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डॉ ज़ाकिर नायक परिचय और विवाद और हकीकत -Dr Zakir Naik from controversy and reality -
भारतीय इस्लामी विद्वान और तुलनात्मक धर्म विशेषज्ञ डॉ. जाकिर अब्दुल करीम नायक दूसरे धर्मों से मुनाजिरों के हवाले से पहचाने जाते हैं, काम के लिहाज से एम. बी. बी. एस. डाक्टर हैं । स्वयं को कुरआन के मुताबिक मुस्लिम कहते हैं लेकिन उनके विरोधियों का कहना है कि नायक अहले हदीस हैं , अफ्रीका के प्रसिद्ध धर्म प्रचारक अहमद दीदात को गुरू मानते हैं, 1991 से इस्लाम के प्रचार को पूरी दिलचस्पी के साथ अपना लिया, हिन्दू, जैन, इसाई आदि से Debate मुनाजरे मशहूर हुए , बहुत से लोंगो ने नायक के द्वारा इस्लाम धर्म अपनाया, मुम्बई में पैदा होने वाले नायक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं और दुनिया के प्रसिद्ध गैर अरबी भाषी इस्लामी विद्वानों में से एक हैं. इस्लामी चैनल पीस टीवी के नाम से चला रहे हैं, हाजिर जवाबी और मुनाजरों में दस्तरस रखते हैं, विलियम केम्पबेल से मुनाजिरे के कारण अंतरराष्ट्रीय वक्ता के रूप में प्रसिद्ध हुए, उर्दू-हिंदी मराठी स्टाइल में बोलते हैं, अरूण शौरी, योगी आदित्यानाथ, तस्लीमा नसरीन जैसी बडी कई धार्मिक और राजनितिक हस्तियों को नायक चुनौती दे चुके हैं तो अपने को सुन्नि मोलवी से बना पंडित कहने वाले महिंद्रपाल और शिया से नास्तिक बना अली सीना जैसे दर्जन से अधिक उनको चुनौती दे रहे हैं । गुरू रामपाल ने तो बहस का झूटा इशतहार तक टीवी पर चलवा दिया था, अंतरराष्ट्रीय वक्ता के रूप में प्रसिद्ध लगभग 50 वर्षीय जाकिर नायक की पत्नि फरहत नायक, बेटा फारिक नायक और बेटी रूशदा नायक भी प्रचारकों की दुनिया में अपनी पहचान बना चुके।
किसी मुद्दे या ग़लत फेहमी दूर दूर करने के लिए तैयारी के साथ पब्लिक के सामने जो बात करते हैं वो पीस टीवी के कैमरों द्वारा रिकोर्ड करके प्रसारित करदी जाती है । फिर वो वीडियोज समर्थकों के द्वारा ऑनलाइन अपलोड करदी जाती जिसे पसंद करने वाले अपनी भाषाओं में अनुवाद करके प्रकाशित कर लेते हैं। ऐसे ही तैयार हुई जाकिर नायक की 5 हिंदी पुस्तकें खाकसार कैरानवी द्वारा आनलाइन उपलब्ध कर दी गयी हैं
किसी मुद्दे या ग़लत फेहमी दूर दूर करने के लिए तैयारी के साथ पब्लिक के सामने जो बात करते हैं वो पीस टीवी के कैमरों द्वारा रिकोर्ड करके प्रसारित करदी जाती है । फिर वो वीडियोज समर्थकों के द्वारा ऑनलाइन अपलोड करदी जाती जिसे पसंद करने वाले अपनी भाषाओं में अनुवाद करके प्रकाशित कर लेते हैं। ऐसे ही तैयार हुई जाकिर नायक की 5 हिंदी पुस्तकें खाकसार कैरानवी द्वारा आनलाइन उपलब्ध कर दी गयी हैं
कुरआन और विज्ञान
क्या कुरआन ईश्वरीय ग्रन्थ है? "IS THE QURAN GOD'S WORD?"
