अध्ययन से कुछ ना कुछ तो एलियंस के बारे में जरूर नया मिलेगा. अब आगे देखते है कि कहा तक जाती है एलियनस के बारे में ये खोज. 
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बुधवार, 14 मार्च 2018

इच्छाधारी नागिन या नागकन्या है ये औरत -Wishful serpent or snake today is this lady

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इच्छाधारी नागिन या नागकन्या है ये औरत -.ichadhari nagin ya nagknya hai ye-Wishful serpent or snake today is this lady

आज तक आपने इच्छाधारी नागिन या नागकन्या का रूप फिल्मों में ही देखा होगा, परंतु आज हम आपको ऐसी इच्छाधारी नागिन से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो अपने नाग पति को पाने के लिए इस मृत्युलोक में साधना कर रही है।

इच्छाधारी नागिन या नागकन्या है ये औरत -Wishful serpent or snake today is this lady


स्वयं नागकन्या होने का दावा करने वाली माया का कहना है कि वह हर 24 घंटे में हवन के दौरान नागिन का रूप धारण कर अपनी तीन बहनों से मिलने जाती है जो उसे अपने नाग पति को पाने के लिए किस तरह साधना की जाए, यह निर्देश देती हैं। माया के मुताबिक ये तीनों बहनें भी इच्छाधारी नागिनें हैं।



खुद को बचपन से शादीशुदा समझने वाली माया नाग के नाम का सिंदूर भरती है और उसे पूरा विश्वास है कि जल्द ही उसके पति के साथ उसका मिलन होगा। माया कहती है कि फिलहाल उसका पति इस मृत्युलोक में उसके परिवार के मोह में फँसा हुआ है और उससे सारी शक्तियाँ छीनी जा चुकी हैं।

अपने पूर्व जन्म की कहानी सुनाते हुए वह कहती है कि द्वापर युग के दौरान वह एक खाई में गिर गई थी तब किसी बाबा ने गोपाल नामक नाग को उसकी मदद के ‍लिए भेजा था, तभी से उन दोनों में प्रेम हो गया था। परंतु शादी न हो पाने की वजह से उसने आत्महत्या कर ली थी। ...और तब से आज तक अपने साथी को पाने के लिए भटक रही है।

नागलोक और मृत्युलोक की अजीबो-गरीब कहानियाँ सुनाने वाली यह इच्छाधारी नागिन माया मध्यप्रदेश के बड़नगर स्थित एक आश्रम में निवास करती है। इन कहानियों से प्रभावित वहाँ के निवासी इनकी महामाया माँ भगवती के रूप में आराधना करते हैं।
इच्छाधारी नागिन या नागकन्या है ये औरत -Wishful serpent or snake today is this lady

लोगों द्वारा माया की पूजा करना आस्था का प्रतीक है या उसका इच्छाधारी नागिन होने के अंधविश्वास का प्रभाव है? आज के इस वैज्ञानिक युग में यह घटना कितनी प्रासंगिक है,

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गुरुवार, 1 मार्च 2018

ये है चालू स्त्रियों के लक्षण जाने -These are the symptoms of the current women

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ये है चालू स्त्रियों के लक्षण जाने -These are the symptoms of the current women
ये है चालू स्त्रियों के लक्षण जाने -These are the symptoms of the current womenये है चालू स्त्रियों के लक्षण जाने These are the symptoms of the current women,चालू लड़की ,चालू ओरत . जिस महिला की आंखें डरी हुई सी,किसी स्त्री की गर्दन छोटी हो,किसी स्त्री की हथेली किसी महिला का माथा,स्त्री के पैर ,जिन स्त्रियों में हों ऐसे लक्षण उन्हें शास्त्रों में शुभ नहीं माना गया है-स्त्री के प्रकार स्त्री को क्या चाहिए स्त्री के प्रकार स्त्री की कमजोरी चरित्रहीन स्त्री स्त्री वशीकरण त्रिया चरित्र चरित्रहीन पत्नी की पहचान नारी के प्रकार चरित्रहीन स्त्री के लक्षण  चरित्रहीन पत्नी के लक्षण  स्त्री चरित्र  भाग्यशाली स्त्री के लक्षण  स्त्री के प्रकार  चरित्रहीन महिलाओं की पहचान  चरित्रहीन लड़कियों की पहचान  चरित्रहीन पत्नी की पहचान

जिन स्त्रियों में हों ऐसे लक्षण उन्हें शास्त्रों में शुभ नहीं माना गया है-


स्त्री को हमारे ग्रंथों में लक्ष्मी कहा गया है। ज्योतिष के ग्रंथों में भी स्त्रियों के स्वभाव और उनके भविष्य से जुड़ी बातों के बारे में रोचक वर्णन मिलता है। प्रसिद्ध ग्रंथ बृहद संहिता में स्त्रियों के दो प्रकार बताए गए है शुभ लक्षणा और अशुभ लक्षणा।शुभ लक्षणा को साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। वहीं अशुभ लक्षणा को अलक्ष्मी कहा जा सकता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं स्त्रियों के कुछ ऐसे ही शारीरिक लक्षणों के बारे में जिन्हें इस ग्रंथ में शुभ नही माना गया है-
कनिष्ठिका वा तदनन्तरा वा महीं न यस्या: स्पृशति स्त्रिया: स्यात्।
गताथवङ्गुष्ठमतीत्य यस्या: प्रदेशिनी सा कुलटातिपापा।।

