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हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी (Hubble Space Telescope (HST)) वास्तव में एक खगोलीय दूरदर्शी है जो अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह के रूप में स्थित है, इसे 25 अप्रैल सन् 1990 में अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी की मदद से इसकी कक्षा में स्थापित किया गया था | हबल दूरदर्शी को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ' नासा ' ने यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से तैयार किया था | अमेरिकी खगोलविज्ञानी एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इसे ' हबल ' नाम दिया गया |यह नासा की प्रमुख वेधशालाओं में से एक है |पहले इसे वर्ष 1983 में लांच करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों और बजट समस्याओं के चलते इस परियोजना में सात साल की देरी हो गई | वर्ष 1990 में इसे लांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इसके मुख्य दर्पण में कुछ खामी रह गई, जिससे यह पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा है | वर्ष 1990 में इसके पहले सर्विसिंग मिशन पर भेजे गए वैज्ञानिकों ने इस खामी को दूर किया| यह एक मात्र दूरदर्शी है, जिसे अंतरिक्ष में ही सर्विसिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया है | वर्ष 2001 में संपन्न पिछले सर्विसिंग मिशन के बाद उम्मीद है कि यह वर्ष 2020 तक काम करता रहेगा, जिसके बाद जेम्स वेब खगोलीय दूरदर्शी को लांच करने कि योजना है |
हब्बल दूरबीन काम केसे करती है --
हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला से चित्र लेना किसी साधारण रंगीन कैमरे से चित्र लेने से कंही ज्यादा जटिल है। हब्बल रंगीन फिल्म का प्रयोग नही करता है। तथ्य यह है कि हब्बल फिल्म का प्रयोग ही नही करता है। इसके कैमरे ब्रह्माण्ड के प्रकाश को अपने विभिन्न इलेक्ट्रानिक उपकरणो के प्रयोग से दर्ज करते है। ये इलेक्ट्रानिक उपकरण इन ब्रह्माण्डीय चित्रो को रंगीन की बजाये काले-सफेद के मध्य के शेडो मे बनाते है।
अंतिम रंगीन चित्र वास्तविकता मे दो या दो से ज्यादा श्वेत-श्याम चित्रो के मिश्रण से निर्मित होते है, जिनमे चित्र के संसाधन(Image Processing) के दौरान रंग जोड़े जाते है।
हब्बल के चित्रो के रंग को विभिन्न कारणों से निर्धारित किया जाता है। कुछ स्थितियो मे ये चित्र किसी अंतरिक्ष यान की यात्रा से देखी गयी छवि से भिन्न हो सकते है। ऐसा इसलिये है कि हम रंगो को उस पिंड की विभिन्न विशेषताओं को उभार कर दिखाने के लिये एक उपकरण की तरह प्रयोग करते है क्योंकि मानव आंखे सभी रंगो को देख पाने या उनमे अंतर कर पाने मे असमर्थ होती है।
एक साधारण चित्र मे हब्बल लाल, हरे और निले फिल्टरो मे से एक समय मे एक फिल्टर का प्रयोग कर तीन श्वेत श्याम चित्र लेता है। इसके बाद दृश्य चित्र अर्थात आंखो से दिखायी देने वाले दृश्य के निर्माण के लिए इन श्वेत श्याम चित्रो मे रंगो का निर्धारण होता है। लाल फिल्टर से लिए गये चित्र मे लाल रंग दिया जाता है, हरे फिल्टर के वाले चित्र लिये हरा, निले फिल्टर वाले चित्र के लिए निला। अंत मे इन तीनो चित्रो के मिश्रण से अंतिम चित्र बनता है। यह चित्र उस पिंड की वास्तविक दृश्य छवी के समीप होता है।
हब्बल दूरबीन काम केसे करती है --
हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला से चित्र लेना किसी साधारण रंगीन कैमरे से चित्र लेने से कंही ज्यादा जटिल है। हब्बल रंगीन फिल्म का प्रयोग नही करता है। तथ्य यह है कि हब्बल फिल्म का प्रयोग ही नही करता है। इसके कैमरे ब्रह्माण्ड के प्रकाश को अपने विभिन्न इलेक्ट्रानिक उपकरणो के प्रयोग से दर्ज करते है। ये इलेक्ट्रानिक उपकरण इन ब्रह्माण्डीय चित्रो को रंगीन की बजाये काले-सफेद के मध्य के शेडो मे बनाते है।
अंतिम रंगीन चित्र वास्तविकता मे दो या दो से ज्यादा श्वेत-श्याम चित्रो के मिश्रण से निर्मित होते है, जिनमे चित्र के संसाधन(Image Processing) के दौरान रंग जोड़े जाते है।
हब्बल के चित्रो के रंग को विभिन्न कारणों से निर्धारित किया जाता है। कुछ स्थितियो मे ये चित्र किसी अंतरिक्ष यान की यात्रा से देखी गयी छवि से भिन्न हो सकते है। ऐसा इसलिये है कि हम रंगो को उस पिंड की विभिन्न विशेषताओं को उभार कर दिखाने के लिये एक उपकरण की तरह प्रयोग करते है क्योंकि मानव आंखे सभी रंगो को देख पाने या उनमे अंतर कर पाने मे असमर्थ होती है।
एक साधारण चित्र मे हब्बल लाल, हरे और निले फिल्टरो मे से एक समय मे एक फिल्टर का प्रयोग कर तीन श्वेत श्याम चित्र लेता है। इसके बाद दृश्य चित्र अर्थात आंखो से दिखायी देने वाले दृश्य के निर्माण के लिए इन श्वेत श्याम चित्रो मे रंगो का निर्धारण होता है। लाल फिल्टर से लिए गये चित्र मे लाल रंग दिया जाता है, हरे फिल्टर के वाले चित्र लिये हरा, निले फिल्टर वाले चित्र के लिए निला। अंत मे इन तीनो चित्रो के मिश्रण से अंतिम चित्र बनता है। यह चित्र उस पिंड की वास्तविक दृश्य छवी के समीप होता है।