गैर मुस्लिमों के 20 सवालों के जवाब
इस्लाम में औरतों (नारियों) के अधिकार
''इस्लाम आतंकवाद या भाईचारा''
क्या कुरआन ईश्वरीय ग्रन्थ है? "IS THE QURAN GOD'S WORD?"
गैर मुस्लिमों के 20 सवालों के जवाब
इस्लाम में औरतों (नारियों) के अधिकार
''इस्लाम आतंकवाद या भाईचारा''
डॉ. जाकिर नाइक को सऊदी अरब के नए शाह ने इस्लाम धर्म के प्रति अभूतपूर्व योगदान के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक से सम्मानित किया..मालूम हो के इस से पहले अवॉर्ड इस्लाम के मशहूर उलेमा मौलाना अबुल हसन नदवी को 1980 मे दिया गया था.
शाह सलमान ने शानदार पुरस्कार समारोह में किंग फैसल अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार (केएफआईपी) इस्लाम की गैरमामूली सेवा के लिये प्रदान किया. यह पुरस्कार नोबेल पुरस्कार के जैसा मुस्लिम दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। पांच श्रेणियों - इस्लाम की सेवा, इस्लामिक अध्ययन, अरबी भाषा एवं साहित्य, चिकित्सा और विज्ञान में दिए जाते हैं. हर पुरस्कार के साथ विजेता की उपलब्धियों से जुड़ा अरबी का एक हस्तलिखित प्रमाणपत्र, एक 24 कैरेट 200 ग्राम सोने का स्मारक पदक और 2,00,000 डॉलर की पुरस्कार राशि दी जाती है.
पुरस्कार समारोह में देश के मंत्री, शाही परिवार के सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद् और प्रतिष्ठित विद्वान मौजूद थे. नाइक ने समारोह के दौरान दिखाई गई एक वीडियो बायोग्राफी में कहा था कि 'इस्लाम एकमात्र धर्म है जो पूरी मानवता के लिए शांति ला सकता है। .वर्तमान में जो यह 1 करोड 32 लाख रूपए से अधिक की राशि होती है यह जाकिर नायक द्वारा पीस टीवी नेटवर्क के वक्फ में दे दान कर दी गयी।
शाह सलमान ने शानदार पुरस्कार समारोह में किंग फैसल अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार (केएफआईपी) इस्लाम की गैरमामूली सेवा के लिये प्रदान किया. यह पुरस्कार नोबेल पुरस्कार के जैसा मुस्लिम दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। पांच श्रेणियों - इस्लाम की सेवा, इस्लामिक अध्ययन, अरबी भाषा एवं साहित्य, चिकित्सा और विज्ञान में दिए जाते हैं. हर पुरस्कार के साथ विजेता की उपलब्धियों से जुड़ा अरबी का एक हस्तलिखित प्रमाणपत्र, एक 24 कैरेट 200 ग्राम सोने का स्मारक पदक और 2,00,000 डॉलर की पुरस्कार राशि दी जाती है.