स्त्री के पैर की सबसे छोटी या उसके बराबर वाली अंगुली भूमि पर न टिकती हो या अंगूठे के बराबर वाली अंगुली, अंगूठे से बहुत लंबी हो तो ऐसी स्त्री का चरित्र परिस्थिति के अनुसार बदल सकता है। ऐसी महिलाएं नियंत्रण मेंं न रहने वाली, पाप करने वाली और गुस्सैल स्वभाव की होती हैं। जिस स्त्री की पिण्डली का पिछला भाग मोटा हो, बहुत ऊपर की ओर चढ़ा हुआ सा हो साथ ही नसें उभरी हों तो ऐसी स्त्रियों को शुभ नहीं माना जाता है।यदि यह भाग मांसहीन, सूखा सा हो, पिण्डली पर बहुत रोम हों तो ऐसी स्त्री बहुत दु:ख पाती है। गुहा भाग के बाल वामावर्त रोमों से युक्त हो या यह भाग दबा हुआ सा हो तो अशुभ होता है। यदि पेट घड़े के समान हो तो जीवन में हमेशा दरिद्रता बनी रहती है।  पेट पतला, लंबा या गड्ढेदार हो तब भी अच्छा नही माना जाता है-

प्रविलम्बिनि देवरं ललाटे, श्वसुर हन्त्युदरे स्फिजो: पतिं च।
अतिरोमचयाान्वितोत्तरोष्ठी, न शुभा भर्तुरतीव या च दीर्घा।। 

किसी महिला का माथा यदि लंबा हो तो देवर के लिए, पेट लंबा हो तो ससुर के लिए, कमर के नीचे वाला हिस्सा भारी हो तो पति के लिए अनिष्टकारक होता है। मूंछों के स्थान पर बहुत रोएं हो या स्त्री का कद बहुत लंबा हो तो पति के लिए शुभ नहीं होता है। स्त्री के कान रोएंदार हों, मैले हों असमान आकार के हों तो हमेशा क्लेश रहता है। दांत, मोटे चौड़े या बहुत लंबे हों, बाहर निकले हों तो जीवन में हमेशा दुख रहता है। काले मसूड़ों वाली महिलाओं का भाग्य उनका अधिक साथ नही देता है-

क्रव्यादरूपैर्वृककाकङ्सरीसृपोलूकसमानचिन्है:।
शुष्कै: शिरालैर्विषमैश्च हस्तैर्भवन्ति नार्य सुखवित्तहीना:।।

जिन स्त्रियों में हों ऐसे लक्षण उन्हें शास्त्रों में शुभ नहीं माना गया है-
किसी स्त्री की हथेली पर मांसभक्षी पक्षी का चिन्ह हो, भेडिय़ा, कौआ, सांप, उल्लू जैसा चिन्ह हों तो वह स्त्री दुख देने वाली होती है-
हथेलियां चपटी मांसहीन हों व नसें ज्यादा उभरी हुुई हों तो उन्हें अच्छा नहीं माना जाता है। दोनों हथेलियों के आकार में अंतर हो तो ऐसी महिलाएं सुख और धन से हीन होती हैं-

नेत्रे यस्या: केकरे पिङ्गले वा सा दु:शीला श्यामलेक्षणा च।
कूपौ यस्या गण्डयोश्च स्मितेषु नि:सन्दिग्धं बंधकी तां वदन्ति।।

जिस महिला की आंखें डरी हुई सी, पीली हों वह बुरे स्वभाव वाली होती है। जबकि चंचल और स्लेटी रंग की आंखों को भी शुभ नहीं माना जाता है। हंसते समय जिस स्त्री के गालों पर गड्ढे पड़ते हों उसका चरित्र बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है-

ह्स्वयातिनि:स्वता दीर्घया कुलक्षय:।
ग्रीवया पृथूत्थया योषित: प्रचण्डता।।

किसी स्त्री की गर्दन छोटी हो तो वह जीवनभर दूसरों पर निर्भर रहती है। वह अपना कोई भी निर्णय स्वयं नहीं ले पाती। वहीं 4 अंगुल से अधिक लंबी गर्दन वाली स्त्री वंश का नाश करने वाली होती है। यदि गर्दन बहुत मोटी हो तो उसे शुभ नही माना जाती है। गर्दन चपटी हो तो ऐसी स्त्री का स्वभाव प्रचण्ड यानी गुस्सैल और जिद्दी होता है-

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

जाने लडकियों के सबसे कामुक अंगो के बारे में -The girls about the sensual organs

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कामुक और सेक्सी हिस्सा कौनसा है योनि से पानी आता है स्त्री औरत लड़की वेसे तो लडकियों का पूरा शारीर ही इस तरह बना होता है कि मर्द उनकी हर अदा पर फ़िदा हो जाता है / 
पर बात जब लडकियों कि आती है तो बहुत से मर्दों को निजी पलो में उनको कुश करना नही आता /इसलिए हम आप को बताने जा रहे ही वो खास अंग जिस पर अगर आप ध्यान दे तो लडकिय आपकी दीवानी हो जाएगी
जाने लडकियों के सबसे कामुक अंगो के बारे में -The girls about the sensual organs जाने लडकियों के सबसे कामुक अंगो के बारे में The girls about the sensual organs,लडकियों के अंग ,लडकियों के बारे में ,लड़की ,लडकियों का शरीर ,लडकियों की बात ,स्तन महिला,नितंब या कूल्हे,योनि,योनि की गहराई,भगशिश्न  महिलाओं का सबसे कामुक अंग ,स्त्री का सेक्सी कामुक अंग ,महिला के सेक्सी अंग ,संवेदनशील अंग चूत से पानी टपक जाये जाता है सेक्सी अंग हिस्सा लड़की को उत्तेजित करने के तरीके, कौनसे अंगों से महिलाओं के शरीर के ये हिस्‍से करते हैं उत्‍तेजित इन अंगों को छूने से मचल कर बाहों में आ जाती है लड़की महिलाओं के ये अंग होते हैं सेंशुअल, छूने से बढ़ती है महिलाओं के ये अंग छूते ही बढ़ जाती है सेक्स की इच्छा शरीर के ये अंग होते है सबसे ज्यादा कामुक

