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दुनिया के अंत की हजारो भविष्यवाणी हो चुकी है ,इनमे से कुछ तो गलत साबित हो गयी है और कुछ गलत साबित होना बाकि है , लेकिन कुछ भी हो दुनिया का अंत केसे होगा और कब होगा इस बात की जिज्ञासा इन्सान में जब से है ,तब इन्सान ने समझना शुरू किया था और ये जिज्ञासा तब तक रहेगी जब तक दुनिया खत्म नही होजाती ,हर धर्म में ऐसी बाते कही गयी है की दुनिया का अंत या कयामत ,प्रलये इस तरह आएगी ,लेकिन हम इस बारे में बात नही करेंगे ,,हम तो विज्ञानं क्या कहता है इस बारे में ये जानेगे की विज्ञानं के नजरिये से दुनिया अंत या प्रलय और कयामत केसे आएगी , आज विज्ञान यह मालूम कर चुका है कि ब्रह्माण्ड फैल रहा है। और फैलने की यह रफ्तार लगातार बढ़ रही है। लेकिन इस फैलाव का भी एक अंत होना चाहिए। फैलते फैलते आखिर में वह किस शक्ल में होगा, कहां तक जायेगा, इस बारे में विज्ञान किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहा है, और तीन अलग अलग थ्योरीज पेश कर रहा है।
पहली थ्योरी बिग फ्रीज़ (Big Freeze Theory) या हीट डेथ (Heat Death Theory)
इस नज़रिये के मुताबिक यूनिवर्स फैलते हुए धीरे धीरे ठंडा होता जायेगा और साथ ही उसके विस्तार की गति भी धीमी पड़ती जायेगी। आखिर में ठंडक की सबसे निचली हालत (Absolute Zero) में पहुंच जायेगा। उस वक्त ब्रह्माण्ड को गति देने वाली पूरी ऊर्जा खत्म हो जायेगी और उसकी हर चीज़ स्थिर हो जायेगी, अपनी जगंह पर रुक जायेगी। कुछ इस तरंह जैसे किसी ठंडे देश में बर्फीले तूफान के बाद सब कुछ बर्फ में जम कर रह जाये।
दूसरी थ्योरी बिग रिप (Big Rip Theory)
जिसमें ब्रह्माण्ड के फैलने की रफ्तार धीरे धीरे बढ़ती जायेगी और इस वजह से ब्रह्माण्ड के सभी पिण्ड टूटकर बिखरने लगेंगे और आखिर में एक दूसरे से अलग बिखरे हुए मूल कण यानि इलेक्ट्रान, प्रोटान इत्यादि ही बाकी रह जायेंगे। ये मूल कण फिर एक दूसरे को खत्म करने लगेंगे नतीजे में मिलेगा एक ऐसा ब्रह्माण्ड जिसमें कुछ नहीं होगा। कुछ इस तरंह जैसे हवा में बहुत से साबुन के बुलबुले बिखरे हुए हों और ये बुलबुले धीरे धीरे फूटकर खत्म हो जायें। इस ब्रह्माण्ड को सिंगुलैरिटी (Singularity) कहा गया है। यह थ्योरी सन 2003 में प्रस्तुत की गयी थी
तीसरी थ्योरी बिग क्रन्च (Big Crunch)
जिसके अनुसार एक समय आयेगा जब ब्रह्माण्ड का फैलना रुक जायेगा और फिर वह सिकुड़ना शुरू हो जायेगा और आखिरकार वह उसी स्टेज पर पहुंच जायेगा जहाँ वह बिग बैंग से पहले था। फिर पैदा होगा एक नया ब्रह्माण्ड एक नये बिग बैंग के द्वारा। फैलने सिकुड़ने और नये ब्रह्माण्डों के बनने की प्रक्रिया लगातार इसी तरंह चलती रहेगी। वर्तमान में जो भी तथ्य मिल रहे हैं उनसे यही मालूम हो रहा है कि ब्रह्माण्ड के फैलने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। लेकिन जो ऊर्जा इस काम को अंजाम दे रही है उसके बारे में विज्ञान अँधेरे में है। हो सकता है कभी इस ऊर्जा का मिजाज़ बदल जाये और वह ब्रह्माण्ड को सिकोड़ना शुरू कर दे।
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दूसरी थ्योरी बिग रिप (Big Rip Theory)
जिसमें ब्रह्माण्ड के फैलने की रफ्तार धीरे धीरे बढ़ती जायेगी और इस वजह से ब्रह्माण्ड के सभी पिण्ड टूटकर बिखरने लगेंगे और आखिर में एक दूसरे से अलग बिखरे हुए मूल कण यानि इलेक्ट्रान, प्रोटान इत्यादि ही बाकी रह जायेंगे। ये मूल कण फिर एक दूसरे को खत्म करने लगेंगे नतीजे में मिलेगा एक ऐसा ब्रह्माण्ड जिसमें कुछ नहीं होगा। कुछ इस तरंह जैसे हवा में बहुत से साबुन के बुलबुले बिखरे हुए हों और ये बुलबुले धीरे धीरे फूटकर खत्म हो जायें। इस ब्रह्माण्ड को सिंगुलैरिटी (Singularity) कहा गया है। यह थ्योरी सन 2003 में प्रस्तुत की गयी थी
तीसरी थ्योरी बिग क्रन्च (Big Crunch)
जिसके अनुसार एक समय आयेगा जब ब्रह्माण्ड का फैलना रुक जायेगा और फिर वह सिकुड़ना शुरू हो जायेगा और आखिरकार वह उसी स्टेज पर पहुंच जायेगा जहाँ वह बिग बैंग से पहले था। फिर पैदा होगा एक नया ब्रह्माण्ड एक नये बिग बैंग के द्वारा। फैलने सिकुड़ने और नये ब्रह्माण्डों के बनने की प्रक्रिया लगातार इसी तरंह चलती रहेगी। वर्तमान में जो भी तथ्य मिल रहे हैं उनसे यही मालूम हो रहा है कि ब्रह्माण्ड के फैलने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। लेकिन जो ऊर्जा इस काम को अंजाम दे रही है उसके बारे में विज्ञान अँधेरे में है। हो सकता है कभी इस ऊर्जा का मिजाज़ बदल जाये और वह ब्रह्माण्ड को सिकोड़ना शुरू कर दे।
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