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फतेहपुर सीकरी (उर्दू: فتحپور سیکری), Fatehpur Sikri एक नगर है जो कि आगरा जिला का एक नगरपालिका बोर्ड है। यह भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है,। यह यहाँ के मुगल साम्राज्य में अकबर के राज्य में 1571 से 1585 तक, फिर इसे खाली कर दिया गया, शायद पानी की कमी के कारण। फतेहपुर सीकरी हिंदू और मुस्लिम वास्तुशिल्प के मिश्रण का सबसे अच्छा उदाहरण है। फतेहपुर सीकरी मस्जिद के बारे में कहा जाता है कि यह मक्का की मस्जिद की नकल है और इसके डिजाइन हिंदू और पारसी वास्तुशिल्प से लिए गए हैं। मस्जिद का प्रवेश द्वार 54 मीटर ऊँचा बुलंद दरवाजा है जिसका निर्माण 1570 ई० में किया गया था। मस्जिद के उत्तर में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह है जहाँ नि:संतान महिलाएँ दुआ मांगने आती हैं।
आंख मिचौली, दीवान-ए-खास, बुलंद दरवाजा, पांच महल, ख्वाबगाह, अनूप तालाब फतेहपुर सीकरी के प्रमुख स्मारक हैं।
प्राचीन इतिहासकारो के अनुसार अकबर को फतेहपुर सिकरी बनाते समय काफी रूचि थी और उन्होंने शहर की कई जगहों को अपनी पसंदीदा कलाकृतियों से भी सजाया है. फतेहपुर सिकरी की बहोत सी इमारतों का निर्माण लाल पत्थरो से किया गया था. अकबर द्वारा बनाये शाही महल में भी उन्होंने बहोत से कलाकृतिया की है. अरेबियन, पर्शियन और एशियन तीनो तरह की कलाकृतियों और संस्कृतीयो का समावेश उन्होंने अपने महलो में किया है. फतेहपुर सिकरी के सभी स्मारक शहंशाह अकबर की महानता और उनके पराक्रमो को दर्शाते है, इस तरह की सुन्दर कला शायद ही आपको और कही देखने मिलेगी.ये उस समय दुनिया का सबसे आलीशान और महंगा शहर था -
1585 में इस शाही कॉम्पलेक्स को छोड़ दिया गया था, कहा जाता है की इसके पूर्ण होने के तुरंत बाद राजपूतो के उत्तर-दक्षिण भाग के बढ़ने की वजह से और आपसी मतभेद होने के कारण इसे छोड़ दिया गया था. और इसी वजह से बाद में अकबर की राजधानी को लाहौर में स्थानांतरित किया गया था. 1598 में अकबर वापिस आगरा लौट आये थे और डेक्कन पर अपना ध्यान केंद्रित करने लगे थे. 1601 से पहले वे कभी दोबारा उस शहर में लौटकर नही आये थे. बाद में कुछ समय बाद मुगल सम्राट मुहम्मद शाह (1719-1748) और उनके सहयोगी सईद हुसैन अली खान बारहा ने इसे हासिल कर लिया था लेकिन 1720 में उनकी हत्या कर दी गयी थी. मुगलो के दिल्ली चले जाने के बाद मराठाओ ने उसे हासिल कर लिया था, और बाद में उन्हें ब्रिटिश आर्मी ने हथिया लिया था, ब्रिटिश आर्मी महलो को अपना हेडक्वार्टर बनाकर उनका उपयोग करती थी. बाद में लॉर्ड कर्जन ने इसकी मरम्मत कराई थी.