कान
कानों के चारों ओर चैतन्य नसों का जमावड़ा होता है, जो कान को उत्तेजना के प्रति अतिरिक्त चैतन्य बनाती हैं. अपनी उंगलियों से उन्हें हल्के से सहलाइए या खींचिये, कान के पीछे की ओर 
चूमे और कान के निचले गुद्देदार हिस्से को हल्के से काटे. इससे महिलाओं में उत्तेजना पूर्ण सनसनाहट का संचार होता है. कई महिलाएं अपने कान में जीभ फेरना पसंद नहीं करती लेकिन सौम्य तरीके से कान के चारों ओर जीभ घुमाना भी उनमें उत्तेजना का संचार करता है.
होंठ
चूमना… किसी महिला के लिए एक बड़ा टर्निंग प्वांइट होता है. जब रिलेशन बन रहे होते हैं तो किस(kiss) ऐसी पहली चीज होती है सर्वप्रथम अस्वीकार की जाती है, लेकिन इसमें देर नहीं करना चाहिये. होंठ उत्तेजक नसों से लबालब भरे होते हैं. इन्हें तुरंत सीधे तौर पर इसलिए जीभ में नहीं डुबाना चाहिये. आपकी किस द्वारा सौम्यता से कामुकता में तीव्रता से परिवर्तन होता है. सबसे पहले उसके निचले होंठो पर अपनी जीभ फेरें फिर उसे अपने होंठों के बीच फंसाकर चूसे साथ ही उसे भी ऐसा करने दें. जब आप उसे किस कर रहें हो तो अपने हाथ उसकी गर्दन पर रखे या फिर उसकी कमर या नितंबों पर या फिर इस दौरान उसके इन सभी जगहों पर हाथ फेर सकते हैं यह दिखाने के लिये कि आप उससे कितना कुछ चाहते हैं



गर्दन
इसे चूमना, चाटना, सौम्य तरीके से काटना और हल्के से थपथपाना उसको सिसकने के मजबूर कर देता है. लेकिन यहां जोर से नहीं काटना चाहिये क्योंकि यहां की त्वचा ब्रेक हो सकती है


कंधे
गर्दन की तरह- कई महिलाएं कंधों को चूमने और आलिंगन करने से काफी उत्तेजना का अनुभव करती हैं. पूर्व की तरह जो प्रक्रिया गर्दन में कर रहे हैं वही करते हुए कंधों तक आएं ताकि उस पता चल सके कि आप कितने सेन्सुअल लवर हैं.

कोहनी
कोहनी के अंदर की ओर चूमने से महिलाओं में हल्की उत्तेजना का संचार होता है. कोहने के अंदर की ओर की त्वचा कोमल होती है, इस जगह हल्के से काटते हुए किस करते चले जाएं. देखें इससे उसे कैसे आनंद की अनुभूति होती है.

अंगुलियां
महिलाओं की उंगलियां भी काफी उत्तेजक होती हैं लेकिन ज्यादातर लोग इस ओर ध्यान नहीं देते. उंगलियों के पोरों को हल्के-हल्के सहलाते हुए दबाने से महिलाओं में तीव्र उत्तेजना का संचार होता है. साथ ही जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ती जाती है आपको उसकी उंगलियों को अपने होंठों के बीच ले जाना चाहिए फिर होंठो से सहलाते हुए धीरे धीरे चूसना चाहिए. इस क्रिया से वह नशे की सी स्थिति में आ जाएगी. यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि उंगलियों में सर्वाधिक कामुक बिन्दु उसके पोर होते हैं.

स्तन
स्तन महिला के सेक्सुअल और कामुक अंगों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. यह महिलाओं में सेक्सुअल आकांक्षा के साथ सेक्सुअल उत्तेजना जागृत करने में सहायक होता है साथ ही सेक्सुअल उत्तेजना के लिये अत्यंत संवेदनशील होता है. परन्तु इसके लिए सीधे छलांग नहीं लगा देनी चाहिये. आप अपने रास्ते उसके शरीर में नीचे की ओर जाते जाएं व उन्हें सहलाते रहे लेकिन स्तनों को तब तक न छुएं जब तक कि आपको यह न पता चल जाए कि वह स्वयं चाह रही है कि आप उसके स्तनों को छुएं. शुरुआती दौर में उनके साथ सौम्य तरीके से पेश आएं. इसके लिये शुरुआत किनारे से करें, फिर केन्द्रीभूत तरीके से गोल घेरे में अपनी उंगलियां उसके स्तनों के चारों ओर घूमाएं, ऐसा तब तक करें कि जब तक कि स्तनों के निप्पल के चारों ओर के गुलाबी या भूरे रंग के गोल घेरे तक न पहुंच जाएं, यहां कुछ देर तक उंगलियां फिराने के बाद निप्पल तक पहुंचना चाहिए. अब आप तो निप्पल को सहलाते हुए थपथपाएं, खींचे, दबाएं, चूमे और चूसे. इस दौरान आप चाहें तो सौम्य तरीके से हल्के से दांतो से काट सकते हैं. जब आप का मुंह एक स्तन पर है तो इस दौरान आपका हाथ दूसरे स्तन पर खेलना चाहिए तभी वह सब कुछ सौंपने को आतुर होगी. इसके पश्चात स्तन बदल कर यही क्रिया दोहराएं. फिर दोनों हाथों से स्तनों को जम कर दबाना चाहिये साथ ही बीच में अपने पार्टनर से पूछें कि उसे स्तनों में कौन सी क्रिया आनंददायी लगती है. कभी भी पार्टनर की इच्छाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिये. स्तनों के बीच की हिस्सा कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है जबकि यह भी कामुक क्षेत्र होता है.

