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उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन को हुकुमत उसके दादा और पिता से विरासत में मिली. लगातार तीन पीढ़ियों से तानाशाही झेल रहा उत्तर कोरिया एक काल-कोठरी की तरह बन गया है. वहां लोगों को अपनी मर्जी या आजादी की मांग के बदले केवल मौत मिलती है. वहां किम जोंग उन की हुकुमत चलती है. आज आपको उत्तर कोरिया की कुछ ऐसी ही तानाशाही नियामों से रूबरू कराते हैं.
दादा के जन्म के समय से शुरू होता है
कैलेंडरभले ही भारत में 2017 चल रहा हो लेकिन उत्तर कोरिया ऐसा देश है जो हमसे कई साल पीछे चल रहा है. मतलब उत्तर कोरिया जैसे देश ने अपने केलेंडर की शुरूआत सन् जीसस से ना करके अपने दादा के जन्म वर्ष से सन् को आरम्भ किया है. यानी अभी कोरिया में सन् 2017 नहीं बल्कि सन् 106 चल रहा है.
पूर्वजों को भगवान मानने पर मजबूर
उत्तरी कोरिया में लोगों को तानाशाह किम जोंग उन के पूर्वजों को ही भगवान की तरह मानने को मजबूर किया जाता है. इनके दादा किम द्वितीय को भगवान मानने का सरकारी हुक्म है. इस देश की इतिहास की किताबों में किम जोंग प्रथम और किम जोंग द्वितीय की वीर गाथाएं ही पढ़ाई जाती हैं.
क्रिसमस पर यीशु मसीह नहीं, दादी की पूजा
बीते साल क्रिसमस पर किम जोंग ने नया फरमान जारी करते हुए उत्तर कोरिया के लोगों से यीशु मसीह की जगह उसकी दादी की पूजा करने को कहा. उसकी दादी सन् 1919 में क्रिसमस के दिन ही पैदा हुई थीं, इसलिए किम चाहता है कि उसकी दादी का जन्मदिन पूरा देश मनाएं.
पिता की मौत पर न रोने वालों को मौत की सजा
चार साल पहले किम के पिता किम जोंग इल की मौत के समय कई लोगों को मौत की सज़ा दी गई थी. किम जोंग उन ने फरमान सुनाया था कि जब उसके पिता का जनाजा निकलेगा तो सभी को रोना पड़ेगा. उस दिन प्योंगयांग की सड़कों पर हज़ारों लोग रो रहे थे. जो नहीं रोया उसको मौत की सजा हुई.
अपनी मर्जी से गाना ना सुनना और ना गाना
अगर आपको अपनी मर्जी का गाना ना सुनने को मिले तो आप परेशान हो जाते है. लेकिन तानाशाह किम की मर्जी के बगैर उत्तर कोरिया में कोई अपनी मर्जी से गाना तो क्या उसे सुन भी नहीं सकते हैं. यहां के गीतों में सरकार की वाहवाही होनी जरूरी है और ऐसा न होने पर उन्हें मौत की सजा भी हो सकती है.
खुद को भगवान साबित करना
किम खुद को भगवान साबित कर लोगों के दिलों पर राज करना चाहता है. किम के मुताबिक उसका जन्म दो इंद्र धनुषों के नीचे हुआ और एक सितारा आसमान में बना था. इसके साथ उसने दावा किया है कि वो मौसम में होने वाले बदलावों पर नियंत्रण कर सकता है. वहां यह भी बात फैली हुई है कि किम ने एक ओवरकोट और लेदर के जूते पहनकर 900 फुट ऊंची माउंट पाएक्टू को पार कर लिया था. इन दावों के साथ किम जोंग की बर्थ डेट भी एक नहीं तीन बताई जाती है.
अपराध करने पर तीन पीढ़ियों तक सजा
अगर उत्तर कोरिया में कोई अपराध करता है तो उसकी सज़ा उसे अगली तीन पीढ़ियों तक भुगतनी पड़ती है. लेकिन सजा भी कोई ऐसी वैसी नहीं है सुन कर आपके भी होश उड़ सकते है. अपराध करने पर इस देश के लोगों को तोप के सामने बांध कर उड़ा दिया जाता है या तो भूखे नरभक्षी कुत्तों के सामने फेंक दिया जाता है.
उत्तर कोरिया में 8 जुलाई और 17 दिसंबर को कोई खुशी नहीं मना सकता.