पुरस्कार समारोह में देश के मंत्री, शाही परिवार के सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद् और प्रतिष्ठित विद्वान मौजूद थे. नाइक ने समारोह के दौरान दिखाई गई एक वीडियो बायोग्राफी में कहा था कि 'इस्लाम एकमात्र धर्म है जो पूरी मानवता के लिए शांति ला सकता है। .वर्तमान में जो यह 1 करोड 32 लाख रूपए से अधिक की राशि होती है यह जाकिर नायक द्वारा पीस टीवी नेटवर्क के वक्फ में दे दान कर दी गयी।
डॉ जाकिर नायक इस्लामी दृष्टिकोण स्पष्ट करने के लिए कारण, तर्क और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ साथ साथ अपनी अच्छी याददाश्त से कुरआन, प्रामाणिक हदीस और अन्य धार्मिक ग्रंथों का उपयोग हवालों के साथ करके, इस्लाम के बारे में दूसरों की गलतफहमी को दूर करना चाहते हैं । वार्ता के बाद दर्शकों से उत्पन्न चुनौतीपूर्ण प्रश्नों को समझाने के दिए गए उनके उत्तर बेहद पसंद किए जाते हैं।
ज़ाकिर नायक अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, आस्टे्लिया, चाईना सहित 30 से अधिक देशों में प्रोगराम में अपने फन का मुजाहिरा लाखों की भीड के सामने कर चुके हैं।
ज़ाकिर नायक अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, आस्टे्लिया, चाईना सहित 30 से अधिक देशों में प्रोगराम में अपने फन का मुजाहिरा लाखों की भीड के सामने कर चुके हैं।
इंग्लिश समाचार पत्र 'इंडियन एक्सप्रेस' ने हिन्दुस्तान के करोंडों मुसलमानों में से टाप 100 ताकतवर मुसलमानों 2009 की लिस्ट में 82 और 2010 ई. में 89 नम्बर पर रखा था, 2009 के हिंदुस्तान के टाप के दस आध्यात्मिक गुरुओं में उनको तीसरा नम्बर दिया गया तो 2010 में सबसे ऊपर जाकिर नायक का नाम दिया गया।
डॉ विलियम कैम्पबेल के साथ उनका सार्वजनिक संवाद, 1 अप्रैल 2000 को "कुरआन और विज्ञान के प्रकाश में बाईबिल" विषय पर शिकागो, संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित एक प्रोगराम में हुआ, इस संवाद को मुस्लिम दुनिया में बेहद पसंद किया गया, प्रमुख हिंदू गुरू श्री श्री रवि शंकर के साथ उनकी आपसी बातचीत, "पवित्र ग्रंथों के प्रकाश में हिंदू धर्म और इस्लाम में ईश्वर की अवधारणा' को विषय को देखते हुए दोनों धर्मों के मानने वालों में पसंद किया गया । यह धार्मिक गुरूओं से बातचीत ऑनलाइन मक़बूल होने के पश्चात अब उर्दू,हिंदी और इंग्लिश में छप भी चुकी हैं।
“Deedat Plus”
शेख अहमद दीदात इस्लाम और तुलनात्मक धर्म पर विश्व प्रसिद्ध वक्ता ने 1994 में इस्लाम की दावत और तुलनात्मक धर्म पर नायक के अध्ययन पर एवार्ड देते हुए जाकिर नायक को "दीदात प्लस" कहते हुए कहा कि ', अल्हम्दु लिल्लाह,बेटा जितना काम तुमने 4 साल में कर दिखाया इतना काम करने में मुझे 40 साल लग गए थे'
शेख अहमद दीदात इस्लाम और तुलनात्मक धर्म पर विश्व प्रसिद्ध वक्ता ने 1994 में इस्लाम की दावत और तुलनात्मक धर्म पर नायक के अध्ययन पर एवार्ड देते हुए जाकिर नायक को "दीदात प्लस" कहते हुए कहा कि ', अल्हम्दु लिल्लाह,बेटा जितना काम तुमने 4 साल में कर दिखाया इतना काम करने में मुझे 40 साल लग गए थे'
