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भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया आजकल के बच्चे ये नही जानते | भारत की दी हुयी महान खोजे और अविष्कार ही है जिनकी वजह से आगे होने वाली खोजो के लिए रास्ता बना और उन महान ऋषि मुनियों ने ये खोजे ऐसे ही अपने किसी शिष्य के पूछने पर या किसी के सवाल के जबाब में कर दी , वो सचमुच ही जीनियस थे तो जानिए उन महान पुरषों के बारे जो प्राचीन भारत में हुए थे -
इनका जन्म 800 ईपू में कशी में हुआ था | ये प्राचीन भारत के महान चिकत्सा शास्त्री कहलाये जाते है | इन्हें शल्य चिकत्सा का जनक भी कहा जाता है | दुनिया की पहली शल्य चिकत्सा इन्होने ही की थी जब एक व्यक्ति का पैर में बड़ा घाव होने पर उसकी जांघ से थोड़ी चमड़ी काटकर उसके पैर में लगाई थी |शल्य चिकत्सा के लिए सुश्रुत 125 तरह के उपकरणों का प्रयोग करते थे
आर्यभट्ट --
इनका जन्म 476 ई. में कुसुमपुर ( पाटलिपुत्र ) पटना में हुआ था | ये महान खगोलशास्त्र और व गणितज्ञ थे | इन्होने ही सबसे पहले सूर्ये और चन्द्र ग्रहण की वियाख्या की थी | और सबसे पहले इन्होने ही बताया था की धरती अपनी ही धुरी पर धूमती है | और इसे सिद्ध भी किया था | और यही नही इन्होने हे सबसे पहले पाई के मान को निरुपित किया
वराहमिहिर--
इनका जन्म 499 ई . में कपित्थ (उज्जेन ) में हुआ था | ये महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्र थे | इन्होने पंचसिद्धान्तका नाम की किताब लिखी थी जिसमे इन्होने बताया था की , अयनांश , का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर होता होता है | और इन्होने शून्य और ऋणात्मक संख्याओ के बीजगणितीय गुणों को परिभाषित किया |
हलायुध --
इनका जन्म 1000 ई . में काशी में हुआ था | ये ज्योतिषविद , और गणितज्ञ व महान वैज्ञानिक भी थे | इन्होने अभिधानरत्नमाला या मृतसंजीवनी नमक ग्रन्थ की रचना की | इसमें इन्होने या की पास्कल त्रिभुज ( मेरु प्रस्तार ) का स्पष्ट वर्णन किया है
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सुश्रुत ---
आर्यभट्ट --
इनका जन्म 476 ई. में कुसुमपुर ( पाटलिपुत्र ) पटना में हुआ था | ये महान खगोलशास्त्र और व गणितज्ञ थे | इन्होने ही सबसे पहले सूर्ये और चन्द्र ग्रहण की वियाख्या की थी | और सबसे पहले इन्होने ही बताया था की धरती अपनी ही धुरी पर धूमती है | और इसे सिद्ध भी किया था | और यही नही इन्होने हे सबसे पहले पाई के मान को निरुपित किया
वराहमिहिर--
इनका जन्म 499 ई . में कपित्थ (उज्जेन ) में हुआ था | ये महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्र थे | इन्होने पंचसिद्धान्तका नाम की किताब लिखी थी जिसमे इन्होने बताया था की , अयनांश , का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर होता होता है | और इन्होने शून्य और ऋणात्मक संख्याओ के बीजगणितीय गुणों को परिभाषित किया |
हलायुध --
इनका जन्म 1000 ई . में काशी में हुआ था | ये ज्योतिषविद , और गणितज्ञ व महान वैज्ञानिक भी थे | इन्होने अभिधानरत्नमाला या मृतसंजीवनी नमक ग्रन्थ की रचना की | इसमें इन्होने या की पास्कल त्रिभुज ( मेरु प्रस्तार ) का स्पष्ट वर्णन किया है
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