पीठ
शुरुआत हल्के तरीके से सहलाने से करें. इसके लिए कंधों के निचले हिस्से से शुरू करें फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर आती जायें(इस दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधे छूने से बचे यह खतरनाक हो सकता है). इस दौरान पीठ पर मिले जुले कभी हल्के कभी तेज थपथपाहट करनी चाहिये. इसे और बेहतर बनाने के लिये टेलकम पावडर या तेल का प्रयोग कर सकते हैं. यहां यह ध्यान दें कि उसकी पीठ के किस हिस्से में टच करने पर ज्यादा उत्तेजना का संचार होता हैं इसके लिये आप चाहें तो अपने पार्टनर से पूछ सकते हैं. फिर उसकी पीठ के मध्य में रीढ़ की हड्डी के उपर बने नालीदार हिस्से पर हल्के हाथ से उंगलियां फिराते हुए नीचे की ओर नितंबों तक आना चाहिये यह क्रिया चाहें तो कई बार दोहरा सकते हैं. ऐसा करने से उसे आराम की अनुभूति तो होगी ही, साथ ही इससे रक्त का संचार उसके पेल्विक क्षेत्र की ओर होने लगता है- इससे उसकी उत्तेजना चरम की ओर पहुंचने लगती है. उसकी पीठ के निचले हिस्से में या ठीक नितंब के उपर बने गङ्ढे (dimple) भी उत्तेजक अंग होते हैं. उसकी रीढ़ के समानान्तर ऊपर से नीचे की ओर(top to the bottom) जीभ फेरने पर उसके उत्तेजना की आग सुलग उठती है.

नितंब या कूल्हे
कई महिलाएं अपने नितंबों को जोर से दबाना या तेज दबाव की मालिश पसंद करती हैं. आप यहां पर शरीर के अन्य अंगों की अपेक्षा ज्यादा दबाव दे सकते हैं. कुछ महिलाएं नितंब पर हल्के थप्पड़ो का प्रहार पसंद करती हैं- किन्तु ऐसा करने से पहले अपने पार्टनर से पूछ लें.इस मामले को जोर का दबाव या थपथपाहट मजाक का विषय नहीं बनाना चाहिये – क्योंकि कई महिलाएं अपने नितंब के आकार को लेकर काफी आशंकित रहती हैं.

मोन्स
जैसे ही आप भग क्षेत्र या बाह्य जननेन्द्रियों (genital area) को पाते हैं, तो उसमें छलांग लगाना काफी सरल होता है लेकिन उसके पहले भगशिश्न के उपर स्थित उस गुद्देदार क्षेत्र को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जो रोमों (pubic hair) से घिरा होता है. इसे थपथपाना और रगड़ना उसे सिसकने को मजबूर कर देगा वहीं रोमों को(यदि हैं तो) उंगलियों में फंसाकर हल्के से खींचने पर उसे मीठे दर्द की अनुभूति होती है जो उसमें उत्तेजना का संचार करती है.
भगशिश्न
यह महिलाओं का सबसे कामुक अंग होता है. भगशिश्न को आसानी से खोजा जा सकता है. यह भगोष्ठ (vaginal lips) के उपर की ओर उभरा हुआ हिस्सा होता है. यह उत्तेजक उत्तकों से बना हुआ होता है और इसका काम पुरुषों को शिश्न मुण्ड की ही तरह होता है. उत्तेजना के दौरान यह रक्त से भरा रहता है. कुछ महिलाओं का भगशिश्न इतना सेन्सटिव होता है कि कई बार परेशानी का सबब भी बन जाता हैं क्योंकि हल्की सी छुअन भी उसमें उत्तेजना भर देती है. इस तरह की स्थितियों में इसे सीधे न छूकर इसके किनारों से स्पर्श करना चाहिए और उस नीचे (base) से उत्तेजित करना चाहिये. कुछ महिलाएं जैसे-जैसे उत्तेजित होती जाती हैं वैसे-वैसे वे अपने भगशिश्न में ज्यादा दबाव चाहती हैं. लेकिन भगशिश्न में दबाव व स्पर्श के लिये पार्टनर से पूछ कर ही हरकत करना चाहिये. यदि आप मुखमैथुन कर रहें हैं तो भगशिश्न तक किनारे से पहुंचे. इस तरीके से उसे ज्यादा आनंद आएगा.
योनि
योनि वह दूसरा क्षेत्र है जहां कई आदमी स्तनों को उत्तेजित करने के बाद सीधे पहुंच जाते हैं. जब आप वहां पहुंच जाएं तो उसके बाहर रुके, तब आपको काफी पसंदीदा तरीके से अंदर के लिये वेलकम किया जाएगा. जैसे ही महिला उत्तेजित होती है उसका गर्भद्वार उपर की ओर खिसक जाता है जिससे योनि की
गहराई बढ़ जाती है और आपको गहरे तक प्रवेश का आनंद मिलता है. इस लिए यह आपकी पसंद का मामला है कि आप उसे कितना गीला कर सकते हैं. जितना समय यहां दिया जाएगा उतना ही आनंद आपको लिंग प्रवेश पर मिलेगा.
जी-स्पॉट
योनि की गहराई के एक तिहाई रास्ते पर यह क्षेत्र योनि की बाहरी दीवार पर (आमाशय या पेट के सामने न कि गुदा की ओर ) एक स्पंजी क्षेत्र पाया जाता है यह लगभग मुंह के उपरी हिस्से की तरह होता है जब जीभ से छुआ जाता है. यदि इस जगह पर लगातार उंगली चलाई जाती है तो कई महिलाएं काफी मात्रा में पानी छोड़ती है. पानी की यह धार काफी तेज भी होती है. वहीं कुछ महिलाओं को ऐसा अनुभव होता है कि मानों उन्हें पेशाब जाना हो, तो कई को कुछ और ही अनुभूति होती है. कुल मिला कर जी-स्पाट उत्तेजना के महिलाओं में अलग-अलग अनुभव होते हैं. इसलिए अपने पार्टनर से पूछिये कि उसे क्या अनुभूति हो रही है और उसे कैसा लग रहा है-


गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

नॉर्थ कोरिया,यहां इंसानों का मांस खाया जाता है -North Korea, the human flesh is eaten -

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पूरी दुनिया में नार्थ कोरिया के बारे में लोगों को और देशों के मुकाबले काफी कम जानकारी है। प्रेजिडेंट किम यू जुंग भले ही इस बात का दावा करते हैं कि नार्थ कोरिया में लोग काफी आराम की लाइफ बिताते हैं, लेकिन इस देश में काफी सख्त नियम-कानून की वजह से असलियत खुलकर सामने नहीं आ पाती। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस देश के 9 सीक्रेट फैक्ट्स जो काफी कम लोग जानते होंगे। लोग खाने लगे हैं इंसानों का मीट
नॉर्थ कोरिया,यहां इंसानों का मांस खाया जाता है -North Korea, the human flesh is eaten -

नार्थ कोरिया में खाने की कमी के कारण, ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोग इंसानों का मीट खाते पाए गए हैं। इनमें ज्यादातर लोग बच्चों का मीट खाते हैं। कुपोषण का शिकार हुए बच्चे आसानी से लोगों द्वारा किडनैप कर मीट की तरह बेचे जाते हैं। नार्थ कोरिया में कुछ जगहों पर तो खुलेआम इंसानों का मीट बिकने की बात सामने आई है।
इलीगल तरीके से बेचीं जाती है ह्यूमन पॉटी
नार्थ कोरिया का ज्यादातर हिस्सा बंजर है। इसलिए यहां लोगों की पॉटी को फर्टिलाइजर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, अब यहां इलीगल तरीके से भी पॉटी बेचीं जाती है।कई लोग जाना चाहते हैं दूसरे देश
नार्थ कोरिया के ज्यादातर लोग बाहर के देशों में जाकर बस रहे हैं। इनमें चीन लोगों को वापस भेज देते हैं, जबकि साउथ कोरिया लोगों को अपने यहां फ्री सिटीजनशिप देने को तैयार है।
3 कास्ट में बंटे हैं लोग
नार्थ कोरिया में लोगों को 3 कास्ट्स में बांटा गया है। ये हैं, होस्टाइल्स, वेवरिंग और कोर। हर कास्ट के लोगों को अलग-अलग ट्रीटमेंट दिया जाता है।विंटर्स में पूरी तरह गुल हो जाती है बिजली
वैसे तो नार्थ कोरिया को बेस्ट कंट्री बनाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है। लेकिन कभी-कभी, खासकर विंटर्स में कई हिस्सों से बिजली पूरी तरह गुल हो। कई घरों में आजतक बिजली आई ही नहीं है।हद से ज्यादा करते हैं हथियारों की खरीद-फरोख्त
नार्थ कोरिया बाहर से हथियार मंगवाने और भेजने में काफी दिलचस्पी रखता है। 2012 में UN ने नार्थ कोरिया से सीरिया जा रहे मिसाइल्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले सिलिंडर्स का जखीरा जब्त किया था।गिरती जा रही है अर्थव्यवस्था
नार्थ कोरिया की इकॉनमी दिन-ब-दिन गिरती ही जा रही है। देश में इंश्योरेंस फ्रॉड के कई मामले सामने आते जा रहे हैं।तीन पुश्तों को झेलनी पड़ती हैं एक गलती की सजा
नार्थ कोरिया के कानून के मुताबिक, अगर आपने कोई गलती की है तो उसकी सजा आपके बाद की दो जनरेशन को भी झेलनी पड़ेगी। यानी की आपकी गलती की सजा आपके बच्चों के अलावा आपके पोते-पोतियों को भी मिलेगी।
जानवरों की तरह रखे जाते हैं इंसान
नार्थ कोरिया में टोटल 16 लेबर कैंप हैं। इनमें 2 लाख से भी ज्यादा कैदियों को रखा जाता है। बदहाल हाल में रहने को मजबूर ये कैदी हर वक्त मौत की भीख मांगते हैं। इन कैम्पस के चारो तरफ बिजली के तार बिछाए गए हैं, ताकि कोई भी कैदी भागने ना पाए।
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बुधवार, 21 सितंबर 2016