दुबई के शासक के प्रधानमंत्री ने 29 जुलाई 2013 को डॉ जाकिर नाइक को प्रतिष्ठित दुबई अंतर्राष्ट्रीय पवित्र कुरआन एवार्ड अर्थात '2013 का इस्लामी व्यक्तित्व' और मीडिया, शिक्षा और परोपकार में विश्व स्तर पर इस्लाम और मुसलमानों के लिए काम पर प्रशस्ति पत्र और 272,000 अमेरिकन डालर दिए गए जिन्हें जाकिर नायक ने पीस टीवी नेटवर्क में देकर उससे वक़्फ़ फंड शुरू करवा दिया।
मलेशिया के बादशाह द्वारा मलेशिया के सर्वोच्च पुरस्कार अर्थात गणमान्य अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व 2013 अवार्ड नायक की बेमिसाल इस्लाम की खिदमत और इस्लाम को मजबूती देने के लिए दिया गया साथ ही मलेशिया के प्रधानमंत्री द्वारा हस्ताक्षर किया गया प्रशस्ति पत्र भी 5 नवंबर 2013 में दिया गया था।
मलेशिया के बादशाह द्वारा मलेशिया के सर्वोच्च पुरस्कार अर्थात गणमान्य अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व 2013 अवार्ड नायक की बेमिसाल इस्लाम की खिदमत और इस्लाम को मजबूती देने के लिए दिया गया साथ ही मलेशिया के प्रधानमंत्री द्वारा हस्ताक्षर किया गया प्रशस्ति पत्र भी 5 नवंबर 2013 में दिया गया था।
शारजाह के शासक द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लाम के लिए स्वैच्छिक सेवा के लिए वर्ष 2013 के लिए डॉ जाकिर नाइक को 16 जनवरी 2014 को 'स्वैच्छिक कार्य के लिए शारजाह पुरस्कार 2013' दिया गया
गाम्बिया गणराज्य के राष्ट्रपति 15 अक्टूबर 2014 को 'गाम्बिया गणराज्य के राष्ट्रीय आदेश के कमांडर का प्रतीक चिन्ह 2015' सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार से डॉ जाकिर नाइक को सम्मानित किया साथ ही गाम्बिया के विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा, उनके उत्कृष्ट योगदान और ज्ञान के प्रसार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामुदायिक सेवाओं के अनुसंधान और प्रसव को बढ़ावा देने के लिए डाक्टरेट की मानद उपाधि दी गयी
फेसबुक पेज पर जून 2015 तक की स्थिति के अनुसार, डॉ जाकिर नाईक पेज को दो वर्ष में अल्हम्दु लिल्लाह 8 लाख लाइक मिले, यह न केवल धर्म पर अंग्रेजी में बोलने वाले मुसलमानों के बीच सबसे अधिक में से एक है बल्कि किसी भी अंग्रेजी वक्ता के बीच सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है, यूट्यूब उपाध्यक्ष, टॉम पिकेट, ने बताया है कि यूटयूब पर जाकिर नायक पर लाइक यानि पसंद ओर लोकप्रियता बहुत अच्छी है।
डॉ जाकिर नाइक दुनिया के 200 से अधिक देशों में कई अंतरराष्ट्रीय टीवी चैनलों पर नियमित रूप से दिखाई देते हैं। नियमित रूप से टीवी और रेडियो साक्षात्कार के लिए उन्हें आमंत्रित किया जाता है। संवाद, बहस और संगोष्ठियों के एक सौ से अधिक डीवीडी उपलब्ध हैं। इस्लाम और तुलनात्मक धर्म पर कई किताबें भी लिखी है।