शाही महल का उपयोग लोग सदियो तक करते थे महल के आस-पास के भागो का उपयोग भी लोग कर रहे थे. लेकिन फिर भी सुरक्षा को देखते हुए महल की तीन बाजुओ पर पाँच मील लंबी तीन दीवारे बनाई गयी थी. लेकिन फिर भी महल में बनी मस्जिद और कॉम्पलेक्स का लोग उपयोग करते थे. महल के नजदीक ही शहर के पास नौबत खाना बाजार भी हुआ करता था और आगरा रोड के प्रवेश द्वार पे भी एक ‘ड्रम हाउस’ था. वर्तमान शहर कॉम्पलेक्स के दक्षिणी भाग पर बना हुआ है, 1865 से 1904 तक वहाँ नगर पालिका भी थी और बाद में शहर को एक सीमा क्षेत्र तक ही सिमित रखा गया और 1901 में वहाँ की जनसंख्या तकरीबन 7147 थी. लंबे समय तक इसे अकबर की राजगिरी और उसके द्वारा बनवाई गयी पत्थरो की मूर्तियो के लिये ही जाना जाता था और उस समय यह शहर ‘बालो से बने कपडे’ और ‘रेशम की कटाई’ के लिये भी जाना जाता था. आज भी सिकरी ग्राम फतेहपुर के पास ही स्थित है.
आंख मिचौली, दीवान-ए-खास, बुलंद दरवाजा, पांच महल, ख्वाबगाह, अनूप तालाब फतेहपुर सीकरी के प्रमुख स्मारक हैं।
अकबर नि:संतान था। संतान प्राप्ति के सभी उपाय असफल होने पर उसने सूफी संत शेख सलीम चिश्ती से प्रार्थना की। इसके बाद पुत्र जन्म से खुश और उत्साहित अकबर ने यहाँ अपनी राजधानी बनाने का निश्चय किया। लेकिन यहाँ पानी की बहुत कमी थी इसलिए केवल 14 साल बाद ही राजधानी को पुन: आगरा ले जाना पड़ा।
1585 में इस शाही कॉम्पलेक्स को छोड़ दिया गया था, कहा जाता है की इसके पूर्ण होने के तुरंत बाद राजपूतो के उत्तर-दक्षिण भाग के बढ़ने की वजह से और आपसी मतभेद होने के कारण इसे छोड़ दिया गया था. और इसी वजह से बाद में अकबर की राजधानी को लाहौर में स्थानांतरित किया गया था. 1598 में अकबर वापिस आगरा लौट आये थे और डेक्कन पर अपना ध्यान केंद्रित करने लगे थे. 1601 से पहले वे कभी दोबारा उस शहर में लौटकर नही आये थे. बाद में कुछ समय बाद मुगल सम्राट मुहम्मद शाह (1719-1748) और उनके सहयोगी सईद हुसैन अली खान बारहा ने इसे हासिल कर लिया था लेकिन 1720 में उनकी हत्या कर दी गयी थी. मुगलो के दिल्ली चले जाने के बाद मराठाओ ने उसे हासिल कर लिया था, और बाद में उन्हें ब्रिटिश आर्मी ने हथिया लिया था, ब्रिटिश आर्मी महलो को अपना हेडक्वार्टर बनाकर उनका उपयोग करती थी. बाद में लॉर्ड कर्जन ने इसकी मरम्मत कराई थी.
शाही महल का उपयोग लोग सदियो तक करते थे महल के आस-पास के भागो का उपयोग भी लोग कर रहे थे. लेकिन फिर भी सुरक्षा को देखते हुए महल की तीन बाजुओ पर पाँच मील लंबी तीन दीवारे बनाई गयी थी. लेकिन फिर भी महल में बनी मस्जिद और कॉम्पलेक्स का लोग उपयोग करते थे. महल के नजदीक ही शहर के पास नौबत खाना बाजार भी हुआ करता था और आगरा रोड के प्रवेश द्वार पे भी एक ‘ड्रम हाउस’ था. वर्तमान शहर कॉम्पलेक्स के दक्षिणी भाग पर बना हुआ है, 1865 से 1904 तक वहाँ नगर पालिका भी थी और बाद में शहर को एक सीमा क्षेत्र तक ही सिमित रखा गया और 1901 में वहाँ की जनसंख्या तकरीबन 7147 थी. लंबे समय तक इसे अकबर की राजगिरी और उसके द्वारा बनवाई गयी पत्थरो की मूर्तियो के लिये ही जाना जाता था और उस समय यह शहर ‘बालो से बने कपडे’ और ‘रेशम की कटाई’ के लिये भी जाना जाता था. आज भी सिकरी ग्राम फतेहपुर के पास ही स्थित है.