सपनो का मतलब भाग -3 -Part -3 meaning of dreams -

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सपनो का मतलब भाग -3 -Part -3 meaning of dreams -सपनों का मतलब जानने के लिए-सपनों का मतलब जानने-सपनो का फल-सपनों का रहस्य-सपने मे पानी देखना-स्वप्न का अर्थ-सपने में रोना-सपने मे साँप देखना
सोते वक्‍त आप हर रोज कुछ न कुछ सपने में जरूर देखते होंगे। कभी चूहा तो कभी बिल्‍ली, कभी समुद्र तो कभी लड़की, कभी सांप तो कभी कुत्‍ता। कुछ न कुछ आपको सपने में जरूर दिखता होगा। आप उस सपने को सपने की तरह देख आगे बढ़ जाते हैं। क्‍या कभी आपने सोचा है, कि इन सपनों का भी आपके जीवन में बड़ा महत्‍व है। जी हां ज्‍योतिष विद्या के अनुसार व्‍यक्ति जो कुछ भी सपने में देखता है, उसका प्रभाव उसके जीवन पर जरूर पड़ता है।
सपनो का मतलब भाग -3 -Part -3 meaning of dreams -
161- मंदिर देखना- धार्मिक कार्य में सहयोग करना
162- नदी देखना- सौभाग्य वृद्धि
163- नाच-गाना देखना- अशुभ समाचार मिलने के योग
164- नीलगाय देखना- भौतिक सुखों की प्राप्ति
165- नेवला देखना- शत्रुभय से मुक्ति
166- पगड़ी देखना- मान-सम्मान में वृद्धि
167- पूजा होते हुए देखना- किसी योजना का लाभ मिलना
168- फकीर को देखना- अत्यधिक शुभ फल
169- गाय का बछड़ा देखना- कोई अच्छी घटना होना
170- वसंत ऋतु देखना- सौभाग्य में वृद्धि
171- बिल्वपत्र देखना- धन-धान्य में वृद्धि
172- स्वयं की बहन देखना- परिजनों में प्रेम बढऩा
173- भाई को देखना- नए मित्र बनना
174- भीख मांगना- धन हानि होना
175- शहद देखना- जीवन में अनुकूलता
176- स्वयं की मृत्यु देखना- भयंकर रोग से मुक्ति
177- रुद्राक्ष देखना- शुभ समाचार मिलना
178- पैसा दिखाई देना- धन लाभ
179- स्वर्ग देखना- भौतिक सुखों में वृद्धि
180- पत्नी को देखना- दांपत्य में प्रेम बढऩा
181- स्वस्तिक दिखाई देना- धन लाभ होना
182- हथकड़ी दिखाई देना- भविष्य में भारी संकट
183- मां सरस्वती के दर्शन- बुद्धि में वृद्धि
184- कबूतर दिखाई देना- रोग से छुटकारा
185- कोयल देखना- उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
186- अजगर दिखाई देना- व्यापार में हानि
187- कौआ दिखाई देना- बुरी सूचना मिलना
188- छिपकली दिखाई देना- घर में चोरी होना
189- चिडिय़ा दिखाई देना- नौकरी में पदोन्नति
190- तोता दिखाई देना- सौभाग्य में वृद्धि
191- भोजन की थाली देखना- धनहानि के योग
192- इलाइची देखना – मान-सम्मान की प्राप्ति

193- खाली थाली देखना- धन प्राप्ति के योग
194- गुड़ खाते हुए देखना- अच्छा समय आने के संकेत
195- शेर दिखाई देना- शत्रुओं पर विजय
196- हाथी दिखाई देना- ऐेश्वर्य की प्राप्ति
197- कन्या को घर में आते देखना- मां लक्ष्मी की कृपा मिलना
198- सफेद बिल्ली देखना- धन की हानि
199- दूध देती भैंस देखना- उत्तम अन्न लाभ के योग
200- चोंच वाला पक्षी देखना- व्यवसाय में लाभ
201- अंगूठी पहनना- सुंदर स्त्री प्राप्त करना
202- आकाश में उडऩा- लंबी यात्रा करना
203- आकाश से गिरना- संकट में फंसना
204- आम खाना- धन प्राप्त होना
205- अनार का रस पीना- प्रचुर धन प्राप्त होना
206- ऊँट को देखना- धन लाभ
207- ऊँट की सवारी- रोगग्रस्त होना
208- सूर्य देखना- खास व्यक्ति से मुलाकात
209- आकाश में बादल देखना- जल्दी तरक्की होना
210- घोड़े पर चढऩा- व्यापार में उन्नति होना
211- घोड़े से गिरना- व्यापार में हानि होना
212- आंधी-तूफान देखना- यात्रा में कष्ट होना
213- दर्पण में चेहरा देखना- किसी स्त्री से प्रेम बढऩा
214- ऊँचाई से गिरना- परेशानी आना
215- बगीचा देखना- खुश होना
216- बारिश होते देखना- घर में अनाज की कमी
217- सिर के कटे बाल देखना- कर्ज से छुटकारा
218- बर्फ देखना- मौसमी बीमारी होना
219- बांसुरी बजाना- परेशान होना
220- स्वयं को बीमार देखना- जीवन में कष्ट
221- बाल बिखरे हुए देखना- धन की हानि
222- सुअर देखना- शत्रुता और स्वास्थ्य संबंधी समस्या
223- बिस्तर देखना- धनलाभ और दीर्घायु होना
224- बुलबुल देखना- विद्वान व्यक्ति से मुलाकात
225- भैंस देखना- किसी मुसीबत में फंसना
226- बादाम खाना- धन की प्राप्ति
227- अंडे खाना- पुत्र प्राप्ति
228- स्वयं के सफेद बाल देखना- आयु बढ़ेगी
229- बिच्छू देखना- प्रतिष्ठा प्राप्त होगी
230- पहाड़ पर चढऩा- उन्नति मिलेगी
231- फूल देखना- प्रेमी से मिलन
232- शरीर पर गंदगी लगाना- धन प्राप्ति के योग
233- पिंजरा देखना- कैद होने के योग
234- पुल पर चलना- समाज हित में कार्य करना
235- प्यास लगना- लोभ बढऩा
236- पान खाना- सुंदर स्त्री की प्राप्ति
237- पानी में डूबना- अच्छा कार्य करना
238- तलवार देखना- शत्रु पर विजय
239- हरी सब्जी देखना- प्रसन्न होना
240- तेल पीना- किसी भयंकर रोग की आशंका
241- तिल खाना- दोष लगना
242- तोप देखना- शत्रु नष्ट होना
243- तीर चलाना- इच्छा पूर्ण होना
244- तीतर देखना- सम्मान में वृद्धि
245- स्वयं को हंसते हुए देखना- किसी से विवाद होना
246- स्वयं को रोते हुए देखना- प्रसन्नता प्राप्त होना
247- तरबूज खाते हुए देखना- किसी से दुश्मनी होगी
248- तालाब में नहाना- शत्रु से हानि
249- जहाज देखना- दूर की यात्रा होगी
250- झंडा देखना- धर्म में आस्था बढ़ेगी
251- धनवान व्यक्ति देखना- धन प्राप्ति के योग
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शनिवार, 17 सितंबर 2016

सेक्स के लिए भी अजीब कानून है इन देशों में -Sex also strange laws in these countries -