दूसरों तक आसानी से इस्लाम का पैगाम पहुंचाने के लिए पीस टीवी नेटवर्क डॉ जाकिर नायक की सोच का नतीजा है, जनवरी 2006 में पीस टीवी अंग्रेजी में भी शुरू किया गया, 100 मिलियन से अधिक दर्शकों की संख्या के साथ, वर्तमान में दुनिया में 'किसी भी धार्मिक' उपग्रह टीवी चैनल पर यह सबसे अधिक दर्शेकों की संख्या हैं जिनमें 25% गैर-मुसलमान हैं, इस सफलता को देखते हुए 2009 में पीस टीवी उर्दू और 2011 में बंग्ला भाषा में शुभारंभ किया गया, 2015 के अंत तक चीनी भाषा सहित विश्व की प्रमुख भाषाओ में भी पीस टीवी अपनी सेवा आरम्भ कर रहा है । परदे बारे में नायक का एक सवाल के उत्तर में कहना था कि तीन सैंकिंड से अधिक महिला का चहरा पीस टी वी पर नहीं दिया जाता जिससे पहली नजर माफ वाली बात पर अमल हो सके।
पीस टीवी का लाइसेंस अरब अमीरात से लिया गया था भारत में इसकी सफलताओं को देखते हुए विरोधियों ने इस पर पाबंदियां लगवायी आज केबल आप्रेटर गंदा या नंगा चैनल दिखा देता है मगर पीस टीवी के लिए बताया जाता है कि डी एम की मंजूरी जरूरी है ,पीस कान्फ्रेंस भी बेहद कामयाबी के साथ जारी थी कि उसको भी विरोधियों ने बंद करवादिया अब इधर हालत यह है कि भारत में सभी तरह के लोग अपने प्रोगराम कर सकते हैं लेकिन जाकिर नायक कोई प्रोगराम नहीं कर सकता, वैसे इसके भी अच्छे नतीजे रहे कि जाकिर नायक भारत के लिए काफी काम कर चुके अब जरूरत थी विश्व स्तर पर काम करने की तो उसका मौका पाबंदियों से मिल गया।
पीस टीवी पर हो jरही पाबंदियों को देखते हुए पीस मोबाइल लांच किया गया है जिस में मुसलमान की जरूरतों का पूरा खयाल रखा गया है ।
आर्य समाजी महेंद्रपाल द्वारा चैलंज पर दोनों ओर के समर्थर्कों का विवाद डा. मुहम्मद असलम कासमी की पुस्तक
"महेन्द्रपाल आर्य बनाम कथित महबूब अली" के द्वारा उठाई गयी आपत्तियों की विश्लेषणात्मक समीक्षा
से आसानी से समझा जा सकता है, असलम कासमी लिखते हैं
"महेन्द्रपाल आर्य बनाम कथित महबूब अली" के द्वारा उठाई गयी आपत्तियों की विश्लेषणात्मक समीक्षा
से आसानी से समझा जा सकता है, असलम कासमी लिखते हैं
श्रीमान महेंद्रपाल जी के द्वारा इन्टरनेट पर एक वीडियो डाली गयी है जिसका शीर्षक है महेंन्द्रपाल ने डाक्टर ज़ाकिर नायक के उस्ताद अब्दुल्लाह तारिक को हराया।
पहली बात तो यह है कि उक्त विडियो जिस प्रोग्राम की है वह कोई शास्त्रार्थ का प्रोगराम नहीं था अपितु आपसी भाईचारे पर आधारित प्रोग्राम था और अगर महेंद्रपाल जी उसे शास्त्रार्थ ही का प्रोग्राम मानते हैं तो फिर बताएं उसमें जज किसे नियुक्त किया गया था, उसमें अधिक संख्या महेन्द्रपाल जी के अनुयाईयों की थी उन्होंने ही प्रोग्राम का आयोजन किया था, और अब्दुल्लाह तारिक को बतौर अतिथि बुलाया गया था।
अब्दुल्लाह तारिक रियासत रामपुर के रहने वाले मशहूर इस्लामी स्कालर हैं उनके प्रोग्राम पीस टीवी से प्रसारित होते रहते हैं। परन्तु जाक़िर नायक से उनका कोई गुरू-शिषय का संबंध नहीं है बल्कि उनकी जाक़िर नायक से एक दो मुलाकातों के अलावा अन्य कोई राबता नहीं है। ऐसे में उनको ज़ाकिर नायक का उस्ताद लिखना केवल अज्ञानता है।