अगर कोई ऐसा करा तो उसे मौत की सजा हो सकती है, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि इन दो दिनों में किम सुंग(दादा) और किम जोंग द्वितीय(पिता) की मौत हुई थी. सोचने वाली बात है अगर उत्तर कोरिया के लोगों का इस दिन बर्थडे आता हो तो वह क्या करता होगा. उस दिन वो भी गम में ही रहेंगे. ऐसे लोगों को अगले दिन खुशी मनाने की छूट है. मतलब 8 जुलाई की जगह 9 जुलाई और 17 दिसंबर की जगह 18 दिसंबर को लोग अपना बर्थडे मनाते हैं.
इंटरनेट पर पाबंदी
बिना इंटरनेट के हमारा काम नहीं होता लेकिन उत्तर कोरिया में महज 605 लोगों को इंटरनेट चलाने की ही आज़ादी है, वो भी कोरियन भाषा में. यहां कम्प्यूटर सिर्फ कोरियन भाषा में चलाया जा सकता है. सोशल मीडिया आपको
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पूर्वजों को भगवान मानने पर मजबूर
उत्तरी कोरिया में लोगों को तानाशाह किम जोंग उन के पूर्वजों को ही भगवान की तरह मानने को मजबूर किया जाता है. इनके दादा किम द्वितीय को भगवान मानने का सरकारी हुक्म है. इस देश की इतिहास की किताबों में किम जोंग प्रथम और किम जोंग द्वितीय की वीर गाथाएं ही पढ़ाई जाती हैं.
क्रिसमस पर यीशु मसीह नहीं, दादी की पूजा
बीते साल क्रिसमस पर किम जोंग ने नया फरमान जारी करते हुए उत्तर कोरिया के लोगों से यीशु मसीह की जगह उसकी दादी की पूजा करने को कहा. उसकी दादी सन् 1919 में क्रिसमस के दिन ही पैदा हुई थीं, इसलिए किम चाहता है कि उसकी दादी का जन्मदिन पूरा देश मनाएं.
पिता की मौत पर न रोने वालों को मौत की सजा
चार साल पहले किम के पिता किम जोंग इल की मौत के समय कई लोगों को मौत की सज़ा दी गई थी. किम जोंग उन ने फरमान सुनाया था कि जब उसके पिता का जनाजा निकलेगा तो सभी को रोना पड़ेगा. उस दिन प्योंगयांग की सड़कों पर हज़ारों लोग रो रहे थे. जो नहीं रोया उसको मौत की सजा हुई.
अपनी मर्जी से गाना ना सुनना और ना गाना
अगर आपको अपनी मर्जी का गाना ना सुनने को मिले तो आप परेशान हो जाते है. लेकिन तानाशाह किम की मर्जी के बगैर उत्तर कोरिया में कोई अपनी मर्जी से गाना तो क्या उसे सुन भी नहीं सकते हैं. यहां के गीतों में सरकार की वाहवाही होनी जरूरी है और ऐसा न होने पर उन्हें मौत की सजा भी हो सकती है.
खुद को भगवान साबित करना
किम खुद को भगवान साबित कर लोगों के दिलों पर राज करना चाहता है. किम के मुताबिक उसका जन्म दो इंद्र धनुषों के नीचे हुआ और एक सितारा आसमान में बना था. इसके साथ उसने दावा किया है कि वो मौसम में होने वाले बदलावों पर नियंत्रण कर सकता है. वहां यह भी बात फैली हुई है कि किम ने एक ओवरकोट और लेदर के जूते पहनकर 900 फुट ऊंची माउंट पाएक्टू को पार कर लिया था. इन दावों के साथ किम जोंग की बर्थ डेट भी एक नहीं तीन बताई जाती है.
अपराध करने पर तीन पीढ़ियों तक सजा
अगर उत्तर कोरिया में कोई अपराध करता है तो उसकी सज़ा उसे अगली तीन पीढ़ियों तक भुगतनी पड़ती है. लेकिन सजा भी कोई ऐसी वैसी नहीं है सुन कर आपके भी होश उड़ सकते है. अपराध करने पर इस देश के लोगों को तोप के सामने बांध कर उड़ा दिया जाता है या तो भूखे नरभक्षी कुत्तों के सामने फेंक दिया जाता है.
उत्तर कोरिया में 8 जुलाई और 17 दिसंबर को कोई खुशी नहीं मना सकता.
अगर कोई ऐसा करा तो उसे मौत की सजा हो सकती है, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि इन दो दिनों में किम सुंग(दादा) और किम जोंग द्वितीय(पिता) की मौत हुई थी. सोचने वाली बात है अगर उत्तर कोरिया के लोगों का इस दिन बर्थडे आता हो तो वह क्या करता होगा. उस दिन वो भी गम में ही रहेंगे. ऐसे लोगों को अगले दिन खुशी मनाने की छूट है. मतलब 8 जुलाई की जगह 9 जुलाई और 17 दिसंबर की जगह 18 दिसंबर को लोग अपना बर्थडे मनाते हैं.
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