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कोई भी मुल्‍क अपने संविधान और कानून की वजह से चलता है. दुनिया के कुछ देश ऐसे भी हैं जो अपने अलग कानून के लिए जाने जाते हैं. खासकर, शारीरिक संबंधों को लेकर भी हर देश में अलग-अलग तरह के कानून हैं. एक नजर, दुनिया में सेक्स को लेकर बनाए गए अजीबो-गरीब कानूनों के बारे में.
सेक्स के लिए भी अजीब कानून है इन देशों में -Sex also strange laws in these countries -

कोलंबिया का सेक्स कानून: 

कोलंबिया में हर शादीशुदा लड़की को काली नामक जगह पर शादी के बाद पहली बार शारीरिक संबंध अपनी मां की मौजूदगी में ही बनानी पड़ती है. ये सुनने में शायद आपको थोड़ा सा अटपटा लगे, लेकिन यह सच है. यहां पर अगर आपकी महिला साथी के साथ चरम सुख पर हैं तो उस समय बन्दूक चलाना गैर-कानूनी माना जाता है.

बहरीन:

 इस्लामिक देश बहरीन में डॉक्टर के लिए अनूठा कानून है. आप अगर पुरुष डॉक्टर हैं और महिला रोग विशेषज्ञ हैं तो आपको महिलाओं के शरीर को छूने की तो आजादी है, लेकिन उन्हें सीधे देखने की नहीं. अगर आपके पास महिला इलाज के लिए आई है तो आप महिला के अंग सिर्फ आइने में देख सकते हैं.

लेबनान:

 दुनिया के कई देशों में जानवर के साथ सेक्‍स करना अपराध माना जाता है लेकिन इस देश में हर जानवर के साथ ऐसा करने पर सजा नहीं मिलती. वहां पर कोई शख्स किसी नर पशु के साथ सेक्‍स करता है, तो उसे सजा दी जाती है. परन्‍तु अगर वह मादा जानवर के साथ सेक्‍स करता है तो उसे गैर-कानूनी नहीं माना जाता.


वाशिंगटन:

 अमेरिका के इस शहर में जानवरों के साथ सेक्स करना गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन इसके लिए उस जानवर का वजन 40 पौंड या अधिक होना चाहिए.

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ताज महल इतिहास में छुपे है कुछ राज-Taj Mahal history is hidden in some secret

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स्थापत्य कला की जीती-जागती तस्वीर आगरा शहर दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिसे बनाने के लिए बगदाद से एक कारीगर बुलवाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था। इसी तरह बुखारा शहर, जो मध्य एशिया में स्थित हैं, वहां से जिस कारीगर को बुलवाया गया वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में दक्ष था। विराट कद के गुंबदों का निर्माण करने के लिए तुर्की के इस्तम्बुल में रहने वाले दक्ष कारीगर बुलाया गया तथा मिनारों का निर्माण करने के लिए समरकंद से दक्ष कारीगर को बुलवाया गया। 
ताज महल इतिहास में छुपे है कुछ राज-Taj Mahal history is hidden in some secret

ताजमहल भारत के आगरा शहर में यमुना नदी के तट पट स्थित एव विश्व धरोहर मकबरा है. ताजमहल में मकबरे और महेमानघर का भी समावेश है और साथ ही इसके दोनों और गार्डन्स भी है.ताजमहल का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ (शासनकाल 1628 से 1658) ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था,

 ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ.


1631 में, शाहजहाँ के साम्राज्य ने हर जगह अपना जीत का परचम लहराया था. उस समय शाहजहाँ (Shahjahan) की सभी बेगम में उनकी सबसे प्रिय बेगम मुमताज़ महल थी. लेकिन पर्शियन बेगम मुमताज़ महल की मृत्यु अपने चौदहवे बच्चे को जन्म देते समय हो गयी, उनके चौदहवे बच्चे का नाम गौहर बेगम था.
शाहजहाँ चाहते थे की दुनिया मुमताज़ और उनकी प्रेम कहानी को हमेशा याद रखे, इसीलिए उनकी याद में वे कुछ इतिहासिक धरोहर बनाना चाहते थे. जिसमे ताजमहल का निर्माण हुआ.
ताजमहल का निर्माण लगभग 1643 में ही ख़त्म हो गया था लेकिन फिर भी उसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिये और 10 सालो तक काम किया गया.

ताजमहल का निर्माण तक़रीबन 1653 में पूरा हो गया था और उस समय उसे बनाने में लगभग 32 मिलियन रुपयों का खर्चा लगा था, ताजमहल का निर्माण जानकारी के अनुसार 25000+ कारीगरों ने किया था. उस्ताद अहमद लाहौरी को प्रायः इसका प्रधान रूपांकनकर्ता माना जाता है.
सन 1983 में ताजमहल, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना. इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसा पाने वाली, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया.
ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया. रबिन्द्रनाथ टैगोर ने अपने लेख, “दी

टियर-ड्राप ऑन दी चीक ऑफ़ टाइम” में उस समय मुग़ल कालीन बहोत सी वस्तुकलाओ का वर्णन किया था, और भारतीय इतिहास की महान कृतियों को दुनिया के सामने रखा था.
हर साल ताजमहल को लगभग 9 से 10 मिलियन लोग देखने आते है. 2007 में, ताजमहल को दुनिया के 7 आश्चर्य की सूचि में भी शामिल किया गया था.

वास्तुकला और बनावट :


ताजमहल का निर्माण पर्शियन और प्राचीन मुग़ल परम्पराओ को ध्यान में रखते हुए किया गया. जिसमे अधिकतर प्रेरणा उन्हें मुघलाकालिन दूसरी इमारते जैसे गुर-इ-अमीर, हुमायूँ का मकबरा, इत्माद-उद-दूलह मकबरा और जामा मस्जिद से मिली.
प्राचीन मुग़ल काल में प्रायः इमारतो का निर्माण लाल बलुआ पत्थरो से किया जाता था लेकिन शाहजहाँ ने ताजमहल का निर्माण सफ़ेद मार्बल से करने की ठानी. इस से ताजमहल की सुंदरता को चार चाँद लग गये.