जहाँ तक उनको हराने की बात है। नेट पर मौजूद विडियो में ऐसी कोई बात नहीं दिखती। महेंद्रपाल और अब्दुल्लाह तारिक की बातचीत की इस विडियो को देखकर लगता है कि महेंद्रपाल सच्चाई को जानने समझने और सही बात को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है बल्कि आक्रमक अंदाज में बेवजह चीख रहे हैं। जबकि अब्दुल्लाह तारिक सभ्यता और शाइस्तगी से बात समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
पहली बात तो यह है कि उक्त विडियो जिस प्रोग्राम की है वह कोई शास्त्रार्थ का प्रोगराम नहीं था अपितु आपसी भाईचारे पर आधारित प्रोग्राम था और अगर महेंद्रपाल जी उसे शास्त्रार्थ ही का प्रोग्राम मानते हैं तो फिर बताएं उसमें जज किसे नियुक्त किया गया था, उसमें अधिक संख्या महेन्द्रपाल जी के अनुयाईयों की थी उन्होंने ही प्रोग्राम का आयोजन किया था, और अब्दुल्लाह तारिक को बतौर अतिथि बुलाया गया था।
अब्दुल्लाह तारिक रियासत रामपुर के रहने वाले मशहूर इस्लामी स्कालर हैं उनके प्रोग्राम पीस टीवी से प्रसारित होते रहते हैं। परन्तु जाक़िर नायक से उनका कोई गुरू-शिषय का संबंध नहीं है बल्कि उनकी जाक़िर नायक से एक दो मुलाकातों के अलावा अन्य कोई राबता नहीं है। ऐसे में उनको ज़ाकिर नायक का उस्ताद लिखना केवल अज्ञानता है।
जहाँ तक उनको हराने की बात है। नेट पर मौजूद विडियो में ऐसी कोई बात नहीं दिखती। महेंद्रपाल और अब्दुल्लाह तारिक की बातचीत की इस विडियो को देखकर लगता है कि महेंद्रपाल सच्चाई को जानने समझने और सही बात को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है बल्कि आक्रमक अंदाज में बेवजह चीख रहे हैं। जबकि अब्दुल्लाह तारिक सभ्यता और शाइस्तगी से बात समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
दूसरी बात यह कि आर्य समाजी महेंद्रपाल के समर्थकों को पता नहीं कि नेट में उपलब्ध विडियो में पंडित जी स्वयं यह बता रहे हैं कि जाकिर नायक ने पंडित महिंद्रपाल को 2004 में सम्मेलन में मुम्बई में सादर आमंत्रित किया था मगर पंडित जी नहीं पहुंचे,
शियाओं से विवाद
जाकिर नायक की शिया मुफती से टी वी पर बहस सुनने से पता चलता है कि वो देवलबंद, जमाते इस्लामी, अहले हदीस आदि से फतवा मंगा चुके, उन फतवों में उन्हें यह जवाब दिया गया कि वो यजीद के लिए दुआओं के अल्फाज कह सकते हैं, किसी ने मुस्तहिब कहा है मना किसी ने नहीं किया, फतवों को देख कर नायक का कहना है कि वो आलिमों को कहना मानेंगे, जिन्होंने मना नहीं किया, उनका इस बातचीत में यह भी कहना था कि हदीस के मुताबिक जो उस जंग में शरीक हुआ वो जन्नती है, यजीद के बारे में गवाही है कि वो उस जंग में कमांडर थे, अर्थात हजूर की बशारत के मुताबिक जन्नती हुए, इस लिए नाम के साथ दुआओं के अलफाज के हकदार हैं, इमाम गजाली और बुखारी शरीफ की शरह लिखने वाले हाफिज असकलानी से भी उन्होंने बताया कि उनका कहना है कि यजीद मुसलमान था, यह भी कहा कि हम जब मुसलमानों के लिए दुआ करते हैं तो सबके साथ उसमें वो भी शरीक होते हैं, यह भी कहा कि वो हजरत हुसैन को पूरी इज्जत देते हैं जिसने उनका कतल किया उसको बुरा समझते हैं, लेकिन उस समय यजीद या उस समय की पूरी मुस्लिम फौज को बुरा कहना गलत मानते हैं साथ ही यह भी कहा कि हदीस के मुताबिक अगर हम किसी गलत आदमी के लिए दुआ करते हैं तो वो लगती नहीं और अगर सही आदमी को लानत भेजते हैं तो वो वापस आती है इस लिए लानत भेजने वालों को गोर करने की जरूरत है कि वो सही या गलत पर लानत भेज रहे हैं, उनका यह भी कहना था कि शिया हजरात मुझे बदनाम करने का कुछ बहाना ढूंडते रहते हैं जबकि वो शिया-सुन्नी इखतलाफी बातों से बचते रहते हैं कि अगर वो कुछ कहेंगे तो शिया हजरात को जवाब देना में मुश्किल होगी
