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ईश्वर कौन है , कैसा है , कहाँ रहता है और क्या क्या करता है | इस धरती और पूरे ब्रह्मांड का मालिक और रचयिता कौन है |ये सब कहा से शुरू हुवा था और कहा पर खत्म होकर जायेगा |सवाल हर सोचने समझने वाले के दिमाग में आता जरूर है|एक बात तो माननी ही पड़ेगी की सब धर्मों का मूलतत्व निचोड़ एक ही सर्वशक्तिमान रचयिता ईश्वर और ब्रह्म या कुछ भी कहो सिर्फ एक मूल तत्व की तरफ ही इशारा करता है इस तत्व को समझना बहुत ही मुश्किल है |क्यों की जितनी गहराई में जाया जाता है |उतना ही ये हमसे दूर हो जाता है कारण ये है की हमारा दिमाग या समझ हमे इस की अनुमति नही देता है | हम और हमारा दिमाग भी भोतिकी के नियमो में बन्दे हुए है | तो जानने की कोशिश करते है की सर्वशक्तिमान इश्वर कोन है , रचियता ,या मूल तत्व कोन है -
ईश्वर है भी या नहीं -
देखिये इस बात को समझाना बहुत मुश्किल है की इश्वर है या नही | क्यों की वो है भी और नही भी | में समझाता हु इश्वर हर वास्तु के कारण में तो मोजूद है लेकिन कर्ता में नही | इश्वर हमारे अन्दर तो मोजूद है लेकिन हमारे दुवारा होने वाले कार्य में नही | वो हर वास्तु में है पर उस के गुण में नही |क्यों की ये दुनिया इश्वर के हिसाब से नही चल रही लेकिन उसके कारण से चल रही है | वो न किसी को देता है न लेता है उसका कोई आकर और नाम नही | इश्वर हमारे जीवन में कोई प्रभाव नही डालता | हम कर्म करने के लिए स्वतंत्र है | इसीलिए ही तो हमारे पाप भी हमारे ही होते है इश्वर के नही | क्यों की जो इश्वर चाहता है वो नही होता प्रक्रति चाहते है वो होता है | लेकिन मूल में वो ही है तो इश्वर भी है |--
ईश्वर कैसा है कौन है कहाँ रहता है -
ईश्वर कैसा है और कौन है इस सवाल का जवाब बनता ही नही क्यों की कौन और कैसा ये शब्द भौतिक चीजों के लिए इस्तेमाल होता हैऔर इश्वर भोतिक नही वो सब कुछ होकर भी कुछ भी नही | उस मूलतत्व को परिभाषित नही किया जा सकता पर समझा जा सकता है | उस तत्व को किसी के दुवारा समझाया नही जा सकता | खुद समझा जा सकता है | जिस तत्व का कोई आकर प्रकार नाम और अस्तित्व नही उसको समझना मुश्किल है | क्यों की वो तत्व ब्रह्मांड की प्रत्यक वस्तु में वो है इसलिए उसका आकर और नाम भी उसी वास्तु की तरह हो जायेगा और जगह भी वो ही होजाएगी | पर ईश्वर उस वस्तु के गुण में नही तत्व में है | इसीलिए ही कहा जाता है की कण -कण में ईश्वर है | +
ईश्वर हर उस जगह है जहा हम सोच सकते है और वहा भी है जहा हम सोच भी नही सकते -
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ईश्वर कैसा है कौन है कहाँ रहता है -
ईश्वर कैसा है और कौन है इस सवाल का जवाब बनता ही नही क्यों की कौन और कैसा ये शब्द भौतिक चीजों के लिए इस्तेमाल होता हैऔर इश्वर भोतिक नही वो सब कुछ होकर भी कुछ भी नही | उस मूलतत्व को परिभाषित नही किया जा सकता पर समझा जा सकता है | उस तत्व को किसी के दुवारा समझाया नही जा सकता | खुद समझा जा सकता है | जिस तत्व का कोई आकर प्रकार नाम और अस्तित्व नही उसको समझना मुश्किल है | क्यों की वो तत्व ब्रह्मांड की प्रत्यक वस्तु में वो है इसलिए उसका आकर और नाम भी उसी वास्तु की तरह हो जायेगा और जगह भी वो ही होजाएगी | पर ईश्वर उस वस्तु के गुण में नही तत्व में है | इसीलिए ही कहा जाता है की कण -कण में ईश्वर है | +
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