बेगम मुमताज़ महल कब्र :


ताजमहल के मध्य में मुमताज़ महल कब्र को रखा गया है. बेगम मुमताज़ महल कब्र कभी बड़ी और सफ़ेद मार्बल से बनी हुई, उनकी कब्र को काफी अलंकृत किया गया है.
मुस्लिम परंपरा के अनुसार कब्र की विस्तृत सज्जा मन है. इसलिए शाहजहाँ एवं मुमताज़ के पार्थिव शरीर इसके निचे तुलनात्मक रूप से साधारण, असली कब्रों में दफ्न है, जिनके मुख दाये एवं मक्का की तरफ है.
मुमताज़ महल की कब्र आतंरिक कक्ष में स्थित है. उनकी कब्र का आधार लगभग 55 मीटर का बना है. उनकी कब्र का आधार एवं ऊपर का श्रुंगारदान रूप, दोनों ही बहुमूल्य पत्थरो एवं रत्नों से जड़े है. इस पर किया गया सुलेखन मुमताज़ की पहचान एवं प्रशंसा है. शाहजहाँ की कब्र मुमताज़ की कब्र के दक्षिण की तरफ है.
ताजमहल के पीछे एक बहुचर्चित कथा भी है, जिसके अनुसार मानसून की पहली वर्षा में पानी की बुँदे इनकी कब्र पर गिरती है.
जैसा की रबिन्द्रनाथ टैगोर के इस मकबरे के वर्णन से प्रेरित है, “एक अश्रु मोती…समय के गाल पर”. ऐसी बहोत सी कथाये ताजमहल को लेकर इतिहास में प्रचलित है.
यमुना नदी के किनारे सफ़ेद पत्थरो से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर “ताजमहल” न केवल भारत में, बल्कि पुरे विश्व में अपनी पहचान बना चूका है.
प्यार किस इस निशानी को देखने के लिये दूर देशो से हजारो लोग यहाँ आते है. दुधिया चांदनी में नाहा रहे ताजमहल की खूबसूरती को निहारने के बाद आप कितनी भी उपमाये दे, वह सारी फीकी लगती है.
ऐसा कहा जाता है जिन कारीगरों ने ताजमहल का निर्माण किया था, शाहजहाँ ने निर्माण होने के बाद उन कारीगरों के हात कटवा दिए थे. इस प्रकार के कई दावे ताजमहल को लेकर इतिहास में किये जाते है.
इस ईमारत का निर्माण सदा से प्रशंसा एवं गर्व का विषय रहा है. इसने धर्म, संस्कृति एवं भूगोल की सीमाओ को पार करके लोगो के दिलो से व्यक्तिगत एवं भावनात्मक प्रतिक्रिया कराइ है. आज भी लोग लोग ताज महल को शाहजहाँ और मुमताज़ के मोहब्बत की निशानी मानते है. आज विश्व के सबसे सुन्दर भवनों में से एक ताजमहल है.
आगरा का ताजमहल भारत की शान और प्रेम का प्रतिक माना जाता है.
ताजमहल के बारे में कुछ रोचक बाते :

इस मनमोहक ईमारत को कुल 25000 से भी जादा लोगो ने मिलकर बनाया था जिनमे मजदुर, पेंटर, आर्टिस्ट और कई कलाकार भी शामिल थे.
ताजमहल बनाते समय लगने वाले सामान को स्थानांतरित करने के लिये लगभग 1500 हातियो का उपयोग किया गया था.
इतिहासकारों के अनुसार शाहजहाँ ने नदी के दुसरे किनारे पर काले पत्थरो से एक और ताजमहल बनाने की योजना बनायी थी अपने बेटे औरंगज़ेब से ही युद्ध होने के कारण उनकी यह योजना पूरी नही हो सकी.
ताजमहल को शाहजहाँ की तीसरी और सबसे प्रिय पत्नी मुमताज़ महल की याद में बनाया गया था और उसे बनाने में तक़रीबन 18 साल लगे थे.
कहा जाता है की मुमताज़ की मृत्यु का शाहजहाँ पर काफी असर हुआ था उनकी मृत्यु के बाद से ही शाहजहाँ की हालत भी काफी ख़राब हो गयी थी. कहा जाता है की शाहजहाँ मरते दम तक मुमताज़ को भूल नही पाए थे.
ताजमहल के चारो तरफ की मीनारों की छाया एक अलग ही आईने जैसा प्रतिबिम्ब निर्मित करती है. इसे भी लोग एक चमत्कार ही मानते है बल्कि कई आर्किटेक्चर भी इस पहेली को सुलझा नही पाए है.
ताजमहल महमोहन गार्डन और इतिहासिक इमारतो से घिरा हुआ है जिसमे मस्जिद और गेस्ट हाउस शामिल है, तक़रीबन 17 हेक्टर्स जमीन पर ताजमहल का परीसर फैला हुआ है. ताजमहल की कुल ऊंचाई तक़रीबन 73 m है.
ताजमहल दिन में अलग-अलग समय में अलग-अलग रंगों में दिखाई देता है, सुबह के समय वह हल्का सा गुलाबी और शाम में दुधेरी सफ़ेद जैसा और रात में हल्का सुनहरा दिखाई देता है. लोगो का रंगों के बदलने से तात्पर्य महिलाओ के मूड (स्वभाव) के बदलने से है.
ताजमहल की दीवारों पर पहले काफी बहुमूल्य रत्न लगे हुए थे लेकिन 1857 की क्रांति में ब्रिटिशो ने उसे काफी हानि पहोचायी थी.
ये भी देखे -ताजमहल के गहरे राज ,जिन्हें कोई नही जनता-
               --ताजमहल का रहस्यमय दरवाजा
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