जाकिर नायक की शिया मुफती से टी वी पर बहस सुनने से पता चलता है कि वो देवलबंद, जमाते इस्लामी, अहले हदीस आदि से फतवा मंगा चुके, उन फतवों में उन्हें यह जवाब दिया गया कि वो यजीद के लिए दुआओं के अल्फाज कह सकते हैं, किसी ने मुस्तहिब कहा है मना किसी ने नहीं किया, फतवों को देख कर नायक का कहना है कि वो आलिमों को कहना मानेंगे, जिन्होंने मना नहीं किया, उनका इस बातचीत में यह भी कहना था कि हदीस के मुताबिक जो उस जंग में शरीक हुआ वो जन्नती है, यजीद के बारे में गवाही है कि वो उस जंग में कमांडर थे, अर्थात हजूर की बशारत के मुताबिक जन्नती हुए, इस लिए नाम के साथ दुआओं के अलफाज के हकदार हैं, इमाम गजाली और बुखारी शरीफ की शरह लिखने वाले हाफिज असकलानी से भी उन्होंने बताया कि उनका कहना है कि यजीद मुसलमान था, यह भी कहा कि हम जब मुसलमानों के लिए दुआ करते हैं तो सबके साथ उसमें वो भी शरीक होते हैं, यह भी कहा कि वो हजरत हुसैन को पूरी इज्जत देते हैं जिसने उनका कतल किया उसको बुरा समझते हैं, लेकिन उस समय यजीद या उस समय की पूरी मुस्लिम फौज को बुरा कहना गलत मानते हैं साथ ही यह भी कहा कि हदीस के मुताबिक अगर हम किसी गलत आदमी के लिए दुआ करते हैं तो वो लगती नहीं और अगर सही आदमी को लानत भेजते हैं तो वो वापस आती है इस लिए लानत भेजने वालों को गोर करने की जरूरत है कि वो सही या गलत पर लानत भेज रहे हैं, उनका यह भी कहना था कि शिया हजरात मुझे बदनाम करने का कुछ बहाना ढूंडते रहते हैं जबकि वो शिया-सुन्नी इखतलाफी बातों से बचते रहते हैं कि अगर वो कुछ कहेंगे तो शिया हजरात को जवाब देना में मुश्किल होगी
उपरोक्त टीवी बहस में इस बात की ओर इशारा है कि इमाम गजाली फरमाते हैं '' यजीद की तरफ से हजरत हुसैन (रजिअल्लाह अन्हू) को कतल करना, या उनके कतल करने का हुकुम देना या उनके कतल पर राजी होना, तीनों बातें दुरूस्त नहीं और जब यह बातें यजीद के मुताल्लिक साबित ही नहीं तो फिर यह भी जायज नहीं कि उसके मुताल्लिक ऐसी बदगुमानी रखी जाए क्यूंकि कुरआन मजीद में अल्लाह का फरमान है कि मुसलमान के मुताल्लिक बदगुमानी हराम है, ( बहवाला मिनहाजु सुन्नत, जिल्द 4, पृष्ठ 5455)
शायद इन सब बातों को देखते हुए ही रामपुर के अब्दुल्लाह तारिक के साथ मौलाना सलमान नदवी भी नायक के पीस टी वी चैनल से जुड चुके हैं, नए मुस्लमान हुई कई विश्व में नाम कमा चुकी हस्तियां पहले ही चैनल से जुडे हुए हैं। पब्लिक में जो शंका थी वो सऊदी बादशाह द्वारा इस्लाम की गेर मामूली खिदमात पर किंग फेसल इनाम 2015 मिलने से दूर हो गयी, यह किंग फेसल इनाम अली मियां को भी मिल चुका है।
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